New Delhi : Chief Minister of Uttar Pradesh, Yogi Adityanath arrives at Parliament in New Delhi on Tuesday.PTI Photo by Subhav Shukla(PTI3_21_2017_000063B)
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद एनआईए विस्फोटक कांड की जांच में जुट गई है। साथ ही एनआईए विस्फोटक और जैश-ए-मोहम्मद के कनेक्शन की भी जांच करेगी, क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद ने पिछले दिनों ऑडियो टेप जारी कर दो बार योगी आदित्यनाथ को धमकी दी थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद शुक्रवार देर रात दोनों टीमों ने विधानसभा की हर जगह से तलाशी ली, विधानसभा में मिले विस्फोटक की दोबारा जांच होगी, एनआईए और सुरक्षा एजेंसियां पाउडर की दोबारा जांच हैदराबाद के CFL से कराना चाहती हैं, लेकिन स्टेट फॉरेंसिक लैब ने इसे PETN करार दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल देर शाम सुरक्षा को लेकर हाईलेवल मीटिंग भी की। इसमें गृह सचिव, डीजीपी, एनआईए , एटीएस और इंटेलिजेंस पुलिस के बड़े अफसर शामिल हुए। इस मीटिंग में विधानसभा की सुरक्षा को और पुख्ता करने पर चर्चा हुई।
हाल ही में आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धमकी दी, ये संदेश आतंकवादी मसूद अजहर खुद द्वारा लिखे गए हैं और उनके एक सहयोगी द्वारा ऑडियो रिकॉर्ड किया गया है। ये संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नफरत से भरे थे।
12 जुलाई की सुबह यूपी विधानसभा के अंदर विस्फोटक मिलने का खुलासा हुआ था, यह विस्फोटक 150 ग्राम की मात्रा में मिला है, विस्फोटक उस जगह पर रखा था जहां तमाम पार्टियों के विधायक बैठते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों को भी ‘डिजिटल इंडिया’ का सक्रिय हिस्सा बनाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक बेहतरीन कदम उठाया है। सरकार गांवों में इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ाने के लिए 10-15 गुना सस्ता इंटरनेट देने का ऑफर लेकर आई है। यह सुविधा ‘भारत नेट प्रोजेक्ट’ के तहत दी जा रही है, जिसमें 700 रुपए सालाना में एक एमबीपीएस की स्पीड दी जाएंगी, जो कि दूसरी कंपनियों की तुलना में 10-15 गुना तक सस्ती है।
इस प्रोजेक्ट के तहत सरकार का उद्देश्य देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ना है। इसके तहत सरकार हर ग्राम पंचायत में मिनिमम 100 एमबीपीएस की स्पीड पहुंचाएगी। सरकार इसके जरिए पंचायतों के माध्यम से ई-गवर्नेंस, ई-हेल्थ, ई-एजुकेशन, ई-बैंकिंग, पब्लिक इंटरनेट सर्विस जैसी सुविधाएं देना चहती है।
भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड के एक अधिकारी द्वारा एक अख़बार को दी गई जानकारी में बताया गया कि कंपनी ‘भारत नेट प्रोजेक्ट’ के तहत एक ऑफर लेकर आई है। जिसमें 29 अगस्त 2017 तक प्रमोशनल स्कीम से जुड़ने पर, 700 रुपए में एक साल के लिए प्रति एमबीपीएस स्पीड दी जाएगी। ऑफर की अवधि स्कीम से जुड़ने के बाद एक साल के लिए मान्य होगी। इसके साथ ही पोर्ट चार्ज और ओएनटी पोर्ट चार्ज फ्री कर दिया गया है।
अधिकारी के अनुसार इसके जरिए हम ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सर्विसेज को तेजी से पहुंचाना चाहते हैं। जिससे कि ई-हेल्थकेयर, ई-एजुकेशन, ई-गवर्नेंस को तेजी से बढ़ाया जा सके। अधिकारी के अनुसार :भारतनेट बैंडविथ प्रोजेक्ट’ के तहत यह ऑफर बिजनेस टू बिजनेस, बिजनेस टू कस्टमर, गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट, गवर्नमेंट टू कस्टमर सर्विसेज के लिए होगा।
गौरतलब है कि बीबीएनएल ने भले ही यह स्कीम लांच कर दी है, लेकिन अभी इसका फायदा करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों को ही मिलेगा। ताजा स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 23147 ग्राम पंचायतें ही पूर्ण रूप से ऑपरेट करने की स्थिति में है, जिसकी वजह से ऑफर का फायदा यही ग्राम पंचायतें ले पाएंगी।
