आज सुबह 11 बजे पीएम मोदी रेडियो पर ‘मन की बात’ करेंगे. आज के इस कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि आज के कार्यक्रम में पीएम के साथ सचिन तेंडुलकर, विश्वनाथन आनंद भी उपस्थित होंगे. इस बार पीएम बच्चों की आगामी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर अपने सुझाव देंगे. पीएम ने खुद अपने ट्विटर वॉल पर इन बातों की जानकारी दी है. इसके अतिरिक्त वे देश से जुड़ी कई समस्याओं और विकल्पों तथा अन्य विभिन्न मुद्दों के विषय में बात करेंगे.
गौरतलब है कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम की यह 17वीं कड़ी है. पिछली बार पीएम ने 31 जनवरी को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में खादी को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार,लड़कियों की संख्या,नशे की लत,फसल बीमा योजना से देश के 50 फीसदी किसानों को जोड़ने ,और स्टार्ट अप अभियान के संबंध में बात की थी. प्रधानमंत्री रेडियो पर इस कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं. यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे आकाशवाणी और दूरदर्शन के सभी चैनलों पर प्रसारित किया जाएगा.
एक बेजोड़ संगीतकार, उम्दा गायक, बेहतरीन एक्टर और बेहद सहज व्यक्तित्त्व वाले हिमेश रेशमिया आज कल फिर सुर्खियों में हैं. वजह है उनकी आगामी फिल्म ‘तेरा सुरूर’. हिमेश की इस बहुचर्चित फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर छाया हुआ है.
‘तेरा सुरूर’ 2007 में आई ‘आपका सुरूर’ फिल्म का सीक्वल है. टी-सीरीज और एचआर म्यूजिक लिमिटेड के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म 11 मार्च 2016 को रिलीज होगी. फिल्म में हिमेश रेश्मिया और एक्ट्रेस फराह करीमी लीड रोल में हैं. साथ ही फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शेखर कपूर, मोनिका डोगरा, कबीर बेदी और शेरनाज पटेल जैसे सितारे भी अहम किरदार में नजर आएंगे.
हिमेश रेशमिया यदि किसी फिल्म का हिस्सा हों तो दर्शकों को उस फ़िल्म के संगीत का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है और हो भी क्यों न. महज़ 16 साल की उम्र में जिस संगीतकार ने 300 से अधिक धुनें बनाई हों, छोटी सी उम्र में एक गुजराती टीवी सीरियल के संगीतकार के तौर पर अपनेे करियर की शुरुआत कर मात्र 25 साल की उम्र में ‘प्यार किया तो डरना क्या’ जैसी सुपर हिट फिल्म में संगीत दिया हो, और लगातार ऐतराज़, बॉडीगार्ड, तेरे नाम, नमस्ते लंदन, खिलाड़ी 786 जैसी बड़ी हिट फिल्मों में संगीत दिया हो, दर्शक उसके संगीत के दीवाने तो होंगे ही. जानकारी के मुताबिक़ अब तक बतौर संगीतकार हिमेश ने 120 फिल्में की हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
फ़िल्म के गाने भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी सराहे जा रहे हैं. फ़िल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर राकेश उपाध्याय कहते हैं कि फ़िल्म को बेहतरीन बनाने में इससे जुड़े हर शख्स का अहम योगदान रहा है. मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ। और आशा करता हूँ कि रिलीज़ के बाद इसे जनता का खूब प्यार मिलेगा.
अपने किरदार के विषय में बात करते हुए हिमेश ने बताया कि इस फिल्म में वे रघु की भूमिका निभा रहे हैं जो कि एक उत्तेजित,पहेलीनुमा शख़्स है. इस फ़िल्म में वे एक एक्शन हीरो की भूमिका में हैं इसलिए उनका चुस्त दुरुस्त दिखना काफी मायने रखता है. फिट शरीर के लिए हिमेश ने कड़ी मेहनत की है. मात्र इस फ़िल्म के लिए नहीं,बल्कि संगीत के बाद अगर उनका कोई दूसरा शौक है तो वो है फिटनेस. हिमेश ने इस फिटनेस के लिए डेढ़ साल कड़ी मेहनत की है और अब वे दिन में 18 घंटे काम कर सकते हैं. इस फिटनेस के लिए उन्होंने शारीरिक व्यायाम के अलावा अपनी डाइट का भी खास ख्याल रखा.
