चिदंबरम पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव की पुस्तक ‘हू मूव्ड माय इंटरेस्ट रेट?’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने यूको बैंक के प्रमुख आरके ठक्कर की टिप्पणी का भी हवाला दिया कि विनिर्माण क्षेत्र में ऋण की मांग नहीं है।
‘मेक इन इंडिया’ महज़ इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा है- पी. चिदंबरम
बेटे ने अपनी ही मां का किया रेप, और फिर..
पुलिस अफसर के मुताबिक 32 साल के देवांगन को संतोष गाडा और अनिल तिवारी के साथ जेल में रखा गया था। पुलिस को बैरक में देवांगन की डेड बॉडी मिली। उसके जिस्म पर चोट के निशान हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही क्लियर होगा कि उसकी मौत कैसे हुई। आपको बता दे कि संतोष गाडा 2007 से एक मर्डर के केस में बंद है।
राष्ट्रगान पर पाबंदी लगाने वाले एम ए कान्वेन्ट स्कूल पर लगा ताला
शिखा पाण्डेय,
इलाहाबाद के एम ए कान्वेन्ट स्कूल स्कूल में राष्ट्रगान गाने पर पाबंदी के मामले का खुलासा होते ही प्रशासन हरकत में आ गया है। स्कूल की प्रिंसिपल सहित आठ अध्यापकों ने स्कूल में राष्ट्रगान गाने की पाबंदी लगा देने पर इस्तीफ़ा दे दिया है। प्रशासन ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि यह स्कूल बिना मान्यता के ही चल रहा था, जिसके बाद स्कूल पर ताला जड़ दिया गया है।
इस्तीफा देने वाले टीचर्स का कहना है कि राष्ट्रगान गाना उन्हें संविधान से दिया गया मूल अधिकार है लेकिन स्कूल प्रबंधन ने जब उन्हें इसे गाने पर आपत्ति जाहिर की तो उन्होंने स्कूल छोड़ दिया है। हालांकि, अपनी सफाई में स्कूल के मैनेजर ने कहा था कि राष्ट्रगान में ‘भारत भाग्य विधाता’ के ‘भारत’ शब्द से उन्हें आपत्ति है और जब तक राष्ट्रगान में इस पंक्ति में भारत नहीं हटाया जाता वह स्कूल में राष्ट्रगान गाने नहीं देंगे।
मामला प्रशासन के पास पहुँचने के बाद प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। उसका कहना कि जांच के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आप सभी को सुनकर अवश्य आश्चर्य होगा कि इस स्कूल की स्थापना के बाद पिछले 12 साल से कभी राष्ट्रगान नहीं गाया गया। एम ए कान्वेन्ट स्कूल की स्थापना के साथ ही इसमें यह नियम लागू कर दिया गया था कि यहां राष्ट्रगान नहीं गाया जाएगा, जो आज तक लागू है। लंबे समय से इस तुगलकी फरमान के साये में जी रहीं इस स्कूल की प्रिंसिपल और उसके साथ की आठ अध्यापिकाओं ने जब इसके खिलाफ आवाज उठाई तो प्रबंधन ने उन्हें स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यहां प्रोग्राम होना था। टीचिंग स्टाफ ने कहा कि नेशनल एंथम होना है। इस पर स्कूल प्रबंधकों ने कहा कि नेशनल एंथम आज तक हमारे यहां नहीं हुआ और अब भी नहीं होगा। कारण पूछा गया तो कहा कि उसमें एक लाइन आती है, ‘भारत भाग्य विधाता’ जो हमारे धर्म के खिलाफ है। भारत हमारे भाग्य का विधाता कैसे हो सकता है?हमारे भाग्य का विधाता सिर्फ अल्लाह है। टीचर्स ने बाताया,” हमें तो एक साल हुआ है यहां, लेकिन 12 साल से किसी ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। बच्चों से पूछिये नेशनल एंथम क्या होता है, उन्हें पता ही नहीं है, गार्जियन को भी चुप करा दिया जाता है।”
मामला सामने आने के बाद जब सवाल उठा कि जिला प्रशासन के कार्यालय से महज एक किलोमीटर के दायरे में स्थित इस स्कूल की मान्यता की जांच कभी प्रशासन ने क्यों नहीं की, तो इसका जवाब प्रशासन के पास नहीं है। जिला प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है जिसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रारम्भिक जांच में यह बात सामने आई है कि नर्सरी से आठवीं तक चल रहे इस स्कूल को सरकार से कोई मान्यता ही नहीं प्राप्त है।
निर्देशक प्रकाश झा पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज़!
