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Monday, August 10, 2026
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सिर्फ और सिर्फ रणबीर ही होंगे मेरे ‘बिगड़े नवाब’-निर्देशक संजय गुप्ता

शिखा पाण्डेय,
‘वेक अप सिड’ के ‘बेशरम’ बॉय रणबीर कपूर की ‘ये जवानी है दीवानी’, निर्देशक संजय गुप्ता को कुछ इस कदर भा गई है, कि उन्होंने इस अजब स्टार के लिए गजब कहानी तैयार कर ली है, जिसका टाइटल होगा ‘बिगड़े नवाब’। संजय गुप्ता ने निश्चय किया है कि वे अपनी आगामी फिल्म ‘बिगड़े नवाब’ में सिर्फ, सिर्फ और सिर्फ रणबीर कपूर को ही लीड रोल में कास्ट करेंगे।

गुप्ता ने तय कर लिया है कि बिगड़े नवाब की स्क्रिप्ट को रणबीर कपूर के अलावा और किसी भी हीरो को नहीं सुनाया जाएगा।  संजय गुप्ता की इस ज़िद का कारण यह है कि उनके मुताबिक यह कहानी सिर्फ रणबीर कपूर पर सूट होती है। उनका कहना है कि कहानी लिखते वक्त ही उनको सिर्फ रणबीर का ही ध्यान रहा है। इतना ही नहीं जब से उन्होंने ‘ऐ दिल है मुश्किल ‘ में रणबीर का काम देखा है, ‘बिगड़े नवाब’ के लिए उनकी सोच और पक्की हो गई है।

अब संजय गुप्ता ने तो अपनी ओर से यह दृढ़ निश्चय कर लिया है कि रणबीर के अलावा कोई नहीं, लेकिन रणबीर इस फिल्म के लिए हाँ कहेंगे या नहीं , यह अभी तय नहीं है, क्योंकि रणबीर की आगामी फिल्मों में पहले ही से ‘जग्गा जासूस’, उसके बाद संजय दत्त पर बनने वाली बायोपिक और उसके बाद अयान मुखर्जी की फिल्म ‘ड्रैगन’ कतार में खड़े हैं। हालांकि संजय गुप्ता भी इन दिनों रितिक रोशन और यामी गौतम स्टारर ‘काबिल’ की काबिलियत सिद्ध करने की दिशा में व्यस्त हैं। आपको बता दें कि उनकी यह फिल्म एक नेत्रहीन मिमिक्री आर्टिस्ट पर आधारित है। इस फिल्म को अगले साल 26 जनवरी को शाहरुख़ की ‘राईस’ के टक्कर में रिलीज़ किया जाना है।

आज से ताजनगरी आगरा में शुरू होगा बर्ड फेस्टिवल

सौम्या केसरवानी,

उत्तर प्रदेश का आगरा शहर अब तक सिर्फ ताजमहल और आगरा के किले के लिए ही जाना जाता था, मगर अब वहां चिड़ियों की चहचाहाहट गूंजेगी। आज से आगरा में बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन हो रहा है। हालांकि, आगरा के स्थानीय निवासियों में इसके प्रति ज्यादा उत्सुकता नजर नहीं आती है मगर देश विदेश से बड़े-बड़े सैलानी इसमें शिरकत करने के लिए पहुँच चुके हैं।

बीते साल से शुरू बर्ड फेस्टिवल के कारण विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। आगरा के जरार स्थित चम्बल सफारी में यह बर्ड फेस्टिवल 2 से 4 दिसंबर तक आयोजित है।

आज इसका उद्घाटन प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अभिषेक मिश्र द्वारा किया जाएगा। 3 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इसमें शामिल होंगे। दुनिया भर के 26 देशों के 40 विशेषज्ञ इस फेस्टिवल में चर्चा करने आ रहे हैं। इनमें इटली, अमेरिका, यूके, फ्रांस, जर्मनी सहित कई अन्य देशो के विशेषज्ञ शामिल है।

इस फेस्टिवल में भारत के पक्षियों की प्रजाति, उनकी स्थिति, भारतीय चिड़ियों के पतन को रोकने की दिशा के बारे में चर्चा की जाएगी।

