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Friday, August 14, 2026
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भारतीय ने दिया मुहतोड़ जवाब तो चीनी मीडिया ने की अभद्रता और गुंडागर्दी

आनंद रूप द्विवेदी  |  Navpravah.com

डोकलाम मुद्दे पर चीन के एक प्रमुख न्यूज़ चैनल CGTV में लाइव टॉक शो के दौरान भारत के प्रोफ़ेसर अजातशत्रु सिंह ने स्टूडियो मीडिया में ही बैठकर चीन को मुह तोड़ जवाब दिया है। जिसके बाद उन्हें तमाम तरह की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ तक कि शो के बाद उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। कुछ चाइनीज़ गुंडों के द्वारा डॉ सिंह को चीन छोड़ कर चले जाने के लिए धमकी मिली है।

दरअसल डॉ. अजातशत्रु सिंह चीन के प्रमुख न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू के लिए बुलाये गए थे जिसमें चीन द्वारा लगातार भारत के विरुद्ध डोकलाम में गतिविधियों को लेकर चर्चा छिड़ी हुई थी। चर्चा के दौरान प्रोफेसर अजातशत्रु सिंह से जब ये सवाल किया गया कि, “डोक्लाम जोकि भूटान का हिस्सा है, उसे लेकर भारत इतना अड़ियल रवैय्या क्यों अपना रहा है?” जवाब में डॉ.सिंह ने कहा कि, “भारत फिलीपीन्स या वियतनाम नहीं है, कि एक  छोटा देश समझकर दक्षिण चीन समुद्र में समुद्र तट के चीनी कब्जे का आसान शिकार बनाया जा सके। चीन, भूटान को लेकर अपनी यथापूर्व स्थिति में स्वयं बदलाव कर रहा है।”

जिसके बाद डॉ सिंह के साथ अभद्रता की गई तथा उनको लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। यहाँ तक कि उनका एक स्थानीय कॉफ़ी शॉप में घेराव किया गया। डॉ सिंह वहाँ से सही सलामत निकल गये और भारतीय दूतावास से संपर्क किया जहां से उन्हें निर्भीकता पूर्वक बाहर आने जाने के लिए मना किया गया है। चीनी मीडिया का ये गुंडागर्दी भरा रवैया कुछ नया नहीं है। डॉ अजातशत्रु सिंह अपनी इसी बेबाक निर्भीक छवि के लिए सुप्रसिद्ध हैं। इससे पहले भी एक टीवी शो के दौरान भारत-पकिस्तान के मुद्दे पर डॉ सिंह को चीन के भारत विशेषज्ञ हू झियोंग द्वारा गाली गलौज का सामना करना पड़ा था। दरअसल चीनी मीडिया जब जवाब देने में नाकाम होने लगता है तब ऐसी अभद्रता करने पर अमादा हो जाता है।

चीन में दशकों से रह रहे डॉ अजातशत्रु सिंह ने वहीँ से पढ़ाई की है और वहां बतौर शिक्षक बीजिंग यूनिवर्सिटी में भी काम कर चुके हैं। फिलहाल डॉ सिंह नई दिल्ली में BRICS Institute में बतौर संचालक व निदेशक कार्यरत हैं।

 

CRPF ने अमरनाथ यात्रियों के लिए जारी की एडवाइजरी

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, सुरक्षा बलों ने इन तीर्थयात्रियों से अपनी यात्रा सुरक्षा घेरे में रहकर ही पूरा करने की अपील की है। इसके साथ ही कश्मीर में शांति बहाली के लिए काम कर रहे सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों के बीच बेहतर तालमेल से बीते दिनों 100 से ज्यादा आतंकी को मार गिराया गया है।

10 जुलाई को कश्मीर घाटी के अनंतनाग इलाके में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर हमला कर दिया था, इस आतंकी हमले के बाद अब अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों ने कई बड़े कदम उठाए है।

सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि भोलेनाथ के भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी यात्रियों को यह हिदायत दी गई है कि वे सुरक्षा बलों के घेरे से बाहर ना जाएं और अपनी यात्रा सुरक्षा घेरे में ही करें।

कश्मीर में शांति बहाली के लिए जारी ऑपरेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से जिस तरह से कश्मीर में सुरक्षा बलों को कामयाबी मिल रही है, उसकी वजह सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल है। कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा आतंकियो को मार गिराया है। उन्होंने कहा है कि सभी सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां मिलजुल कर कश्मीर में काम कर रही हैं।

माता वैष्णो देवी यात्रा और मंदिर में किसी आतंकी हमले की खबर पर उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई स्पेसिफिक इनफार्मेशन नहीं है, मगर पुलिस, सीआरपीएफ और आर्मी पूरी तरह से अलर्ट है।

एक अरब से ज्यादा हुए व्हाट्सएप यूज़र्स

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

सोशल मीडिया के आंकड़े के मुताबिक दुनिया भर में व्हाट्सऐप के 1 अरब से भी ज्यादा डेली ऐक्टिव यूजर्स हैं, इस ऐप के मंथली ऐक्विट यूजर्स 1.3 बिलियन हैं।

कंपनी के मुताबिक हर दिन 55 अरब मैसेज हर दिन शेयर किए जाते हैं, इनमें से 1 अरब सिर्फ वीडियो मैसेज होते हैं, जबकि 4.5 अरब ऐसे मैसेज होते हैं जिनमें फोटोज शामिल हैं। इस ऐप को 60 भाषाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है।

व्हाट्सऐप के आधिकारिक ब्लॉगपोस्ट में कहा गया है कि इसमें दिए गए नए स्टेटस फीचर को भी लोगों ने पसंद किया है, इंस्टाग्राम स्टोरी से इंस्पायर इस फीचर के 250 मिलियन डेली ऐक्टिव यूजर्स हैं।

व्हाट्सऐप के नए स्टेटस फीचर के बाद कंपनी पर स्नैपचैट के फीचर कॉपी करने का आरोप लगा था।

जब फेसबुक ने फरवरी 2014 में व्हाट्सऐप का अधिग्रहण किया था तो इस ऐप के पास 350 मिलियन डेली यूजर्स थे, लेकिन 3 सालों में यूजर्स की संख्या तीन गुना बढ़ गई है।

व्हाट्सऐप के सीईओ जेन कोम ने ब्लॉगपोस्ट में लिखा है, ‘इस नए माइलस्टोन का जश्न मनाते हुए हम यूजर्स को इसमें पहले से ज्यादा काम के फीचर्स देने का साथ यह भी ध्यान दिया जाएगा कि आपके उम्मीद के मुताबिक यह सिक्योर रहे।’

हाल ही में व्हाट्सऐप ने किसी भी तरह की फाइल सेंड करने का ऑप्शन दिया है, यानी कंपनी लगातार नए प्रयोग करती है और आने वाले समय मे यह भारतीय कस्टमर्स के लिए पैसे ट्रांसफर का भी सपोर्ट दे सकती है।

