पीएम नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे का असर दिखने लगा है, अमेरिका में भारतीय नागरिकों को ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम में जगह दे दी गई है। अब भारतीयों को भी अमेरिका में प्री-अप्रूवल, लो-रिस्क यात्री का दर्जा मिलेगा।
भारत अब अमेरिका की इस लिस्ट में शामिल होने वाला 11वां देश हो गया है। यह कस्टम-बॉर्डर प्रोटेक्शन की पहल से हुआ है। अब अमेरिका के कुछ चुनिंदा एयरपोर्टों पर भारतीयों को भी प्री-अप्रूवल के बाद सीधे तौर पर एंट्री मिलेगी, उन्हें कस्टम ऑफिसर्स के सवालों का सामना नहीं करना होगा। इसके लिए पहले लोगों को अपने फिंगरप्रिंट्स, पासपोर्ट आदि अन्य कुछ कागजात देने होंगे, जिससे वे ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम के हिस्सा बनेंगे।
कस्टम-बॉर्डर प्रोटेक्शन की वेबसाइट के मुताबिक, भारतीय नागरिक भी अब हमारे भरोसेमंद यात्री बन गए हैं। ग्लोबल एंट्री के तहत अमेरिका में कुल 53 एयरपोर्ट हैं और 15 प्री-अप्रूवल लोकेशन हैं।
25 और 26 जून को अमेरिका दौरे पर गए पीएम मोदी को अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना सच्चा दोस्त बताया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार और आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर समझौते हुए और इसके अलावा भारत और अमेरिका की मजबूत दोस्ती का वादा भी किया।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चुनाव से पहले और चुनाव के बाद वादों की पोटली रख दी थी, जिसमें सड़को को गढ्ढ़ो से मुक्त करने का भी एक वादा था। जिसकी तारीख़ भी तय कर दी गई थी, उस तारीख़ को बीते 15 दिन हो गए हैं पर अभी तक सड़क में गढ्ढों का कोई खास सुधार नहीं दिखा है।
बता दें कि योगी सरकार ने अपनी सरकार के सौ दिन पूरा होने के मौके पर यूपी के सरकार की उपलब्धियां गिनाई। सड़क को गढ्ढों से मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करने वाले योगी ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। मुख्यमंत्री की तरफ से इस बात के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि यूपी की सड़कों को 15 जून तक गड्ढा मुक्त बना दिया जाएगा, जिस पर सरकार की तरफ से कहा गया कि 63% तक यूपी के सड़कों को गढ्ढों से मुक्त कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार बता दें कि पीडब्ल्यूडी यानी लोकनिर्माण विभाग ने केवल अभी तक 85 हजार 942 किलोमीटर सड़क में से 57 हजार 378 किलोमीटर सड़क के गड्ढे भर पाई, जबकि पंचायती राज विभाग को 3890 किलोमीटर सड़क के गड्ढे भरने के लिए कहा गया था, जिसने सिर्फ 191 किलोमीटर के गड्ढे भरे हैं। वहीं सिंचाई विभाग ने तो केवल फाइल में ही 9668 किलोमीटर सड़क को गढ्ढा भरने का वादा किया था, जिसमें से एक भी किलोमीटर का काम नहीं हुआ है। मतलब साफ है कि इस तरह 1 लाख 21 हजार 816 किलोमीटर में से अब तक सिर्फ 61 हजार 433 किलोमीटर सड़क ही गड्ढामुक्त हो पाई है बाकी के केवल फाइल में ही दबे हुए हैं।
सीएम योगी ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि गड्ढामुक्त सड़कों के लिए हम लोगों के पास पैसा नहीं था, क्योंकि खजाना तो खाली था। अधिकतर मार्गों को गड्ढामुक्त हम लोगों ने किया है, लेकिन आने वाले समय जो मार्ग बचेंगे, बरसात के बाद प्रदेश के अंदर युद्धस्तर पर उन कार्यों को लेकर के हम प्रदेश को पूरी तरह गड्ढामुक्त सड़कें देंगे।
100 दिन पूरे होने पर सरकार ने बजट का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया है कहा है कि सरकार के पास बजट की कमी है, पूरा होने पर काम हो जाएगा।
