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Friday, August 14, 2026
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धर्म-प्रचारक विवादित जाकिर नाइक का पासपोर्ट रद्द

कोमल झा| Navpravah.com

काफी समय से देश से बाहर विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक का पासपोर्ट मुंबई के पासपोर्ट ऑफिस ने रद्द कर दिया गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस ने गृह मंत्रालय के निर्देश पर ये कार्रवाई की है। राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) के सामने पेश नहीं होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

 

जाकिर नाइक 1 जुलाई 2016 से देश से बाहर हैं. एनआइए को कई मामलों में जाकिर नाइक से पूछताछ करनी है लेकिन वो लगातार देश के बाहर है। जाकिर नाइक और उसका एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन जांच एजेंसियों के रडार पर है। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और धर्म परिवर्तन के आरोप लगे हैं। प्रवर्तन निदेशालय को भी कई मामलों में उसकी तलाश है।

इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के फाउंडिंग ट्रस्टी जाकिर नाइक इस समय सऊदी अरब में है, खबर है कि वो सउदी या मलेशिया की सदस्यता लेने की कोशिश में है।

तिलमिलाई माया, राज्यसभा से दिया इस्तीफ़ा

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
दलित वोटों को सदा से अपना ‘धर्मसिद्ध’ अधिकार समझने वाली बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने फिर एक नया ‘दलित कार्ड’ खेला है। आज राज्यसभा में अपनी बात पूरी न कर पाने से क्रोधित मायावती पहले राज्यसभा से इस्तीफा देने की बात कहते हुए सभा से तिलमिलाई हुई बहार निकल गईं। फिर प्रेस कांफ्रेंस कर अपने इस्तेफे का ऐलान किया और झट-पट इस्तीफा दे भी दिया।
मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मायावती ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हो रहे दंगों पर राज्यसभा में तीखी प्रतिक्रिया दी। सदन की कार्यवाही के दौरान जब उपसभापति ने कहा कि उन्‍हें केवल मुद्दा उठाने का समय मिला है,वे भाषण न दें, बाकी लोगों को भी बोलना है, इस पर मायावती भड़क गईं। इसके बाद क्रोधित होकर उन्होंने कहा कि अगर उन्हें उस समुदाय का मुद्दा सदन में उठाने का मौका नहीं मिलता, जिससे वे आती हैं, तो सदन में रहने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद उन्होंने दिन में संसद परिसर में प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि अगर उन्हें अपने समुदाय के लोगों का मुद्दा नहीं उठाने दिया जायेगा, तो वे इस्तीफा दे देंगी और शाम होते होते बसपा सुप्रीमो ने सभापति हामिद अंसारी को अपना इस्तीफा सौंप भी दिया है।
मायावती ने कहा कि विपक्ष के कई सांसदों ने उन्‍हें इस्‍तीफा नहीं देने को कहा लेकिन वह अपने फैसले से पीछे नहीं हट सकतीं। उन्‍होंने कहा, “जब सत्‍ता पक्ष मुझे अपनी बात रखने का भी समय नहीं दे रहा है,तो मेरा इस्‍तीफा देना ही ठीक है।” उधर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मायावती के इस कृत्य को, साल की शुरुआत में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में मिली हार की हताशा करार दिया। उन्होंने तो यहां तक कहा कि इस्तीफे की धमकी देकर उन्होंने चेयरमैन का अपमान किया और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
क्या है परदे के पीछे की सियासत-
दरअसल राज्यसभा में मायावती का कार्यकाल 2 अप्रैल 2018 को पूरा हो रहा है। यूपी में उनकी पार्टी के पास सिर्फ 19 सीटें हैं, इसलिए वह 2018 में भी दोबारा चुनकर राज्यसभा नहीं पहुंच सकतीं। वॉकआउट में मायावती का साथ देने वाली कांग्रेस ने अगर उन्हें समर्थन दिया, तभी वह अगले साल उच्च सदन में पहुंच पाएंगी। लोकसभा में पार्टी का सूपड़ा पहले ही साफ हो चुका है। ऐसे में इस्तीफे के बाद उनके पास उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुराने जनाधार को एक बार फिर से अपने पक्ष में लाने का ही काम रह जाएगा।
इस इस्तीफे के बाद वह 2019 लोकसभा और 2022 विधानसभा चुनाव के लिए अच्छे से तैयारी कर सकती हैं।इसीलिए नरेंद्र मोदी-अमित शाह के  नेतृत्व में भाजपा के उत्तरप्रदेश में मजबूत उभार के बाद मायावती के लिए यही अच्छा मौका था, जब वह सहारनपुर में दलितों पर हुए अत्याचार के मुद्दे पर इस्तीफा दे दें और अपने इस कोर वोट बैंक से फिर से जुड़ें और मोदी व अमित शाह द्वारा दलित वोट बैंक में लगाई गई सेंध का हिसाब किताब बराबर कर सकें।

