यूएस स्थित इंडिया बिज़नस काउंसिल ने की ट्रम्प से अपील, कहा- “आधिकारिक यात्रा पर मोदी को बुलाया जाए”

अमित द्विवेदी,

वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती नज़र आ रही है, जिससे विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका भी अछूता नहीं है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के बाद यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) ने नए राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की है कि वह अपने प्रशासन के पहले साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर आमंत्रित करें।

ट्रंप को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मिली जीत पर बधाई देते हुए यूएसआईबीसी ने ट्रंप को पत्र लिखकर उनसे मोदी को आमंत्रित करने का अनुरोध किया है।
अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के एक ही दिन बाद यूएसआईबीसी के अध्यक्ष मुकेश आघी ने ट्रंप को लिखे पत्र में कहा, ‘‘अपने कार्यकाल के पहले साल में प्रधानमंत्री मोदी को आधिकारिक यात्रा पर आमंत्रित कीजिए। इससे द्विपक्षीय संबंध के महत्व के बारे में स्पष्ट संकेत जाएगा।’’

यूएसआईबीसी ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति से अपील की कि वह उन नीतियों एवं प्रक्रियाओं की समग्र समीक्षा करें, जिन्होंने भारतीय रक्षा एवं एयरोस्पेस बाजार में अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर किया है। यूएसआईबीसी ने कहा, ‘‘अमेरिकी निर्यात नियंत्रण और लाइसेंस प्रक्रिया ने अमेरिकियों को प्रतिस्पर्धा के लिहाज से रूस जैसे प्रतिस्पधियों की तुलना में कमजोर स्थिति में ला दिया है।’’

पत्र में कहा गया है, ‘‘व्यवसायिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू से यह बेहतर है कि भारत जैसा देश आधुनिक रक्षा उपकरण अमेरिका से खरीदे, न कि उसके विदेशी प्रतिद्वंद्वियों से। यूएसआईबीसी ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति से यह भी अपील की है कि वे सामाजिक सुरक्षा के समग्रीकरण से जुड़े एक विधायी समझौते के जरिए भारतीय कर्मचारियों पर लगाए जाने वाले पुराने एवं अनुचित कर को हटाने के लिए काम करें।

पत्र में कहा गया कि कई रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में कभी अमेरिका का जो एकाधिकार हुआ करता था, वह अब नहीं रह गया। उसकी नीतियों को इस सच्चाई के अनुकूल खुद को ढालना चाहिए। पत्र में यूएसआईबीसी की उन मांगों का जिक्र किया गया, जिसपर प्रशासन को शुरूआती महीनों में गौर करना चाहिए, ताकि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को प्रगाढ़ किया जा सके और विस्तार दिया जा सके।

इस सूची में शामिल प्रमुख मांगों में दोनों देशों की सरकारों के बीच ज्यादा और जल्दी संवाद की परंपरा को जारी रखना, भारत के साथ द्विपक्षीय निवेश से जुड़ी संधि पर बातचीत और एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच में भारत के प्रवेश का समर्थन करना है।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को लिखे पत्र में आघी ने कहा, ‘‘हम आपको आपके प्रशासन के उच्चतम स्तरों पर भारत के साथ लगातार जुड़ाव के जरिए इस संबंध को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करते हैंं।’’

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