राहुल गांधी विदेश से छुट्टियां मनाकर भारत वापस आ गये हैं और उनके वापस आते ही कांग्रेस ने जीएसटी समेत कई मसलों पर सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जीएसटी से सरकार ज्यादा टैक्स कमा रही है, उन्होंने खासकर एलपीजी को जीएसटी के दायरे में लाने की आलोचना की है।
चीन से तनाव पर माकन ने कहा कि एक तरफ चीन की तरफ से सरहद पर सीमा का उल्लंघन हो रहा है, दूसरी तरफ सरकार इसको मानती ही नहीं कि ये घुसपैठ चीन की तरफ से हो रही है। माकन ने कहा कि हमारे देश को पीएम के विदेशी दौरों से कोई फायदा नहीं हो रहा, पीएम का यह 65वां दौरा है। पीएम के दौरे करने से कोई उपलब्धि भी नहीं हो रही है।
कांग्रेस ने जीएसटी लागू करने की घोषणा के लिए 30 जून की आधी रात को बुलाई गई संसद की विशेष बैठक का भी बहिष्कार किया था, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, आनंद शर्मा और रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस की आपत्तियों को साझा किया था। गुलाम नबी आजाद ने आजादी के कार्यक्रमों का हवाला देने के बाद देश में मॉब लिन्चिंग की घटनाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों, महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को लेकर भी केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकारों पर निशाना साधा था।
जम्मू कश्मीर मे हुआ बड़ा आतंकी हमला जिसमें एक पुलिसकर्मी हुआ गंभीर रूप से घायल। इस आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए पुलिसकर्मी का नाम कॉनस्टेबल गुलाम हसन बताया जा रहा है।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार गर्दन पर गोली लगने से उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हमले के तुंरत बाद गुलाम हसन को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें आर्मी के बेस अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घायल हुए कॉनस्टेबलकी स्थिति काफी नाजुक बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार कॉन्सटेबल पर नजदीक से गोली चला दी थी, जिससे हालत ज्यादा खराब हो गई। जिसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कई अन्य जवानों के भी घायल होने की खबर बताई जा रही है।
बता दें कि यह हमला अनंतनाग और पहलगाम मार्ग पर हुआ है। सभी पुलिसकर्मी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात थे। हमले के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश तेज कर दी है।
गौरतलब है कि इसके पहले कश्मीर बनेगा दारुल इस्लाम का नारा देने वाले दुर्दांत आतंकी जाकिर मूसा पर नकेल कसते हुए सोमवार की सुबह सुरक्षाबलों ने बामनु-पुलवामा में उसके दो साथियों को मार दिया था तथा एक आतंकी को जिंदा पकड़ लिया गया था।
आम आदमी पार्टी अगले साल होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के पहले इस साल राजस्थान के छात्र संघ चुनाव में किस्मत आजमाएगी। पार्टी के राजस्थान केंद्रीय पर्यवेक्षक कुमार विश्वास ने दिल्ली में राजस्थान के कार्यकर्ताओं की बैठक में यह घोषणा की।
राजस्थान में अगस्त के तीसरे सप्ताह में छात्रसंघ के चुनाव होने वाले हैं। आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समिति राजस्थान के लगभग 100 कॉलेजों में छात्र संघ की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। छात्र संघ चुनाव में किस्मत आजमाने के बहाने आम आदमी पार्टी राजस्थान में युवाओं के बीच अपनी पकड़ बनाते हुए अपना युवा जनाधार बढ़ाना चाहती है।
कुमार विश्वास ने बैठक में हर जिले के पर्यवेक्षकों और कार्यकर्ताओं को राजस्थान के सभी कॉलेजों में सहायता डेस्क लगाने को कहा है। इसके पहले 2015 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव लड़ा था लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। राजस्थान का प्रभार दिए जाने के बाद से कुमार विश्वास लगातार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं।