करिश्मा कपूर और संजय कपूर के तलाक मामले में एक नया मोड़ आ गया है. करिश्मा ने खार पुलिस स्टेशन में संजय के खिलाफ धारा ४९८ के तहत दहेज़ उत्पीड़न का मामला दर्ज़ कराया है. पिछले कुछ महीनों इस दम्पति के मामले में कई मोड़ आए हैं.
करिश्मा कपूर और संजय कपूर के मामले में लगातार आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. कुछ महीने पहले ऐसा लगा था कि दोनों आपसी सहमति के आधार पर तलाक ले लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. और बीच में ही करिश्मा ने रुख बदलते हुए तलाक देने से इंकार कर दिया. इन दोनों के तलाक मामले की सुनवाई बांद्रा के एक फैमिली कोर्ट में होती है.
इसी मसले में पिछले महीने मामला तब और गरमा गया था जब संजय ने करिश्मा के बारे में यह कह दिया था कि करिश्मा ने पैसे की वजह से शादी की थी. जिसपर करिश्मा के पिता रणधीर कपूर ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए संजय को थर्ड क्लास आदमी तक कह दिया था.
इस मामले में संजय ने भी करिश्मा पर हमला नोलते हुए कहा था कि करिश्मा एक पत्नी और बहू दोनों नहीं बन सकी. फिलहाल अब करिश्मा ने दहेज़ उत्पीड़न का मामला दर्ज़ करवा कर इसे और भी गंभीर बना दिया है.
पाकिस्तान में भारतीय झंडा फहराने के कारण गिरफ्तार हुए विराट कोहली के फैन को आखिरकार ज़मानत मिल गई. पिछले एक महीने से जेल में बंद उमर दराज़ को अंततः ज़मानत मिल गई है. उमर की ज़मानत याचिका को पंजाब (पाकिस्तान) के जिला अदालत ने स्वीकार कर लिया.
पिछले एक महीने से खिलाड़ी विराट कोहली का फैन उमर दराज़ भारतीय तिरंगा फहराने की वजह से जेल में बंद था. उमर कोहली का बहुत बड़ा फैन है, और कोहली के खेल से प्रभावित होकर उमर ने तिरंगा फहरा दिया. जो उसके लिए भारी परेशानी की वजह बन गई. हालाँकि इस सम्बन्ध में पहले भी सुनवाई हुई थी. पुलिस द्वारा क्लीन चिट दिए जाने पर भी अदालत ने दराज़ की ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी. लेकिन इस बार पंजाब की अदालत से उसे राहत मिल ही गई.
उमर दराज़ लाहौर से लगभग २०० किलोमीटर दूर के एक गाँव में रहता है. पाकिस्तान पुलिस ने उसे घर से ही गिरफ्तार किया था. और पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 123 ए और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया था.
इस सम्बन्ध में अधिकारी अजीज चीमा ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि उमर ने ‘देशद्रोह’ किया है. हालाँकि पाकिस्तान में इस अपराध की अधिकतम सजा १० साल जेल और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
‘रिंगिंग बेल्स’ कंपनी द्वारा 251 रूपये में स्मार्ट फोन उपलब्ध कराने की योजना को कांग्रेस ने ‘‘मेक इन इंडिया’’ की बजाय ‘‘फ्रॉड इन इंडिया’’ करार दिया है. कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने इस योजना को लांच करने के अवसर पर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति पर कड़ा ऐतराज जताया और सरकार से इस बारे में जवाब तलब किया.
कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने आज राज्यसभा में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया, ‘‘सरकार एक बड़ा घोटाला करने जा रही है और यह सदी का सबसे बड़ा घोटाला होगा.’’ उन्होंने कहा कि यह उत्पाद बीजेपी मार्गदर्शक मंडल की उपस्थिति में लांच किया गया.
