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Saturday, August 15, 2026
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बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है, आईये सभी इसी मन्त्र के साथ आगे बढ़ें – पीएम मोदी

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहराया और देश के नाम अपना संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि, आजादी के पावन पर्व पर देशवासियों को कोटि-कोटि शुभकामनाएं। आजादी के लिए अपने प्राण देने वाले, यातनाएं झेलने वाले सभी महापुरुषों को मैं नमन करता हूं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि, यह एक महत्वपूर्ण साल है, इस साल हमने भारत छोड़ो आन्दोलन के 75 वर्ष, चंपारण सत्याग्रह के 100 साल और गणेश उत्सव के 125 साल पूरे किये हैं।
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे गोरखपुर हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त की,
पीएम मोदी ने कहा कि, पिछले दिनों बच्चों की मौत हुई उनके परिवारों के साथ हम सबकी संवेदनाएं हैं और ऐसे परिवारों की मदद में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि, New India का संकल्प ले कर हमें इस देश को आगे बढ़ाना है, साल 1942 से 1947 तक देश में एक सामूहिक शक्ति देखने को मिली थी, आइये हम और आप वही शक्ति आने वाले 5 सालों में लेकर चलें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि, 1 जनवरी 2018 का दिन कोई सामान्य दिन नहीं होगा, जो इस सदी में पैदा हुए हैं वो 18 साल के होंगे, साथ ही साथ वो देश के ‘भाग्य विधाता’ भी हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि, सवा सौ करोड़ देशवासियों में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है, सामूहिक शक्ति के द्वारा हम देश में परिवर्तन ला सकते हैं। बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है, आईये सभी इसी मन्त्र के साथ आगे बढ़ें।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि जिन्होंने देश को लूटा आज वो चैन की नींद नहीं सो सकते हैं, समुद्र हो या सीमा हो, साइबर हो या स्पेस हो, देश के खिलाफ उठने वालों से हम निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। आज देश में ईमानदारी का उत्सव मनाया जा रहा है, सरकार ने 800 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति जब्त की है। हमारी सेनाएं, हमारे अर्धसैनिक बलों ने हमेशा पराक्रम दिखाया है।
सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो दुनिया ने हमारा लोहा माना। आज दोगुनी रफ़्तार से सड़कें बन रही हैं, रेल की पटरियां बिछाई जा रही हैं। 14 हजार से ज्यादा गांवों को बिजली मिली है और वो उजाले से रोशन हो रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आज हम अकेले नहीं है, कई देश हमको ऐसी गतिविधियों में जानकारी दे रहे हैं, मैं ऐसे देशों का अभिनंदन करता हूं।

चंडीगढ़ में 8वीं क्लास की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म, स्वतंत्रता दिवस समारोह से लौट रही थी छात्रा

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
एक ओर जहां पीएम मोदी स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में लालकिला से देश को  संबोधित कर रहे थे वहीँ, चंडीगढ़ के सेक्टर 23 में स्कूल के स्वतंत्रता दिवस समारोह से लौटती 8वीं क्लास की बच्ची से सामूहिक ब्लात्कार की घटना सामने आई है। स्वतंत्रता दिवस के दिन ऐसी शर्मनाक घटना ने देश का शीश एक बार फिर शर्म से झुका दिया है।
एक ओर जहां सारा भारत अपने स्वतंत्रता की वर्षगांठ मना रहा है वहीं कुछ दरिंदे एक बच्ची से इस सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दे रहे थे। आजतक की खबर के मुताबिक यह अपराध चंडीगढ़ जैसे विकसित शहर में हुई है। आज के दिन ऐसी दरिंदगी को अंजाम देने का स्पष्ट मतलब है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस द्वारा किसी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
प्राप्त खबर के अनुसार चंडीगढ़ पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर कार्यवाई शुरू कर दी गई है। इस शर्मनाक घटना के बाद हमें ये सोचने की जरूरत है कि जिस आज़ादी का जश्न हम मना रहे हैं, सही मायने में कितने आज़ाद हैं हम. क्या हमारी माताएं बहनें बच्चियां भी अपने इस देश में आज़ाद हैं?