वहां दूसरी बार जा रहा था पिछली बार तब गया था जब वहां मेला लगा हुआ था और तब लिखने, सोचने और पढ़ने की ज्यादा लालसा भी नहीं थी मुझमें। तब घूमने का मतलब सिर्फ घूमना होता था लेकिन इस बार जब जाने का फैसला किया तो यह सोच कर किया की उस जगह को करीब से जानना है। क्यूं जानना है इस बारे में कभी सोचा नहीं, बस जानना था ठीक वैसे ही जैसे हम उन सारी चीजों के बारे में जानना चाहते हैं जिनसे हमारा ज्यादा लेना-देना नहीं होता।
जब रामनगर (जहां आजकल अपना घर है) से निकले तो मां से पहले ही कह चुका था कि मां मुझे इस बार वहां जाना है। पहले तो मां मना करती रही लेकिन बार-बार ज़िद के कारण मां मान गयी और मेरा वहां जाने का आदेश जारी कर दिया। मां के मना करने का कारण सिर्फ उस जगह की ऊंचाई थी और मां का मानना था कि मैं इतना पैदल नहीं चल सकता। लेकिन कहते हैं ना जब कुछ ठान लिया हो तो मुसीबतों को भी आपके सामने सज़दा करके जाना पड़ता है। रामनगर से तकरीबन 120 किलोमीटर की दूरी पर, चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ मेरे घर या यूं कह दिया जाए मेरा जन्मघर, चिललगांव के सबसे ऊंचे टीले पर जहां से रात को बांई तरफ देखने पर जगमगाता हुआ रानीखेत नज़र आता है और दांई ओर देखने पर मल्लीमिरेई के रोशनमय मकान; पहुंचने पर अंदाज़ा हो गया था कि सफर कुछ आंसां नहीं होने वाला है। दो दिन से लगातार बारिश हो रही थी, बिजली के पोल गिरने के कारण उसका कोई अता पता नहीं था कि कब आएगी; मेरा फोन एकदम डेड हो चुका था लेकिन डीएसएलआर में अभी दम बाक़ी था। गौरव से पहले पूछा तो उसने कहा था कि वो आएगा लेकिन बाद में पता चला की उसका इंजीनियरिंग का एक्ज़ाम है तो मैंने उसे आने के लिए खुद मना कर दिया।
अगले दिन सुबह से शुरू होने वाली इस यात्रा में मेरा साथी था मेरी मौसी का छोटा बेटा पंकज जो बेहद शैतन है और ड्रामेबाज भी। मालूम तो उसे भी था कि मैं उसे सिर्फ इसलिए ले जा रहा हूं ताकि वो मेरी तस्वीरें खींच सके। समुद्र तल से 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पांडव खोली जो ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ हिंदू धर्म की श्रद्धा से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञात वास के दौरान यहां रूके थे। घर से द्वाराहाट जाने के लिए गाड़ी कफड़ा से ली और फिर द्वाराहाट से कुकुछीना तक के लिए दूसरी गाड़ी, पहले तो ड्राइवर हमें दुनागिरी से आगे छोड़ने को राजी नहीं था लेकिन नोट सारे काम करवा ही देते हैं।
कुकुछीना से हमारा असली सफर शुरू हुआ था। लगभग तीन से चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई अपने इन्हीं पैरों से चढ़नी थी जिन पर मां को कतई विश्वास नहीं था। जिसमें लगभग डेढ़ घंटे का वक्त लगना तय था चूंकि मौसम आज भी खराब था तो हमें बारिश शुरू होने से पहले मंदिर पहुंचना था इसलिए मैंने पंकज से तेज चलने के लिए कहा और हम लगभग पचास मिनट में पाण्डव खोली पहुंच गए। कुकुछीना से पाण्डव खोली तक जाने के लिए काफी पापड़ बेलने पडे़ थे, एक तो भूख से बुरा हाल, और साथ में पंकज के ड्रामे झेलना बहुत मुश्किल था।
असल में कुकुछीना नाम के पीछे भी एक कहानी है जो मेरे मित्र गौरव ने मुझे बताई थी। क्यूंकि गौरव पहले ही इस जगह को काफी अच्छे से पढ़ चुके हैं तो उनका दिया हुआ ज्ञान इस यात्रा में काफी मददगार रहा। मान्यता है कि जब अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां पहुंच थे तो कौरव भी उन्हें ढूंढ़ते हुए यहां तक पहुंच गए थे। कौरव उन्हें क्षति पहुंचाना चाहते थे और इस बात की भनक उस क्षेत्र के राजा चित्रकूट कोे लग गई, राजा बेहद मायावी होने के साथ-साथ शक्तिशाली थे उन्होंने कौरव सेना को हराकर दुर्योधन को बंदी बनाकर एक पेड से बांध दिया इसलिए जगह का नाम कौरवछीना रख दिया गया जो बाद में कुकुछीना हो गया। हालांकि बाद में पांडवों के अनुरोध पर दुर्योधन को छोड़ दिया गया था।
