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Wednesday, September 9, 2026
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बंगाल में ६ चरणों में चुनाव, ममता नाराज़

AmitDwivedi@navpravah.com

बंगाल में ६ चरणों में होने वाले चुनाव की बात से ममता बनर्जी काफी नाराज़ हैं. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और केरल में विधानभा चुनाव एक दिन में और असम में दो दिन में समाप्त हो जाएगा, जबकि उनके राज्य में मतदान को कई चरणों में कराए जाने की बात कही गई है.

चुनाव आयोग के बंगाल में ६ चरणो में कराए जाने वाले चुनाव के निर्णय को लेकर ममता दुखी नज़र आ रही हैं. हालाँकि पहले तो उन्होंने कहा कि वे राज्य में ६ चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर दुखी हैं, साथ ही अपने बयान का बचाव करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि मतदान की तारीखों और उसके चरणों के निर्धारण का विशेषाधिकार चुनाव आयोग के पास है और हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन वे उन पार्टियों से दुखी हैं जो उनकी पार्टी के बारे में भ्रम फैलाते हैं.

ममता ने कहा कि तमिलनाडु में २३४ सीटों पर चुनाव होना है और वहाँ मात्र एक दिन में चुनाव संपन्न कराया जाएगा.

५ राज्यों में ८२४ सीटों पर १७ करोड़ मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. ४ अप्रैल से १६ मई के बीच सभी ५ राज्यों में चुनाव कराया जाएगा.

१ . पश्चिम बंगाल (कुल २९४ सीट)-

६ चरणों में होगा चुनाव
पहला चरण- ४ और ११ अप्रैल
दूसरा चरण- १७ अप्रैल
तीसरा चरण- २१ अप्रैल
चौथा चरण- २५ अप्रैल
पांचवां चरण- ३० अप्रैल
छठा चरण- ५ मई

२. असम (१२६ सीट)-

२ चरण में होगा चुनाव
पहला चरण- ४ अप्रैल
दूसरा चरण- ११ अप्रैल

३. तमिलनाडु (२३४ सीट)-

एक ही चरण में होगा चुनाव
१६ मई को होगा मतदान

४. केरल (१४० सीट)-

एक ही चरण में होगा चुनाव
१६ मई को होगा मतदान

५. पॉन्डिचेरी (३० सीट)-

एक ही चरण में चुनाव कराया जाएगा
१६ मई को होगा मतदान

एशिया कप: भारत और बांग्लादेश के बीच कांटे की टक्कर

Bureau@navpravah.com

रविवार को एशिया कप फाइनल खेलने के लिए मीरपुर में भारत और बांग्लादेश की टीमें आमने-सामने होंगी. बांग्लादेश के अब तक के प्रदर्शन के अनुसार उसे बेहद खतरनाक टीम माना जा रहा है.

एशिया कप का पहला टी20 मैच बांग्लादेश और भारत के ही बीच हुआ था, जिसमे बांग्लादेश ने भारतीय बल्लेबाजों के होश उड़ा दिए थे. शिखर धवन 2, विराट कोहली 7, सुरेश रैना 13 और युवराज सिंह 15 रनों पर ऑउट हुए थे. भारत का टॉप ऑर्डर बांग्लादेश की गेंदबाजी के आगे तितर बितर हो गया था.

यदि रोहित शर्मा ने पांव न जमाए होते (55 पर 83)  तो टीम इंडिया 166 रनों का स्कोर न खड़ा कर पाती. हार्दिक पांड्या का योगदान (18 पे 31) भी काबिल-ए-तारीफ था. हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने पलटवार कर ये मैच टीम इंडिया को जिता दिया था, पर इस हार के बाद बांग्लादेश की टीम ने अन्य मैचों में आक्रामक वापसी की.

बांग्लादेश ने यूएई को 51 रन से हराया. श्रीलंका को 23 रन से मात दी और फिर पाकिस्तान को रोमांचक मुकाबले में 5 विकेट से हराया.

