28.6 C
Mumbai
Sunday, August 9, 2026
Home Blog Page 1094

कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरी

सौम्या केसरवानी,

कोलकाता के एसएसकेएम सरकारी अस्पताल में भीषण आग लगने से अफरा तफरी मच गई। अस्पताल की चौथी मंजिल पर आग लगने की जानकारी जैसी ही मिली अस्पताल में मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे। मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गई और आग पर काबू पाने की लगातार कोशिश जारी हैं।

अस्पताल में लगी भीषण आग में फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। आग अस्पताल की चौथी मंजिल पर लगी है, इसलिए आग को बुझाने में फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को काफी मुश्किलें हो रही है।

आग की लपटें अस्पताल की खिड़की में निकल रही हैं। अस्पताल के चारों तरफ धुआँ ही धुआं है। मौके पर प्रशासन अधिकारी भी पहुंच गये हैं। आग लगने के कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

सीएम अखिलेश ‘एक्सप्रेस-वे’ का करेंगे उद्घाटन

सौम्या केसरवानी,

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज अपने 
महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर अपने पिता और पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को उनके जन्मदिन से पहले तोहफा देंगे। आगरा एक्सप्रेस-वे मुख्यमंत्री अखिलेश का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यह अपनी तय समय सीमा 26 महीने से पहले बनकर तैयार हो चुका है।

बीते 29 अक्टूबर को सीएम अखिलेश ने आगरा एक्सप्रेस-वे पर खुद गाड़ी चलाकर उसका निरीक्षण किया था।उदघाटन के दौरान वायुसेना के फाइटर जेट्स एयर शो के दौरान करतब दिखायेंगे। यह एयर शो एक्सप्रेस-वे को तय समय सीमा से पहले खत्म करने के उपलक्ष्य में किया गया है। लेकिन बीते 18 नवम्बर को एक्सप्रेस-वे की टेस्टिंग के लिए फाइटर जेट्स को वहां उतारा गया था।

युद्ध के हालातों में वायुसेना के विमान यहाँ से उड़ान भर सकेंगे। एयर शो में 8 फाइटर जेट्स मौजूद रहेंगे। इनमें से 3 सुखोई और 5 मिराज-2000 मौजूद रहेंगे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के बाद दो शहरों के बीच की दूरी तय करने में लगने वाला समय आधा हो जायेगा।

‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे’ में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ यातायात मैनेजमैट प्रणाली का प्रयोग किया गया है। विश्व स्तर पर अग्रिम यातायात प्रबंधन प्रणाली की सुविधा, UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) इससे पहले इस विषय पर मीटिंग कर चुका है।

Edit

सावधान! दूसरों के खाते में अघोषित राशि जमा की, तो होगी 7 साल की जेल

आनंद रूप द्विवेदी,

आयकर विभाग द्वारा जारी की गई सूचना के अनुसार, जो लोग अपना अघोषित पैसा दूसरों के बैंक अकाउंट में जमा कर रहे हैं, वो पकड़े जाने पर 7 साल के लिए जेल की हवा खा सकते हैं। ऐसे मामलों में बेनामी लेन देन कानून के तहत सजा का प्रावधान है, साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 8 नवम्बर के बाद लगभग 200 करोड़ की अघोषित राशि पकड़ी गई है।  जिसमें 50 करोड़ नकदी है। लोगों ने अपनी अघोषित राशि दूसरों के खातों में जमा कराना शुरू कर दिया है, जिस पर सतर्कता बरतते हुए आयकर विभाग ने ये कहा है कि अपना अघोषित धन दूसरों के खातों में जमा कराने वालों पर बेनामी लेन देन अधिनियम 1988 के तहत कारवाई की जाएगी, जिसके अंतर्गत भारी जुर्माना व अधिकतम 7 साल तक कि जेल सज़ा का प्रावधान है। गौरतलब है कि जिसके खाते में पैसा जमा किया जायेगा उसको भी पकड़ा जायेगा।
कुछ मामलों में पाया गया है कि लोग अपना काला धन सेटल करने और उसे वैध बनाने के लिए ये हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन अब ऐसे लोग बच नहीं पायेंगे। साथ ही 2.5 लाख से ज्यादा रुपये जमा कराने वालों को भी आयकर विभाग ने नोटिस जारी करने शुरू कर दिए हैं। इससे कम राशि जमा कराये जाने पर संदिग्ध मामलों पर कारवाई की जाएगी।

​नोटबन्दी: मोदी के मास्टर स्ट्रोक के बाद हारी हुई बाजी खेल रहा है विपक्ष!