क्या है मामला
झा ने ‘प्रकाश झा प्रोडक्शन्स’ के अंतर्गत ‘‘जय गंगाजल’ का सह-निर्माण किया था। प्ले एंटरटेनमेंट के सीईओ मिलिंद दबके ने आज यहां जारी एक बयान में कहा, “फिल्म को लेकर हमारे बीच हुए समझौते के तहत अभी तक फिल्म की मूल कॉपी नहीं मिली है। इस वजह से हमारे प्रोडक्शन हाउस को घाटा हो रहा है। मूल कॉपी के बिना हम सौदा या किसी टीवी चैनल का सैटेलाइट राइट नहीं बेच सकते हैं।”
प्ले एंटरटेनमेंट ने कहा है कि झा के साथ एक अन्य सह-निर्माण, अरशद वारसी अभिनीत फिल्म ‘फ्रॉड सैंया’, के मामले में कंपनी का सभी कॉपीराइट प्रदान करने पर समझौता हुआ था लेकिन फिल्म के साउंड रिकॉर्डिंग का कॉपराइट दूसरी म्यूजिक कंपनी को बेच दिया गया।
दबके ने कहा, ‘‘इससे साफ पता चलता है कि समझौता ज्ञापन पर काम करते समय म्यूजिक राइट्स को किसी दूसरी कंपनी को बेचने की बात को जानबूझकर दबा दिया गया था।” हालांकि झा की कंपनी के सीईओ सुनील अग्रवाल ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है। उन्होंने कहा कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से शिकायत दर्ज कराई गई है।
“मोदीजी समझ गए कि गाय दूध देती है, वोट नहीं”- लालू प्रसाद यादव
लालू ने कहा, “लगता है मेरे द्वारा दो दिन पहले कही गई बात मोदी जी को अच्छे से समझ में आ गयी कि गाय दूध देती है, वोट नहीं। और समझ भी क्यों ना आये, गौमाता इनकी सरकार बनवाना तो दूर, बनी बनाई सरकारों को हिला रही है।” लालू ने कहा,” मोदी जी आपने कल कहा कि गाय के नाम पर गुंडागर्दी हो रही है, 80 फीसदी गौरक्षक गौरखधंधा करते हैं, दिन में गौरक्षक का चोला ओढ़ लेते हैं और रात में अपराध। ऐसे लोगों के डोजियर तैयार कीजिए तो पता चल जायेगा।”
लालू ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि नागपुर वालों, यह सत्य की विजय और पाखंड की पराजय है। लालू ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा , “गौमाता के नाम पर बेवकूफ बनाने चले थे, अब दाँव उल्टा पड़ गया तो भाषा बदल रही है। जनता सब जानती है। देखिये आप लोग बिहार चुनाव में कैसे बड़े-बड़े विज्ञापन निकालते थे। ये उन विज्ञापनों की पराकाष्ठा थी कि चुनाव में दाल नहीं गली। हाँ, अब आपका दल जरूर गल जायेगा।”
लालू ने चुनौती देते हुए कहा,” आप प्रधानमंत्री हैं, डोजियर तैयार करवाइए, किस राज्य में, किसके राज में, किसकी सरकार में यह गुंडागर्दी हो रही है? क्यों हो रही है? किसके कहने से हो रही है? कौन कर रहा है?किसलिये कर रहा है?जहां हो रहा है वहाँ जंगलराज घोषित किजिए।”
आपको बता दें कि कल दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम “टाऊन हॉल ” में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मुझे गो रक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वालों पर गुस्सा आता है। उसी बात पर लालू ने पीएम पर ये व्यंग बाण चलाये।
अब नसीरुद्दीन शाह पर बरसे जावेद अख़्तर
शिखा पाण्डेय
अनुपम खेर, खन्ना परिवार के बाद अब गीतकार, पटकथा लेखक जावेद अख्तर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर भड़क गए हैं। अख़्तर ने कहा कि शाह कभी भी सफल लोगों की प्रशंसा नहीं करते।