पिछले तीन मैचों में बांग्लादेश ने बेहद धुंआदार प्रदर्शन किया है. बांग्लादेश के बल्लेबाज लगातार रन बना रहे हैं. शब्बीर रहमान ने 4 मैचों में 144 रन बनाए हैं 127 की स्ट्राइक रेट से. पाकिस्तान के खिलाफ सौम्या सरकार ने भी बेहतरीन पारी खेली थी. वहीं गेंदबाजी में अल अमीन हुसैन ने 4 मैचों में 10 विकेट लिए हैं 7.42 की इकॉनोमी से. कप्तान मशर्फे मोर्तजा ने 4 मैचों में 5 विकेट लिए हैं 7 की औसत से. गेंदबाज एक बार फिर पेस से हमला करने की रणनीति बना रहे हैं .

पिछली वनडे सीरीज में भी बांग्लादेश ने भारत को 2-1 से हरा कर वापिस भेजा था. इसलिए एशिया कप फाइनल में बांग्लादेश को उसी की धरती पर हराना धोनी के धुरंधरों के लिए आसान नहीं होगा.

टीम इंडिया भले ही दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है, लेकिन कई बड़े मुकाबलों में बांग्लादेश टीम इंडिया को मात दे चुकी है. साल 2007 के वनडे विश्वकप में बांग्लादेश की ही वजह से भारत को बाहर जाना पड़ा था. साल 2015 में भी बांग्लादेश टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी पर 109 रन से हार गई थी. इस मैच में रोहित शर्मा के आउट होने पर विवाद हुआ था जिसकी कसक बांग्लादेश के मन से कभी नहीं जाएगी.

गौरतलब है कि दूसरी बार बांग्लादेश टीम एशिया कप फाइनल में पहुंची है. इससे पहले सिर्फ एक बार फाइनल में पहुंची थी जहाँ पाकिस्तान से 2 रनों से हार गई थी. इसलिए बांग्लादेश की टीम इस बार एशिया कप जीतने के लिए पूरी जान लगा देगी. अब देखना ये है कि भारत,जो इस वक्त सफलताओं और आत्मविश्वास से ओत प्रोत है,वो एशिया कप हथियाने में भी सफल होता है,या बांग्लादेश टीम से फिर मात खाता है.

बेहद सुखद व अविश्वसनीय अनुभव -मनोज कुमार

ShikhaPandey@navpravah.com

मशहूर फिल्म अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए वर्ष 2015 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है. भारत सरकार के इस फैसले पर मनोज कुमार ने कहा, “यह बेहद सुखद व हैरान कर देने वाला अनुभव है. इस खबर को पचाने में मुझे थोड़ा वक्त लगेगा.”

मनोज कुमार ने बताया, ” मैं सो रहा था और मेरे दोस्तों के फोन आने शुरू हो गए. पहले मुझे लगा कि वे मुझसे मजाक कर रहे हैं, लेकिन जब मैंने अपने बारे में एक न्यूज वेबसाइट पर खबर पढ़ी, तब मुझे पता चला कि यह सच है.”

बेहतरीन देशभक्ति फिल्मों के कारण भारत कुमार भी कहे जाने वाले अभिनेता ने कहा, “यह निश्चित रूप से बहुत प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है. मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया, मैं उससे संतुष्ट हूं और मेरा परिवार भी इस खबर से बेहद खुश है.”

मनोज कुमार आखिरी बार बड़े परदे पर 1995 की फिल्म ‘मैदान-ए-जंग’ में दिखाई दिए थे. उन्होंने कहा कि अब वे फिल्म उद्योग में और पुनः सक्रिय होने का प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा, “हां, मैं सुर्खियों से गायब था और यह मेरी ही गलती है. मैं एक फिल्म बनाना चाहता हूँ और जल्द ही सक्रिय होना चाहता हूं.”

गौरतलब है कि भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नकद और एक शॉल प्रदान किया जाता है. मनोज कुमार को 47वें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है. मनोज कुमार ने ‘उपकार’, ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी अनेकों फिल्मों से अपने अभिनय की छाप छोड़ी. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और पद्मश्री से सम्मानित मनोज कुमार ने ‘रोटी कपड़ा और मकान’ सहित पांच से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया है.

राफेल डील में सबसे अच्छी कीमत चाहता हूँ – मनोहर पर्रीकर

bureau@navpravah.com

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने खुद को एक ‘सख्त वार्ताकार’ बताया है और कहा है कि फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीद के सौदे में वे ‘सबसे अच्छी कीमत’ चाहते हैं. रक्षा  मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट में राफेल करार का ध्यान रखा गया है और उसके लिए ‘पर्याप्त धन’ अलग रखा गया है.