अनुज हनुमत,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अचानक से पूरे देश में 500 और एक हजार की नोटों पर पाबंदी लगा दी, जिसके चलते कालाधन रखने वाले सदमे में आ गये। नोटबंदी के फैसले के बाद अगले दो तीन दिन तक तो राजनीतिक गलियारों में भी अजीब सी शांति देखी गई। मानों सभी के पास बड़े पैमाने पे कालाधन रहा हो, जिसको सभी ठिकाने लगाने की व्यवस्थाओं में लग गए हो, लेकिन ये तो वही पार्टी वाले ही जानते होंगे।
बीच में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई, जिसमें यूपी की कुछ प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के कार्यालय से नोटों से भरे बैग गाड़ियों में लदते देखे गये। इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि क्षेत्रीय दलों के अंदर इस निर्णय को लेकर सबसे ज्यादा बेचैनी है। क्योंकि समय समय पर इन क्षेत्रीय पार्टियों के ऊपर मोटी रकम लेकर टिकट देने का भी आरोप लगता रहा है। ऐसे में पीएम मोदी इन पार्टियों के सबसे ज्यादा निशाने पर हैं। केंद्र सरकार द्वारा लिए गये नोटबन्दी के फैसले के बाद से बाहुबली नेता, खनन माफ़िया, बड़े ठेकेदार, बिल्डर, अंडरवर्ल्ड, आतंकवादी, नक्सली, अधिकांश बड़े मंदिर ये सभी बेचैन हैं, क्योंकि ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो सबसे ज्यादा घाटा इन्हीं का हुआ है।
केंद्र सरकार के नोटबन्दी वाले फैसले के एक हफ्ते के बाद विपक्ष अचानक मुखर हुआ और पीएम मोदी के ऊपर एक के बाद एक हमले शुरू कर दिए। फ़िलहाल विरोध का आलम ये है कि शीतकालीन सत्र भी नोटबन्दी की भेंट चढ़ने वाला है। ये सारे हमले गरीबों की कंधे पर बन्दूक रखकर किये जा रहे हैं, क्योंकि सरकार द्वारा अचानक लिए गये इस फैसले से आम लोगों को कुछ दिक्कतों का सामना तो निःसन्देह करना पड़ रहा है, लेकिन अधिकांश लोग सरकार के इस फैसलों को सही बता रहे हैं। शायद विपक्ष भी एक हारी हुई लड़ाई लड़ रही है, जिसका नेतृत्व भी कांग्रेस के स्थान ममता बनर्जी कर रही हैं।
कांग्रेस के नेता केवल जुबानी वार करते नजर आ रहे हैं। पार्टी के नेता तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर पीएम नरेंद्र मोदी हिटलर हैं या मुसोलिनी! शायद ये पार्टी के नेताओं में आपसी संवादहीनता का नतीजा है, जो हर नेता अलग अलग तीर चला रहा है। इस नोटबन्दी वाले मुद्दे में सरकार के विरोध में दो शूरवीर योद्धाओं ने सबसे ज्यादा तेजी दिखाई है, जिसमें एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं और दूसरे कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी हैं।
अगर हम अरविन्द केजरीवाल की बात करें, तो वो शायद तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें प्रदेश की राजनीति करने है या पूरे देश की। इसिलिए नए नए करतब करते अमूमन दिखाई दे जाते हैं। आने वाले दिनों में इनके कारण पार्टी को जबरदस्त झटका लग सकता है। दूसरी तरफ अगर कांग्रेस युवराज की बात करें तो उनके व्यवहार से तो अक्सर यही प्रतीत होता है कि तैयारी में कुछ कमी थी, लेकिन ऐसा कब तक होता रहेगा। कब तक कांग्रेस परिवारवाद की गिरफ्त में रहेगी। पार्टी में ऐसे बहुत से युवा चेहरे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को लीड कर सकते हैं लेकिन शायद ये सभी जानते हैं कि कांग्रेस में ऐसा निर्णय लेना नामुमकिन है कि कोई गांधी परिवार से इतर पार्टी का नेतृत्व करे!
अगर हम इसी मुद्दे पर मीडिया की बात करें, तो नोटबन्दी के फैसले का सबसे ज्यादा दर्द एनडीटीवी को हुआ है, जो लगातार ग्राउंड जीरो से गरीबों की दिक्कतें दिखा रहे हैं। रवीश कुमार ग्राउंड जीरों पर गये, लेकिन उन्हें सभी सरकार के भक्त नजर आये तो दूसरी ओर कुछ रिपोर्ट्स में चैनल ने ये दिखाया कि मजदूरों को भी नोटबन्दी के चलते अपनी मजदूरी का नुकसान करना पड़ रहा है, लेकिन जब पता चला कि उन्ही मजदूरों का प्रयोग लोग अपने पैसे निकलवाने के लिए कर रहे हैं तो फिर ये रिपोर्ट सामने नहीं आई। 
एनडीटीवी, सरकार के विरुद्ध इस मुद्दे पर इसलिए भी लड़ाई लड़ रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ के एक मामले में चैनल के ऊपर एक दिन का बैन लगाने का निर्णय लिया था। कुछ चैनल लगातार भक्ति भी कर रहे हैं लेकिन ये सब कितना उचित है। जब लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ ही ऐसी कुंठित मानसिकता का कार्य करेगा तो फिर देश का क्या होगा!
सरकार के नोटबन्दी के ऐलान ने देशविरोधी तत्वों और आतंकी संगठनों की नींद उड़ाकर रख दी है। घाटी में पिछले 11 दिन में ड्रग्स तस्करी का केवल एक ही मामला सामने आया है। हवाला कारोबार बैठ गया है।आतंकी संगठनों के लिए गाइड और पोर्टर का काम करने वाले ओवर ग्रांउड वर्करों की भी कमर टूट गई है।
हालांकि नोटबन्दी के असर से लुधियाना का हैजरी उद्योग भी अछूता नहीं रह सका, जहाँ कारोबार महज दस फीसदी तक सिमट गया है। वहीं फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग भी पूरी तह पटरी से उतर गया है। दरअसल, ध्यान देने वाली बात यह है कि नोटबन्दी के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव आतंकवाद पर पड़ा है। अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए विख्यात पाकिस्तान में जन्मे कैनेडियन लेखक तारिक फ़तेह ने नोटबन्दी के फैसले की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान, नक्सलवाद और आतंक फैलाने वाले दाउद जैसों की कमर टूटी है।
सबसे खास बात यह है कि कालाधन रखने वालों की नींदें उड़ी हुई हैं और आपको फिर भी लगता है कि सरकार का यह फैसला गलत है। हालाँकि इसे लेकर व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिए थी। अगर हम चाहते हैं कि भ्रष्टाचार खत्म हो, तो तकलीफ सहने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीति करने और लोगों को भड़काने से बचना चाहिए।