मंदिर की देख रेख का कार्य रानीखेत की पथभ्रमण संस्था करती है। पाण्डव खोली को स्वर्गपुरी के नाम से भी जाना जाता है। पाण्डव खोली की नींव रखने का श्रेय ब्रह्मलीन बलवंत गिरी महाराज को जाता है जिनकी पुण्यतिथि पर हर साल दिसम्बर माह में भंडारा कराया जाता है जिसमें दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु आते हैं। घंटा भर मंदिर में घूमने के बाद कुछ देर ध्यान किया और फिर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित चाय पीने के उपरांत मन को मारते हुए लौट कर आना पड़ा। लौटते वक्त दुनागिरी मंदिर भी गए, क्यूंकि भूख काफी तेज लगी थी तो मंदिर के भण्डारे में आलू चने की सब्जी, पूड़ी और खीर खाकर अपने उदर को शांत किया जो बहुत देर से चूहों के ज़ोर-ज़ोर से कूदने के कारण बेहद अशांत स्थिति में पहुंच चुका था।
अगले दिन रामनगर को वापस लौटना था और मन अनुमती नहीं दे रहा था, मां से विनती कर जैसे तैसे दो दिन और रूके। उस पत्थर की 22 इंच की मजबूत दीवार वाले मकान से निकलते ही मेरे मन की मजबूती टूट जाती है और आंखों से बहता नीर रोकने की पूरी जद्दोजहद में लग जाता है। जन्मभूमि होने के कारण इस भूमि से बेहद लगाव है और इसे छोड़ कर जाने का मन नहीं करता लेकिन मजबूरन कर्मभूमि की ओर लौटना ही पड़ता है। इस लेख को यहीं छोड़ने के लिए चार पंक्तियों का प्रयोग कर रहा हूं- छोड़ कर जाने को दिल नहीं करता सोचे बिन तुझे दिन पूरा नहीं कटता तिल-तिल तरसा हूं तुझसे मिलने को मेरे गांव तू मुझसे कभी रूठा नहीं करता
(लेखक पीयूष चिलवाल, उत्तराखंड के बेहद संज़ीदा युवा साहित्यकार हैं, जिनकी फेसबुक पोस्ट से यह वृत्तान्त साभार उद्धृत है।)
रेलयात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने इंटीग्रेटेड मोबाइल ऐप ‘रेल सारथी’ लांच कर दिया है। इस ऐप को लांच करते हुए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि यात्रियों को सभी सुविधाओं और शिकायतों के लिए ये ऐप काफी सहायक साबित होगा। अब आप अपने मोबाइल पर रेल सारथी ऐप के जरिए टिकट बुकिंग से लेकर कैटरिंग और शिकायत सबकुछ एक ही जगह पर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार रेल यात्रा को और आरामदायक बनाने के लिए काम कर रही है।
दरअसल रेलवे की अलग-अलग सुविधाओं को लेकर अलग-अलग ऐप और वेबसाइट हैं, रेलवे ने इन सभी सुविधाओं और शिकायतों के लिए एक इंटीग्रेटेड ऐप बना दिया है। रेल सारथी नाम के इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद अब आप अपने मोबाइल फोन पर ही इसके जरिए टिकट बुक करा सकेंगे। साथ ही साथ प्लेटफार्म टिकट को भी इसी से बुक कराया जा सकेगा।
रेलयात्री अब अपनी तमाम जरूरतों को एक ही जगह पर पूरा कर सकता है, इमरजेंसी में आप अपने ऐप के जरिए आरपीएफ को बुला सकते हैं। इसके अलावा रेलवे ने विदेशी सैलानियों के लिए रेल टिकट 365 दिन पहले बुक कराने की सुविधा देने का ऐलान भी किया। रेलमंत्री प्रभु का कहना है कि इससे जहां विदेशी सैलानियों को भारत आने पर अपना प्लान बनाने में मदद मिलेगी तो वहीं दूसरी तरफ रेलवे को भी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रेलवे की पीएसयू CRIS ने यह ऐप तैयार किया है। रेलवे ने रेल सारथी ऐप की सेफ्टी और सिक्योरिटी का काफी ख्याल रखा है और इसकी पिछले 6 महीने से लगातार टेस्टिंग चल रही थी। टेस्टिंग में पास होने के बाद अब ये ऐप लोगों के लिए उपलब्ध है।
आयकर विभाग ने भोपाल में बीजेपी नेता सुशील वासवानी की बताई जा रही दो बेनामी संपत्तियां अटैच की हैं। इस बीजेपी नेता पर नोटबंदी के दौरान महानगर सहकारी बैंक के जरिये करीब 150 करोड़ रुपये के काले धन को सफेद करने का आरोप है।