कुमार विश्वास 25 जून को राजस्थान का दौरा भी कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई राजस्थान के हर कॉलेज में 6 सदस्यों वाला पैनल चुनाव लड़वाने के लिए उतारेगी। विश्वास ने राजस्थान की हर लोकसभा क्षेत्र के पर्यवेक्षकों को कहा है कि वह अपने-अपने इलाकों में कार्यकर्ताओं के घरों पर पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के साथ कार्यकर्ताओं की फोटो वाले पोस्टर लगाएं।
दिल्ली में हुई आज की बैठक में भी कुमार विश्वास पार्टी के नेताओं पर निशाना लगाने से नहीं चुके, विश्वास ने कहा कि ‘अब कोई ताकत चाहे राजस्थान की हो या दिल्ली में हमें राजस्थान विधानसभा चुनाव जीतने से नहीं रोक सकती है।
मैं कई दफ़ा सोचता हूं कि भारतीय वामपंथियों का पाकिस्तान से इतना इश्क़-मोहब्बत का रिश्ता क्यों है? उन्हें क्यों लगता है कि हिन्दुइज़्म एक बहुत पिछड़ी हुई, घटिया जीवन पद्धति है और इस्लाम सर्वश्रेष्ठ है। सर्वश्रेष्ठ कहना भी दरअसल अन्याय है। उनकी नज़र में इस्लाम कई बार ऐसा लगता है कि उसका विकल्प ढूंढने की कोशिश करने वाले जड़-मूल से बुद्धिहीन हैं। वास्तव में उसका विकल्प समूचे संसार में कोई है ही नहीं। अतः यह एकमात्र रास्ता है, जिस पर चल कर हम कम्युनिज़्म की अंतिम सीढ़ी को लांघ कर उस स्वर्गिक संसार में दाखिल हो सकते हैं, जिसकी परिकल्पना कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने की थी और जिसे अनेकानेक विद्वानों ने आगे बढ़ाया।
ईसाइयत के बारे में भी वामपंथियों के स्वर लगभग ऐसे ही हैं। अनेक वैज्ञानिकों को मौत के घाट उतारने वाला रिलीजन उन्हें वैज्ञानिक लगता है, लेकिन शून्य से लेकर अणु तक के विचार अपने धर्मग्रंथों में संजोए सनातन पिछड़ा हुआ। उनके राजनीतिक खेमे में आप विशेष गोल टोपी लगाए तो सम्मिलित हो सकते हैं, आपस में ‘अस्सलाम अलैकुम, वालेकुम सलाम’ तक कह सकते हैं और कभी ज़रूरत महसूस हो, तो आपको किसी एक-दो वक़्त की नमाज़ अदा करने की सहूलियात भी मुहैया कराई जा सकती हैं, लेकिन अगर आपने कहीं संध्या वंदन या आरती का प्रावधान करने की हिमाकत कर दी, तो आप संसार के सबसे दुर्दांत ‘भगवा आतंकवादी’।
मैं जब भी सोचता हूं, तो साफ़ दिखता है कि यह सब न विचारधारा है, न किसी ग्रन्थ का सम्मान। है, तो सिर्फ़ वोटों का गणित। अगर वाकई हिन्दू उतने ही कट्टर होते, तो आपकी हिम्मत ही नहीं होती कि उनके ख़िलाफ़ एक शब्द बोल सकें। आपका समूचा इतिहास गवाह है कि आपने हिटलर को कोसते हुए, अपनाया उसी की नीतियों को है।
मैंने विख्यात अभिनेता ए. के. हंगल की आत्मकथा पढ़ी। वे जीवन भर कराची की सेवा करते रहे। बदले में क्या मिला?
‘अबे, तू हिन्दू है। यहां क्या करेगा? भाग यहां से, वरना मारा जाएगा।’
विभाजन के वक्त उन्हें काफ़ी समय जेल में बिताना पड़ा और बड़ी मुश्किल से भारत आ पाए।
ऐसा भी नहीं है कि यह सिर्फ़ एक हंगल की दास्तान हो। अनेकानेक कलाकार हैं, जिन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया कि वे पाकिस्तान छोड़ कर भागने को विवश हुए या घुट-घुट कर जीते रहे।
सज्जाद ज़हीर को याद करें। उनकी सुपुत्री नूर ज़हीर इंडिया की तानाशाही के ख़िलाफ़ सक्रिय हैं, लेकिन जिस पाकिस्तान से उनके अब्बा हुजूर को डंडे मार कर भगाया गया था, उसके ख़िलाफ़ एक लफ़्ज़ उनके श्रीमुख से सुन पाना दुर्लभ है। उन्हीं के रिश्तेदार कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राज बब्बर के बयान ही देख लें। कुछ समझ आता है? इनसे पूछें, सज्ज़ाद ज़हीर को पाकिस्तान से क्यों भागना पड़ा?