 “श्रीकृष्ण ने गीता के जरिये पूरे विश्व को सन्देश दिया” – राम नाइक

दीक्षांत समारोह में बोले राम नाइक
सौम्या केसरवानी।Navpravah.com
देश आज अपनी आजादी का 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जिसके तहत हर साल की तरह इस बार भी लाल किले पर झंडारोहण किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहराया और देश के नाम अपना संबोधन दिया, इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी देश की आजादी का 71वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। जहाँ राज्यपाल राम नाईक ने राजभवन में झंडारोहण किया। झंडारोहण के बाद राज्यपाल राम नाईक ने राज्य के नाम अपना संबोधन किया।
आजा आजादी के 71वें जश्न के मौके पर सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने राजभवन में झंडारोहण किया, इस दौरान उन्होंने कहा कि, आजादी के लिए शहीद होने वालों को नमन है, उन्होंने आगे कहा कि, संयोग से आज कृष्ण जन्माष्टमी भी है। श्रीकृष्ण ने गीता के जरिये पूरे विश्व को सन्देश दिया, श्रीकृष्ण ने गीता में कार्य करते रहने का सन्देश दिया।
उन्होंने कहा कि स्वराज के 70 सालों बाद आज की स्थिति पर विचार करना चाहिए, 70 साल में स्वराज्य के बाद किये गए कार्यों पर विचार करना चाहिए। आज के दिन देश को बुलंदियों पर पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए, देश के गरीबों को भी स्वतंत्रता का अहसास होना चाहिये।

हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा: एक सफ़र

आनन्द रूप द्विवेदी | Navpravah.com

विश्वविजयी भारत का प्यारा तिरंगा स्वतंत्रता संघर्ष का सम्पूर्ण कालखंड है. इसका गर्व ही स्वतंत्रता सेनानियों का संबल और वीर शहीदों के मर मिटने का कारण बना रहा. आज भी तिरंगे के समक्ष किसी भी भारतीय का सर गर्व से ऊँचा, और सम्मान से नतमस्तक  हो जाता है , फिर वो चाहे देश-विदेश में हो या अन्तरिक्ष में.

पिंगली वेंकैया

 

भारत का राष्ट्रीय ध्वज “तिरंगा” तीन रंगों की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है. इस तिरंगे की अभिकल्पना देशभक्त एवं कृषि वैज्ञानिक  “पिंगली वेंकैया” ने की थी. जिसे १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व २२ जुलाई, १९४७ को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था.

 

 

क्या है तिरंगे का इतिहास ?

यह ध्वज भारत की स्वतंत्रता के संग्राम काल में निर्मित किया गया था। १८५७ में स्वतंत्रता के पहले संग्राम के समय भारत राष्ट्र का ध्वज बनाने की योजना बनी थी, लेकिन वह आंदोलन असमय ही समाप्त हो गया था और उसके साथ ही वह योजना भी बीच में ही अटक गई थी। वर्तमान रूप में पहुंचने से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय ध्वज अनेक पड़ावों से गुजरा है। इस विकास में यह भारत में राजनैतिक विकास का परिचायक भी है। कुछ ऐतिहासिक पड़ाव इस प्रकार हैं. :-

  • प्रथम चित्रितध्वज १९०४ में स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा बनाया गया था। ७ अगस्त, १९०६ को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में इसे कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे और नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चाँद बनाए गए थे। बीच की पीली पट्टी पर वंदेमातरम् लिखा गया था।

  • द्वितीय ध्वजको पेरिस में मैडम कामा और १९०७ में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। कुछ लोगों की मान्यता के अनुसार यह १९०५ में हुआ था। यह भी पहले ध्वज के समान था; सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर केवल एक कमल था, किंतु सात तारे सप्तऋषियों को दर्शाते थे। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