इस जांच में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, इन दोनों बेनामी संपत्तियों की कीमत 10 करोड़ रुपये आंकी गई है, इनमें से एक निर्माणाधीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और दूसरी निर्माणाधीन मॉल है। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, ये दोनों संपत्तियां कागज़ों में तो सनविजन इंफ्राटेक प्रा. लि. और गुरुमुख दास कॉन्ट्रैक्टर प्रा. लि. के नाम पर दिखाई गई है, लेकिन बीजेपी नेता वासवानी के पास से जब्त दस्तावेज़ों से पता चलता है कि हकीकत में वासवानी ही इन दोनों संपत्तियों के मालिक हैं।
इस मामले के उजागर होने के बाद से ही विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वासवानी अपना ही नहीं, बल्कि बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष नेताओं के कालेधन को सफेद बनाने का काम किया। एक मामूली बस कंडक्टर से करोड़ों की संपत्ति के मालिक बने वासवानी को मौजूदा शिवराज सरकार ने एमपी हाउसिंग कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
अपने विवादित ट्वीट और बयान को लेकर चर्चाओं में रहनेवाले हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज कसा है। उन्होंने शुक्रवार को एक के बाद एक ट्वीट कर राहुल गांधी पर हमला किया। विज ने कहा है कि राहुल गांधी दिमाग से बिल्कुल खाली हो गए हैं। राहुल नानी के घर गए थे लेकिन वहां जाकर भी उन्होंने कुछ नहीं सीखा।
उन्होंने ट्वीट में लिखा है, ‘राहुल गांधी का तो नानी के घर जाकर भी दिमाग ठीक नहीं हुआ।’ फिर उन्होंने ट्वीट किया और इसमें लिखा कि ‘हिंदुस्तान उम्मीद कर रहा था कि नानी के घर जाकर वह बुद्धि लेकर आएंगे लेकिन लगता है कि वहां से खाली हाथ आ गए हैं।’
अनिल विज ने कहा कि अमरनाथ में हुए आतंकी हमले से पूरा देश गुस्से में है और देशभर में लोग इसकी निंदा कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता इस पर भी राजनीति कर रहे हैं। विज ने कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को सारे देश के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।
रिटेल महंगाई में नरमी के बाद अब थोक महंगाई पर भी नरमी दिख रही है। जून में साल दर साल के आधार पर थोक महंगाई दर घटकर 0.9 फीसद रह गई। जो कि मई महीने के दौरान 2.17 फीसद रही थी। शुक्रवार को जारी हुए आंकड़ों के जरिए यह जानकारी सामने आई है जो कि खुदरा मुद्रास्फीति के अनुरूप है।
अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें तो जून महीने में इससे जुड़ी महंगाई दर 2.27 फीसद रही है, जबकि बीते माह यह 2.55 फीसद रही थी। वहीं कोर सेक्टर की इन्फ्लेशन 2 फीसद रही जो कि मई महीने के दौरान 2.1 फीसद रही थी।
फ्यूल एंड पॉवर ग्रुप इन्फ्लेशन की बात करें तो इससे जुड़ी महंगाई दर 5.28 फीसद रही जो कि मई महीने के दौरान 11.7 फीसद रही थी। इसके अलावा फूड आर्टिकल्स से जुड़ी महंगाई दर जून में (-)3.47 फीसद रही है जो कि मई महीने के दौरान (-) 2.27 फीसद रही थी।
जून महीने के दौरान रिटेल महंगाई में नरमी देखने को मिली है। जून में रिटेल महंगाई दर मई के 2.18 फीसद के स्तर से घटकर 1.54 फीसद रही है। वहीं, यह अप्रैल महीने में 2.99 फीसद रही थी। महीने दर महीने आधार पर जून में कोर महंगाई दर 3.8 फीसद रही है। शहरी और ग्रामीण महंगाई में भी कमी दर्ज की गई है। शहरी महंगाई घटकर 1.41 फीसद पर आ गई है, जबकि मई महीने में यह 2.13 फीसद रही थी। ग्रामीण महंगाई की बात करें तो जून महीने में 1.59 फीसद के स्तर पर आ गई है।
विश्व की पहली सोलर एनर्जी डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट) ट्रेन चलाने का गौरव भारतीय रेलवे को मिला है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज विश्व की पहली सोलर एनर्जी की ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. ये ट्रेन दिल्ली के सराय रोहिल्ला से गुरुग्राम (पूर्व गुड़गांव) के फरुख नगर तक चलेगी. इसके साथ ही आज भारतीय रेलवे ने विश्व की पहली सोलर एनर्जी की ट्रेन चलाने की शुरुआत कर बड़ा मुकाम हासिल किया है.