मोदी-शाह के खिलाफ मिला था जनादेश, नितीश धोखेबाज -लालू

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
राजद नेता लालू यादव ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को एकजुट किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने उनकी हत्या कर दी, नीतीश के फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं।
लालू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को झांसा दिया, अमित शाह ने कहा कि 15-15 लाख रुपये देने का वादा जुमला था। बीजेपी ने 15-15 लाख देने का ढोंग रचा था, मोदी ने देश की जनता से किया वादा नहीं निभाया।
मायावती का जिक्र करते हुए लालू ने कहा कि दलित भाई और पिछड़े वर्ग के लोगों ने हमें वोट दिया, लालू ने नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नीतीश के डीएनए पर भी सवाल उठाया था।
उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जागरूक हैं और उनके फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं, राजद नेता ने कहा कि हम सत्ता के लोभी नहीं हैं, नीतीश सत्ता के बहुत बड़े लोभी हैं।
लालू ने कहा कि नीतीश ने बीजेपी को खाने पर बुलाकर पत्तल खींचा था, वे लोग आए और ड्रामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ था, जनता ने सेक्युलर ताकतों को वोट दिया था। लालू ने कहा कि आरएसएस के लोगों ने अफवाह फैलाई कि अगर लालू-नीतीश जीत गए तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे।
लालू ने कहा कि मैंने शिव की तरह नीतीश को आशीर्वाद दिया कि जाओ राज करो और वो भस्मासुर निकला। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाफ नीतीश के कहने पर केस दर्ज हुआ।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने कौन सा अपराध किया है, बड़ी पार्टी होने के बावजूद हमने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया।
मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय मीडिया विपक्ष से लड़ रहा है, लालू ने कहा कि मैंने नीतीश को फोन किया था और उन्होंने कहा कि हम इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं, सिर्फ मीडिया हल्ला कर रहा है तो मैं क्या करुँ।

आज है देश के मिसाइल मैन डॉक्टर कलाम की पुण्यतिथि

विकास तिवारी | Navpravah.com
आज सम्पूर्ण राष्ट्र, पूर्व राष्ट्रपति,महान वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कलाम को उनकी पुण्य तिथि में  अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है. उन्हें भारत के मिसाइल मैन के रूप में भी जाना जाता है.  भारत रत्न डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को धनुषकोडी गांव, रामेश्वरम, तमिलनाडु में मछुआरे परिवार में हुआ था. वे तमिल मुसलमान थे.
बचपन मे नाव चलाकर और घर घर अखबार बांटकर परिवार का पालन पोषण करने वाले कलाम बड़े होकर अपने बुद्धिमत्ता से भारत का दुनिया भर में विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में झंडा गाड़ दिया था.
आरंभिक शिक्षा रामेश्वरम् में ग्रहण करने के उपरांत 1950 में कलाम जी ने B.Sc की परीक्षा st. Joseph’s college से पूरी की. इसके बाद 1954-57 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) से एरोनिटिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया.
देश के विकास, गांवों में शिक्षा का प्रसार, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे मामलों पर गहनता से बातें करने वाले  कलाम ने 1958 में D.T.D. and P. में तकनिकी केंद्र में वरिष्ट वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया यहाँ इन्होंने prototype hover craft के लिए तैयार वैज्ञानिक team का नेतृत्व किया. 1962 में अब्दुल कलामजी रक्षा अनुसन्धान को छोड़ भारत के अन्तरिक्ष अनुसन्धान में कार्य करने लगे. 1962 से 82 के बीच वे इस अनुसन्धान से जुड़े कई पदों पर कार्यरत रहे. 1969 A.P.J. Abdul कलामजी ISRO में भारत के पहले SLV-3 (Rohini) के समय प्रोजेक्ट हेड बने.
एपीजे अब्दुल कलाम को बच्चों से बहुत स्नेह था. वे हमेशा अपने देश के युवाओं को अच्छी सीख देते रहे है, उनका कहना था कि युवा चाहे तो पूरा देश बदल सकता है. 1981 में मिसाइल मैन को पद्म भूषण से और 1990 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था और 1997 में भारत रत्न से.
हमेशा अपनी माँ को सफलता का श्रेय देने वाले कलाम ने अग्नि, पृथ्वी व आकाश के प्रक्षेपण में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. सन 1992 में APJ अब्दुल कलामजी रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव बन गए. वे इस पद में 1999 तक कार्यरत रहे.
2002 में एनडीए ने कलाम को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार उतारा जिसके बाद वह 2002 से 2007 तक देश के राष्ट्रपति रहे. राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद कलाम जी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम के चांसलर बन गए. साथ ही अन्ना यूनिवर्सिटी के एरोस्पेस इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर बन गए.
ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में विख्यात रहे कलाम के विशेष कार्याधिकारी सृजन पाल सिंह ने बताया कि शिलॉन्ग में जब वह डॉ.कलाम के सूट में माइक लगा रहे थे तो उन्होंने पूछा ‘फनी गॉय हाउ आर यू’,जिस पर मैंने जवाब दिया ‘सर ऑल इज वेल’।
फिर वह छात्रों की ओर मुड़े… और बोले ‘आज हम कुछ नया सीखेंगे’ और इतना कहते ही पीछे की ओर गिर पड़े. पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया.
इस तरह से देश ने अपने गौरव इतिहास में चार चांद लगाने वाले कलाम को खो दिया. हमने वह शख्स खो दिया जिसने बहुत कुछ बनाया पर केवल हमारे और आपके लिए अपने लिए नही.
आज एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक का डिजाइन और इसका निर्माण पी करुमबू में (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) डीआरडीओ ने किया है. इस दौरान मोदी यहां ध्वजारोहण और कलाम की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे| और कलाम के परिजनों से भी मुलाकात करेंगे.
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तेजस्वी को किया बेनकाब, सुशील मोदी बने हीरो

