बिजली कंपनी को कोल ट्रेड समेत अन्य चीजों के लिए पैसा देना पड़ता है. इसलिए तालाबंदी के दौरान आंके गए बिजली बिलों में किसी भी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जा सकती. यह बयान है महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री डॉ. नितीन राउत का.
मंत्री कहते है कि बिजली बिलों की वसूली के बीच किसी भी उपभोक्ता पर कोई अप्रिय कार्रवाई नहीं की जाएगी. इन्हीं मंत्री जी ने आज से दो महीने पहले कहा था कि, अतिरिक्त बिजली बिलों को कम किया जाएगा और आज कह रहे हैं कि कोई छूट नहीं दी जा सकती. मंत्री का बयान पूरी तरह से भ्रम को बढ़ावा देने वाला इसलिए है कि, वे उपभोक्ताओं पर किसी भी अप्रिय कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं और छूट के भी.
राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार में ऊर्जा मंत्रालय कांग्रेस के पास है. सरकार गठन के बाद प्रति यूनिट बिजली का दर 22 फीसदी इतना बढ़ाया गया. तालाबंदी मे बिजली उपयोग आंकलन व्यवस्था चरमराई और उपभोक्ताओ को दुगने तिगने बिल थमा दिए गए. ऊर्जा मंत्री के पलटू टाइप बयान के कारण आम जनता मे उद्धव ठाकरे सरकार के प्रति काफी असंतोष दिखाई पड़ने लगा है. अगले महीने विधानसभा का शीतसत्र आरंभ होने जा रहा है. राउत के बयान ने विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका प्रदान किया है.
नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने सरकार से कहा है कि, वह बिजली कंपनी को 5 हजार करोड़ रुपये की मदद घोषित करे. अच्छा होता कि फडणवीस केंद्र सरकार के पास राज्य के बकाया 38 हजार करोड़ रुपये के बारे मे भी कुछ कह देते.
मनमाने बिजली बिलों को लेकर नवप्रवाह ने जनता की आवाज बुलंद करने और प्रशासन की कोताही को लेकर लगातार खबरे चलाई है. प्रस्तावित न्यायिक छूट की प्रतीक्षा मे मार्च से अब तक लाखो ग्राहको ने बिजली के बिलो का भुगतान नही किया है जिसके कारण सरकारी खजाने मे जमा होने वाला करोड़ो रुपया रुक गया है. समय पर इस मसले पर फैसला लिया जाता, तो कितना बेहतर होता. अब जनभावना के दबाव में बिलों में छूट मिलती भी है, तो आम लोगो को 9 महीने का लंबित बिल एक साथ भरना आसान नही होगा.
नव प्रवाह न्यूज नेटवर्क
गुजरात के वडोदरा में वाघोडिया क्रॉसिंग हाईवे पर बुधवार तड़के दो ट्रकों की टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई. जबकि 17 लोग घायल हो गए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि घटना सुबह तीन बजे घटित हुई. हादसे से हाईवे पर भारी जाम लग गया है.
वडोदरा के पुलिस आयुक्त आरबी ब्रह्मभट्ट ने बताया कि हादसा वाघोडिया सर्कल पर हुआ जब मिनी ट्रक के चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी. उन्होंने बताया कि जिन 11 लोगों की मौत हो गई है. वे सभी सूरत शहर के वराछा इलाके के थे और पंचमल जिले के पावागढ़ जा रहे थे.
– प्रधानमंत्री ने जताया शोक
वडोदरा की घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने शोक जताया है. उन्होंने लिखा, ‘वडोदरा में हुई दुर्घटना से दुखी हूं. मेरी सांत्वना उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया. प्रार्थना है कि घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएं. प्रशासन दुर्घटनास्थल पर हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है.’
– मुख्यमंत्री ने भी जताया दुख
घटना को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘वडोदरा के पास एक सड़क दुर्घटना के कारण हुई मौत से दुखी हूं. अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. जो लोग घायल हुए हैं उनके जल्द से जल्द ठीक होने की कामना करता हूं. मैं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं. ओम शांति.’