सफदरगंज रेलवे स्टेशन पर उद्घाटन के लिए लाई गई इस ट्रेन में इंजन के अलावा सबकुछ सोलर एनर्जी से चल रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की मंशा तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने की है जिससे क्लीन-ग्रीन एनर्जी से चलने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सके.
रेलवे बोर्ड के रोलिंग ट्रैफिक मेम्बर, रवींद्र गुप्ता ने कहा कि सफदरगंज रेलवे स्टेशन से चलने वाली इस ट्रेन के हर कोच में 16 सोलर पैनल लगे हैं. ये पैनल दिन भर में 20 सोलर यूनिट बिजली बनाएंगे जो ट्रेन की बैट्रियों में स्टोर होगी.
सोलर ट्रेन के प्रत्येक कोच में 300 वॉट के 16 सोलर पैनल लगाए गए हैं. इससे करीब 28 पंखे और 20 ट्यूबलाइट जल सकेंगी. स्टोर सोलर बिजली से ट्रेन का काम दो दिन तक चल सकता है लेकिन किसी भी आपात परिस्थिति में कोच का लोड अपने आप डीजल एनर्जी पे शिफ्ट हो जाएगा. इससे सलाना 9 टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा और 21 हज़ार लीटर डीजल की बचत होगी.
ये ट्रेन भारतीय रेलवे की पहली सौर ऊर्जा युक्त डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टि यूनिट) ट्रेन है. इस ट्रेन की छत पर सौर पैनल लगा है जो केबिन में रोशनी और पंखा चलाने के लिए लगे हैं. इसके हरेक कोच में 16 सौर पैनल लगे हैं जिनकी कुल क्षमता 4.5 किलोवाट है. हर कोच में 120 एंपीयर पर आवर कैपेसिटी की बैटरीज भी हैं.
इस ट्रेन में गद्देदार सीटों का इस्तेमाल किया गया है साथ ही हरेक कोच में एक डिस्प्ले बोर्ड लगा है. वहीं पैसेंजर्स के सामान रखने के लिए रैक भी बनाए गए है जिसका इस्तेमाल रात में हो सकेगा.यह ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनी है.
इस 6 कोच वाले रैक पर दिल्ली के शकूरबस्ती वर्कशॉप में सौर पैनलों लगाए गए है. अगले छह महीने में शकूर बस्ती वर्कशॉप में इस तरह के 24 और कोच तैयार किए जा रहे हैं.
इस ट्रेन की कुल लागत 13.54 करोड़ रुपये है. प्रत्येक पैसेंजर कोच बनाने में 1 करोड़ जबकि मोटर कोच बनाने में 2.5 करोड़ खर्च हुए हैं. इसके अलावा हर सोलर पैनल पर 9 लाख रुपये का खर्च आया है.सोलर ट्रेन से प्रति कोच सालाना दो लाख रुपये के डीजल की बचत होगी. साथ ही प्रति वर्ष 9 टन कार्बन डाइऑक्साइड कम पैदा होगा.