  • १९१७में भारतीय राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया। डॉ॰ एनी बीसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान तृतीय चित्रित ध्वज को फहराया। इस ध्वज में ५ लाल और ४ हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्ततऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे। ऊपरी किनारे पर बायीं ओर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

  • कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्तमानविजयवाड़ा) में किया गया यहाँ आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने एक झंडा बनाया (चौथा चित्र) और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्वं करता है। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

  • वर्ष१९३१ तिरंगे के इतिहास में एक स्मरणीय वर्ष है। तिरंगे ध्वज को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया और इसे राष्ट्र-ध्वज के रूप में मान्यता मिली। यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इसका कोई साम्प्रदायिक महत्त्व नहीं था।

  • २२ जुलाई१९४७ को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।

क्या हैं राष्ट्रध्वज से सम्बंधित नियम ?

हमारे राष्ट्रध्वज के प्रदर्शन और सम्मान के लिए कुछ विशेष नियम भी हैं जिनका पालन सभी को कड़ाई से करना चाहिए. राष्ट्रध्वज देश का गौरव होता है और इसके प्रति सद्भाव व सम्मान हर देशवासी का परम कर्तव्य.

भारतीय ध्वज संहिता २००२ के अनुसार :

  • जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
  • सरकारी भवन पर झंडा रविवार और अन्य छुट्‍टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है।
  • झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
  • जब झंडा किसी भवन की खिड़की, बालकनी या अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
  • झंडे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उनके दाहिने ओर हो।
  • झंडा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।
  • फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जाता है।
  • झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
  • किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊँचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा।
  • झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए।

जब झंडा क्षतिग्रस्त है या मैला हो गया है तो उसे अलग या निरादरपूर्ण ढंग से नहीं रखना चाहिए, झंडे की गरिमा के अनुरूप विसर्जित / नष्ट कर देना चाहिए या जला देना चाहिए। तिरंगे को नष्ट करने का सबसे अच्छा तरीका है, उसका गंगा में विसर्जन करना या उचित सम्मान के साथ दफना देना।

५ जुलाई २००५, को भारत सरकार ने संहिता में संशोधन किया और ध्वज को एक पोशाक के रूप में या वर्दी के रूप में प्रयोग किये जाने की अनुमति दी। हालांकि इसका प्रयोग कमर के नीचे वाले कपडे के रूप में या जांघिये के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रीय ध्वज को तकिये के रूप में या रूमाल के रूप में करने पर निषेध है।  झंडे को जानबूझकर उल्टा, रखा नहीं किया जा सकता, किसी में डुबाया नहीं जा सकता, या फूलों की पंखुडियों के अलावा अन्य वस्तु नहीं रखी जा सकती। किसी प्रकार का सरनामा झंडे पर अंकित नहीं किया जा सकता है।

सन २००२ से पहले, भारत की आम जनता के लोग केवल गिने चुने राष्ट्रीय त्योहारों को छोड़ सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहरा नहीं सकते थे। एक उद्योगपति, नवीन जिंदल ने, दिल्ली उच्च न्यायालय में, इस प्रतिबंध को हटाने के लिए जनहित में एक याचिका दायर की। जिंदल ने जान बूझ कर, झंडा संहिता का उल्लंघन करते हुए अपने कार्यालय की इमारत पर झंडा फहराया। ध्वज को जब्त कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाने की चेतावनी दी गई। जिंदल ने बहस की कि एक नागरिक के रूप में मर्यादा और सम्मान के साथ झंडा फहराना उनका अधिकार है और यह एक तरह से भारत के लिए अपने प्रेम को व्यक्त करने का एक माध्यम है।  तदोपरांत केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने, भारतीय झंडा संहिता में २६ जनवरी २००२, को संशोधन किए जिसमें आम जनता को वर्ष के सभी दिनों झंडा फहराने की अनुमति दी गयी और ध्वज की गरिमा, सम्मान की रक्षा करने को कहा गया।

भारतीय संघ व वी.यशवंत शर्मा के मामले में कहा गया कि यह ध्वज संहिता एक क़ानून नहीं है, संहिता के प्रतिबंधों का पालन करना होगा और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बनाए रखना होगा। राष्ट्रीय ध्वज को फहराना एक पूर्ण अधिकार नहीं है, पर इस का पालन संविधान के अनुच्छेद ५१-ए के अनुसार करना होगा।

(इस लेख में दी गई जानकारी  का सम्पूर्ण श्रेय विकिपीडिया  को जाता  है.)