पंजाब: दलितों का वोट कैश करने के लिए ‘दलित घोषणापत्र’ जारी करेंगे केजरीवाल

शिखा पाण्डेय,

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं और राज्य की 32 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की है। पंजाब में चुनावी रैलियों के अपने 10 दिवसीय कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मुख्य लक्ष्य इस 32 प्रतिशत वोट बैंक को हथियाने का है, जिसके तहत केजरीवाल इस सप्ताह पंजाब में ‘आप’ का ‘दलित घोषणापत्र’ जारी करेंगे।

यह घोषणापत्र पार्टी द्वारा पूरे पंजाब में आयोजित कराए गए ‘दलित संवाद’ की श्रृंखलाओं का परिणाम है। इन संवादों की शुरुआत अगस्त में हुई। केजरीवाल इस समूह विशेष के ‘व्यवस्थागत उत्पीड़न’ को विस्तार से बताते हुए अपनी तरह का यह पहला दस्तावेज जारी करेंगे। आपको बता दें कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 88 लाख है। यह राज्य की कुल जनसंख्या का 32 प्रतिशत है और अन्य सभी राज्यों की तुलना में यह प्रतिशत सबसे ज्यादा है।

आप के राष्ट्रीय संगठन निर्माण के अध्यक्ष दुर्गेश पाठक ने बताया कि यह घोषणापत्र केजरीवाल की यात्रा का प्रमुख बिंदु होगा। इस दौरान वह 21 रैलियों को संबोधित करेंगे। पाठक ने कहा, “राज्य में दलित-बहुल इलाकों में 10-12 संवाद आयोजित किए गए। समुदाय के सदस्यों ने आगे आकर अपने विचारों को उन्मुक्तता के साथ रखा और दस्तावेज में शामिल करने के लिए सुझाव भी दिए।” पाठक ने बताया कि खुले सत्रों के दौरान दलित समुदाय के सदस्यों को एक फॉर्म भी दिया गया था, जिसमें वे अपनी प्रतिक्रिया और सिफारिशें लिख सकते थे। घोषणापत्र बनाते हुए इनका खास ध्यान रखा गया है।