RSS एक लत है, आदत पड़ जाए तो इंसान और कहीं नहीं जा सकता -मोहन भागवत

अनुज हनुमत,

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मौजूदा प्रमुख मोहन भागवत अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं। इस बार उन्होंने आरएसएस को दुनिया में मानव विकास का एक अनूठा मॉडल बताते हुएे कहा कि लोग अपनी इच्छा से संघ में शामिल होने या इसे छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन इस संगठन को समझने के लिए व्यक्ति को खुले विचार का होना चाहिए।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ये बात संगठन की स्थापना के 90 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए कोशिश करना महत्वपूर्ण है। लेकिन आरएसएस को समझने के लिए व्यक्ति को खुले विचार का होना चाहिए और उसके भीतर जिज्ञासा होनी चाहिए।

भागवत ने आरएसएस को एक लत बताया और कहा कि जो इसके आदी हो जाते हैं, वे कहीं और नहीं जा सकते। यही वजह है कि कुछ लोग इस संगठन में शामिल नहीं हो सकते। कोई भी अपनी इच्छा से इसमें शामिल होने या इसे छोड़ने को स्वतंत्र है। आपको बता दें कि इस समय विपक्ष, केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार के हर फैसले के लिए संघ को दोषी मान रहा है। उसका कहना है कि सरकार में संघ का बहुत ज्यादा दखल है।

‘अकाउंट हैक’ मामले में स्वामी ने ली चुटकी,कहा,” राहुल ने कई लोगों की नाक में दम कर रखा है।”

शिखा पाण्डेय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए जितने ‘अच्छे दिन’ लेने की कोशिशें कर रहे हैं, कांग्रेस के लिए उतने ही ‘बुरे दिन’ आते जा रहे हैं। इन्हीं बुरे दिनों के तहत पहले तो पार्टी को महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के लोकल बॉडी चुनाव में शिकस्त मिली, उसके बाद इसी हफ्ते में दो बार पार्टी का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया गया। बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट हैक होने के बाद गुरुवार शाम को पार्टी का ट्विटर अकाउंट हैक हो गया! उधर कांग्रेस खेमे में इस मामले को लेकर हड़कंप मच हुआ है, और इधर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी अपने निराले अंदाज में इस विषय पर राहुल की टांग खींचते नज़र आए।

सुब्रमण्यन स्वामी ने दावा किया कि राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट किसी बाहरी ने नहीं हैक किया है, बल्कि ये किसी ‘अंदर वाले’ का ही काम है। उनका दावा है कि किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं है, बल्कि उनके किसी ऐसे जानकार शख्स ने ट्विटर अकाउंट खोला है जिसको उनका पासवर्ड पता है।

एएनआई से बातचीत के दौरान स्वामी ने कहा, “यह उन असंतुष्ट लोगों ने किया है जिनके साथ राहुल ने बुरा बर्ताव किया। किसी बाहरी ने नहीं बल्कि कोड जानने वाले लोगों ने ही इसे हैक किया है।” स्वामी ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अपने दफ्तर में बहुतों को परेशान किया है, कइयों की नाक में डैम कर रखा है, और ये उन्हीं में से किसी का काम है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंटं हैक कर हैकर्स ने गाली-गलौज वाले ट्वीट भी किए। राहुल के ट्विटर हैंडल का नाम तक बदल डाला। इसके बाद अगले ही दिन कांग्रेस का ट्विटर हैंडल हैक हो गया। कांग्रेस ने ईमेल के भी हैक होने की आशंका जताते हुए इस मामले में सरकार से मदद मांगी है।

पार्टी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रणदीप सुरजेवाला ने इसे आजाद भारत की सबसे घटिया राजनीतिक घटना बताया और सरकार से इस मामले में जांच की मांग की है। सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। दिल्ली पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच कर रही है।