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘’मेक इन इंडिया’ की बात करने वाले लोग वास्तव में ‘फ्रॉड इन इंडिया’ कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि उसी कंपनी के एक निदेशक ने खुद कहा है कि एक फोन की न्यूनतम लागत 1400 रूपये आएगी. अगर ऐसी बात है तो कंपनी ने मात्र 251 रूपये में फोन उपलब्ध कराने की घोषणा कैसे कर दी.
उन्होंने कहा कि इस कंपनी द्वारा 251 रूपये पर उपभोक्ताओं को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराने की घोषणा कर के अभी तक करोड़ों रूपये जमा किए जा चुके हैं.
तिवारी ने सरकार से मांग की कि इस योजना के लिए एकत्र हुए धन को अलग सुरक्षित रखा जाए. उन्होंने प्रश्न उठाया, “जब अन्य स्मार्ट फोन 20 हजार रूपये में आ रहे हैं तो यह मोबाइल इतनी कम कीमत में कैसे दिया जा रहा है. इसलिए या तो यह कंपनी गलत है या तो अन्य कंपनियाँ. सरकार को इस बारे में जवाब देना चाहिए.’’
गौरतलब है कि नोएडा की एक नयी कंपनी ‘रिंगिग बैल्स’ ने यह मोबाइल फोन योजना शुरू की है, जिसके तहत मात्र 251 रुपये की मामूली सी कीमत में एक उम्दा फीचर्स से लैस स्मार्टफोन मिलेगा और कंपनी ने दावा किया है कि सरकार की मदद से इसको विकसित किया गया है.
जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने के आरोपी छात्र उमर ख़ालिद और अनिर्बान की पुलिस रिमांड आज ख़त्म हो रही है. आज इन दोनों की कोर्ट में पेशी होनी थी परंतु सुरक्षा के मद्देनज़र आज इनकी पेशी पुलिस स्टेशन में ही होगी.
तीसरे मुख्य आरोपी, जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को एक दिन की पुलिस रिमांड के बाद तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. वहाँ से उसे पूछताछ के लिए आज एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अज्ञात स्थान की जानकारी दिए बिना ये बात मीडिया से साझा की.
गौरतलब है कि कन्हैया कुमार 12 फरवरी से पुलिस हिरासत में है.
जंग-ए-आज़ादी में कुछ लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करते हुये हथियार को उठाया और सिर पर कफ़न बांधकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े. इन्ही से एक थे चंद्रशेखर आजाद. 23 जुलाई 1906 को मप्र. के झाबुआ जिले के ग्राम भावरा में आजाद का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम पंडित सीताराम और माता का नाम जगरानी देवी था. आजाद का प्रारम्भिक जीवन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित भावरा गाँव में बीता. यहाँ उन्होंने धनुष बाण चलाने के साथ निशानेबाजी भी सीखी. आजाद ने देश को आजाद कराने के लिए अहिंसात्मक मार्ग के बजाए सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया.
17 वर्ष के चंद्रशेखर आज़ाद क्रांतिकारी दल ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में सम्मिलित हो गए. दल में उनका नाम ‘क्विक सिल्वर’ (पारा) तय पाया गया. पार्टी की ओर से धन एकत्र करने के लिए जितने भी कार्य हुए चंद्रशेखर उन सबमें आगे रहे. सांडर्स वध, सेण्ट्रल असेम्बली में भगत सिंह द्वारा बम फेंकना, वाइसराय की ट्रेन बम से उड़ाने की चेष्टा, सबके नेता वही थे. इससे पूर्व उन्होंने प्रसिद्ध ‘काकोरी कांड’ में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए. एक बार दल के लिए धन प्राप्त करने के उद्देश्य से वे गाजीपुर के एक महंत के शिष्य भी बने. इरादा था कि महंत के मरने के बाद मरु की सारी संपत्ति दल को दे देंगे.
