फैन्स सेल्फी लेना चाहते थे , बीबर ने बदले में दी गंदी गाली
अगस्त से कोलंबो और वाराणसी के बीच शुरू होगी एयर इंडिया की सीधी उड़ान
BSP से निकाले गए नसीमुद्दीन ने कहा, “मायावती ने मुस्लिमों को कहा था गद्दार”
जस्टिन बीबर गाना नहीं गा रहे थे, सिर्फ लिप सिंक करके चले गए! फैंस नाराज
आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. बहुत सारे ऐसे सेलेब्स हैं जो लाइव कंसर्ट के दौरान लिप सिंक करते हैं और नाचते-गाते हैं. यहां ध्यान देने योग्य बात ये भी है कि अपने पर्पज टूर में जस्टिन हर जगह इसी ट्रेंड को फॉलो करते हैं. हालांकि पूरे शो के दौरान जस्टिन ने सिर्फ लिप सिंक नहीं किया है. जहां स्टेज पर जस्टिन ने अपने कुछ सुपरहिट गानों को गाया है. और अपनी टीम के साथ डांस भी किया है. कल मंच पर जस्टिन ने गिटार बजाकर भी गाया है. जिसे सुनकर फैंस क्रेजी हो गए थे.
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कि तीन तलाक अगर धर्म का हिस्सा है तो अदालत दखल नहीं देगी
कोमल झा | Navpravah.com
नई दिल्ली : देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में आज तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई चल रही है. प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ सात याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. दिलचस्प बात ये है कि इस बेंच में अलग-अलग धर्मों से जुड़े जजों को रखा गया है मसलन सिख, ईसाई, पारसी, हिंदू और मुस्लिम जज इस संविधान पीठ का हिस्सा हैं इनमें पांच याचिकायें मुस्लिम महिलाओं ने दायर की हैं.
उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने मुसलमानों में ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुपत्नी प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर दी. यह सुनवाई लगातार 10 दिनों तक चलेगी. संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही है. पीठ यह देखेगी कि क्या यह धर्म का मामला है. अगर यह देखा गया कि यह धर्म का मामला है तो कोर्ट इसमें दखल नहीं देगी. लेकिन अगर यह धर्म का मामला नहीं निकला तो सुनवाई आगे चलती रहेगीतीन तलाक से मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं. इस पर कोर्ट देखेगी. बहुविवाह पर कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा. सीजेआई ने साफ कहा कि पहले तीन तलाक का मुद्दा ही देखा जाएगा. इस सुनवाई में पहले तीन दिन चुनौती देने वालों को मौका मिलेगा. फिर तीन दिन डिफेंस वालों को मौका मिलेगा.
सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में कहा : ट्रिपल तलाक कोई मुद्दा ही नहीं है. क्योंकि तलाक से पहले पति और पत्नी के बीच सुलह की कोशिश जरूरी है. अगर सुलह की कोशिश नहीं हुई तो तलाक क्या वैध नहीं माना जा सकता. एक बार में तीन तलाक नहीं बल्कि ये प्रक्रिया तीन महीने की होती है. जस्टिस रोहिंग्टन ने खुर्शीद से पूछा, क्या तलाक से पहले सुलह की कोशिश की बात कहीं कोडिफाइड है. खुर्शीद ने कहा – नहीं.
पर्सनल ला बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने भी खुर्शीद का समर्थन किया कि ट्रिपल तलाक कोई मुद्दा नहीं है. खुर्शीद निजी तौर पर कोर्ट की मदद कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – ये पर्सनल ला क्या है? ये क्या इसका मतलब शरियत है या कुछ और?
पर्सनल ला बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा, ये पर्सनल ला का मामला है. सरकार तो कानून बना सकती है. लेकिन कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए. जस्टिस कूरियन ने कहा, ये मामला मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा है.