नोटबंदी पर बोले पीएम, ‘देश सोने की तरह तपकर बाहर निकलेगा’

सौम्या केसरवानी,

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार 20 नवम्बर को उत्तर प्रदेश के आगरा के दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना’ का उदघाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने रेल परियोजनाओं सहित कई योजनाओं का लोकार्पण किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम में कालेधन नोटबंदी से जनता को रही तकलीफों पर बात की। उन्होंने कहा कि आपका तप बेकार नहीं जायेगा। इसी में आगे जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा, देश सोने की तरह तपकर बाहर निकलेगा। व्यवस्था में सुधार करना है तो करूँगा। आपको जो तकलीफ हो रही है, उसके लिए मैंने पहले ही दिन कहा था।

जवाब में कार्यक्रमस्थल पर मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर पीएम मोदी के प्रति अपना समर्थन जताया। पीएम नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि, आप लोग जो कष्ट उठा रहे हैं, उससे फायदा होगा। देश के आदिवासी, किसान और माताएं-बहनें कष्ट उठा रही हैं। ये उन्होंने देश को कालेधन से मुक्त करने का बीड़ा उठाया है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों ने आशीर्वाद दिया है।

केजरीवाल का नोटबंदी पर एक और बेतुका बयान

सौम्या केसरवानी,

राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल वैसे तो आये दिन प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने नोटबंदी को लेकर मोदी को घेरते हुए एक बेतुका बयान दे दिया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने नोटबंदी पर कहा कि प्रधानमंत्री को देश से तुरंत नोटबंदी को हटा लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता की वकालत की है। जिसके साथ केजरीवाल ने बीजेपी को अपनी संपत्ति के ब्यौरे की घोषणा करने की चुनौती भी दी है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि नोटबंदी को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए, ऐसा इसलिए क्योंकि उनके अनुसार यह एक ‘बड़ा घोटाला’ है।

इसके अलावा उन्होंने उन पर लगे सभी आरोपों का खंडन किया, जिसके तहत उन पर नोटबंदी का विरोध करने का आरोप लगाया गया था। केजरीवाल ने कहा, ‘‘मोदी जी यह खुलासा क्यों नहीं करते हैं कि 2014 के चुनाव में धन किसने दिया था? उनके अनुसार सभी पार्टियों को ऐसा करना चाहिए चाहे वह सपा हो या बसपा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमित शाह ने सीबीआई, आयकर विभाग आदि को मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया है।
परंतु उन्हें कुछ भी नहीं मिला, नहीं तो वे अब तक हमें जेल भेज चुके होते।

पंजाब: केजरीवाल का ऐलान-ए-जंग, सुखबीर बादल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे सांसद भगवंत मान

शिखा पाण्डेय,

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के विधानसभा क्षेत्र जलालाबाद से सुखबीर के खिलाफ सांसद भगवंत मान को उतारने की घोषणा की है। आज केजरीवाल जलालाबाद में रैली करने पहुंचे। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब को नशामुक्त करने व भ्रष्टाचारमुक्त शासन देने के लिए आम आदमी पार्टी ने ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

अपने 10 दिवसीय दौरे के पहले दिन रैली के दौरान केजरीवाल ने दिल्ली सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान जो वादे किए थे उन्हें उन्होंने पूरा किया। उन्होंने कहा कि जब वह रास्ते में आ रहे थे तो कांग्रेसी व अकाली दल के कार्यकर्ता उन्हें काले झंडे दिखा रहे थे। केजरीवाल ने कहा कि वह ऐसे काले झंडों से डरने वाले नहीं हैैं।

उन्होंने मंच से सुखबीर के खिलाफ सांसद भगवंत मान को उतारने का फैसला किया तो मान ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वह सुखबीर को दिखा देंगे कि जीत क्या होती है। रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगर सुखबीर बादल किसी दूसरे क्षेत्र से भी चुनाव लड़ते हैैं तो वहां भी मान सुखबीर के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

केजरीवाल ने कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया पर निशाना साधते हुए कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नशे को लेकर मजीठिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मजीठिया ने पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे में डुबो दिया है। बादल परिवार भी पंजाब को लूटने में लगा है। पंजाब को नशामुक्त व भ्रष्टाचारमुक्त केवल आप पार्टी ही कर सकती है।

केजरीवाल ने मजीठिया को चुनौती दी कि या तो वे उन्हें गिरफ्तार कर लें, नहीं तो आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर वे उन्हें गिरफ्तार करवा लेंगे।केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह मजीठिया का बचाव कर रहे हैैं, जबकि बादल कैप्टन का। केजरी ने कहा कि ये आपस में मित्रता निभा रहे हैैं। इनको पंजाब के कल्याण से कोई मतलब नहीं है।

आमिर-आदित्य में हीरोइन को लेकर विवाद, ठन्डे बस्ते में फिल्म ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’!