मेडिकल वीजा के लिए PAK का लेटर नहीं चाहिए: सुषमा

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पीओके के निवासी को भारत का वीजा देने के लिए सरताज अजीज की चिट्ठी की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है, सुषना ने ट्वीट कर कहा कि संबंधित व्यक्ति को यहां आने की अनुमति होगी क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
पीओके में रावलकोट निवासी ओसामा अली 24 को यकृत कैंसर है और वह अपना इलाज दिल्ली में कराने की अनुमति मांग रहे हैं, स्वराज ने ट्वीट किया, पीओके भारत का अभिन्न अंग है, हमलोग उसे वीजा दे रहे हैं।
अली के परिवारवालों ने मंत्री से मेडिकल वीजा के लिए अजीज की सिफारिशी चिट्ठी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की थी, सुषमा ने 10 जुलाई को किसी अन्य मामले के संदर्भ में अजीज द्वारा चिट्ठी जारी करने की जरूरत को दोहराया था, उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष द्वारा शिष्टाचार नहीं दिखाने पर नाराजगी जताई थी।
सुषमा ने कहा था कि अजीज ने उनके निजी खत पर कोई संज्ञान नहीं लिया, जिसमें उन्होंने कुलभूषण जाधव की मां के लिए पाकिस्तानी वीजा देने की अपील की थी। हालांकि मंत्री ने अजीज को आश्वस्त किया था कि उनकी सिफारिश पर मेडिकल वीजा मांगने वाले पाकिस्तानी नागरिक को तुरंत भारत आने के लिए वीजा दिया जाएगा।
कई ट्वीट करते हुए सुषमा ने कहा, पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय वीजा देने के लिए हमें सिर्फ उनके अजीज की सिफारिश की जरूरत है।
अवंतिका अपने बेटे से मिलने के लिए पाकिस्तान जाना चाहती हैं, उन्होंने ट्वीट में कहा था कि मैंने सरताज अजीज को अवंतिका को वीजा देने के लिए निजी खत लिखा था, हालांकि अजीज ने खत मिलने की जानकारी देने का सामान्य शिष्टाचार भी नहीं दिखाया। भारतीय नागरिक जाधव को पिछले साल पाकिस्तान ने अशांत ब्लूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था।

जानिए ऐसा क्या कहा वरुण धवन ने जिससे कंगना से मांगनी पड़ी माफ़ी

कोमल झा| Navpravah.com

वरुण धवन, सैफ अली खाना और करण जौहर ने आईफा अवार्ड्स में नेपोटिज्म को लेकर कंगना रनौत का मजाक उड़ाया था. इसलिए वरुण ने अब इस बात के लिए माफी मांगी है. वरुण ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट कर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी.

वरुण ने लिखा कि, “मैं क्षमायाचना और अफसोस व्यक्त करता हूं..अगर मैंने अपने एक्ट द्वारा किसी को नाराज किया है या चोट पहुंचाई है तो मैं क्षमा मांगता हूं.”