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पत्रकार अर्नब गोस्वामी के मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया। गोस्वामी पर आत्महत्या के लिए उकसाने आरोप है। 2018 के इस केस के संदर्भ में सुको ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस तरह से अर्नब की व्यक्तिगत स्वस्तंत्रता पर प्रतिबंध लगाना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने राज्य सरकार को ऐसे रवैए के लिए फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि न्याय का मज़ाक़ न उड़ाएँ।
न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि राज्य सरकारें कुछ लोगों को विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर निशाना बना रही हैं। अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक ऐसा मामला है जिसमें उच्च न्यायालय जमानत नहीं दे रहे हैं और वे लोगों की स्वतंत्रता, निजी स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल हो रहे हैं।’
न्यायालय ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि क्या गोस्वामी को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की कोई जरूरत थी क्योंकि यह व्यक्तिगत आजादी से संबंधित मामला है। पीठ ने टिप्पणी की कि भारतीय लोकतंत्र असाधारण तरीके से लचीला है और महाराष्ट्र सरकार को इन सबको (टीवी पर अर्नब के ताने) नजरअंदाज करना चाहिए।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘उनकी जो भी विचारधारा हो, कम से कम मैं तो उनका चैनल नहीं देखता लेकिन अगर सांविधानिक न्यायालय आज इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा तो हम निर्विवाद रूप से बर्बादी की ओर बढ़ रहे होंगे।’ पीठ ने कहा, ‘सवाल यह है कि क्या आप इन आरोपों के कारण व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत आजादी से वंचित कर देंगे।’
न्यायालय ने कहा, ‘अगर सरकार इस आधार पर लोगों को निशाना बनाएंगी…आप टेलीविजन चैनल को नापसंद कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।’ पीठ ने टिप्पणी की कि मान लीजिए की प्राथमिकी ‘पूरी तरह सच’ है लेकिन यह जांच का विषय है।
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से पीठ ने सवाल किया, ‘क्या धन का भुगतान नहीं करना, आत्महत्या के लिए उकसाना है? यह न्याय का उपहास होगा अगर प्राथमिकी लंबित होने के दौरान जमानत नहीं दी जाती है।’
न्यायालय ने कहा, ‘ए, बी को पैसे का भुगतान नहीं करता है और क्या यह आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला है? अगर उच्च न्यायालय इस तरह के मामलों में कार्यवाही नहीं करेंगे तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। हम इसे लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं। अगर हम इस तरह के मामलों में कार्रवाई नहीं करेंगे तो यह बहुत ही परेशानी वाली बात होगी।’
न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने कहा कि न्यायालयों की उनके फैसलों के लिए तीखी आलोचना हो रही है और ‘मैं अक्सर अपने लॉ क्लर्क से पूछता हूं और वे कहते हैं कि सर कृपा करके ट्विट्स मत देखें।’ गोस्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने उनके और चैनल के खिलाफ दर्ज तमाम मामलों का जिक्र किया और आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें निशाना बना रही है।
साल्वे ने कहा, ‘यह सामान्य मामला नहीं था और सांविधानिक न्यायालय होने के नाते बंबई उच्च न्यायालय को इन घटनाओं का संज्ञान लेना चाहिए था। क्या यह ऐसा मामला है जिसमे अर्नब गोस्वामी को खतरनाक अपराधिकयों के साथ तलोजा जेल में रखा जाए।’
उन्होंने कहा, ‘मैं अनुरोध करूंगा कि यह मामला सीबीआई को सौंप दिया जाए और अगर वह दोषी हैं तो उन्हें सजा दीजिए। अगर व्यक्ति को अंतरिम जमानत दे दी जाए तो क्या होगा।’ सिब्बल ने इस मामले के तथ्यों का हवाला दिया और कहा कि इस मामले में की गई विस्तृत जांच शीर्ष अदालत के सामने नहीं है और अगर वह इस समय हस्तक्षेप करेगी तो इससे एक खतरनाक परंपरा स्थापित होगी।
राज्य की ओर से ही एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें न्यायलय को अंतरिम स्तर पर जमानत देने के लिए अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामले की जांच करने की राज्य की क्षमता का सम्मान होना चाहिए।
इस मामले में भोजन अवकाश के बाद बहस जारी रहेगी। शीर्ष अदालत 2018 के एक इंटीरियर डिजायनर और उनकी मां को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के मामले में अंतरिम जमानत के लिए गोस्वामी की अपील पर सुनवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी बीजेपी ने 6 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में गई है. भाजपा टूंडला, बांगरमऊ, देवारिया, नौगावां सादात, घाटमपुर और बुलंदशहर में जीतने में कामयाब रही, वहीं मल्हनी विधानसभा सीट पर सपा के लकी यादव ने जीत दर्ज की. उपचुनाव में योगी का जलवा कायम दिखा.
निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार अमरोहा की नौगांवा सादात विधानसभा सीट के उपचुनाव में दिवंगत कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की पत्नी और भाजपा प्रत्याशी संगीता चौहान ने 15077 मतों से जीत हासिल की है.
बुलंदशहर में भाजपा प्रत्याशी ऊषा सिरोही 21702 मतों से विजयी हुई हैं. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी हाजी यूनुस को हराया है.
फीरोजाबाद के टूंडला में सेहरा भाजपा प्रत्याशी प्रेम पाल धनगर के सिर पर बंध गया है. उन्होंने 17 हजार 683 वोटों से जीत हासिल की है. दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी महाराज सिंह धनगर रहे.
उन्नाव की बांगरमऊ विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत कटियार ने 31398 वोटों से जीत दर्ज कर ली है. उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी आरती बाजपेयी को शिकस्त दी है.
कानपुर की घाटमपुर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी उपेंद्रनाथ पासवान ने 23820 वोटों से जीत दर्ज की है. यह सीट एक बार फिर जनता ने भाजपा की झोली डाल दी, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. कृपा शंकर दूसरे पायदान पर रहे हैं.
देवरिया सदर सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी 20089 वोट से चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने सपा के ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी को पराजित किया है.
जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट पर सपा ने जीत की हैट्रिक लगाते हुए कब्जा बरकरार रखा. दो बार यहां से विधायक रहे पारसनाथ यादव के बड़े पुत्र सपा प्रत्याशी लकी यादव ने पूर्व सांसद निर्दलीय प्रत्याशी धनंजय सिंह को कांटे के मुकाबले में 4,632 मतों से हराकर जीत दर्ज की.
बिहार में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार में बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर एकतरफा जीत हासिल कर लिया है. सत्तारूढ़ गठबंधन को 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में 125 सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि विपक्षी महागठबंधन ने 110 सीटें जीती हैं. इसके साथ की नीतीश कुमार के लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है.
भाजपा की बदौलत मिली जीत
इस बार नीतीश की पार्टी जदयू को 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है. जदयू को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं. गत चुनाव में नितीश कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव जीता था. एक प्रकार से कहा जा सकता है कि, इस बार बिहार में भाजपा के कारण ही नितीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने यह घोषणा कर दी है कि, यह उनका आखरी चुनाव है.
महागठबंधन ने दी कड़ी टक्कर
वहीं, महागठबंधन के खाते में 110 सीटें आई हैं. महागठबंधन ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है. खास तौर पर उन सीटों पर आरोप लगे हैं, जहां बेहद कम वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ है. कई सीटें ऐसी रहीं, जहां कांटेदार मुकाबला था. एक सीट पर तो 12 वोटों से हार-जीत का फैसल हुआ.
बिहार चुनाव मतगणना में कांटे की टक्कर के बीच जैसे तैसे बहुमत के आंकड़े को छू लिया है. हालांकि अभी भी सरकार बनाने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, क्योंकि प्रत्याशियों की जीत हार का अंतर काफी होने के कारण जीत-हार का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है. रुझानों में सुबह साढ़े 10 बजे NDA ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया था, लेकिन करीब नौ घंटे बाद तस्वीर बदल गई. NDA 134 से घटकर 120 पर आ गया था. दो घंटे बाद उसने फिर 123 सीटों पर बढ़त के साथ रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार किया है. इस बीच, राजद भी दावा कर रहा है कि बिहार ने बदलाव कर दिया है और महागठबंधन की सरकार बनना तय है.