 

समृद्धि का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है -योगी आदित्यनाथ

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

15 अगस्त 2017 को भारत अपनी आजादी का 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जिसके तहत हर साल की तरह इस बार भी लाल किले पर झंडारोहण किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया और देश को सम्बोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर से ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात की।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी देश की आजादी का 71वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। राज्यपाल राम नाईक ने राजभवन में झंडारोहण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लखनऊ स्थित विधानसभा में झंडारोहण किया, साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के 22 करोड़ लोगों के नाम अपना सन्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में झंडारोहण के बाद राज्य की जनता के नाम अपना सन्देश देते हुए कहा कि, 1857 का वह दिन, 1857 का पहला संग्राम उत्तर प्रदेश की भूमि से शुरू हुआ था।

भारत को विकसित करना है, समृद्ध करना है।

अग्रणी देशों की कतार में आगे रखना है।

इसका रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।

सीएम योगी ने आगे कहा कि, क्या हम संकल्प कर पाएंगे कि, हम अपना एक-एक पल दुनिया के सामने भारत को शक्ति के रूप में स्थापित करने में देंगे? क़ानून के रक्षकों को आउट ऑफ टार्न के साथ प्रोत्साहित करेंगे।

उन्होंने कहा कि यूपी में देश की विरासत को बचाने का काम कर रहे हैं, विरासत के बिना समाज त्रिशंकु की तरह होता है जिसकी कोई राह नहीं होती। यूपी में कानून का राज और हर नागरिक भयमुक्त हो, इसके लिए पुलिसिंग को नई दिशा दे रहे हैं। यूपी STF और ATS की योगी आदित्यनाथ ने तारीफ की और कहा कि गरीब, किसान, मजदूर, अल्पसंख्यकों के बच्चे अगर हीन भावना से ग्रसित होंगे, तो यूपी आगे नही बढ़ पाएगा।

“धारा 370 हटाने पर ही होगी कश्मीर समस्या हल” -अनुपम खेर

​शिखा पाण्डेय |Navpravah.com

धारा 370 को हटाना या जारी रखना , तमाम राजनीतिक पार्टियों के बीच हमेशा से विवाद का विषय रहा है। इस मुद्दे पर तमाम नेता-अभिनेता अपना मत व्यक्त करते रहते हैं।कश्मीरी पंडित होने के नाते अभिनेता अनुपम खेर अक्सर इस विषय पर अपनी राय खुलकर व्यक्त करते हैं। खेर का मानना है कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए धारा 370 को हटाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर वहां देश के अन्य हिस्सों के लोगों को संपत्ति खरीदने का अधिकार हो, शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का अधिकार मिले तो इस समस्या का यह बेहतर समाधान हो सकता है। 

इंडिया आसियान यूथ समिट में हिस्सा लेने पहुंचे अनुपम ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, “कश्मीर में रहने वाले भी तो हमारे ही भाई-बहन हैं। इसलिए वहां जाकर दूसरे लोगों को बसने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए? इतना ही नहीं देश के अन्य हिस्सों के लोगों को, जो अवसंरचना विकास का लाभ मिल रहा है, वह लाभ कश्मीर के लोगों को भी मिलना चाहिए।” खेर ने कहा कि धारा 370 के हटाने से अगर देश के अन्य हिस्सों के लोगों को वहां उद्योग लगाने, शिक्षा संस्थान खोलने, संपत्ति खरीदने का अधिकार मिल जाता है, तो यह कश्मीर समस्या का एक उत्तम समाधान हो सकता है।