कुल मिलाकर सालाना 672 करोड़ रुपये के बचत होगी. अगले 25 सालों में रेलवे सोलर पैनलों की बदौलत हर ट्रेन में 5.25 लाख लीटर डीजल बचा सकता है. इस दौरान रेलवे को प्रति ट्रेन 3 करोड़ रुपये की बचत होगी. वहीं सोलर पावर के जरिए 25 सालों में प्रति ट्रेन 1350 टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सजर्न कम होगा.
इन सोलर प्रोजेक्ट ट्रेन से रेलवे को हर साल 700 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.इस ट्रेन में दस कोच हैं जिसमें 2 मोटर, 8 पैसेंजर कोच हैं. अगले कुछ दिनों में 50 अन्य कोचों में ऐसे ही सोलर पैनल्स लगाने की योजना है. सोलर पावर पहले शहरी ट्रेनों और फिर लंबी दूरी की ट्रेनों में लगाए जाएंगे.
विश्व में पहली बार ऐसा हुआ है कि सोलर पैनलों का इस्तेमाल रेलवे में ग्रिड के रूप में किया गया. शिमला कालका टॉय ट्रेन की छोटी लाइन पर पहले से सौर ऊर्जा ट्रेन चल रही हैं और इसकी बड़ी लाइन की कई ट्रेनों के 1-2 कोच में सोलर पैनल लगे हैं.
आपको बता दें कि राजस्थान में भी सोलर पैनल से वाली लोकल ट्रेन का ट्रायल हो गया है. हालांकि ये सोलर एनर्जी को सेव यानी करने की सुविधा नहीं रखती है.
दिवंगत अभिनेता ओम पुरी की हास्य व व्यंग्य से भरपूर फिल्म ‘मिस्टर कबाड़ी’ अगले महीने सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी. ओम पुरी की पहली पत्नी सीमा कपूर द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में अन्नू कपूर शीर्षक भूमिका में हैं.
सीमा ने अपने बयान में कहा, “मिस्टर कबाड़ी एक व्यंग्यात्मक कॉमेडी फिल्म है. मेरा मानना है कि हास्य तब उभरता है जब अचेतन मन में छिपे विचार व भावनाएं सचेत रूप में जाहिर की जाती हैं. इस फिल्म में हमने दिखाया है कि जब एक कबाड़ी वाला धनवान बन जाता है तो वह कैसे अपने धन-वैभव का शान दिखाता है.. अन्य करोड़पति की तरह बनने के लिए वह उनके जैसे ही कपड़े पहनता है, अलग उच्चारण शैली अपनाता है और अपना कारोबार बढ़ाता है.”
उन्होंने कहा कि फिल्म में सभी कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शकों फिल्म को पसंद करेंगे. फिल्म में सारिका, विनय पाठक, राजवीर सिंह, कशिश वोरा और बृजेंद्र काला भी हैं.
पद्मश्री पुरस्कार विजेता ओमपुरी का जनवरी में 66 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनके आवास पर निधन हो गया था.
बुधवार सुबह यूपी विधानसभा में विस्फोटक मिलने की खबर मिली थी जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले की जांच करनी होगी और ‘सुरक्षा के मामले में सभी को चौकन्ना रहने की जरूरत है।
विधानसभा में काम कर रहे कर्मचारियों की जांच पुलिस को करनी चाहिए। साथ ही एनआईए को मामले की जांच सौपेगी| बता दे कि दो दिन पहले बुधवार 12 जुलाई को यूपी विधानसभा के अंदर विस्फोटक मिलने की खबर सामने आई जिसके बाद फौरेंसिक जांच किया गया और विस्फोटक मिलने की पुष्टि हुई है, हालांकि डेटोनेटर नहीं मिला है| यह विस्फोटक 150 ग्राम की मात्रा में मिला है|
जानकारी के मुताबिक यह उस जगह पर रखा था जहां तमाम पार्टियों के विधायक बैठते हैं| ये विस्फोटक समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे की सीट के नीचे मिला है| मनोज ने सीएम योगी से विधानसभा की सुरक्षा और कड़ी करने की मांग की है|
इस विस्फोटक का नाम PETN बताया जा रहा है| एफएसएल की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है|
सूत्रों के मुताबिक, सीएम सिक्यॉरिटी से जुड़े लोगों को विधानसभा हॉल के भीतर सबसे पहले इस पाउडर के होने का पता चला था उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को इस बारे में जानकारी दी थी|
मामले की जांच की जा रही है, यह मसला इसलिए भी बडा है क्यों कि लागातार आतंकी घटनाए बढ़ रही है|