– 23 सीटों पर अभी कांटे की टक्कर जारी
अभी 11 सीटों पर वोटों का मार्जिन एक हजार से कम है. इनमें से 3 पर NDA और 7 पर महागठबंधन आगे है. 1 सीट पर निर्दलीय आगे है. इसी तरह, 12 सीटों पर अभी वोट मार्जिन एक हजार से दो हजार के बीच है. इनमें NDA 4 और महागठबंधन 8 पर आगे है. इस बीच, गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फोन पर बातचीत की. इस बार भाजपा का पूरा कैम्पेन प्रधानमंत्री मोदी के भरोसे था.
चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने जदयू को गहरी चोट पहुंचाई है. लोजपा की वजह से जदयू के 5 मंत्री समेत नीतीश कैबिनेट के 7 मंत्री चुनाव हार गए हैं. इनमें भाजपा कोटे के दो मंत्री सुरेश शर्मा और बृजकिशोर बिंद शामिल हैं.
जदयू के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह चुनाव हार गए. रोहतास के दिनारा सीट से लगातार जीत रहे जय कुमार सिंह की हार की वजह भाजपा से लोजपा में गये राजेंद्र सिंह हैं. हालांकि राजेंद्र सिंह भी हार गए हैं. दिनारा से राजद के विजय कुमार मंडल ने जीत हासिल की है. राजेंद्र सिंह ने दिनारा से चुनाव लड़ने की तैयारी काफी पहले से कर रखी थी, लेकिन भाजपा ने यह सीट जदयू को दिया तो राजेंद्र सिंह बागी हो गए और लोजपा से चुनाव लड़ गए. नतीजा ये हुआ कि ना राजेंद्र जीते और ना ही जय कुमार सिंह जीते. इस लड़ाई में तीसरे को फायदा हो गया.
बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा मुजफ्फरपुर से चुनाव हार गए हैं. उन्हें कांग्रेस के विजेंद्र चौधरी ने हराया. मंत्री सुरेश कुमार शर्मा की हार का बड़ा कारण मुजफ्फरपुर में जलजमाव बना है. कहा जा रहा है कि मंत्री जी को पानी ले डूबा. मुजफ्फरपुर में इस बरसात में बड़ी नारकीय स्थिति हो गई थी. घरों और दुकानों में पानी घुस गया था. इस वजह से मंत्री जी की काफी किरकिरी भी हुई थी. सुरेश शर्मा के मंत्री रहते पटना शहर भी डूबा था. बताया जा रहा है कि लोगों का यही गुस्सा इस बार मतदान में खुल कर दिखा है.
राजपुर विधानसभा सीट से मंत्री संतोष कुमार निराला चुनाव हार गए हैं. 2015 की नीतीश सरकार में संतोष कुमार निराला परिवहन मंत्री रहे हैं. वे कांग्रेस के विश्वनाथ राम से चुनाव हारे हैं. यहां से भी लोजपा के प्रत्याशी निर्भय निराला ही हार की वजह हैं.
बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार जमालपुर से हार गए हैं. यहां भी हार की वजह लोजपा ही है. इस हार में लोजपा के दुर्गेश कुमार ने बड़ी भूमिका निभाई है. शैलेश कुमार कांग्रेस के अजय कुमार सिंह से चुनाव हारे हैं.
घोसी विधानसभा से सीट बदल कर जहानाबाद गए बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा चुनाव हार गए हैं. यहां से राजद के सुदय यादव ने वर्मा को हराया है. शिक्षा मंत्री के सीट बदलकर जहानाबाद जाने को लेकर वहां की जनता ने विरोध किया था. यहां तक कि कृष्णनंदन वर्मा के सामने जहानाबाद की जनता ने खरी-खरी सुनाई थी.
बिहार के खनन मंत्री बृज किशोर बिंद ने भगवान शिव की जाति बताई थी. वो चैनपुर से चुनाव हार गए हैं. चुनाव प्रचार में गए थे तो मतदाताओं से कहा कि जब वो यहां से विधायक थे, तो किसी प्रकार की मुसीबत नहीं थी, लेकिन हम हार गए तो यहां अकाल आ जाएगा, फसलें खराब हो जाएगी. ये विडियो तुरंत वायरल हो गया. मतदाताओं को ये पसंद नहीं आया और जनता ने उन्हें चुनाव हरा दिया.
