अनुज हनुमत,
जानलेवा बीमारी कैंसर से जंग जीतकर एक नई पारी की शुरुआत करने वाले भारतीय क्रिकेट के युवराज अब परिणय सूत्र में बंधने वाले हैं। गौरतलब हो कि भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर युवराज सिंह 30 नवंबर यानी आज शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं और अपनी शादी को लेकर युवराज सिंह काफी खुश हैं। संगीत और मेहंदी की रस्म के मौके और कल युवी ने हेजल के साथ एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘आज से नई पारी की शुरुआत हो रही है।’
एक ही ओवर में 6 छक्के मारने वाले युवराज सिंह ने ट्विटर पर हेजल कीच के साथ अपनी एक तस्वीर ट्वीट की। युवी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘आज से नई पारी की शुरुआत हो रही है, आप सभी के प्यार के लिए धन्यवाद। कृपया नए कपल को आशीर्वाद दें।’
आपको बता दें कि युवराज सिंह बॉलीवुड एक्ट्रेस हेजल कीच के साथ शादी कर रहे हैं। युवी और हेजल ने पिछले साल 11 नवंबर को बाली में सगाई की। युवराज सिंह 30 नवंबर को चंडीगढ़ में सिख परंपरानुसार गुरुद्वारे में शादी करेंगे। इसके बाद 2 दिसंबर को गोवा में हिंदू परंपरानुसार इनकी शादी होगी। 7 दिसंबर को दिल्ली में रिसेप्शन होगा। सबसे खास बात यह है कि युवराज सिंह की शादी में तमाम क्रिकेट हस्तियां शामिल हो रही हैं और साथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल हो
आज हेज़ल संग परिणय सूत्र में बंध जाएंगे युवराज
नोटबंदी पर पटना में धरना देंगी ममता, लालू से मांगा साथ
इंद्रकुमार विश्वकर्मा,
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज पटना में नोटबंदी के खिलाफ धरना देने वाली हैं। ममता बनर्जी नोटबंदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की पूरी कोशिश में जुटी हैं। हालांकि पटना में उनके प्रदर्शन में कांग्रेस या आरजेडी के शामिल होने की उम्मीद कम ही है। इस बात का अंदाजा शायद ममता को भी था, इसलिए ममता बनर्जी पटना पहुंचते ही लालू के दर पर सहयोग मांगने पहुंच गई।
ममता की सियासी मोर्चेबंदी का यह नया अध्याय है। एक दिन पहले लखनऊ में दम दिखाने के बाद ममता आज पटना में धरना देंगी। नितीश अब जब नोटबंदी के समर्थन में उतर आए हैं, तो ममता की नजर लालू पर टिक गई है। नोटबंदी पर पब्लिक के दर्द को आवाज देने के लिए ममता पटना पहुंचते ही लालू का साथ मांगने सीधा लालू के घर पहुंच गई।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी नोटबंदी के खिलाफ शहर-शहर पहुंच कर विपक्ष को एकजुट करने में लगी हैं। ममता लखनऊ गईं, तो अखिलेश ने दगा दे दिया और लालू के दर पहुंची तो भी दीदी को आशानुकूल जवाब नहीं मिला। पर ममता ने कह दिया है कि मोदी सरकार के खिलाफ उनकी यह लड़ाई नहीं थमेगी।
बंगाल के अलावा ममता नोटबंदी के खिलाफ दिल्ली और लखनऊ में मोर्चेबंदी की कोशिश कर चुकी हैं। अब नजर बिहार पर है। ममता अब बंगाली छोड़कर हिंदी में बात कर रही हैं और उनके निशाने पर मोदी सरकार के अलावा कोई नहीं है। तमाम विपक्षी दलों से मिलकर सियासी मोर्चेबंदी का उनका अंदाज कहता है कि उनकी नजर नोटबंदी के बहाने शायद 2019 के चुनाव पर टिकी है, जहाँ वे खुद को तीसरे मोर्चे का चेहरा बनाना चाहती हैं।
बिगड़ी संतानों पर दिल्ली उच्च न्यायालय का कानूनी डंडा, कहा, “ज़बरदस्ती नहीं रह सकते माँ-बाप के घर में”
अनुज हनुमत,
समाज में फ़ैली कई अव्यवस्थायों पर समय-समय पर न्यायपालिका अपना कानूनी डंडा चलाता रहा है और ऐसा ही एक फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया है। दरअसल, माता-पिता के मकान पर अपना कानूनी हक समझने वालों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नई व्यवस्था दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी बेटे को अपने माता-पिता के खुद की अर्जित किये गये घर में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह केवल उनकी ‘दया’ पर ही वहां रह सकता है, फिर चाहे बेटा विवाहित हो या अविवाहित। अदालत ने कहा कि चूंकि माता-पिता ने संबंध अच्छे होने के वक्त बेटे को घर में रहने की अनुमति दी, इसका यह मतलब नहीं कि वे पूरी जिंदगी उसका ‘बोझ’ उठायें।