दरअसल, ये सब की शुरुआत हुई जब वरुण धवन अपना बेस्ट कॉमिक एक्टर का अवार्ड लेने स्टेज पर पहुंचे. तब सैफ, करण और वरुण नेपोटिज्म को लेकर मजाक कर बैठे और कंगना की और इशारा करते हुए गाना गाने लगे ‘बोले चूड़ियां बोले कंगना’.

इस बात को लेकर जल्द ही एक नया विवाद खड़ा हो गया. दर्शकों ने करन जौहर को इसके लिए जमकर फटकार लगाई और इसकी निंदा भी की. वरुण के ट्वीट को पढ़ने के बाद फैंस ने ये तक कह दिया कि वरुण ने तो माफी मांग लिया है पर माफी तो करन को मांगनी चाहिए. वैसे तो इनके इस मजाक पर अब तक कंगना ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया है पर कही न कही लोगों को ये बात पसंद नहीं आई है.

मुंबई में अब इमारतों और कोठी का भी होगा आधार नंबर

कोमल झा| Navpravah.com

 

मुंबई में बीएमसी शहर के बंगलों और इमारतों को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर वाला स्टीकर दे रहा है. इमारतों को दिया जाने वाला 15 अंकों का यह नंबर बिल्कुल आधार नंबर की तरह है. इस तरह के स्टीकर को इमारतों के गेट और नोटिसबोर्ड पर लगाया जा रहा है.

इस नंबर के आधार पर अब सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेना आसान होगा. साथ ही इमारतों की सही लोकेशन का भी आसानी से पता चल सकेगा. कई बार इमारतों के नाम एक जैसे होने पर सही जगह पहुंचने में मुश्किल होती थी.

डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर बीजी पवार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ’15 अंकों वाला यह यूआईडी नंबर इमारत के प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद की सेक्शन अकाउंट कोड, वार्ड नंबर, बगल की इमारत के नंबर और इमारत ने फ्लैट्स की संख्या को मिलाकर जारी किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में प्रॉपर्टी टैक्स अदा करने वाली 27 लाख इमारतों को यह नंबर दिया जा चुका है.

सिर्फ एक क्लिक से हो जाएंगे सारे काम
पवार ने यह भी कहा कि इस नंबर के जरिए बीएमसी के सभी विभागों से इमारत के बारे में किसी भी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. जैसे अब सिर्फ एक क्लिक द्वारा कोई भी व्यक्ति किसी भी इमारत की वैधता की जांच कर सकता है.

पवार ने कहा कि यूआईडी के जारी होने के बाद लोगों को अपनी इमारतों और सोसाइटी के मरम्मत या रखरखाव संबंधी कामों को करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. इस यूआईडी द्वारा ही संबंधित विभाग इमारत पर किसी तरह के बकाए राशि जैसे प्रॉपर्टी टैक्स, पानी या बिजली का बिल आदि की जांच कर लेगा और बकाया नहीं होने पर मरम्मत आदि के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर देगा.

नागरिक सुविधा केंद्र में भी केवल इसी नंबर को बताकर लोग अपना प्रॉपर्टी टैक्स, पानी बिल जमा करा पाएंगे. पानी न आने, टैक्स का बकाया या लाइसेंस रिन्यू कराने समेत सभी कामों के लिए अब अलग-अलग नंबर नहीं बताने होंगे. केवल इसी नंबर के आधार पर सिस्टम में सारा रिकॉर्ड मिल जाएगा.

इस नंबर के जारी होने के बाद न सिर्फ सरकारी लालफीताशाही से लोगों को मुक्ति मिलेगी बल्कि प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत भी अब आसानी से पता हो जाएगी.