पत्रकारों ने जब रक्षा मंत्री से राफेल डील पर अब तक दस्तखत न होने का कारण पूछा तो वे बोले, ‘‘मैं एक सख्त वार्ताकार हूं. मुझे देश के लिए कुछ पैसे बचाने दें.’’  उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय वायुसेना को विमानों की जरूरत है. पर मेरा मानना है कि एक अच्छा खरीददार अपनी कमजोरी कभी सामने नहीं रखता. वह हर वक्त अपने पत्ते छुपाकर रखता है. कृपया देशहित के लिए आप सब मुझ पर अपने पत्ते खोलने के लिए दबाव न बनाएं .’’

जब पत्रकारों ने पर्रीकर से पूछा कि यदि राफेल करार पर बात नहीं बनती है तो क्या वायुसेना को विमान मुहैया कराने को लेकर उनके पास कोई विकल्प है, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘कई बार हालात सामने आने पर उसके अनुसार ही फैसला करना होता है.’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष के बजट में राफेल करार पर दस्तखत होने की स्थिति में भुगतान का ख्याल रखा गया है. पर्रिकर ने पिछले महीने स्पष्ट किया था कि इस समझौते में अब विमान की कीमत ही एकमात्र असहमति का मु्द्दा रह गया है.

 

उन्होंने कहा कि यदि करार पर दस्तखत हो जाता है तो कुल कीमत का कम से कम 15 फीसदी भुगतान तुरंत करना होगा. यह करार 59,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है.

मनोज कुमार २०१५ के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता

ShikhaPandey@navpravah.com

बॉलीवुड को पूरब और पश्चिम,क्रांति,रोटी कपड़ा और मकान जैसी बेहतरीन फिल्में देने वाले दिग्गज अभिनेता-निर्देशक अभिनेता मनोज कुमार को फिल्म जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए २०१५ का हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ दिया जाएगा. फिल्मों में उनके अहम योगदान को देखते हुए जूरी मेंबर्स लता मंगेशकर, आशा भोंसले, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा ने इस अवॉर्ड के लिए मनोज कुमार का नाम सुझाया है.

दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड के तहत मनोज कुमार को स्वर्ण कमल के साथ-साथ 10 लाख रुपये की राशि और शॉल दी जाएगी. इस घोषणा के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने मनोज कुमार से  बात की और इस अवॉर्ड के लिए उन्हें बधाई दी.

हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी उर्फ़ मनोज कुमार का जन्म अविभाजित भारत के एबटाबाद में हुआ था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है.फिल्म ‘कांच की गुडिया’ से १९६० में उन्होंने बतौर नायक अपना करियर शुरू किया था. शुरुवात भले ही एक रोमांटिक फिल्म से हुई हो,परन्तु जल्द ही उन्होंने देशभक्ति फिल्मों की ओर रुख मोड़ लिया और लगातार सफलताओं के बाद मनोज कुमार से भारत कुमार बन गए. 79 साल के मनोज कुमार ने कई सुपरहिट फिल्में दी हैं. उन्होंने शहीद, हरियाली और रास्ता,  हिमालय की गोद में, उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान, दो बदन,पत्थर के सनम और क्रांति जैसी सुपरहिट फ़िल्में दीं.

 

गौरतलब है कि मनोज कुमार यह सम्मान पाने वाले ४७वें अभिनेता हैं. इस सम्मान के अतिरिक्त उन्हें फिल्म ‘उपकार’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था और १९९२ में भारत सर्कार ने भारत कुमार को पद्मश्री से नवाज़ा था.

 

शहीदों के नाम पर ‘श्रद्धांजलि’ का खेल

पुष्कर अवस्थी,

लखनऊ

कल जब चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ की मूर्ति के साथ था तब मुझे कुछ और भी याद आया था लेकिन उसे लिखा नही था। आज जब मन का कोलाहल कुछ शांत हुआ है तो एक घटना का जिक्र करता हूँ। यह इसलिए जरुरी है क्यूंकि आप यह समझ सके कि कैसे कैसे लोग थे और अब कैसे कैसे लोग आज, चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ जैसे शहीदों के नाम पर श्रद्धांजलि का खेल खेल रहे है, नारे लगा रहे है और उन शहीदो को अपना नायक बना रहे है।