जस्टिस रोहिंग्टन ने केंद्र से पूछा, इस मुद्दे पर आपका क्या स्टैंड है? केंद्र की ओर से एएसजी पिंकी आनंद ने कहा, सरकार याचिकाकर्ता के समर्थन में है कि ट्रिपल तलाक असंवैधानिक है. बहुत सारे देश इसे खत्म कर चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट फिलहाल मुसलमानों में तीन तलाक और निकाह हलाला पर ही सुनवाई करेगा. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि बहुपत्नी प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर पीठ सुनवाई नहीं करेगा. इनमें पांच याचिकायें मुस्लिम महिलाओं ने दायर की हैं जिनमें मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक की प्रथा को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक बताया गया है. सुनवाई कर रही पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर शामिल हैं.
संविधान पीठ के सदस्यों में सिख, ईसाई, पारसी, हिन्दू और मुस्लिम सहित विभिन्न धार्मिक समुदाय से हैं. इस मामले की सुनवाई इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है. क्योंकि शीर्ष अदालत ने ग्रीष्मावकाश के दौरान इस पर विचार करने का निश्चय किया और उसने यहां तक सुझाव दिया कि वह शनिवार और रविवार को भी बैठ सकती हैं. ताकि इस मामले में उठे संवेदनशील मुद्दों पर शीघ्रता से निर्णय किया जा सके.
अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी इस मामले में संविधान पीठ की मदद करेंगे और यह भी देखेंगे कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में अदालत किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकता हैं. शीर्ष अदालत ने स्वत: ही इस सवाल का संज्ञान लिया था कि क्या महिलाएं तलाक अथवा उनके पतियों द्वारा दूसरी शादी के कारण लैंगिक पक्षपात का शिकार होती हैं. शीर्ष अदालत इस मसले पर विचार करके मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुपत्नी प्रथा की संवैधानिकता और वैधता पर अपना सुविचारित निर्णय देगी.
इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दायर किया गया जिसमें कहा गया है. कि ट्रिपल तलाक के प्रावधान को संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार और भेदभाव के खिलाफ अधिकार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. केंद्र ने कहा. कि लैंगिक समानता और महिलाओं के मान सम्मान के साथ समझौता नहीं हो सकता. केंद्र सरकार ने कहा है. कि भारत जैसे सेक्युलर देश में महिला को जो संविधान में अधिकार दिया गया है. उससे वंचित नहीं किया जा सकता. तमाम मुस्लिम देशों सहित पाकिस्तान के कानून का भी केंद्र ने हवाला दिया जिसमें तलाक के कानून को लेकर रिफॉर्म हुआ है. और तलाक से लेकर बहुविवाह को रेग्युलेट करने के लिए कानून बनाया गया है.
लालबत्ती मामले पर मौलाना के बिगड़े बोल,कहा, “भाजपा वालो को मार-मार कर भगा देंगे
कोमल झा | Navpravah.com
कोलकाता के टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम मौलाना सैयद नूर उल रहमान बरकती एक बार फिर विवादों में हैं। बुधवार को उन्होंने मीडिया से चर्चा में संघ व भाजपा के खिलाफ अनेक अपशब्द कहे। यहाँ तक कि उन्होंने कहा बंगाल में भाजपा वालों को मार कर भगा देना चाहिए।