इंडिया की रियल वंडरवुमेन मिसेज वर्ल्ड केतकी जानी जिसने एलोपेशिया को दी मात

आनंद रूप द्विवेदी | Navpravah.com

“ दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया,

उठ उठ के देखती रही गर्द-ए-सफ़र मुझे.”

                                                                                                                     –अली सरदार जाफ़री

कहते हैं, जिनके इरादे और इच्छाशक्ति में दम हो उसे मज़िल तक पहुँचने से कोई क्या रोकेगा।  कुछ ऐसी ही दास्ताँ है गुजरात की केतकी जानी की।  केतकी को वंडरवुमन भी कहा जाए तो कम है। अहमदाबाद की केतकी जानी पुणे में गुजराती भाषा की अधिकारी के तौर पर कार्यरत हैं। वर्ष 2011 में केतकी के जीवन में एलोपेशिया (बालों के पूर्णतः झड़ जाना) नामक त्रासदी की शुरुआत हुई, जिसकी वजह से उनके सर के बाल झड़ गए। एलोपेशिया की शिकार केतकी जानी इस बात से बेहद दुखी रहने लगीं। उनके अनुसार, “लोग सूरज के उदय का इंतज़ार करते थे और मैं सूरज के अस्त का, लेकिन तभी मुझे ये पता चला कि एलोपेशिया की चपेट में आने वाली मैं अकेली महिला नहीं हूँ, बल्कि दुनिया भर में इस बीमारी के कारण कई महिलायें संघर्षरत हैं।”

बस फिर क्या था, अपनी इसी एलोपेशिया की अवस्था को एक चुनौती की तरह स्वीकार करते हुए केतकी जानी ने विग्स और दुपट्टे को अलविदा कह दिया। उन्होंने अपने सर पर माँ-बेटी, ओम के टैटू बनवाये और शान से जीने का रास्ता ढूंढ निकाला।  वो “वर्ल्ड वाइड एलोपेशियन ग्रुप” के संपर्क में आईं जहां उनके जैसी अन्य महिलाओं ने उनकी हौसलाफजाई की।

जीवन में कभी भी हार न मानने वाली केतकी जानी ने “मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड” जैसी शीर्ष प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। कैटवाक, प्रश्नोत्तर आदि तमाम बाधाओं को बेहद संजीदगी से पार करते हुए केतकी जानी ने “मिसेज इण्डिया वर्ल्डवाइड-इंस्पिरेशन कैटेगरी” का ख़िताब जीत लिया।

दुनिया भर में एलोपेशिया से ग्रस्त तमाम महिलाओं के लिए जीने की वजह ज़ाहिर करने वाली केतकी जानी जिंदादिली की एक अद्भुत मिसाल हैं। उन्होंने हमसे बताया कि कैसे एलोपेशियन लड़कियां अपना दुःख व्यक्त करते हुए जब ये बताती हैं कि बालों के न होने के कारण उन्हें कोई जीवनसाथी के रूप में नहीं अपनाना चाहता, तब उनके मन को कितनी पीड़ा पहुँचती है। दूसरों की इसी समस्या को उनके जीने की वजह बनाने के लिए और एलोपेशिया से जुड़े तमाम भ्रमों से दुनिया को अवगत कराने के उद्देश्य से केतकी ने “ Support & Accept Aelopecia with Ketki Jani ” नामक एक ग्रुप भी बनाया है।

केतकी जानी ने हमसे बताया कि लोगों के दिमाग में एलोपेशिया को लेकर कैसे कैसे मिथक पल रहे हैं।  मेडिकल प्रैक्टिशनर्स भी स्वार्थ के चलते कैसे इससे जुड़े सच को लोगों से छुपा रहे हैं।