जो घटना बता रहा हूँ यह बात मुझे, 1975 या 1976 में, जब मैं झाँसी में था पता लगी थी। इसकी सत्यता की पुष्टि की जा सकती है।

ये पूरा वाकया, ‘आज़ाद’ की कहानी नही है, यह कहानी उनकी मौत के बाद जन्मी है। यह कहानी हम भारतियों की कहानी कहती है। इसमें नायक उँगलियों में गिने जाने वाले, चंद अनाम लोग हैं और बाकी भारतीय रजिनीतिज्ञों की तर्ज़ पर या तो खलनायक नज़र आएंगे या फिर भारी तादाद में नपुंसकों की भीड़ में नज़र आएंगे।

1931 में चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ की हत्या और भगत सिंह, राजगुरु, सहदेव की फांसी के बाद, इन लोगो का दल, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन (HSRA) बिखर गया था। इसके काफी सदस्य पहले से ही ब्रिटिश पुलिस के मुखबिर हो गए थे और वामपंथी यशपाल अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करते हुए HSRA के प्रमुख बन गए थे लेकिन कालांतर में यह संघटन पूरी तरह से खत्म हो गया था। जो वाकई चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ के समर्पित क्रन्तिकारी साथी थे, जो विभिन्न मामलों में जेल में रहे और आज़ादी के बाद गुमनामी की ज़िन्दगी में जीते रहे थे।

चंद्रशेखर आज़ाद का क्रन्तिकारी जीवन का केंद्र बिंदु झाँसी रहा था, जहां क्रांतिकारियों में उनके २-३ करीबियों में से एक, सदाशिव राव मलकापुरकर रहते थे। चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ अपने जीवन में बहुत गोपनीयता रखते थे और इसी लिए वे कभी अपने जीवन में, पुलिस द्वारा पकड़े नही गए थे। उन्हें इसका एहसास था कि उनके साथियों में कुछ कमजोर कड़ी है जो पुलिस की प्रतारणा पर विश्वसनीय नही रह जायेंगे। लेकिन सदाशिव जी उन विश्वनीय लोगो में से थे, जिनको वह अपने साथ, मध्यप्रदेश में अपने गाँव भावरा ले गए थे और अपने पिता सीताराम तिवारी और माँ जगरानी देवी से मिलवाया था। 

 

 

सदाशिव राव, चंद्रशेखर आज़ाद की मृत्यु के बाद भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते रहे और कई बार जेल भी गए थे। आज़ादी के बाद जब वो स्वतन्त्र हुए तब वो आज़ाद के माता पिता की खैरियत का पता करने के लिए उनके गाँव गए थे। वहां उन्हें पता चला की आज़ाद के पिता जी का स्वर्गवास हो गया है और उनकी माँ बेहद गरीबी में जीवन यापन कर रही है। वो जंगल से लकड़ी और गोबर इकठ्ठा करके बेचती थी और उसी से बमुश्किल उनका गुजारा करती थी। सदाशिव राव ने जब यह देखा तो वो टूट गए, एक महान राष्ट्र भक्त की माँ दिन के एक वक्त के भोजन के लिए तरस रही थी। जब उन्होंने गाँव से कोई मदद न मिलने का कारण का पता किया, तो पता चला की चंद्रशेखर आज़ाद की माँ को एक डकैत की माँ कह कर उलाहना दी जाती थी और समाज ने उनका बहिष्कार किया हुआ था।

उनकी दुर्दशा देख कर सदाशिव राव ने उनसे, उनके साथ झांसी चलने को कहा तो माँ ने यह कह कर मना कर दिया कि,’उनके पति की इस जगह मृत्यु हुयी थी और वो वही गांव में ही अपना अंतिम समय गुजरना चाहती है।’ तब सदाशिव राव ने माँ से कहा कि ‘आज़ाद’ की हमेशा यह इच्छा थी कि वो अपनी माँ को तीर्थस्थानों की यात्रा पर ले जाये, इसलिए कम से कम उन्हें, ‘आज़ाद’ की यह इच्छा पूरी करने दे।