बचपन का दृढ़निश्चय-
एक आदिवासी ग्राम भावरा के अधनंगे आदिवासी बालक मिलकर दीपावली की खुशियाँ मना रहे थे. किसी बालक के पास फुलझड़ियाँ थीं, किसी के पास पटाखे थे और किसी के पास मेहताब की माचिस. बालक चन्द्रशेखर के पास इनमें से कुछ भी नहीं था. वह खड़ा–खड़ा अपने साथियों को खुशियाँ मनाते हुए देख रहा था. जिस बालक के पास मेहताब की माचिस थी, वह उसमें से एक तीली निकालता और उसके छोर को पकड़कर डरते–डरते उसे माचिस से रगड़ता और जब रंगीन रौशनी निकलती तो डरकर उस तीली को ज़मीन पर फेंक देता था।
बालक चन्द्रशेखर से यह देखा नहीं गया, वह बोला, “तुम डर के मारे एक तीली जलाकर भी अपने हाथ में पकड़े नहीं रह सकते. मैं सारी तीलियाँ एक साथ जलाकर उन्हें हाथ में पकड़े रह सकता हूँ.”
जिस बालक के पास मेहताब की माचिस थी, उसने वह चन्द्रशेखर के हाथ में दे दी और कहा, “जो कुछ भी कहा है, वह करके दिखाओ तब जानूँ.” बालक चन्द्रशेखर ने माचिस की सारी तीलियाँ निकालकर अपने हाथ में ले लीं. वे तीलियाँ उल्टी–सीधी रखी हुई थीं, अर्थात कुछ तीलियों का रोगन चन्द्रशेखर की हथेली की तरफ़ भी था. उसने तीलियों की गड्डी माचिस से रगड़ दी. भक्क करके सारी तीलियाँ जल उठीं. जिन तीलियों का रोगन चन्द्रशेखर की हथेली की ओर था, वे भी जलकर चन्द्रशेखर की हथेली को जलाने लगीं. असह्य जलन होने पर भी चन्द्रशेखर ने तीलियों को उस समय तक नहीं छोड़ा, जब तक की उनकी रंगीन रौशनी समाप्त नहीं हो गई. जब उसने तीलियाँ फेंक दीं तो साथियों से बोला, “देखो हथेली जल जाने पर भी मैंने तीलियाँ नहीं छोड़ीं.”
उसके साथियों ने देखा कि चन्द्रशेखर की हथेली काफ़ी जल गई थी और बड़े–बड़े फफोले उठ आए थे. कुछ लड़के दौड़ते हुए उसकी माँ के पास घटना की ख़बर देने के लिए जा पहुँचे. उसकी माँ घर के अन्दर कुछ काम कर रही थी. चन्द्रशेखर के पिता पंडित सीताराम तिवारी बाहर के कमरे में थे. उन्होंने बालकों से घटना का ब्योरा सुना और वे घटनास्थल की ओर लपके. बालक चन्द्रशेखर ने अपने पिताजी को आते हुए देखा तो वह जंगल की तरफ़ भाग गया. उसने सोचा कि पिताजी अब उसकी पिटाई करेंगे. तीन दिन तक वह जंगल में ही रहा. एक दिन खोजती हुई उसकी माँ उसे घर ले आई. उसने यह आश्वासन दिया था कि तेरे पिताजी तेरे से कुछ भी नहीं कहेंगे.
‘आज़ाद’
1921 में जब महात्मा गाँधी के असहयोग आन्दोलन प्रारंभ किया तो उन्होंने उसमे सक्रिय योगदान किया. चन्द्रशेखर भी एक दिन धरना देते हुए पकड़े गये. उन्हें पारसी मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट के अदालत में पेश किया गया. मि. खरेघाट बहुत कड़ी सजाएँ देते थे. उन्होंने बालक चन्द्रशेखर से उसकी व्यक्तिगत जानकारियों के बारे में पूछना शुरू किया,
“तुम्हारा नाम क्या है?”
“मेरा नाम आज़ाद है।”
“तुम्हारे पिता का क्या नाम है?”
“मेरे पिता का नाम स्वाधीन है।”
“तुम्हारा घर कहाँ पर है?”