नोटबंदी को लेकर केंद्र ने जनता को उलझाने का काम किया- सीएम अखिलेश यादव

सौम्या केसरवानी,
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार 1 दिसम्बर को राजधानी लखनऊ में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ मेट्रो का उद्घाटन किया। इस दौरान कार्यक्रम में सपा प्रमुख, सपा प्रदेश अध्यक्ष समेत कई मंत्री मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री अखिलेश ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि उनकी सरकार ने अपने सभी घोषणापत्र के वादे पूरे कर लिए हैं और वाराणसी में भी मेट्रो चलाने की बात कही। सीएम अखिलेश ने आगे कहा कि समाजवादियों ने कम समय में एक्सप्रेस वे का भी निर्माण कराया और पार्टी बिजली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी लगातार काम कर रही है।
उन्होंने आगे नोटबंदी के विषय पर चर्चा की। जिसमें कहा कि लोगों को अपना वेतन निकालने में परेशानी हो रही है। पहले केंद्र ने कहा कि 50 दिन लगेंगे और अब कह रहे हैं कि महीनों लगेंगे। नोटबंदी को लेकर केंद्र ने जनता को उलझाने का काम किया है। बैंकों की ब्रांचों में करंसी नहीं पहुँच रही है।

सोने पर भी कसा शिकंजा, अब सीमा से अधिक सोना बनेगा गले की फांस!

ब्यूरो
केंद्र सरकार ने काला धन और भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने की दिशा में जमकर कमर कस ली है। इसी के तहत सरकार ने गोल्ड, याने की सोना रखने संबंधी नई घाेषणा की है। वित्‍त मंत्रालय ने सोना रखने संंबंधी आयकर नियमों में बदलाव कर नागरिकों के पास सोना रखने की सीमा तय कर दी है। मंत्रालय के अनुसार, आयकर विभाग के छापे के दौरान शादीशुदा महिला को 500 ग्राम तक सोना रखने की छूट दी गई है। इसके अलावा अविवाहित महिलाएं 250 ग्राम तथा पुरुष 100 ग्राम सोना अपने पास रख सकते हैं। 
पुश्‍तैनी गहनों पर टैक्‍स से छूट दी गई है। 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद अघोषित आय से खरीद गए सोने पर यह नियम लागू होगा और अगर आयकर छापे के दौरान इससे ज्‍यादा मात्रा में सोना या जेवर पाया गया और उसकी काली कमाई से खरीद ना करने संबंधी साक्ष्‍य नहीं उपलब्‍ध कराए तो उसे जब्‍त कर टैक्‍स वसूला जाएगा।
कौनसा सोना होगा टैक्स फ्री-
-जारी किए गए नए नियमों के तहत जिस आय की जानकारी दी जा चुकी है, उससे खरीदा गया सोना करमुक्‍त रहेगा। 

-जिस आय पर टैक्‍स नहीं लगता है, उससे या उचित घरेलू बचत के पैसों से खरीदे गए सोने पर भी टैक्‍स नहीं लगेगा। 

-पुश्तैनी गहनों और इनकम टैक्‍स रिटर्न में बताई गई अामदनी के पैसों से खरीदे गए सोने पर भी टैक्‍स नहीं लगेगा।
आपको बता दें कि 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान होने के बाद बड़ी मात्रा में सोने की खरीद-बिक्री की खबरें आने के मद्देनजर यह ऐलान किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से नोट बंदी के ऐलान के बाद अगले दो दिन साेने की अवैध खरीद किए जाने की शिकायत पर दिल्‍ली के कई सर्राफा प्रतिष्‍ठानों पर छापेमारी की गई थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश में सबसे ज्‍यादा काला धन रियल एस्‍टेट और सर्राफा में ही है। छापेमारी के विरोध में सर्राफा कारोबारी हड़ताल पर चले गए थे।

खतरे में भारतीय राजनीति, राष्ट्र के नाम 52 सेकंड भी देने में असहाय नेता!

जटाशंकर पाण्डेय

उच्चतम न्यायालय का एक बड़ा फैसला आया है कि पूरे देश के सिनेमा घरों में अब फिल्में दिखाने से पहले पर्दे पर तिरंगा दिखेगा, फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे भारत  भाग्य विधाता’ बजाया जाएगा। इसके सम्मान में सब दर्शक खड़े होंगे, जिसके बाद फिल्म शुरू की जाएगी। चलिए इसी बहाने कम से कम कुछ लोगों को राष्ट्रगान याद तो आएगा। शायद कुछ लोगों की राष्ट्र के प्रति श्रद्धा उपज जाए।