दरअसल अभिनेता राजेश खन्ना वाले मामले को जावेद अख्तर ने फिर उठा दिया है। आपको बता दें कि नसीरुद्दीन शाह ने हाल में कहा था कि 1970 के दशक में राजेश खन्ना के औसत अभिनय के कारण बॉलीवुड फिल्में भी औसत दर्ज़े की रहीं। उनके इस बयान का उल्लेख करते हुए अट्टा गलाटा की तरफ से आयोजित पहले बंगलुरू कविता उत्सव में हिस्सा लेने आए अख्तर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह को सफल लोगों पसंद नहीं।
जावेद अख्तर ने कहा,” नसीरुद्दीन शाह कभी भी सफल लोगों की प्रशंसा नहीं करते हैं। ऐसा करते मैंने उन्हें कभी नहीं देखा है। नसीरुद्दीन शाह कभी दिलीप कुमार की आलोचना करते हैं तो कभी अमिताभ बच्चन की।”
गौरतलब है कि शाह के बयान की काफी आलोचना हुई थी। डिंपल कपाड़िया ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मेरे पति का हिंदी सिनेमा में बहुत बड़ा योगदान रहा है। डिंपल ने कहा था,”मैं, आप, यहां तक कि उनके लाखों फैंस उनकी फिल्मों और काम को अच्छी तरह से पहचानते हैं।” उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन मुझे लगता है कि इंसान का काम खुद बोलता है।
ट्विंकल खन्ना ने भी नसीरुद्दीन शाह के बयान पर नाराज़गी जताई थी। ट्विंकल ने ट्वीट करके शाह से कहा था कि उन्हें कम से कम गुज़र चुके लोगों का लिहाज़ करना था। उनके अतिरिक्त भी कई बॉलीवुड हस्तियों ने शाह के बयान की आलोचना की थी।
रुस्तम देखने से बनेगे रिश्ते मज़बूत, नहीं होंगे तलाक : अक्षय कुमार
अब्दुल फ़हद,
अभिनेता अक्षय कुमार अपनी नयी फ़िल्म ‘रुस्तम’ को शादीशुदा लोगों को देखने की पुरज़ोर अपील कर रहे हैं। अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि उनकी आगामी फिल्म ‘रुस्तम’ को महिलाएं पसंद करेंगी और यह शादी बचाने के साथ ही तालाक होने से भी रोकने में कामयाब होगी।
अभिनेता ने कहा, इसका विषय अलग है। यह वास्तविक कहानी पर आधारित मूवी है और यह पहली बार है जब कोई पारसी नेवी ऑफिसर की मुख्य भूमिका निभाएगा। जब उनसे पूछा गया कि इस फिल्म से वह क्या वापस लेना चाहते हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, मैं अपना यूनिफॉर्म वापस लेने जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि यह फिल्म शादियों को बचाएगा और तालाक लेने से लोगों को रोकेगा।
यह फिल्म बेवफाई और विवाहेत्तर संबंधों पर आधारित है। जब अक्षय के किरदार को उनकी पत्नी धोखा दे रही होती है, जिसके कारण वह अपने पत्नी के प्रेमी को मार देता है।
इलाहाबाद: अपने ही देश के विद्यालय में 12 साल से बैन है राष्ट्रगान, विरोध करने पर शिक्षकों को किया बाहर
अनुज हनुमत
इलाहाबाद। अभी हाल ही में बुन्देलखण्ड के बांदा जिले से एक सरकारी विद्यालय में राष्ट्रगान पर पाबंदी लगाने का मामला सामने आया था। शिक्षा के मन्दिर में ऐसी घटना ने पूरे देश को शर्मसार किया था और अब देश के स्वाभिमान से जुडी ऐसी ही एक घटना सामने आई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक स्कूल में राष्ट्रगान गाने पर ही प्रतिबंध लगा हुआ है।
कथित तौर पर स्कूल के मैनेजर ने कहा है कि वह स्कूल में राष्ट्रगान गाने नहीं देंगे, क्योंकि राष्ट्रगान में ‘भारत भाग्य विधाता’ के ‘भारत’ शब्द से हमें आपत्ति है। मैनेजर जियाउल हक का कहना है कि भारत, हमारे भाग्य का विधाता कैसे हो सकता है, भाग्य का विधाता तो सिर्फ ईश्वर/अल्लाह है। इस वजह से हम गाने नहीं देंगे। जो हमारे धर्म इस्लाम के भी खिलाफ भी है।