“मेरा घर जेलखाना है।”
मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट इन उत्तरों से चिढ़ गए. उन्होंने चन्द्रशेखर को पन्द्रह बेंतों की सज़ा सुना दी. उस समय चन्द्रशेखर की उम्र केवल चौदह वर्ष की थी. जल्लाद ने अपनी पूरी शक्ति के साथ बालक चन्द्रशेखर की निर्वसन देह पर बेंतों के प्रहार किए. प्रत्येक बेंत के साथ कुछ खाल उधड़कर बाहर आ जाती थी. पीड़ा सहन कर लेने का अभ्यास चन्द्रशेखर को बचपन से ही था. वह हर बेंत के साथ “महात्मा गांधी की जय” या “भारत माता की जय” बोलते जाते थे. जब पूरे बेंत लगाए जा चुके तो जेल के नियमानुसार जेलर ने उसकी हथेली पर तीन आने पैसे रख दिए. बालक चन्द्रशेखर ने वे पैसे जेलर के मुँह पर दे मारे और भागकर जेल के बाहर हो गया. इस पहली अग्नि परीक्षा में उत्तीर्ण होने के फलस्वरूप बालक चन्द्रशेखर का बनारस के ज्ञानवापी मोहल्ले में नागरिक अभिनन्दन किया गया. अब वह चन्द्रशेखर आज़ाद कहलाने लगा. बालक चन्द्रशेखर आज़ाद का मन अब देश को आज़ाद कराने के अहिंसात्मक उपायों से हटकर सशस्त्र क्रान्ति की ओर मुड़ गया. उस समय बनारस क्रान्तिकारियों का गढ़ था. वह मन्मथनाथ गुप्त और प्रणवेश चटर्जी के सम्पर्क में आये और क्रान्तिकारी दल के सदस्य बन गये. क्रान्तिकारियों का वह दल “हिन्दुस्तान प्रजातंत्र संघ” के नाम से जाना जाता था। (साभार-भारतकोश)
काकोरी काण्ड-
किसी बड़े अभियान में चन्द्रशेखर आज़ाद सबसे पहले “काकोरी काण्ड” में सम्मिलित हुए. इस अभियान के नेता रामप्रसाद बिस्मिल थे. उस समय चन्द्रशेखर आज़ाद की आयु कम थी और उनका स्वभाव भी बहुत चंचल था. इसलिए रामप्रसाद बिस्मिल उन्हें क्विक सिल्वर (पारा) कहकर पुकारते थे. 9 अगस्त, 1925 को क्रान्तिकारियों ने लखनऊ के निकट काकोरी नामक स्थान पर सहारनपुर – लखनऊ सवारी गाड़ी को रोककर उसमें रखा अंगेज़ी ख़ज़ाना लूट लिया. बाद में एक–एक करके सभी क्रान्तिकारी पकड़े गए, पर चन्द्रशेखर आज़ाद कभी भी पुलिस के हाथ में नहीं आए. यद्यपि वे झाँसी में पुलिस थाने पर जाकर पुलिस वालों से गपशप लड़ाते थे, पर पुलिस वालों को कभी भी उन पर संदेह नहीं हुआ कि वह व्यक्ति महान क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद हो सकता है. काकोरी कांड के बाद उन्होंने दल का नये सिरे से संगठन किया. अब उसका नाम ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन एण्ड आर्मी’ रखा गया. चंद्रशेखर इस नये दल के कमांडर थे. वे घूम-घूम कर गुप्त रूप से दल का कार्य बढ़ाते रहे. फरारी के दिनों में झाँसी के पास एक नदी के किनारे साधु के रूप में भी उन्होंने कुछ समय बिताया.