आज आलम यह है कि भाग दौड़ भरे इस माहौल में पूरे देश के लोग अपने निजी जीवन में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि देश के बारे में सोचने के लिए उन्हें जरा भी फुर्सत ही नहीं है। तमाम ऐसे लोग हैं, जिनको राष्ट्रगान याद भी नहीं होगा। शायद यह बात गलत लग सकती है, लेकिन हर भारतीय अपने आप में गा कर देखे कि क्या आपको राष्ट्रगान याद है? आपको उत्तर खुद मिल जायेगा।

कई बार मीडिया द्वारा या अन्य तरीकों से किए गए सर्वे में ऐसा पाया गया है कि अशिक्षित से लेकर शिक्षित वर्ग तक, कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें राष्ट्रगान पूरी तरह नहीं आता। हमें भारतीय होने का गर्व जरूर है लेकिन भारतीय होने का एहसास बहुत कम है। भारतीय होने का पहला चरण यही है कि हमें मालूम होना चाहिए कि हमारा राष्ट्रगान क्या है।

‘विविधता में एकता’ वाला हमारा देश, इतनी जातियां, इतने धर्म, इतनी भाषाएं, इतनी पार्टियां, इतने विचार, सब अलग-अलग हैं। परंतु इन सभी भिन्नताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ता है हमारा ‘राष्ट्रगान’। जहां राष्ट्र की बात आए, हमें एक होने का एहसास दिलाता है यह राष्ट्रगान। विविध धर्म की विविध मान्यताएं, भिन्न समाज की भिन्न प्रथाएं, भिन्न लोगों का भिन्न खान-पान भिन्न विचार, सब भिन्न भले हो, परंतु जहां राष्ट्र हित की  बात आए, राष्ट्रीय एकता की बात आए, हमें अपनी सभी भिन्नताओं को  भुला कर एकता की शक्ति दिखानी चाहिए।

राजनीतिक गलियारों की यदि बात करें, तो एकता का दूर दूर तक नाम-ओ-निशान नहीं दिख रहा। भाजपा इस फैसले का हर्षोल्लास से स्वागत कर रही है। भाजपा का कहना है कि इससे राष्ट्रवाद की भावना और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार को मजबूती मिलेगी। भाजपा का कहना है, “हम इस फैसले के लिए अदालत की सराहना करते हैं। इससे राष्ट्रवाद की भावना मजबूत होगी। राष्ट्रीय एकता और तिरंगा हमें एक राष्ट्र के तौर पर एकजुट करता है एवं इससे एकता को और मजबूती मिलेगी।”

दूसरी ओर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष अससुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोगों के दिलों में इससे राष्ट्रभक्ति उपजेगी? ओवैसी का कहना है,  “इस आदेश का पालन तो करना है, लेकिन सवाल यह है कि क्या राष्ट्रगान के वक़्त लोगों का खड़ा होना जरूरी है? क्या इससे देशभक्ति या राष्ट्रवाद बढ़ाने में मदद मिलेगी ?”

राष्ट्रीय एकता व राष्ट्र सम्मान की ओर कदम बढ़ाने के प्रयास में ही इतना बिखराव है। तमाम अलग अलग पार्टियों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं! क्या राष्ट्रगान यह संदेश देता है? रोज़, हफ्ते, पखवाड़े, महीने में कहाँ किसी को राष्ट्रगान की याद आती है? हाँ, फिल्में आप हर तीसरे दिन देखते होंगे। कम से कम उसी बहाने राष्ट्रगान का सम्मान कर लीजिए।

राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना भले आपके राष्ट्रभक्त होने या न होने का प्रमाण न देता हो, लेकिन अन्य जानवरों से अलग, सामाजिक प्राणी होने के नाते, भावनाओं से भरा होने के नाते, कहीं न कहीं राष्ट्रगान राष्ट्र की भावनाओं से जुड़ा है और अगर इसके सम्मान में 52 सेकंड खड़ा होना ही पड़ जाये, तो कोई ख़ास हानि भी तो नहीं होगी ना?

विश्व एड्स दिवस: एड्स पीड़ितों का निरादर क्या इस रोग के वायरस को और मज़बूत बना रहा है?