इमाम बरकती ने तीन तलाक से लेकर लाल बत्ती तक गाड़ी तक सब मुद्दे पर खुलकर बात कही। इमाम ने कहा, मुझे भाजपा से कोई दिक्कत नहीं है,लेकिन अगर भाजपा से कोई यहां आया तो साफ कह रहे हैं उसे मार-मार कर भगा देंगे। मौलाना ने ये धमकी बार-बार दोहराते रहे । बरकती ने मस्जिद के बाहर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने वालों को किन्नर बताया। मौलाना नूर रहमान इमाम बरकाती ने कहा था कि उन्हें ” ब्रिटिश सरकार ” द्वारा इजाजत दिया गया था। कि वह लाल-बीकन लगाकर घूमेंगे। वे यह किसी कीमत पर नहीं हटाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें इसे इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
याद रहे, केंद्र की मोदी सरकार ने देश से वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए 1 मई से सरकारी वाहनों से लालबत्ती हटा दी है। सिर्फ एंबुलेंस व अन्य आपात सेवा वाहनों को नीली बत्ती की इजाजत दी गई है।
देखा जब स्वप्न सवेरे – यात्रावृत्
अमित द्विवेदी । Navpravah.com
“देखा जब स्वप्न सवेरे” डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय का सद्यः प्रकाशित यात्रावृत्तांत है । इस पुस्तक में कुल पंद्रह स्थानों की यात्रा का रोमांचक वर्णन है । लेखक रामेश्वरम से कश्मीर तक की केवल भौगोलिक यात्रा ही नहीं करता है बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक यात्राएं भी समानांतर चलती हैं । एक जोड़ी तटस्थ आँखें हर वक़्त सतर्क और सावधान हैं । बिना किसी चश्मे के ‘आँखों देखी’ से लेकर ‘कागज की लेखी’ के मध्य संतुलन साधा गया है ।
इस पुस्तक में संस्मरणकार ने अपने गहन अध्ययन का आसव निचोड़ कर रख दिया है किंतु ज्ञान की नीरसता रंचमात्र भी नहीं । सर्वत्र काव्य-रस अबाध प्रवाहित है । प्रकृति-चित्रण में जयशंकर प्रसाद से लेकर महाकवि कालिदास तक का काव्य-सौंदर्य देखने को मिलता है । “स्पंदन” शीर्षक का यह प्रसंग देखें, “वन प्रदेश की श्यामल हरीतिमा अपने-आप में रमणीय है । यहां आकर प्रकृति-प्रेमी बच्चों की तरह चहकने लगते हैं । पसरी हुई नीली घाटियां मन को बरबस अपनी ओर खींचती हैं । सुदूर रजत-रेख-सा गिरता झरना अपनी मस्ती में गुनगुनाता रहता है । यहां की अमराइयों में गुठलियां बाँझ नहीं बल्कि धरती का ‘हिरण्यगर्भा रूप’ अपने सर्वोत्तम रूप में मौजूद है ।” डॉ. पाण्डेय के शैली की यह विशेषता है कि यदि पाठक ने एक बार इस पुस्तक का रस चख लिया तो अतृप्त मन की प्यास उसे बेचैन कर देगी । दिलो-दिमाग़ में नशा-सा उतरने लगेगा । संजीव निगम ने अपने मनोगत में लिखा है, “इस यात्रावृत्त पुस्तक की भाषा अपने विषय के अनुरूप कभी अल्हड़ बरसाती नदी की तरह तो कभी धीर गंभीर अथाह पानी वाली नदी की तरह बहती चली जाती है ।” पुस्तक के प्रारंभ में निगम जी के ‘मनोगत’ को पढ़कर मन चंचल हो उठता है । चैन, एक सिटिंग में पढ़कर ही मिलता है ।
देखा जाय तो इस पुस्तक में संतुलन स्थापित करने की कोशिश की गई है । यदि इसमें भारतीय साहित्य, संगीत, संस्कृति और शिल्प के वैभव का गुणगान है तो “छप्पन भोग” के मज़दूरों की पीड़ा, “स्पंदन” के मोनू का दर्द और “भय बिनु होय न प्रीति” के आठ वर्षीय बालक की छटपटाहट भी है । पर्यावरण को बचाने की चिंता लेखक के लगभग सभी यात्रावृत्तों में मौजूद है । वृत्तकार इतना व्यथित है कि आधुनिक विकास को कटघरे में खड़ा करते हुए लिखता है – “प्रकृति से दूर भागता मनुष्य विकास की कौन-सी परिभाषा गढ़ने में व्यस्त है ? समझ से परे है । इतिहास साक्षी है कि मानवीय उत्थान के लिए राम, कृष्ण, ईसा, बुद्ध, महावीर आदि महापुरुषों ने भी महलों को छोड़ अपना अधिकांश जीवन प्रकृति के बीच गुज़ारा ।” लेखक की यह वेदना “गंगा का मौन हाहाकार” शीर्षक में अधिक मुखरित हुई है ।