केतकी जानी की ही एक पोस्ट के अनुसार, “सालों से वो हमारे बीच है लेकिन हमने उसे जानने की न उत्सुकता जताई और ना किसी ने ये सब बताने की हिम्मत की। मै उठाती हूँ आज परदा, आप व Alopecia ( एलोपेशिया / ऊंदरी / इन्द्रलुप्त / कीड़ा लगना / चाई पड़ना / गंजापन ) के बीच से। क्योंकि मैं इसकी वजह से 6 साल पहले रोज-रोज पलपल मरी हूँ। मुझे ये होने के बाद पता चला कि, कमउम्र में जिन लड़के – लड़कियों को जीवनसाथी नही मिल पाते साथ ही इसकी वजह से और कई शादीशुदा लोगों की जिन्दगी में भूकंप आये हैं। बहुतों की अरमान भरी ज़िन्दगी बरबाद हो रही है।  प्यार की जगह उन्हें एकलता मिलती है। आप ही तय करें कि इस डिसऑर्डर की वज़ह से क्यों लाखों अरमान सुलग जाएँ ?? क्यों जिसके हिस्से ये आया है वो ताउम्र विग / स्कार्फ़ / कैप या घर की चार दीवारी की क़ैद में रहे ? ये होना उनकी मर्ज़ी नहीं मज़बूरी है। आओ , आप के आसपास कोई ऐसा है तो उसे हिम्मत दो बिना कोई बंधन खुले आकाश मै उड़ने की।

क्या है एलोपेशिया ?

एलोपेशिया एक हेयर रिलेटेड समस्या है जिसमे शरीर हेयर ग्रो करने से मना करता है।  संक्षेप में ये शरीर की हेयर बनाने के काम से घोषित की हुई हड़ताल है।

इसे ऑटोइम्म्युन डीसीस (Auto-Immune Disorder ) कहते हैं, ठीक डायबिटीज , थाइरोइड की तरह. एलोपेशिया मुख्यतः दो प्रकार का होता है।

पहला, रेयर केसेज़ में लोगो की  फैमिली के सभी सदस्यों को ये अनुवांशिक वज़ह से होता है। बकौल केतकी, उन्होंने सात वर्षों में केवल दो ही ऐसे एलोपेशियन परिवार देखे हैं और ऐसा शायद करोड़ों में एक आध परिवारों में ही पाया जाता है।

दूसरा, जो कभी किसी को भी अपनी गिरफ़्त में जकड़ सकता है, जो कई प्रकार का होता है:

  1. ऐलोपेसिआ ईराटा Alopecia Areata (AA)- इसमें सर के बाल के बीच बाल्ड ( Bald Patches) पैचेज होते है।
  2. ऐलोपेसिआ टोटालिस Alopecia Totalis (AT)- इसमें पूरा सर बिना बाल का होता है।
  3. ऐलोपेसिआ युनिवर्सलिस Alopecia Universalis (AU)- इसमें पूरे शरीर में कहीं भी बाल नहीं होते है।

 

ये जन्म से लेकर जीवन के अंत तक उम्र के किसी भी पड़ाव में हो सकता है. शुरुआत सर के किसी भी हिस्से में राउंड पैच से होती है। इसके कारण को आजतक दुनिया में कोई भी नहीं जान सका है। इसकी कोई शर्तिया दवा भी उपलब्ध नहीं है। जरूरी नहीं जिस दवा के लगाने से किसी एक को बाल आयें उसी के उपयोग से किसी अन्य जो भी बाल आ जाएँ।

एलोपेशियन्स के बारे में क्या हैं भ्रांतियाँ ?