चन्द्रशेखर आज़ाद घूम–घूमकर क्रान्ति प्रयासों को गति देने में लगे हुए थे. आख़िर वह दिन भी आ गया, जब किसी मुखबिर ने पुलिस को यह सूचना दी कि चन्द्रशेखर आज़ाद ‘अल्फ़्रेड पार्क’ में अपने एक साथी के साथ बैठे हुए हैं. वह 27 फ़रवरी, 1931 का दिन था, चन्द्रशेखर आज़ाद अपने साथी सुखदेव राज के साथ बैठकर विचार–विमर्श कर रहे थे. मुखबिर की सूचना पर पुलिस अधीक्षक ‘नाटबाबर’ ने आज़ाद को इलाहाबाद के अल्फ़्रेड पार्क में घेर लिया. “तुम कौन हो” कहने के साथ ही उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना नाटबाबर ने अपनी गोली आज़ाद पर छोड़ दी। नाटबाबर की गोली चन्द्रशेखर आज़ाद की जाँघ में जा लगी. आज़ाद ने घिसटकर एक जामुन के वृक्ष की ओट लेकर अपनी गोली दूसरे वृक्ष की ओट में छिपे हुए नाटबाबर के ऊपर दाग़ दी. आज़ाद का निशाना सही लगा और उनकी गोली ने नाटबाबर की कलाई तोड़ दी. एक घनी झाड़ी के पीछे सी.आई.डी. इंस्पेक्टर विश्वेश्वर सिंह छिपा हुआ था, उसने स्वयं को सुरक्षित समझकर आज़ाद को एक गाली दे दी. गाली को सुनकर आज़ाद को क्रोध आया. जिस दिशा से गाली की आवाज़ आई थी, उस दिशा में आज़ाद ने अपनी गोली छोड़ दी. निशाना इतना सही लगा कि आज़ाद की गोली ने विश्वेश्वरसिंह का जबड़ा तोड़ दिया.
बहुत देर तक आज़ाद ने जमकर अकेले ही मुक़ाबला किया. उन्होंने अपने साथी सुखदेव राज को पहले ही भगा दिया था. आख़िर पुलिस की कई गोलियाँ आज़ाद के शरीर में समा गईं. उनके माउज़र में केवल एक आख़िरी गोली बची थी. उन्होंने सोचा कि यदि मैं यह गोली भी चला दूँगा तो जीवित गिरफ्तार होने का भय है. अपनी कनपटी से माउज़र की नली लगाकर उन्होंने आख़िरी गोली स्वयं पर ही चला दी. गोली घातक सिद्ध हुई और उनका प्राणांत हो गया. इस घटना में चंद्रशेखर आज़ाद की मृत्यु हो गई और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया. उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उन्हें तीन या चार गोलियाँ लगी थीं.
चंद्रशेखर आज़ाद के शहीद होने का समाचार जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू को प्राप्त हुआ. उन्होंने ही कांग्रेसी नेताओं और देशभक्तों को यह समाचार बताया. श्मशान घाट से आज़ाद की अस्थियाँ लेकर एक जुलूस निकला. इलाहाबाद की मुख्य सड़कें अवरुद्ध हो गयीं, ऐसा लग रहा था मानो सारा देश अपने इस सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा है. जुलूस के बाद एक सभा हुई. सभा को शचीन्द्रनाथ सान्याल की पत्नी ने सन्बोधित करते हुए कहा- “जैसे बंगाल में खुदीराम बोस की शहादत के बाद उनकी राख को लोगों ने घर में रखकर सम्मानित किया वैसे ही आज़ाद को भी सम्मान मिलेगा.”
27 फ़रवरी, 1931 को चन्द्रशेखर आज़ाद के रूप में देश का एक महान क्रान्तिकारी योद्धा देश की आज़ादी के लिए अपना बलिदान दे गया, शहीद हो गया।
आजाद के ठाठ तो फकीराना थे ही, उनका जीवन सादा पर विचार उच्च थे. कवि श्यामपाल सिंह ने आजाद के बारे में लिखा है: “स्वतंत्रता रण के रणनायक अमर रहेगा तेरा नाम, नहीं जरूरत स्मारक की स्मारक खुद तेरा नाम। स्वतंत्र भारत नाम के आगे जुड़ा रहेगा तेरा नाम, भारत का जन-मन-गण ही अब बना रहेगा तेरा धाम।।”
जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले आरोपी छात्र उमर खालिद, अनिर्बान और कन्हैया की तीन दिनों की पुलिस रिमांड आज खत्म हो रही है. आज कोर्ट में उनकी पेशी होगी. इसके बाद पुलिस, पूछताछ के लिए रिमांड बढ़ाने की भी मांग सकती है.
शुक्रवार को अनिर्बान और उमर खालिद को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई थी. पुलिस ने सुबह करीब 10:30 बजे तीनों से पूछताछ शुरू की थी. गुरुवार को भी आरोपियों से लंबी पूछताछ हुई थी.