अनुज हनुमत,

पूरा विश्व आज एड्स दिवस मना रहा है। आज भी इस ‘वैश्विक कलंक’ के खिलाफ मानव जाति की जंग जारी है। जन स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक माने जाने वाले हयूमन इम्यूनोडिफिसिएंसी वायरस (एचआईवी), एड्स के मामलों में यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक़ वैश्विक स्तर पर गिरावट देखने को मिली है। 29 साल की जंग के बाद भारत में भी एचाआईवी/एड्स के मामलों में कमी दर्ज की गई है।

देश में इस तरह का पहला मामला मामला 1996 में दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ सफलता से उत्साहित सयुंक्त राष्ट्र ने वैश्विक रूप से इस वाइरस और एड्स बीमारी से पूरी तरह से निजात पाने के संकल्प के साथ इस साल की थीम ‘एचआईवी पीड़ितों की संख्या शून्य तक ले जाना’ निर्धारित की है।

विश्व एडस दिवस पर हम सभी को यह समस्या याद सी आ जाती है। भारत में एडस रोगियों की समस्या में बढोत्तरी हो रही हैं। एड्स फैलने का मुख्य कारण है, इस बीमारी के प्रति लोगों में जानकारी का अभाव। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का आभाव होना इसका प्रमुख कारण है। जबकि भारत जैसे विशाल देश में यह आसान काम नही हैं कि स्वास्थ्य के प्रति लोगों को घर-घर जाकर समझाया जा सके। सरकार का प्रयास भी काम चलाऊ लगता है। विकासशील भारत की भौगिलिक स्थिती ऐसी है, जिस वजह से हर स्थान पर सूचनाएं देना सम्भव नहीं है।

लोगो को एड्स के प्रति जागरूक करने के मकसद से 1988 से हर वर्ष एक दिसम्बर को विश्व एड्स मनाया जाता है। एड्स को तमाम जागरूकता, अभियानों के बावजूद अब भी एक संक्रमण नहीं, बल्कि सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है। घर-परिवार और समाज से लेकर कामकाज की जगहों तक में एचआईवी/ एड्‌स से ग्रस्त लोग अपमान, प्रताड़ना और भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। यदि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षण को देखें, तो आने वाले दिन में इन एडस रोगियों की संख्या में कुछ सुधार के आसार हैं। पर क्या इस तरह की सरकारी बातों को माना जा सकता है। ये तो आने वाले दिन ही बतायेंगे। फिर भी एडस से पीड़ित रोगियों के लिए पर्याप्त संसाधन की व्यावस्था न होने के कारण इन रोगियों की बची हुई जिंदगी आसान नहीं रह जाती है। तो क्या इस तरह से जीवन के एक पल को घुट-घुट कर जी रहे लोगों को हम लोगों को मदद नहीं करनी चाहिए! वैसे तो भारत में कई गैर सरकारी संगठन इन रोगियों के लिए काम कर रहें हैं, पर ये संगठन मात्र दिखावा ही लगते है।

एचआईवी एड्स महज एक मेडिकल समस्या नहीं है, यह सामाजिक संकट बनती जा रही है। एक समय लोग सोचते थे कि भारत जैसे देश में यह रोग तेजी से नहीं फैलेगा, क्योंकि यहां सामाजिक नियम बड़े कड़े हैं। जाहिर है कि यह बात गलत साबित हुई। आज अगर ग्रामीण इलाकों के लोग भी इस रोग की चपेट में आ रहे हैं तो उसका मतलब यह है कि समाज के ऐसे कई पहलू हैं जिनको हमने नहीं समझा है। आइये हम मिलकर इस एडस दिवस पर ये संकल्प ले कि हम इन रोगियों को प्यार एवं आर्थिक मजबूती देगें। इस बीमारी को खत्म करने के लिए प्रयास करेगें।

दिल्ली में कोहरे के कारण विमान सेवाओं पर असर, दिल्ली आने-जाने वाली 85 ट्रेनें लेट

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

दिल्ली-एनसीआर में आज लगातार दूसरे दिन भी घना कोहरा छाया हुआ है। दिल्ली सहित आसपास के कई इलाके घने कोहरे में लिपटे हुए हैं। घने कोहरे की वजह से रेल और विमान सेवाओं पर भी असर पड़ा है। दिल्ली एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम देखी गई, जिसके कारण उड़ानों को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। इस दौरान 50 उड़ानों को रोक दिया गया।

कुछ देर बाद जब दिल्ली एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी थोड़ी ठीक हुई, तब जाकर विमानों का परिचालन शुरू हुआ, जिसमें पांच फ्लाइट्स का रूट बदल दिया गया। कोहरे की वजह से कई फ्लाइट्स में देरी हुई है।