लोगों में ये भ्रम है कि एलोपेशिया कोई छुआछूत की बीमारी है जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है। किसी एक के बाल झड़ने की वजह से उसके आसपास के अन्य लोग बिलकुल प्रभावित नहीं होते हैं।

         दैनिक जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं होती, बल्कि इंसान बेहद सामान्य जीवन जीता है। एलोपेशिया से सिर्फ सर के बाल झड़ जाते हैं न कि ये किसी प्रकार के दूसरे रोगों को जन्म देता है।

     अमूमन देखा जाता है कि लड़की के बाल न होने पर उसकी शादी ही नहीं होती या फिर वैवाहिक जीवन प्रभावित हो जाता है। स्त्री की सुन्दरता उसके शरीर मात्र से नहीं होती। ऐसे लोग जिन्हें स्त्री केवल भोग की वस्तु या शोपीस समझ में आती हैं वो असामाजिकता के पर्याय हैं। ऐसे व्यक्ति का जीवनसाथी होने से बेहतर है आप अपने जीवन के साथी स्वयं बने रहें।

     किसी भी एलोपेशिया से पीड़ित व्यक्ति चाहे वो स्त्री हो या पुरुष, की प्रजनन क्षमता पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता।

     मेडिकल प्रैक्टिसनर्स द्वारा यदि ये दावा किया जा रहा है कि वो आपके बाल वापस लाने की कोई शत प्रतिशत गारंटी दे रहे हैं तो, ये एक मिथक मात्र है।

     कई मामलों में पाया गया है कि जीवन से हताश निराश व्यक्ति जिनके बाल एकदम झड चुके हैं, वो वापस आ गये। एलोपेशिया से ग्रस्त व्यक्ति बेहद तनाव में आ जाता है, जिस कारण जीवन से हार तक मान सकता है। आवश्यकता है, कि ऐसे व्यक्ति स्त्री हो या पुरुष , हमें अपने बात व्यवहार में कोई भेद नहीं लाना चाहिए, बल्कि जितना हो सके सामान्य व्यवहार करें, उनका प्रोत्साहन करें।  शरीर के बाल जीवन के लक्ष्य तय नहीं करते।  शरीर के वाह्य आवरण पर इंसान का मन नहीं दिख सकता।  दुनिया भर में लाखों लोग एलोपेशियन हैं, और मस्ती भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। लेकिन भारत में इसे एक अलग नजरिये से देखा जाता है। हमारे समाज में बालों वाले ही सुन्दर माने जाते हैं। तमाम हेयर ऑयल्स के एडवर्टीज्मेंट्स में सुन्दरता का परिचायक बालों को ही बताया जाता है।  हम समाज के निर्माता हैं।  इसके हर उतार चढ़ाव के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं।  आज हम घने बालों वाले बिना बाल वाले लोगों को हेय दृष्टि से देखें और कल हमारी ही औलाद एलोपेशियन हो जाए तो क्या हमारा दृष्टिकोण पहले जैसा ही रहेगा?

     अक्सर हम गंजा, गंजी, टकला, टकली जैसे कुछ शब्दों का इस्तेमाल एलोपेशिया से गुजर रहे व्यक्तियों को संबोधित करने या उनका उपहास करने में इस्तेमाल करते हैं जिन्हें हम अपने लिए बर्दाश्त भी नहीं कर सकते। ऐसे वाहियात चुटकुलों पर दांत निपोर कर हंसने वालों की तादाद भी बहुत ज़्यादा है। लेकिन ज़रा सोचिए, यदि आपके पिता, पुत्र,माता,बहन,पत्नी,बेटी या अन्य किसी करीबी के लिए कोई भी ऐसे उपहासजनक व अपमानजनक शब्द बोले तो आपके मन में सबसे पहला विचार क्या आएगा! ये बेहद निंदनीय है कि हमें दूसरों का अपमान करके मिलने वाला सुख ज्यादा प्रिय है। यदि हम ऐसा दुर्व्यवहार करते हैं तो न ये हमारे देश की सभ्यता है और न ही हम सभ्य हैं। हमें एलोपेशिया से गुज़र रहे आस पास के हर व्यक्ति के जीवन का सम्बल बनकर रहने में आखिर तकलीफ़ ही क्या है।