“देखा जब स्वप्न सवेरे” पुस्तक में यथार्थ की खुरदरी जमीन के साथ कल्पना की स्वप्निल उड़ान भी है । अंध श्रद्धा का विरोध और वैज्ञानिक दृष्टि का समर्थन “झरती आस्थाएं” शीर्षक यात्रावृत्त में किया गया है – “आंतरिक शांति को ढूंढ़ने के लिए हम बाहर दौड़ते हैं और यह ठहरी मृगमरीचिका । तुलसी, कबीर, मीराबाई, सूरदास आदि भक्त कवियों का सार एक तरफ, हमारा तर्क एक तरफ । अतार्किक विचारों की परिधि में हम कैद हैं । विवेक पर अंधश्रद्धा की काली पट्टी पड़ी है ।” इस प्रकार इस पुस्तक में तथ्य परक आंकड़े, अकाट्य साक्ष्य तथा लेखक की दूरदृष्टि का परिचय मिलता है ।
कुल मिलाकर यह पुस्तक एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसमें स्थान विशेष की परत-दर-परत को बड़े सलीके से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है । पाठक को कहानी, कविता, उपन्यास, आत्मकथा आदि का ज़ायका एक ही जगह मिल जाएगा । पढ़ने के बाद मन तृप्त हो जाएगा किंतु प्यास नहीं बुझेगी । यह संस्मरण क्षणिक उत्तेजना का अल्प विस्तार नहीं बल्कि विराट का सूक्ष्म अणु है । स्फुरण और प्रसरण होता जाएगा….
लेखक : डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय
पुस्तक : देखा जब स्वप्न सवेरे (यात्रावृत्त)
प्रकाशक : परिदृश्य प्रकाशन, मुंबई
मूल्य : 175/-
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: 1000 करोड़ रुपये कमाने वाली ‘बाहुबली-2’ पहली भारतीय फिल्म बनी
कोमल झा | Navpravah.com
‘बाहुबली-2’ ने बॉक्स ऑफिस पर वो रिकॉर्ड बनाया है, जो शायद कई सालों तक कोई फिल्म नहीं तोड़ पायेगी|
‘बाहुबली-2’ ने अपनी रिलीज के साथ ही रिकॉर्ड्स की झड़ी लगाना शुरु कर दिया था। एक के बाद एक इस फिल्म ने न जानें कितने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड बना डाले हैं लेकिन अब जो रिकॉर्ड इस फिल्म ने बनाया है वो शायद कई सालों तक कोई फिल्म न तोड़ पाये। हम आपको बताना चाहेंगे कि प्रभास की ‘बाहुबली-2’ भारतीय सिनेमा की वो पहली फिल्म बन गई है जिसने देश और दुनिया को मिलाकर 1000 करोड़ का कारोबार पूरा कर लिया है।
हमें पता है कि इस खबर को पढ़कर आपके दिल में खुशी और आश्चर्य दोनों तरह की भावनायें आ रही होंगी। जब हमने यह खबर पढ़ी थी तो हम भी आपकी ही तरह हो गए थे। ट्रेड एक्सपर्ट रमेश बाला ने अपने ट्वीट के माध्यम से लोगों को इस बात की जानकारी दी है कि फिल्म ने 1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। रमेश बाला ने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘भारत में 800 करोड़ और विदेशों में 200 करोड़ रुपये की कमाई के साथ बाहुबली-2 भारतीय सिनेमा की वो पहली फिल्म बन गई है जिसने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया है।’
नेताजी का छलका दर्द, कहा, ‘हमें बर्बाद करने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी’
कोमल झा। Navpravah.com
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह से हुई हार को लेकर सपा संरक्षक मुलायम सिंह काफ़ी नाराज़ नज़र आ रहे हैं। पार्टी की हार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा कि उनके मना करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस से गठबंधन किया।?

