ऎसी शख़्सियात की एक लम्बी सूची है, जिन्हें पाकिस्तान को अलविदा कहने के लिए यातनाएं सहनी पड़ीं या मज़बूर किया गया। मैं सिर्फ़ कुछ शुभनाम का जिक्र करूंगा – सआदत हसन मंटो, जोश मलीहाबादी, हबीब ज़ालिब, फैज़ अहमद फैज़ आदि न जाने कितने नाम हैं, जो वहां प्रताड़ित हुए या मुल्क़ बदर हुए।
‘एक ही सफ़ में खड़े हो गए महमूदो-अयाज़’।
यह एक मशहूर काव्यपंक्ति है और उतना ही विख्यात जुमला भी। मुझे लगता है कि इस्लाम की यही ख़ासियत कम्युनिस्टों को आकृष्ट करती है कि एक कम्यून तो यहां पहले से मौजूद है। फिर इस जमात में वामपंथ आते कितनी देर लगेगी? लेकिन क्या संसार भर में ऐसा कोई एक भी उदाहरण है कि किसी इस्लामी व्यवस्था के अंतर्गत चल रहे मुल्क में कम्युनिज़्म आया हो। नहीं, एक उदाहरण नहीं है।
कम्युनिज़्म सदा टोटेमवाद अथवा उदार सभ्यताओं में जी रहे मुल्क़ों में अपनी विजय पताका फहरा पाया है और उसका हस्र उन स्थानों पर भी पाकिस्तान जैसा ही हुआ है।
क्या समय नहीं आ गया है कि वामपंथी अपनी आंखों पर चढ़ा हरा चश्मा कम से कम आज़ कम एक बार उतार कर दुनिया को एक नई दृष्टि से देख लें?
(यह आलेख वरिष्ठ पत्रकार आलोक शर्मा जी की फेसबुक वॉल से साभार उधृत है।)
वाशिंगटन: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान समेत छह मुस्लिम देशों के आवेदकों और सभी शरणाथर्यिों के लिए नई वीजा नीती तैयार की है। इन मानदंडो में अमेरिका में निकट पारिवारिक या व्यापारिक सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।
प्रशासन का यह नया कदम सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासकीय आदेश के आंशिक तौर पर बहाल करने के बाद आया है जिसे मुसलमानों पर प्रतिबंध के तौर पर देखा जा रहा था और उसकी तीखी आलोचना की जा रही थी।
बुधवार को अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को भेजे गए नए दिशा निर्देश में कहा गया है कि छह देशों के आवेदकों को माता-पिता, पति या पत्नी, बच्चे, वयस्क बेटे या बेटी, दामाद, बहू या भाई के साथ संबंधों को साबित करना होगा। तभी वह अमेरिकी वीजा पाने के हकदार होंगे।
पारिवारिक रिश्ते के अलावा उन्होंने साफ किया कि अगर अमेरिका से व्यावसायिक संबंध होंगे तो उस स्थिति में भी उसे अमेरिकी वीजा उपलब्ध कराया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने सात मुस्लिम देशों के लिए अमेरिकी वीजा पर रोक लगा दी थी।
अमेरिका के एक जज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सात मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध के फैसले पर अस्थाई रोक लगा दी थी। यूएस के दो राज्यों समेत पूरे अमेरिका में ट्रंप सरकार के फैसले को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। ट्रंप के इस आदेश से प्रभावित देशों के 60 हजार लोगों ने अपने वीजा को रद्द कर दिया था।
जिला जज जेम्स रॉबर्ट ने कहा था कि राज्यों का रुख ट्रंप के आदेश के खिलाफ है। पूरे देशभर में उनके इस आदेश के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए थे। वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस का तर्क है कि इस आदेश के बाद देश सुरक्षित बनेगा।
आज सेना प्रमुख विपिन सिंह रावत के सिक्किम दौरे को 24 घण्टे भी नहीं बीते कि चीन ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया कर दी। चीन ने कहा कि भारत युद्ध की धमकी देने बन्द करे। आपको बता दें कि चीनी सेना ने भारतीय थलसेना प्रमुख विपिन रावत की इस टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है कि भारत ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार है । चीनी सेना ने रावत से कहा कि वह युद्ध का शोर मचाना बंद करें. रावत ने कहा था कि चीन और पाकिस्तान के साथ-साथ अंदरूनी सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है ।
भारतीय थलसेना प्रमुख की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के प्रवक्ता कर्नल वू क्वियान ने कहा, ऐसा बड़बोलापन बेहद गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, हमें उम्मीद है कि भारतीय थलसेना में एक खास शख्स ऐतिहासिक सबक से सीख लेंगे और युद्ध के लिए ऐसे शोर मचाना बंद करेंगे. रावत ने हाल में कहा था, भारतीय थलसेना ढाई मोर्चो पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है.