माँ जगरानी देवी, सदाशिव राव की इस बात को मान गयी और सदाशिव राव उन्हें अपने साथ झाँसी लेकर आ गये, जहाँ वह, एक और आज़ाद के क्रन्तिकारी साथी, भगवान दास माथुर के यहां रहने लगी थी। सदाशिव राव ने अपना वचन निभाया और चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ की माँ को विभिन्न तीर्थस्थानों की यात्रा पर लेकर गए थे।

मार्च 1951 में, जब चंद्रशेखर आज़ाद की माँ जगरानी देवी का, झाँसी में निधन हुआ तो, सदाशिव राव मलकापुरकर ने ही उनका अंतिम संस्कार किया था। उनकी मृत्यु के बाद झाँसी के लोगो ने उनकी याद में एक सार्वजनिक स्थान पर एक पीठ का निर्माण किया जिसे तत्कालीन सरकार ने उसे एक अवैधानिक कदम माना और गैर क़ानूनी करार कर दिया था। लेकिन झाँसी की जनता, वहां जगरानी देवी की मूर्ति लगाकर चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि देना चाहती थी। मूर्ति बनाने का काम, चंद्रशेखर आज़ाद के एक और ख़ास सहयोगी, मास्टर रुपनारायण ने, जो शिल्पकार भी थे ने किया था। उन्होंने माँ की फोटो देख कर उनका बस्ट(केवल धड़ से ऊपर) बनाया था।

जब सरकार को पता चला की जगरानी देवी की मूर्ति बना ली गयी है और सदाशिव राव, रूप नारायण. भगवान दास माथुर सहित कई क्रन्तिकारी , झाँसी की जनता के सहयोग से, मूर्ति को स्थापित करने जा रहे है तो , शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। लेकिन जब इन सबकी परवाह किये बिना, सदाशिव राव, मूर्ति को अपने सर पर उठा कर, कुछ लोगो के साथ, पीठ की तरफ चल दिए, तब सरकार ने गोली चला देने का आदेश दे दिया था। पुलिस ने सदाशिव राव पर गोली चलायी लेकिन झाँसी के लोगो ने सदाशिव राव को चारो तरफ से घेर कर बचा जरूर लिया था लेकिन उस गोली कांड में ३ लोगो को गोली लगने से मृत्यु हो गयी थी।

गोली चलने से झाँसी शहर वीराना हो गया और चंद्रशेखर आज़ाद की माँ जगरानी की मूर्ति वहां स्थापित नही हो पायी थी। इस घटना के बाद, सदाशिव राव मलकापुरकर ने रोते हुए कहा था,” चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ ने तो अपनी जान दे कर भारत माँ पर शहीद हो गए थे लेकिन वो इतने दुर्भाग्यशाली है कि चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ की माँ के लिए वह अपनी जान भी नही दे सके है।”

चन्द्रशेखर ‘आज़ाद’, उनकी माँ जगरानी देवी, सदाशिव मलकापुरकर, मास्टर रूप नारायण, भगवान दास माथुर, झाँसी की जनता एक तरफ है, वहीं भावरा गाँव, वहां का समाज, यशपाल और सरकार दूसरी तरफ है।

आज भी, हम और आप में से लोग, दो तरफ खड़े हुए है।

  

दिल का दौरा पड़ने से पूर्व लोकसभा स्पीकर संगमा का निधन

Bureau@navpravah.com

पूर्व लोकसभा स्पीकर पी. ए. सगमा का 69 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. साल 1996 में संयुक्त मोर्चा की सरकार के समय लोकसभा के अध्यक्ष रहे संगमा प्रणव मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़े थे. संगमा के अचानक निधन से सभी राजनेताओं ने दुःख व्यक्त किया.

1 सितंबर, 1947 को जन्मे संगमा नार्थ ईस्ट के कद्दावर नेता थे. छठी लोकसभा में पहली बार तुरा सीट से चुन कर आए संगमा ने मेघालय के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली थी. उनके निधन पर कई नेताओं ने दुःख व्यक्त किया. नेता शरद पवार ने कहा कि संगमा अभी बिल्कुल स्वस्थ थे, उनके निधन की खबर चौंका देने वाली थी. भारत ने एक बेहतरीन नेता खो दिया, जिसकी भरपाई संभव नहीं.

सोनिया गांधी के नेतृत्व को चुनौती देने के कारण उन्हें शरद पवार और तारिक अनवर के साथ कांग्रेस पार्टी से 1999 में निकाल दिया गया था संगमा नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से थे, लेकिन बाद में पवार से भी उनकी नहीं बनी, जिसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली.