न्यायूमर्ति प्रतिभा रानी ने अपने आदेश में कहा कि जहां माता-पिता ने खुद से कमाकर घर लिया है तो बेटा, चाहे विवाहित हो या अविवाहित, उसे उस घर में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। वह केवल उसी समय तक वहां रह सकता है, जब तक के लिये वे उसे रहने की अनुमति दें। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि माता-पिता ने उसे संबंध मधुर होने पर घर में रहने की अनुमति दी थी, इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता जीवनभर उसका बोझ सहें।
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति और उसकी पत्नी की अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। अपील में एक निचली अदालत द्वारा माता-पिता के पक्ष में दिये गये आदेश को चुनौती दी गई थी। माता-पिता ने बेटे और बहू को घर खाली करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। इस निर्णय के बाद अब यह बहस भी तेज होगी, लेकिन इस निर्णय का आने वाले समय में काफी असर देखने को मिलेगा, क्योंकि अभी तक बच्चे अपने अभिभावकों की संपत्ति को अपना हक मानते थे, लेकिन अब इसके बाद उन्हें समझ आएगा कि ये आवश्यक नहीं।
“मोदी नितीश कुमार को अपने घर ले जाएं और अपनी बहन से शादी करा दें”-राबड़ी देवी
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने शिष्टता की सीमा लांघते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। अपनी ही पार्टी के सहयोगी दल जेडीयू के वरिष्ठ नेता व बिहार के मुख्यमंत्री के विषय में उन्होंने ऐसा कुछ कहा, जो किसी भी सभ्य व्यक्ति को शोभा नहीं देता। राबड़ी ने कहा कि भाजपा नेता सुशील मोदी नीतीश कुमार को अपने साथ अपने घर ले जाएं और बहन से उनकी शादी करा दें।
राबड़ी देवी पहले भी एेेसे ऊट पटांग बयान देती रही हैं, लेकिन आज उन्होंने पद, कद व उम्र में बड़े नितीश कुमार पर भी छींटाकशी की। राबड़ी ने जिस लहजे में यह कहा, उससे उनकी खीझ साफ दिख रही थी और इतना बड़ा बयान देने के बावजूद उन्होंने विश्वास भी जताया कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले महागठबंधन टूटेगा नहीं, पांच साल तक चलेगा।
मीडिया में अपने इतने असभ्य बयान के बाद राबड़ी खुद अपनी बात को मज़ाक बताकर बचती नज़र आईं। राबड़ी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “मुझसे मीडिया वालों ने कहा कि सुशील मोदी कहे हैं कि नीतीश कुमार आरजेडी को छोड़कर बीजेपी में आ जाएं, तो हम बोले कि मोदी जी नीतीश को गोदी में उठा लीजिए। इसमें कौन सी आपत्ति है? थोड़ा हंसी-मजाक कर लिया, बस। सभी करते हैं ना।”
आपको बता दें कि राबड़ी देवी आज विधानमंडल की कार्यवाही में भाग लेने पहुंची थीं और राजद नेता और कार्यकर्ताओं के साथ नोटबंदी का विरोध कर रही थीं। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि हम काला धन नहीं नोटबंदी के खिलाफ हैं। जब तक भाजपा माफी नहीं मांगती, तब तक सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। राबड़ी ने पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम कहते हैं कि लालू जी ने काला धन छुपा रखा है। लेकिन, लालू जी के पास तो नहीं है काला धन, पच्चीस साल से केस चल रहा है और एक चवन्नी भी नहीं निकाल पाए हैं लोग।
उन्होंने कहा कि पीएम ने चुनाव से पहले गरीब के खाते में 15 लाख लाने की घोषणा की थी, कहां गया वो पैसा? उन्होंने कहा कि कहावत है कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, तो यहां वहीं हो रहा है, चोर कोतवाल को डांट रहा है।
नोटबंदी से दो महीने पहले बिहार में बीजेपी द्वारा करीब चार करोड़ की जमीन खरीदी के मामले पर बोलते हुए राबड़ी देवी ने कहा कि बीजेपी के लोगों ने हर जिले में जमीन खरीदी है। अगर पैसा नहीं है तो वो किसान के पास नहीं है, अनाज भी बिक नहीं रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को भी जमीन खरीद का हिसाब देना चाहिए। राबड़ी ने कहा कि नोटबंदी से जनता परेशान है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि ऐसी स्थिति कब तक रहेगी और सरकार हालात पर कब तक काबू पा सकेगी।
विश्व हो गया है ‘मोदीमय’, ‘टाइम्स’ के लिए ‘पर्सन ऑफ़ द ईयर’ की दौड़ में मोदी सबसे आगे!