उन्होंने परोक्ष रूप से अलगाववादियों पर तंज कसते हुए कहा, “चंद गिनती के लोग वहां की जनता के बारे में तय नहीं कर सकते कि क्या होना चाहिए। वहां के लोगों को भी बेहतर सुविधा मिले। अच्छे पुल हों, सड़कें हों। यह तभी संभव है, जब धारा 370 को हटा दिया जाए।”

दूसरी ओर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह एक मिथक है कि राज्य में धारा 370 व जम्मू एवं कश्मीर के विशेष दर्जे की वजह से निवेश नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा राज्य देश के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक छोटा राज्य है। जम्मू एवं कश्मीर के किसी उत्पादक के लिए अपने उत्पाद को चेन्नई में बेचना कठिन है। सच्चाई यह है कि निवेश इसलिए नहीं आ रहा क्योंकि यहां हालात ठीक नहीं हैं, धारा 35ए इसकी वहज नहीं है।” 

दिल्ली मे स्वास्थ्य विभाग की टीम अब घर पहुंचाएगी दवा और मास्क

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

राजधानी में स्वाइन फ्लू के कहर को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग में अलर्ट करते हुए डॉक्टरों की छुटिृटयों को भी रद्द कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने वहीं लोगों से भी सावधानी बरतने को कहा है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग ने समय से इलाज उपलब्ध कराने की बात कही है।

स्वास्थ्य विभाग ने अब मरीजों के परिजनों को स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए उनके घर तक दवा पहुंचाने का निर्णय किया है, स्वाइन फ्लू से मरीजों को बचाने के लिए लखनफ को आठ भागों में बांटा गया है।

प्रत्येक क्षेत्र में एक एसीएमओ निगरानी के लिए तैनात किया गया है, इसको लेकर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अपर निदेशक की अध्यक्षता में बैठक भी हुयी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीएस बाजपेई ने बताया कि स्वाइन फ्लू के साथ डेगू से बचाव के लिए हर प्रयास जारी है।

इसके लिए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती हर क्षेत्र में की गयी है, इस नेतृत्व में टीम प्रतिदिन क्षेत्रों का मुआयना करेगी। साथ ही यदि मरीज की हालत सही नहीं है तो घर पर ही मास्क व दवा पहुंचाएगी।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में हाई अलर्ट

सौम्या केसरवानी।Navpravah.com
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली हाई अलर्ट पर है, इस खास मौके पर दिल्ली पुलिस सतर्क है। राष्ट्रीय त्योहार को सुचारु और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए दिल्ली पुलिस काफी ध्यान दे रही है।
इस खास राष्ट्रीय त्योहार पर दिल्ली पुलिस ने करीब 20 हजार जवानों की तैनाती की है, दिल्ली पुलिस के मुताबिक 15 अगस्त को मुख्य आयोजन स्थल से लेकर पुरानी दिल्ली के आस-पास के इलाकों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर रहेगी।
करीब 500 स्पेशल कमांडो की तैनाती की गई है, जो हर लिहाज से किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है, इन्हें लाल किले पर तैनात किया गया है।
मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, मॉल समेत सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस 24 घंटे नजर बनाए हैं, इसके अलवा इंडिया गेट और संसद भवन सहित कई स्थानों पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए है।
मेट्रो स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की अतिरिक्त जांच की जा रही है।

‘पहरेदार पिया की’ शो पर नहीं लगेगा कोई पहरा!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बाल विवाह के कॉन्सेप्ट की आड़ में समाज में कथित तौर पर असामाजिकता फैलाने वाले कार्यक्रम ‘पहरेदार पिया की’ पर प्रतिबंध लगने की अब तक कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही। इस शो में एक 9 साल के बच्चे के साथ एक 18 साल की युवती की सुहागरात दिखाना खुद दर्शकों को अस्वीकार्य रहा और कई लोगों ने इस कार्यक्रम को बंद करने की मांग की। लेकिन शो के निर्माताओं ने सोमवार को कहा कि उन्हें अभी तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से शो को बंद करने का कोई नोटिस नहीं मिला है और वे इस शो को बंद करने के बिलकुल खिलाफ हैं।