‘रंगीला’ गर्ल उर्मिला ने भी रचाई शादी

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तमाम ब्रेकअप्स के बाद बॉलीवुड में इस वक़्त शादियों का दौर शुरू है. मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा के बाद अब चार्मिंग डॉल उर्मिला मातोंडकर ने भी शादी रचा ली है.

कश्मीर के बिजनेसमैन मोहसिन अख्तर मीर से उर्मिला ने गुरुवार को ब्याह रचाया. मोहसिन अख्तर मॉडल भी रह चुके हैं. शादी के इस कार्यक्रम को बेहद प्राइवेट रखा गया था.बॉलीवुड से सिर्फ मशहूर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा शादी में नज़र आए. उर्मिला, मोहसिन और मनिष कॉमने फ्रेंड्स है.

42 साल की उर्मिला ने खुद से 9 साल छोटे मोहसिन से शादी की है. ऐसा ही कुछ प्रीति का भी किस्सा है. उन्होंने भी खुद से दस साल छोटे गुडएनफ से शादी की है.

शादी को बेहद सीमित और मीडिया से भी दूर रखने के विषय में उर्मिला ने कहा, ‘हमने शादी में सिर्फ परिवार और दोस्तों को ही बुलाया. हमें एक लो प्रोफाइल इवेंट रखना था. इस वजह से हमने ज्यादा लोगों को नहीं बुलाया था. हमारी फैमिली चाहती थी कि इसे बहुत ही कम लोगों तक सीमित रखना चाहिए.”

गौरतलब है कि अभिनेत्री उर्मिला के हसबैंड मोहसिन मिस्टर इंडिया कॉन्टेस्ट के सेकेंड रनर अप भी रह चुके हैं. फिलहाल मोहसिन का गार्मेंट्स का बिजनेस है.

देश विरोधी नारे लगाने वालों का सिर होगा कलम -घोष

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पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने अपने विवादित बयान से एक बार फिर से माहौल गरम कर दिया है. घोष ने कहा कि पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने वालों के सिर कलम कर दिए जाएंगे.

पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने ऐसे लोगों को चेतावनी दी है, जो भारत के विरोध और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में घोष ने कहा कि जो यहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं उन्हें उपर से छह इंच काट दिया जाएगा. घोष ने स्पष्ट किया कि अब दिन बदल गए हैं. देश के खिलाफ एक शब्द नहीं सुना जाएगा.

घोष ने चरमपंथियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों को भी चेताया. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो कि देश का विरोध करने वालों की मदद करते हैं, सावधान हो जाएं. क्योंकि अब देश के खिलाफ बोलने वालों का सिर कलम कर दिया जाएगा.

गौरतलब है कि राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनावी साल होने के कारण वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति भी जोरों पर है.

मेरा परिवार अब तक नहीं जनता था कि मेरे साथ बलात्कार हुआ था-लेडी गागा

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पॉप गायिका लेडी गागा की ऑस्कर में संगीत प्रस्तुति के बाद उनके परिवार को मालूम पड़ा कि उनके साथ बलात्कार हुआ था. यह बात उनके परिवार को तब पता चली जब वे ऑस्कर में अपनी प्रस्तुति के दौरान वह यौन हमले की 50 पीड़िताओं के साथ शामिल हुईं.

पीपल पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, ‘पोकर फेस’ की स्टार के साथ 19 वर्ष की उम्र में बलात्कार किया गया था, लेकिन अपने साथ हुए यौन शोषण के बारे में उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों को नहीं बताया.

इंस्टाग्राम पर पोस्ट में 29 वर्षीय गागा ने कहा कि ‘टिल इट हैप्पेंस टू यू’ की जबर्दस्त प्रस्तुति के बाद उनकी दादी और चाची ने उन्हें फोन किया और उनकी बहादुरी की तारीफ की.

गागा ने लिखा, “मैं बहुत शर्मिंदा थी, बहुत डरी हुई थी। मेरे साथ गलत हुआ है यह मानने में मुझे खुद लंबा समय लगा, क्योंकि मैं कैथोलिक हूं और मैं जानती थी कि यह बुरा है, लेकिन मैं समझती थी कि यह मेरी गलती थी.”