अमित द्विवेदी,

‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन और  आमिर खान की जोड़ी को साथ देखने की दिली ख़्वाहिश रखनेवाले दर्शकों को निराशा हाथ लग सकती है। डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा की इस फिल्म के जरिये दोनों सितारे पहली बार साथ काम करने वाले थे लेकिन अब यह मामला अधजल में नज़र आ रहा है।

खबर है कि आदित्य चोपड़ा ने फिल्म के रिलीज़ का समय भी तय कर लिया है। वहीं सूत्रों की मानें तो आमिर और आदित्य चोपड़ा के बीच ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की हीरोइन को लेकर बड़ा विवाद हो गया है।

खबर के मुताबिक, आदित्य चाहते हैं कि फिल्म की हिरोइन वाणी कपूर हों, लेकिन आमिर आलिया भट्ट को अपने अपोजिट लेना चाहते हैं। दरअसल आदित्य की फिल्म ‘बेफिक्रे’ में भी वाणी ने लीड रोल निभाया है। आदित्य ने खुद इस फिल्म को निर्देशित किया है। इसलिए उन्हें लगता है कि ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ के लिए वाणी परफेक्ट हैं।

यदि सूत्रों की मानें, तो आमिर और आदित्य के बीच हीरोइन को लेकर विवाद इस हद तक पहुंच चुका है कि आमिर ने इस फिल्म को छोड़ने का मन बना लिया है। आपको बता दें कि अदित्य ने फिल्म के रिलीज़ के लिए दीपावली, 2018 का समय भी तय कर लिया है।

भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने चाइना ओपन का ख़िताब किया अपने नाम

शिखा पाण्डेय,

भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने चाइना ओपन का ख़िताब जीतकर एक बार फिर देश का मस्तक फ़क्र से ऊंचा कर दिया है। सिंधु का फाइनल मुकाबला चीन की सुंग जी ह्यून के साथ हुआ। आपको बता दें कि इससे पहले चाइना ओपन में भारत से मात्र सायन नेहवाल पहुंची थीं, और 2014 में यह ख़िताब उन्होंने अपने नाम किया था।

सिंधु ने सेमी फाइनल में दक्षिण कोरिया की सुंग जी ह्यून को 11-21, 23-21, 21-19 से हराया। सिंधु ने सुन यू को 21-11, 17-21 और 21-11 से हराया। किसी बड़े टूर्नामेंट में यह लगातार तीसरे साल हुआ है, जब कोई भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी फाइनल खेली है, जबकि इनमें आमतौर पर चीनी खिलाड़ियों का बोलबाला रहता है। साल 2014 में साइना नेहवाल ने यह टूर्नामेंट जीता था, लेकिन 2015 में वह रनर अप रहीं थीं।

फाइनल मुकाबले का पहला सेट जीतने में सिंधु को बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और उन्होंने नौवीं वरीयता प्राप्त चीन की ह्यून को 17 मिनट में ही 21-11 से गेम जीत लिया। दूसरे गेम में सिंधु को मशक्कत करनी पड़ी। ह्यून ने वापसी की सफल कोशिश की और गेम पर 17-21 से कब्जा कर लिया, लेकिन तीसरे और निर्णायक गेम में सिंधु ने एक बार फिर लय पकड़ ली और ह्यून को एक बार फिर 21-11 से मात दी। सिंधु और ह्यून के बीच यह छठा मुकाबला था, जिसमें सिंधु ने जीत-हार का आंकड़ा 3-3 से बराबर कर लिया।

ओलिंपिक के बाद यह सिंधु का पहला बड़ा खिताब है। यह खिताबी जीत उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि चाइना ओपन में इससे पहले 25 में से 23 बार चीनी खिलाड़ियों ने ही खिताब पर कब्जा किया था। सिंधु से पहले अब तक भारत की साइना नेहवाल और मलेशिया की मी चुंग वॉन्ग ही ऐसी गैर-चीनी खिलाड़ी रही हैं, जिन्होंने यह खिताब जीता था।