चीन की सेना का भूटान की सीमा में घुसपैठ से इनकार-
उधर चीन की सेना ने आज भूटान के इस आरोप से इनकार किया कि उसके सैनिक भूटान की सीमा में घुसे और कहा कि उसके सैनिक चीन के क्षेत्र में ही तैनात रहते हैं. चीन ने भारत से उसकी गड़बड़ियों को भी ठीक करने को कहा. चीन के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यहां मीडिया से कहा, मुझे इस बात को ठीक करना है जब आप कहते हैं कि चीन के सैनिक भूटान की सीमा में घुसे. चीन के सैनिक चीन की सीमा में ही तैनात रहते हैं।
कोलकाता| प्रसिद्ध गायिका सबिता चौधरी का गुरुवार को उनके आवास पर निधन हो गया। वह पिछले पांच महीनों से कैंसर से पीड़ित थीं।
सबिता दिवंगत गीतकार सालिल चौधरी की पत्नी थीं। सबिता को जनवरी में फेफड़ों व थाइरॉइड के कैंसर की पुष्टि हुई थी।
भारतीय संगीत की सबसे महान प्रतिभाओं में शामिल रहे सालिल के साथ शादी के बंधन में बंधी सबिता चौधरी ने गायन के क्षेत्र में खुद की एक गहरी छाप छोड़ी। दशकों तक लोगों पर इनके कई बांग्ला गीतों का जादू छाया रहा।
उन्होंने कई हिंदी व बांग्ला फिल्मों के लिए पाश्र्व गायिका के तौर पर गीत गाए। इनके कुछ प्रसिद्ध बंगाली गीतों में ‘ओइ झिलमिल झावर बॉनी’, ‘जारे जा जा मोनो पाकी’ आदि शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबिता के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “प्रख्यात गायिका सबिता चौधरी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। मेरी संवेदना उनके परिवार, मित्रों तथा प्रशंसकों के साथ हैं।”
चीन की सेना ने गुरुवार को भूटान के इस आरोप से इंकार किया कि उसके सैनिक भूटान की सीमा में घुसे और कहा कि उसके सैनिक ‘चीन के क्षेत्र’ में ही तैनात रहते हैं. साथ ही चीन ने भारत से उसकी ‘गड़बड़ियों’ को भी ‘ठीक करने’ को कहा.
चीन के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यहां मीडिया से कहा, ‘मुझे इस बात को ठीक करना है कि जब आप कहते हैं कि चीन के सैनिक भूटान की सीमा में घुसे. चीन के सैनिक चीन की सीमा में ही तैनात रहते हैं’. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने भारतीय सैनिकों पर सिक्किम सेक्टर के डोंगलोंग क्षेत्र में चीन की सीमा में घुसने का आरोप भी लगाया.
प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने सामान्य क्रियाकलापों को रोकने का प्रयास किया. चीन ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के लिए इन क्रियाकलापों पर उचित प्रतिक्रिया दी’. उन्होंने कहा, ‘हमने भारतीय पक्ष को साफ कर दिया है कि वह अपनी गड़बड़ियां ठीक करे और चीन की सीमा से अपने सभी जवानों को वापस बुलाएं’.
भूटान ने बुधवार को कहा था कि उसने डोकलाम के जोमपलरी क्षेत्र में उसके सेना शिविर की तरफ एक सड़क के निर्माण पर चीन को ‘डिमार्शे’ (शिकायती पत्र) जारी किया है और बीजिंग से काम तत्काल रोककर यथास्थिति बहाल करने को कहा.