शुक्रवार को हुई पूछताछ में कन्हैया कुमार को अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की गई, जिससे वह उमर खालिद और अनिर्बान के बयानों से अप्रभावित रहे. दिल्ली पुलिस को कन्हैया की एक दिन की ही रिमांड मिली थी. उसे वापस तिहाड़ भेज दिया गया है.
पुलिस की पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अलग-अलग बयान दिए हैं. अब आज सबकी नज़र कोर्ट के फैसले पर टिकी होगी कि कोर्ट इन देशद्रोह के आरोपियों पर क्या फैसला सुनाती है.
24 फरवरी को हल्दवानी में हुए रेसलिंग मैच में घायल खली को आज अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया.अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मीडिया से रुबरू होते हुए खली ने कहा कि वे भी कनाडा के तीनों पहलवानों को उसी तरीके से मारकर बदला लेंगे जैसे उन तीनों ने उन्हें मारा.
उन्होंने कहा,”मुझे धोखे से मारा गया और इस धोखेबाज़ी का बदला मैं कनाडा के तीनों पहलवानों को मारकर ज़रूर लूंगा. खून का बदला खून से बी लूंगा.
24 फरवरी के मुकाबले में घायल खली के सर पर 7 टांके लगे हैं, कई गंभीर चोटें लगी हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अभी खली के लिए रेसलिंग करना मुश्किल है, घातक है. मगर खली 24 तारीख को हल्दवानी में हुए मैच का बदला लेने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. खली बेहद क्रोध में हैं और रिंग में खून ही खून बहाना चाहते हैं. चाहे सर में चोट लगी हो या पूरे जिस्म छलनी हो गया हो, वे अपने अपमान और छल का बदला कनाडा के खिलाड़ियों का सिर फोड़कर लेंगे. जिस प्रकार उन्होंने खली को लोहे की कुर्सी से वार कर घायल किया, वैसे ही वे भी उनकी हड्डी पसली तोड़ेंगे. उनका कहना है कि मैं अपना डेथ वारंट पहले ही साइन भी कर चुका हूँ.
गौरतलब है कि 28 फरवरी को देहरादून के स्टेडियम में रेसलर्स दोबारा एक दूसरे से लड़ने रिंग में उतरेंगे.उस दिन के सभी मैचों में से जिस मैच पर सबसे अधिक निगाहें टिकी होंगी,वो खली का ही मैच होगा.
रोहित वेमुला खुदखुशी मामले में आज राज्यसभा में फिर से बहुजन समाजवादी पार्टी प्रमुख मायावती और केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी आमने सामने आ गईं। आज सत्र के दौरान मायावती ने केंद्र सरकार पर संघ के संरक्षण का आरोप भी लगा दिया।
मायावती और स्मृति ईरानी आज फिर से संसद में भीड़ गईं। मायावती ने कहा कि सरकार रोहित वेमुला मामले को दबा देना चाहती है। क्योंकि इस मामले में कई संघी लोगों का भी हाथ है। सत्र के दौरान मायावती ने स्मृति को उनका वादा याद दिलाते हुए कहा कि आपके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं हूँ, क्या आप अपना वादा निभाएंगी? इसपर स्मृति ने कहा कि मैंने आपके कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे मेरा सिर काटकर ले जाएं।
मायावती ने सरकार पर आरोप लगाया कि जांच समिति में सरकार ने एक भी दलित को नहीं रखा है। जो सरकार की मंशा एकदम साफ़ कर देता है।
मायावती ने अपना भाषण जारी रखते हुए कहा कि आरएसएस के कट्टर समर्थक इसके पीछे बताए जा रहे हैं, जिसकी वजह से सरकार अंदर ही अंदर उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। मायावती ने कहा कि इलाहबाद हाई कोर्ट के जज जो जांच कमेटी में इकलौते सदस्य हैं, वो दलित जाति के नहीं हैं। एक से ज्यादा भी अधिकारी कमीशन में रखे जा सकते थे, इससे सरकार की साफ़ तौर पर दलित विरोधी नीति नज़र आती है।
गौरतलब है कि 24 फरवरी को राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए स्मृति ईरानी ने मायावती से कहा था कि अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं होंगी तो मैं अपना सिर आपके चरणों में रख दूंगी।