दरअसल प्रतिष्ठित अमेरिकी मैगजीन ‘टाइम्स’ ने साल 2016 के लिए अपने ‘पर्सन आफ द ईयर’ सर्वे की शुरुआत की है। गुरुवार तक ‘टाइम्स पर्सन आफ द इयर’ के लिए की गई। वोटिंग के आधार पर पीएम मोदी विश्व के सभी बाकी नेताओं में आगे चल रहे हैं। गौरतलब है कि लगातार चौथे साल नरेंद्र मोदी टाइम मैगजीन के ‘पर्सन आफ द ईयर’ की दौड़ में बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी 11 फीसदी मतों के साथ पहले पायदान पर बने हुए हैं, जबकि विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे 9 फीसदी मतों के दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। इस सर्वे में अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नाम भी शामिल हैं।
नोटबंदी का विरोध जारी रहेगा, दम है मुझे गिरफ्तार कर के दिखाओ- ममता बनर्जी
सौम्या केसरवानी ,
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी मंगलवार को लखनऊ के दौरे पर थी। यहाँ उन्होंने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले पर अपना विरोध प्रदर्शन किया।
ममता बनर्जी ने मोदी पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छुपे रुस्तम बनकर देश को लूट लिया है। बेटी की शादी हो तो मोदी के पैरों में पड़ो वो बचाएगा। सबका पैसा छीनकर कह रहे हैं कि बहुत पैसा आ गया है।”
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ज़बरदस्ती कर रहे हैं। बिग बाजार में छुट्टा मिलेगा, लेकिन कोऑपरेटिव बैंक में गरीबों और खेती के लिए नहीं है। नोटबंदी से मार्केट, दुकान और खेती बंद हो गयी है। मायावती की तरह ममता बनर्जी ने भी नोटबंदी को आर्थिक इमरजेंसी बताया।
उन्होंने आगे कहा कि, बैंकों में कैश भी नहीं है, जिससे बैंककर्मी भी परेशान हो रहे हैं। नोटबंदी के साथ वोटबंदी भी करनी है। भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि नोटबंदी के बाद भाजपा नेताओं ने बड़े स्तर पर जमीन खरीदी। साथ ही ममता ने ये भी कहा कि दम है तो मुझे गिरफ्तार कर के दिखाओ, मैं नोटबंदी का विरोध करती रहूंगी।
पीएम ने पार्टी विधायकों-सांसदों से कहा, 9 नवंबर के बाद के बैंक ट्रांजैक्शन का ब्यौरा दें
सौम्या केसरवानी,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों को निर्देश दिया है कि वे खुद आगे आकर यह दिखाएं कि उनके पास कोई कालाधन नहीं है और इस तरह से समाज में उदारहण पेश करें। सूत्रों के अनुसार पीएम ने सभी सांसदों और विधायकों को साफ तौर से यह निर्देश दिया है कि वे एक जनवरी को अपने बैंक स्टेटमेंट और खातों का विवरण पेश करें ताकि यह पता चल सके कि उनके खाते में कितना धन जमा है।
इस कदम के द्वारा प्रधानमंत्री यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि बीजेपी नेताओं के पास किसी तरह का कालाधन नहीं है। इसको लेकर बीजेपी कार्यालय से सभी सांसदों और विधायकों को एक निर्देश जारी किए जाएंगें।
इस आदेश के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा है और ट्वीट किया है कि ‘उन्होंने 8 नवंबर से पहले ही पैसे ठिकाने लगा दिए। 6 महीने पहले का हिसाब माँगना चाहिए और अपने अमीर दोस्तों के भी 6 महीने के अकाउंट्स का हिसाब मांगना चाहिए’।
काला धन सफ़ेद कराने का आखिरी मौक़ा!