प्रबंधन के इस फैसले से नाराज़ स्कूल की प्रिंसिपल समेत 8 शिक्षकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है। इस्तीफ़ा देने के बाद ही यह अजीबो गरीब मामला मीडिया के सामने आया ।
पत्रकारों से बात करते हुए स्कूल के मैनेजर ने कहा कि राष्ट्रगान में ‘भारत भाग्य विधाता’ के ‘भारत’ शब्द से उन्हें आपत्ति है, जब तक राष्ट्रगान में इस पंक्ति में भारत नहीं हटाया जाता, वह स्कूल में राष्ट्रगान गाने नहीं देंगे। राष्ट्रगान की एक लाइन पर उन्हें गहरा ऐतराज है, जिसकी वजह से वह स्कूल में राष्ट्रगान को नहीं गाने दे सकते।
मैनेजर की मानें तो राष्ट्रगान में भारत भाग्य विधाता का गान करना इस्लाम के खिलाफ है क्योंकि अल्लाह के सिवाय और कोई उनका भाग्य विधाता नहीं हो सकता है। आपको बता दें कि देश में यह अपने आप में एक अनोखा स्कूल है, जहां स्कूल की स्थापना के बाद पिछले 12 साल से कभी राष्ट्रगान नहीं गाया गया। स्कूल की स्थापना के साथ ही इसमें यह तुगलकी फरमान आज भी जारी है कि यहां राष्ट्रगान नहीं गाया जाएगा।
स्कूल की प्रिंसिपल और उसके साथ की 8 शिक्षिकाओं ने जब इसके खिलाफ आवाज उठाई तो प्रबंधन ने उन्हें स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। मामला प्रशासन के पास पहुँचने के बाद प्रशासन ने आनन फानन में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं, उसका कहना है कि जांच के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शुरुआती जाँच में प्रशासन ने पाया कि इस विद्यालय की नर्सरी से आठवीं तक सरकार से कोई मान्यता ही नहीं प्राप्त है। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन स्कूल प्रबन्धन के ऊपर क्या कार्यवाही करता है।
विजय रूपाणी बने गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री,गांधीनगर में ली शपथ
ब्यूरो,
आज विजय रुपानी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर गुजरात के गांधीनगर में शपथ ली। नितिन पटेल ने भी रूपानी के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद नेता हुए।
दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर गांधीनगर में शुरू हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में कुछ नये मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। शपथ ग्रहण समारोह
में शामिल होने के लिए लालकृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली पहले ही अहमदाबाद पहुंच गये हैं।
गौरतलब है कि शुक्रवार को काफ़ी उठापटक के बाद विजय रुपानी के नाम पर मुहर लगी थी। रूपानी के नाम को लेकर अमित शाह और आनंदीबेन पटेल के बीच नोक-झोंक भी हुई थी। इससे पहले एक अगस्त को आनंदीबेन ने फेसबुक पर अपने इस्तीफे का ऐलान किया था। रूपानी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों का करीबी माना जाता है।
विजय रूपाणी का संक्षिप्त परिचय-
विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त को 1956 रंगून में हुआ था। उनके पिता कारोबारी थे। 1960 में वे परिवार के साथ राजकोट आ गये। 1980 में भाजपा में शामिल होने से पहले इमरजेंसी के दौरान रूपाणी मीसा के तहत जेल भी गए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रूपाणी काफी आक्रामक नेता माने जाते हैं। वे आनंदीबेन सरकार में ट्रांसपोर्ट, वाटर सप्लाई, श्रम और रोजगार विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे हैं। उन्हें नरेंद्र मोदी और अमित शाह का करीबी माना जाता है। पार्टी के इस निर्णय के बाद जैन समुदाय के विजय रुपाणी गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री बन गये हैं।
“गौरक्षा ही करनी है तो गायों को अपनी शाखाओं में रखें भाजपा व आरएसएस”- नितीश कुमार
शिखा पाण्डेय,
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि भाजपा व आरएसएस अगर गौरक्षा करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी शाखाओं में सुरक्षित रखें। शराबबंदी का एजेंडा लेकर यूपी चुनाव लड़ने की बात करने वाले जेडीयू अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संघ और भाजपा एक सिक्के के दो पहलू हैं।
कानपुर से करीब 70 किमी दूर घाटमपुर में आयोजित जदयू के प्रमंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कहा “राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ गायों और नीलगायों की रक्षा की बात करता है। अगर गायों और नीलगायों से इतनी ही सहानुभूति रखते हैं, तो उन्हें संघ और भाजपा के नेता अपनी शाखाओं में रखें। इन्हें सड़कों पर न छोड़ें, जिससे कि वे परेशानी का कारण बनें।
नितीश ने कहा,” भाजपा संघ का ही एक चेहरा है। गाय के नाम पर भाजपा और संघ देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। जदयू कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वह भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के जूते का फोटो लें और उन्हें दिखा कर पूछें कि वे किस चमड़े के जूते पहने हुए हैं। हम चाहते हैं कि देश संघमुक्त बने।”
नितीश ने शराबबंदी के विषय में कहा कि बिहार में हमारी सरकार ने पीढ़ियों के भविष्य को संभालने का काम किया है और अब हर कोई हमारी सरकार के इस काम का सहयोग कर रहा है। उत्तरप्रदेश में भी पूर्ण रूप से शराब बंद होनी चाहिए। बिहार का उदाहरण देते हुए वे बोले कि बिहार में शराबबंदी के बाद जो शराब के आदी थे, वे भी सुधर गये हैं और अब सरकार के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने बिहार में विपक्षी भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पहले तो भाजपा शराबबंदी का समर्थन करती थी, लेकिन अब जब भी शराबबंदी पर कोई कानून हम विधानसभा में लाते हैं, तो वह सहयोग नहीं करती।
नीतीश ने कहा कि यूपी में हमारी लड़ाई सपा और बसपा से नहीं, बल्कि भाजपा से है। हमारी नजर 2019 में होनेवाले लोकसभा चुनाव पर है, जिसमें हम मजबूती से उतरेंगे और भाजपा का मुकाबला करेंगे। जेडीयू अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यूपी एक बड़ा प्रदेश है और दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है, इसिलए हम पहले अपने कार्यकर्ताओं को यूपी में मजबूत करेंगे। उसके बाद 2019 में जोरदार तरीके से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे।