घने कोहरे की वजह से  रेल सेवा भी प्रभावित हुई है। दिल्ली आनेवाली 60 से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है। दिल्ली से जानेवाली 25 ट्रेनें देरी से चल रही है। साथ ही 5 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। रेल और विमान सेवाओं के अलावा सड़कों की रफ्तार भी काफी धीमी हो गई है। सड़कों पर दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में गाड़ियां तकरीबन रेंग रही है।

गौरतलब है कि दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी पिछले दो दिनों से कोहरा छाया हुआ है, जिसके कारण यातायात और विमान सेवाएं कुछ हद तक प्रभावित हुई हैं। ठण्ड अधिक बढ़ने की खबर तो नहीं है, पर कोहरे के कारण लोगों की दिनचर्या अवश्य प्रभावित हुई है।

ममता ने घुमा फिर कर नितीश पर निकाल ली अपनी भड़ास, उन्हें बता दिया गद्दार!

शिखा पाण्डेय,
नोट बंदी के कारण विपक्ष द्वारा ‘देश बंदी’ का बनाया गया सुपर प्लान फ्लॉप हो जाने से सभी विरोधी अच्छे खासे नाराज हैं। उस पर से बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और उनकी पार्टी द्वारा नोट बैन के समर्थन से तो कई लोग जल भुन कर खाक हो गए हैं। इसे लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना गुस्सा दबा नहीं पायीं और अंततः अपना क्रोध जाहिर ही कर दिया। उन्होंने परोक्ष रूप से नितीश कुमार को गद्दार करार दे दिया।

बुधवार को पटना में नोटबंदी के खिलाफ एक बड़ी रैली थी। इस रैली में बिहार सरकार में गठंधन सहयोगी राजद के नेता तो पहुंचे लेकिन जद (यू) से कोई नहीं पहुँचा। जद (यू) के रैली से दूरी बनाए रखने से ममता बनर्जी बिलकुल खुश नज़र नहीं आईं और उन्होंने इशारों इशारों में सीएम नीतीश कुमार को गद्दार बता दिया। पटना रैली के दौरान ममता ने कहा कि नोटबंदी पर जो लोग उनका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे गद्दार हैं। भले ही ममता ने नीतीश कुमार का नाम नहीं लिया, पर बिहार की राजधानी में आकर ऐसा बयान दिए जाने को स्वाभाविक तौर पर नीतीश से ही जोड़ कर देखा जा रहा है।

पटना के गर्दनीबाग में नोटबंदी के खिलाफ धरना देने पहुंचीं ममता के साथ मंच पर आरजेडी के नेता भी मौजूद थे। आरजेडी की ओर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे और वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह धरने में शामिल हुए। ममता ने यहां नरेंद्र मोदी को तो निशाना बनाया ही, साथ ही परोक्ष रूप से नितीश पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, “जो पार्टियां नोटबंदी के मुद्दे हमारा समर्थन कर रही हैं, मैं उन्हें शुक्रिया अदा करती हूं और जो समर्थन नहीं कर रहे हैं वे गद्दार हैं।”

ममता ने केंद्र सरकार को घेराते हुए कहा कि मौजूदा हालात आपातकाल से भी बदतर हैं। यह आर्थिक आपातकाल है। उन्होंने कहा, “भीख मांग कर खाएंगे, सड़क पर रहेंगे पर आपका पैसा नहीं चाहिए।” तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ने कहा, “दिक्कत के समय घर की महिला बचत करती है, मोदी ने सब ले लिया। यह स्त्रीधन और स्त्री शक्ति का अपमान है।” ममता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बच्चे आजकल कहते हैं कि पेटीएम के लिए दूसरा शब्द ‘पे पीएम’ है।

ममता की नाराज़गी का एक बड़ा कारण यह भी था कि मंगलवार रात जब पटना रैली के लिए ममता पटना पहुंचीं उन्हें वहां रिसीव करने नीतीश कुमार ने एयरपोर्ट पर नहीं पहुंचे और ना ही कोई सीनियर मंत्री पहुंचा। हालांकि बाद में वो आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव  के घर पहुंचीं, जहां उनका स्वागत किया गया।