हथुआ से जदयू विधायक व समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह अपने क्षेत्र से चुनाव हार गए हैं. लोजपा से रामदरस प्रसाद की वजह से ये चुनाव हारे हैं. यहां राजद के राजेश सिंह ने चुनाव जीता है.
जिले के अजंता थाना क्षेत्र के शिवना गांव के व्यापारी अखिलेश गुप्ता के रिश्तेदार से 50 लाख रुपए की फिरौती वसूलने के लिए उन्हें अगवाह करने का प्रयास करनेवाली टोली का 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश करने में औरंगाबाद ग्रामीण अपराध शाखा व अजंता पुलिस कामयाब हुई है. पुलिस ने व्यापारी को अगवाह करनेवाले टोली के चारों सदस्यों को गिरफ्तार कर उनसे 1 पिस्तौल, 1 जिंदा कारतूस, मोटर साईकिल व 3 मोबाइल हैंडसेट जब्त किए.
औरंगाबाद ग्रामीण की एसपी मोक्षदा पाटिल ने बताया कि रविवार की शाम शिवना ग्राम निवासी 45 वर्षीय अखिलेश सुधीर गुप्ता खेती का काम समाप्त कर कार क्र. एमएच 19-एई 6286 में सवार होकर अपने साथियों के साथ घर की ओर निकले थे. तभी अज्ञात तीन लोगों ने उनकी कार को रोककर वहां हंगामा खडा कर व्यापारी अखिलेश गुप्ता का अपहरण करने का प्रयास किया. बदमाशों ने इस समय फायरिंग भी की, जिससे परिसर के खेत में काम करनेवाले लोग कार की ओर दौडे. लोग जमा होते देख आरोपी वहां से फरार हुए. इस घटना से घबराएं अखिलेश गुप्ता ने अजंता थाना पहुंचकर पुलिस को घटना की सूचना दी.
इधर, इस घटना की जानकारी एसपी मोक्षदा पाटिल को मिलने पर उन्होंने इसे गंभीरता से लेकर अपराध शाखा टीम को भी इस घटना की जांच के आदेश दिए. एसपी के आदेश पर अपराध शाखा के पीआई भागवंत फुंदे व उनके सहकर्मियों जांच शुरू करने पर पुलिस को जानकारी मिली कि शिवना निवासी 23 वर्षीय युवक कृष्णा माणिक काले ने अपने सहयोगियों के साथ 50 लाख रुपए की फिरौती वसूलने व्यापारी अखिलेश गुप्ता को अगवाह करने का प्रयास किया.
इसी जानकारी पर ग्रामीण अपराध शाखा टीम व अजंता पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पहले टोली के प्रमुख कृष्णा काले को गिरफ्तार किया. उसके द्वारा दी गई जानकारी पर पुलिस ने जालना जिले के भोकरदन तहसील के आडगांव भोंबे निवासी 28 वर्षीय सागर संतोष सोनुने, वैभव गणेश कालविले निवासी नाटवी-तहसील सिल्लोड तथा सचिन चिंटू सोनवने निवासी कांचन नगर जलगांव को गिरफ्तार किया. पुलिस ने इन बदमाशों से 1 लाख से अधिक का माल जप्त किया.
यह कार्रवाई एसपी मोक्षदा पाटिल, डीवाईएसपी विशाल नेहुल के मार्गदर्शन में ग्रामीण अपराध शाखा के पीआई भागवंत फुंदे, एपीआई गिरीधर ठाकुर, पीएसआई संदीप शेलके, हेड कांस्टेबल बालू पाथ्रीकर, नामदेव सिरसाठ, विक्रम देशमुख, राजेन्द्र जोशी, पुलिस नाईक संजय भोसले, उमेश बकले, योगेश तरमाले, बाबा नवले, ज्ञानेश्वर मेटे, जीवन घोलप, संजय तांदले, अंजता थाने के अक्रम पठाण, आबासाहाब आव्हाड, निलेश निरसकर, पुलिस नाईक रविकिरण भारती ने पूरी की.