शो को बनाने वाले ‘शशि सुमित प्रोडक्शंस’ के निर्माता सुमित मित्तल और साक्षी मित्तल ने ‘पहरेदार पिया की’ के कहानी को लेकर मचे बवाल के बीच एक संवाददाता सम्मेलन रखा। निर्माताओं ने कहा कि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित प्राधिकरण को स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं।
साक्षी से जब पूछा गया कि क्या उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कोई नोटिस मिला है, तो उन्होंने कहा, “नहीं, हमें अधिकारियों से कोई नोटिस नहीं मिला है और अगर हमें नोटिस मिलता भी है, तो हम स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि हमने कहानी में कुछ गलत नहीं दिखाया है। हम सबसे यह कहना चाहते हैं कि शो को देखे बिना जज नहीं करें।”

जब निर्माताओं से पूछा गया कि अगर ‘प्रसारण सामग्री शिकायत परिषद’ (बीसीसीसी) कहानी की विषयवस्तु में बदलाव लाने के लिए कहता है, तो वे क्या करेंगे, इस पर सुमित ने कहा, “नहीं, हम बदलाव करने के बजाय उनसे कोई भी फैसला लेने से पहले कहानी को जानने का अनुरोध करेंगे। शो की थीम में बदलाव लाने की अब तक हमारी कोई योजना नहीं है।”

निर्माताओं ने संवाददाता सम्मेलन में ‘पहरेदार पिया की’ के दो एपिसोड्स भी दिखाए कि किन हालातों में दिव्या (किरदार का नाम) की शादी रतन (बच्चे) से हुई है। साक्षी के मुताबिक, कई लोगों ने शो को बिना देखे इस पर प्रतिबंध लगाने की बात की है। उन्होंने बताया कि एक पार्टी में कुछ महिलाएं शो पर प्रतिबंध लगाने का बात कर रही थीं, जब उन्होंने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने शो देखा है, तो उन लोगों ने मना कर दिया। इस आधार पर साक्षी ने इस कार्यक्रम को बंद करने की मांग को बिलकुल गलत बताया।

उल्लेखनीय है कि शो में दिखाए गए इस कॉन्सेप्ट के कारण मुंबई की एक एनजीओ द्वारा और एक दर्शक द्वारा ऑनलाइन याचिका देकर प्राइम टाइम में प्रसारित होने वाले इस शो पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह शो एक 18 साल की लड़की का नौ साल के बच्चे से शादी को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। शो में बच्चे को लड़की का पीछा करते हुए उसकी तस्वीरें भी लेते हुए दिखाया गया है और हनीमून मनाते दिखाया गया है, जिसके बाद से इस शो की काफी आलोचना हो रही है।

कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान पर काम कर रही सरकार :राजनाथ

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार कश्मीर समस्या का स्थायी समाधान हासिल करने पर काम कर रही है, कश्मीर में हम अब जो भी कदम उठा रहे हैं, वह समस्या का स्थायी समाधान हासिल करने की दिशा में उठा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि, ‘मैं विस्तार से नहीं बताना चाहूंगा और यह सही भी नहीं होगा।’ उन्होंने कहा कि कश्मीर को अपनी पहचान बनाए रखनी चाहिए।
राजनाथ ने कहा कि कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं, लेकिन इसे पूरी तरह बंद होना चाहिए। राजनाथ ने कहा कि हम मौजूदा स्थिति से अभी संतुष्ट नहीं हैं, हमें कश्मीर के युवाओं को नौकारियां देनी होंगी।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं जोर देकर कहना चाहूंगा कि राज्य सरकार आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में बाधा नहीं पहुंचा रही।’
उन्होंने आतंकवाद के खात्म में राज्य की पुलिस के योगदान के लिए उनको सलाम किया।