     हाल ही में खंडवा, मध्य प्रदेश की एक कॉलेज छात्रा निकिता लाड़ ने एलोपेशिया से पीड़ित होने के कारण, ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। आज के समाज को “घने मुलायम काले रेशम से मतवाले” बालों की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी से इतर सोचने और श्रेष्ठ मानसिकता का परिचय देने की ज़रूरत है। जो एलोपेशिया से पीड़ित हैं वो ये बिलकुल न सोचें कि बाल समाप्त तो जीवन समाप्त। जीवन हमें एक निश्चित लक्ष्य, समाज में योगदान देने के उद्देश्य के लिए मिला है न कि घने बालों के ख़्वाबों में मर मिटने के लिए। आपका आत्मविश्वास क्या इतना कमजोर था जो बालों के जाते ही खो गया!

     केतकी जानी वो नाम है जो समाज के लिए संघर्ष और कामयाबी की सच्ची प्रतिबिम्ब हैं। जिनसे सभी को सीख मिलती है कि जीवन बालों या शारीरिक सुन्दरता का मोहताज़ नहीं है।  हम अगर चाहें तो तबीयत से उछाले गए एक पत्थर से आसमान में भी सुराख कर सकते हैं।  ज़रूरत है तो केवल मज़बूत व अडिग धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की।  केतकी जानी के इस अद्भुत साहस को हम सलाम करते हैं।

(Pictures Credit- Facebook Wall of Ketki Jani)

भड़कीं माया, कहा, “राज्यसभा सदस्य बने रहने का कोई मतलब नहीं”

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

बसपा प्रमुख मायावती आज राज्यसभा में सहारनपुर के मुद्दे पर बहुत ज्यादा भड़क गईं। उन्होंने उपसभापति द्वारा इस मुद्दे पर बोलने का समय न देने के विरोध में सदन से इस्तीफे की धमकी दे डाली। मायावती ने यहां तक कहा कि जिस सदन में वो अपने समाज के हित की बात नहीं रख सकतीं, उस सदन का सदस्य बने रहना उनके लिए कोई मायने नहीं रखता है।

मायावती ने कहा कि मुझे महज तीन मिनट का वक्त दिया जा रहा है, आखिर इतने महत्वपूर्ण मसले पर मेरी बात क्यों नहीं सुनी जा रही। लानत है ऐसी सदस्यता पर कि जिस समाज से मैं आती हूं उसी की बात सदन में नहीं रख पा रही, मुझे ऐसी सदस्यता नहीं चाहिए।

मायावती ने उपसभापति से कहा कि ये जीरो ऑवर नहीं है फिर कैसे उनकी बात महज तीन मिनट तक सीमित की जा सकती है। आखिर सहारनपुर में जो कुछ हो रहा है वो सब उन्हें क्यों नहीं बताने दिया जा रहा। वहाँ मौजूद नकवी ने कहा कि माया सियासी हताशा में उपसभापति पर हमला कर रही हैं और सीधे-सीधे धमकी दे रही हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है।

दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद ने मायावती का समर्थन किया और उनके समर्थन में पार्टी के सभी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

पेशावर: पाक अर्द्धसैनिक बल पर आत्मघाती हमला, 2 जवानों की मौत 10 घायल

कोमल झा| Navpravah.com

पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में अर्द्धसैनिक बल के जवानों को ले जा रहे एक वाहन पर सोमवार को एक आत्मघाती हमलावर ने हमला किया जिसमें एक मेजर सहित दो जवानों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए.

पुलिस ने बताया कि विस्फोटकों से लदी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर ने फ्रंटियर कांस्टेबुलेरी के काफिले पर पेशावर के हयाताबाद क्षेत्र में ट्रैफिक सिग्नल के दौरान हमला किया. इस हमले में एक मेजर समेत दो जवानों की मौत हो गई.

हयाताबाद के बाग-ए-नारन में हुए इस आत्मघाती विस्फोट में समीप से गुजर रहे राहगीरों समेत 10 लोग घायल हो गए.

काफिले का हिस्सा रहे दो वाहन इस विस्फोट में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे.