दीपावली, छठ पूजा आदि त्यौहार पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेल प्रशासन ने पुणे – गोरखपुर के बीच त्यौहार विशेष गाड़ी चलाने का निर्णय लिया है.
इसके तहत पुणे – गोरखपुर – पुणे द्विसाप्ताहिक त्यौहार विशेष गाड़ी सं .02031 पुणे – गोरखपुर 14 नवंबर से 21 नवंबर तक प्रति मंगलवार एवं शनिवार को पुणे से 16.15 बजे रवाना होकर अगले दिन 22.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. त्यौहार विशेष गाड़ी सं. 02032 गोरखपुर – पुणे 16 नवंबर से 23 नवंबर तक प्रति गुरुवार एवं सोमवार को गोरखपुर से 01:15 बजे रवाना होकर अगले दिन 08.05 बजे पुणे पहुंचेगी.
पुणे रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झंवर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि, इस गाड़ी की कुल 6 फेरियां होंगी तथा इसमें 01 एसी टू टियर, 04 एसी थ्री टियर, 11 स्लीपर एवं 04 द्वितीय श्रेणी सिटिंग कोच होंगे एवं रास्ते में अहमद नगर, मनमाड़, भुसावल, इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी.
गाड़ी सं. 02031 की बुकिंग 11 नवंबर से शुरू हो रही है. यह विशेष गाड़ी पूरी तरह आरक्षित होगी तथा इसमें विशेष प्रभार लागू होगा एवं यात्रा करने हेतु अग्रिम आरक्षण आवश्यक है. जिन यात्रियों के पास कन्फर्म टिकट होंगे उन्हें ही यात्रा की अनुमति होगी. यात्रियों से अनुरोध है कि कोरोना महामारी के चलते रेल यात्रा हेतु जारी मार्गदर्शक सूचनाओं, जैसे यात्रा के दौरान मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंस, सेनिटाइजर का उपयोग आदि का पालन करें.
मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे बीजेपी के पक्ष में आये हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के ख़ास समर्थक माने जाने वाले गोविन्द सिंह राजपूत की बड़ी जीत हुई है. सुरखी विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी गोविन्द राजपूत ने कांग्रेस प्रत्याशी पारूल साहू को 40 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया है.
सुरखी विधानसभा उपचुनाव की मतगणना में शुरुआत से ही बीजेपी प्रत्याशी गोविन्द राजपूत आगे चल रहे थे, कुछ ही राउंड में पारुल साहू ने बढ़त बनाई. लेकिन सातवें राउंड के बाद बीजेपी प्रत्याशी की लीड लगातार बढ़ती गईं और 24 वे राउंड में 40990 मतों से भाजपा के गोविंद सिंह की जीत हुई.
कई मायनों में यहां का उपचुनाव रोचक रहा. सिंधिया के साथ कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर गोविन्द राजपूत ने चुनाव लड़ा. वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा छोड़ कर आई पूर्व विधायक पारुल साहू को टिकट दिया. दोनों प्रत्याशियों के बीच राजनीतिक लड़ाई पुरानी रही है. जब गोविन्द सिंह भाजपा में आये तो पारुल साहू ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. कांग्रेस ने जहां अन्य सीटों पर दल बदल को मुद्दा बनाया लेकिन यहां दोनों ही प्रत्याशी दल बदल मैदान में थे. लेकिन जनता ने गोविन्द राजपूत को जीत का तोहफा दिया.
मतगणना से पहले ही सोमवार को बीजेपी प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत की जीत के पोस्टर लगने से राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई थी. बीजेपी ने जहां अपनी जीत सुनिश्चित बताई थी, वहीं कांग्रेस ने इमरती देवी के कलेक्टर वाले बयान से जोड़ते हुए इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे.
सुरखी विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रभारी और म.प्र. शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने क्षेत्र के मतदाताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं को इस विजयश्री का श्रेय देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया है. मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि, कांग्रेस के नेता पिछले छह महीनों से जनता में जो भ्रम फैला रहे थे, उसे सुरखी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत को जिताकर कांग्रेस को खारिज कर दिया है. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव को कांग्रेस की अनैतिकता, असत्य जनता से वादा खिलाफी के खिलाफ एवं जंग की तरह लड़ा और जीत हासिल की.