सौम्या केसरवानी,
केंद्र सरकार ने काला धन रखने वालों को अपना पैसा सफेद करने का आखिरी मौका दिया है। जिसके लिए सरकार ने आयकर कानून में बदलाव के लिए एक बिल संसद में पेश कर दिया है।
केंद्र सरकार ने कालाधन रखने वालों को अपना धन सफ़ेद करने का आखरी मौक़ा दिया है, जिसके तहत अघोषित आमदनी पर 50 फीसदी टैक्स चुकाकर उसे सफेद करने का प्रावधान है। नोटबंदी के बाद काले धन से निपटने के लिए सरकार संसद में नया बिल लेकर आई है।
बिल में काले धन से निपटने के लिए तीन तरह के प्रावधान हैं, जिसमें अगर कोई शख्स अघोषित आय बैंक में जमा करने के बाद खुद उसकी जानकारी देता है, तो टैक्स और जुर्माना मिलाकर 50 फीसदी रकम देनी पड़ेगी। जिसमे से 25 फीसदी रकम उसे फौरन वापस मिल जाएगी।
इसके साथ ही बाकी 25 फीसदी रकम 4 साल बाद मिलेगी, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। यानी 1 करोड़ रुपये की अघोषित आय में 50 लाख रुपये सरकार के पास चले जाएंगे, परंतु अगर किसी ने बैंक में रकम जमा करने के बाद खुद उसकी जानकारी नहीं दी, तो पकड़े जाने पर 60 फीसदी टैक्स और 15 फीसदी सरचार्ज मिलाकर 75 फीसदी रकम सरकार को देनी होगी। इसके अलावा आयकर अधिकारी चाहे तो 10 फीसदी जुर्माना भी लगा सकता है, जिसे मिलाकर कुल टैक्स 85 फीसदी हो जाएगा। यानी 1 करोड़ रुपये की अघोषित रकम में सिर्फ 15 लाख रुपये ही वापस मिलेंगे।
इसके साथ ही सरकार ने गरीब कल्याण योजना के लिए धन जुटाने का इंतज़ाम भी किया है। नया विधेयक एक मनी बिल है। नियम कहता है कि लोकसभा में बिल पारित करके राज्यसभा भेजा जाता है। राज्यसभा इसकी समीक्षा कर सकता है, लेकिन खारिज नहीं कर सकता।
सलमान को अपनी फिल्म ‘दंगल’ दिखाने को बेताब आमिर, पर ‘बिग बॉस’ में नहीं करेंगे प्रमोट!
शिखा पाण्डेय
अक्सर बॉलीवुड के दो दिग्गज खान्स, सलमान और आमिर को एक दूसरे की फिल्मों की प्रशंसा करते हुए पाया गया है। आमिर खान सलमान को उनकी रेसलिंग पर आधारित फिल्म ‘सुल्तान’ के बाद उसी थीम पर बेस्ड अपनी बिलकुल अलग तरह की स्टोरी ‘दंगल ‘ दिखाने के लिए बेताब हैं। आमिर को उम्मीद है कि सलमान भी उनकी फिल्म को परोक्ष रूप से ज़रूर प्रमोट करेंगे, जैसा की आमिर अक्सर सलमान की फिल्मों को करते हैं।
आमिर ने कहा, “मैं अक्सर सलमान की फिल्में प्रमोट करता हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है कि सलमान भी ‘दंगल’ को प्रमोट करेंगे। मैं उन्हें अपनी यह फिल्म दिखाने के लिए बेताब हूँ।” वैसे जितने लोगों को यह उम्मीद थी कि आमिर अपनी फिल्म को प्रमोट करने सलमान के शो ‘बिग बॉस’ में जायेंगे, उनके लिए दुखद समाचार यह है कि आमिर ‘बिग बॉस’ में फिल्म को प्रमोट करने नहीं जायेंगे। आमिर ने कहा कि किसी भी टेलीविज़न शो पर अपनी आगामी फिल्म को प्रमोट करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं है। आमिर के मुताबिक़, “हमारे प्रचार और प्रोमोज़ टीवी पर दिखाए जायेंगे, पर मैं खुद किसी टीवी शो पर उसे प्रमोट करने नहीं जाऊंगा।”