विस्फोट के बाद सुरक्षाबलों ने इस क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है. घायल हुए लोगों को हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स में भर्ती कराया गया है.

पाकिस्तानी सेना द्वारा कबायली इलाके खैबर में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खात्मे के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा के एक दिन बाद यह हमला हुआ है.

तहरीक-ए-तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन्स) सज्जाद खान ने बताया कि इस हमले में फ्रंटियर कॉर्प्स के एक मेजर समेत दो जवानों की मौत हो गई. काफिले का हिस्सा रहे दो वाहन इस विस्फोट में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए.

अमित कुमार सरोहा ने विश्व पैरा एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीत देश को किया गौरवान्वित

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
लन्दन में चल रहे विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में पुरूष वर्ग के ‘क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा’ में भारत के अमित कुमार सरोहा ने आज रजत पदक जीतकर देश का नाम रौशन किया है। सरोहा का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 30.25 मीटार का रहा जो उन्हें तीसरे प्रयास में मिला, जिसके कारण वह रजत पदक जीतने में सफल रहे। इस विजय के साथ उन्होंने पैरा एथेलेटिक्स में एक नया एशियाई रेकॉर्ड भी बनाया।
 
सरोहा ने दोहा में 2015 में हुए द्विवार्षिक चैंपियनशिप प्रतियोगिता के पिछले सत्र में भी रजत पदक जीता था। वह 2014 इचिंयोन एशियाई पैरा खेलों की स्पर्धा में इसी खेल में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। एक अन्य भारतीय धरमबीर 22.34 मीटर के थ्रो के साथ 10वें स्थान पर रहे। सर्बिया के जेल्जको दिमित्रिजेविच ने 31.99 मीटर के विश्व रिकार्ड से अपना खिताब कायम रखा।
उल्लेखनीय है कि सरोहा,एक क्वाड्रिप्लेजिक हैं। गर्दन से नीचे पूरे शरीर के पूर्ण पक्षाघात के बावजूद सरोहा वे प्रथम क्वाड्रिप्लेजिक हैं, जिन्होंने 2012 के लंदन पैरालिम्पिक्स में भारत का प्रतिनिधित्त्व किया था व देश का नाम रौशन किया था। सरोहा मंवलवार को खेले जाने वाले पुरुषों के डिस्कस थ्रो(एफ 52) का भी हिस्सा होंगे। इससे पहले सुंदर सिंह गुर्जर 14 जुलाई को पुरूषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।

GST इफ़ेक्ट : सिगरेट पीने वालों के लिए बुरी ख़बर

कोमल झा| Navpravah.com

सोमवार को आनन-फानन में जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाई गई. इस बैठक में सिगरेट पर कंपनसेशन सेस बढ़ाने का फैसला किया गया ताकि जीएसटी लागू होने के बाद सिगरेट की कीमते घट ना जाएं.

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा सिगरेट पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा. इसके अलावा 5 फीसदी ऐड वेलोरम टैक्स चुकाना होगा. इसके बाद सिगरेट की लंबाई के आधार पर अतिरिक्त सेस वसूला जाएगा. जेटली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक की अगुवाई की.

क्या थी मुश्किल

जीएसटी लागू होने के बाद सिगरेट पर 28 फीसदी टैक्स लग रहा था. यह पुराने दर के मुकाबले 8 फीसदी कम था. सिगरेट की कीमतों में कमी ना आए, इसलिए जीएसटी की बैठक बुलाई गई थी. दरअसल जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज ड्यूटी खत्म हो गई थी, जिससे सिगरेट सस्ता हो गया था.

केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क की अध्यक्ष वनजा सरना ने बताया कि जेटली ने काउंसिल की अगली बैठक का दिन 5 अगस्त निर्धारित किया था, लेकिन कुछ मुद्दों पर तुरंत ध्यान दिए जाने की आवश्यकता थी.