फिल्म में सिक्स पैक्स न बनाने और शारीरिक वज़न के विषय में प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “आपने अक्सर देखा होगा कि जो अखाड़े के पहलवान होते हैं, जो धूल मिट्टी में कुश्ती लड़ते हैं, वे बड़े विशाल शरीर और तोंद वाले होते हैं, जबकि आप सुशील कुमार या उनके जैसे अन्य खिलाड़ियों को देखें तो वे सिक्स पैक्स और गठीले शरीर के होते हैं। आप मैट रेसलिंग में गीता, बबिता फोगट या अन्य किसी भी खिलाड़ी को देखिये, वे बिलकुल फिट दिखेंगे, क्योंकि इस खेल में रंच मात्र का भी अतिरिक्त फैट आपकी स्पीड को घटा देता है।”
भइ गति सांप छूछुन्दर के री, उगलत निगलत प्रीत घनेरी
जटाशंकर पाण्डेय,
भारतीय जनता पार्टी यानी सत्ता पक्ष के अलावा सारी पार्टियां आज भारत बंद में शामिल होने वाली थीं। एक नितीश कुमार के अलावा सब लोग संसद से लेकर सड़क तक हाहाकार मचा देने वाले थे। पूरा विपक्ष नोट बंदी के खिलाफ एकजुट दिख रहा था और दिनांक 28 नवम्बर को भारत बंद का ऐलान किया गया था। जैसे-जैसे समय नजदीक आया, धीरे-धीरे सब लोगों ने पल्ला झाड़ लिया। मात्र कांग्रेस और वाम दल कहीं कहीं सडकों पर दिखे। कहीं कहीं तृणमूल कांग्रेस भी दिख गई।
जिस जोश खरोश के साथ विपक्ष ने गुब्बारा फुलाया, पब्लिक ने उसमें पिन चुभो दी और सारी हवा निकल गई। कुछ कार्यकर्ताओं के साथ ममता बनर्जी गरजीं, कहीं वाम दल तो कहीं राहुल गांधी। इन गिनी-चुनी पार्टियों के लोग भी एकजुट नहीं दिखे। किसी प्रदेश की इकाई भारत बंद के पक्ष में थीं तो किसी पार्टी की प्रदेश इकाई बंद का समर्थन नहीं कर रही थी।
सब मिला जुला के हल यह निकला कि कहीं न कहीं सभी पार्टियों के मन में यह बात खटक रही है कि जनता सरकार के साथ है। जनता नोट बंदी से परेशान है, फिर भी सरकार का साथ दे रही है। ये जानते हैं कि अगर ये सड़क पर ज्यादा हंगामा मचाएंगे, तो जनता इनके कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगी।
जनता नोट बंदी से काफी परेशान है। इस बात को जनता भी जानती है और सरकार भी। फिर भी विपक्ष परेशानी का डंका बजा रहा है। कोई बात किसी से छुपी नहीं है। इन सभी बातों से विपक्ष काफी बौखलाया है, लेकिन जनता के आगे उसकी कुछ चल नहीं रही है। विपक्षी पार्टियों का लिया हुआ हर फैसला फेल होता जा रहा है। हाँ, एक बात है कि संसद में जनता नहीं है, जनता के प्रतिनिधि हैं। यहां पर ये विरोधी स्वतन्त्र हैं, न ही ये चर्चा कर रहे हैं, न ही करने दे रहे हैं। ये क्या चाह रहे हैं पता नहीं।
जनता के करोड़ों रुपये संसद के ऊपर खर्च हो रहे हैं और ये मुर्ग-मसल्लम, रबड़ी-बिरयानी खा कर हंगामा कर रहे हैं। अध्यक्ष की कोई गरिमा ही नहीं है। वह सबको चुप कराने में ही परेशान रहते हैं। उनकी कोई सुनता ही नहीं है। आज ‘विपक्ष’ का मतलब है सरकार चाहे जो भी करे ,सरकार अगर गलत करे तो गलत है ही, अगर अच्छा करे तो भी ये गलत बोलेगें, क्योंकि ये विपक्ष में हैं। मतलब विपरीत हैं। सरकार जो करे उसको गलत बोलना इनका जन्मसिद्ध अधिकार है।
आज विपक्ष ऐसा फंसा है कि जो फैसला लिया है, उस पर टिक भी नहीं सकता क्योंकि जनता सपोर्ट नहीं करेगी। उसको वापस ले? यह भी बड़े शर्मिन्दगी कि बात है। आगे चुनाव है, क्या करें कुछ समझ नहीं आता। इन सबके बीच पिस रही है जनता। जनता की तो वही हालात है कि, ‘दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय।’
