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

कुछ घंटों में बिहार की सत्ता बदल चुकी है, लालू और नीतीश की जोड़ी टूट गई है, नितीश फिर से एनडीए के पाले में हैं और इस्तीफे के 15 घंटे के भीतर दोबारा सत्ता संभालने जा रहे हैं। इस पूरे मामले में एक किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा- सुशील मोदी का। सुशील मोदी ने लगातार खुलासों से भ्रष्टाचार के मामले पर लालू कुनबे को घेर लिया और बाद में सीबीआई और ईडी के छापों के बाद नितीश को मजबूर होकर आरजेडी से गठबंधन तोड़ना पड़ा।

बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने इसी साल 4 अप्रैल को लालू परिवार के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पर मिट्टी घोटाले का पहला आरोप लगाया। इसके बाद सुशील मोदी एक-एक कर लालू यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार बम फोड़ते रहे। तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा भारती, रागिनी यादव, राबड़ी देवी और लालू को लेकर लगातार सुशील मोदी ने खुलासे किए।

सुशील मोदी ने पिछले कुछ सालों में लालू परिवार को करोड़ों के फ्री गिफ्ट को लेकर भी घेरा, इसमें तेजस्वी के नाम पर कई संपत्तियों के लेन-देन पर सवाल खड़े किए गए। सुशील मोदी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और उनके भाई व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप की खुद और उनके परिवार की एक हजार करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्तियां हैं। इसके अलावा तेजस्वी और तेजप्रताप को चाचा और नाना से भी करोड़ों के उपहार मिले, जो जांच के दायरे में हैं। लालू की बेटी हेमा यादव और पत्नी राबड़ी देवी को उनके नौकर ललन चौधरी ने 2014 में करीब एक करोड़ रुपये की जमीन दान में दी थी, ललन के नाम से बीपीएल कार्ड भी बना हुआ है, ये भी जांच के दायरे में आ गये हैं।

सुशील मोदी ने विभिन्न जिलों में मर्डर, अपहरण, लूट की घटनाओं के मामलों पर सुशील मोदी ने सीधे आरजेडी को घेरा। नितीश सरकार पर हमला करते वक्त सुशील मोदी ये बताते कभी नहीं भूले कि जंगलराज की वापसी लालू के सत्ता में आने के कारण हुआ और पिछले काल में जब नितीश के साथ बीजेपी थी तब हालात कुछ और थे।

सुशील मोदी नितीश के साथ पिछले एनडीए सरकार में भी डिप्टी सीएम थे और अब फिर वे इस पद पर लौट रहे हैं। नितीश के साथ उनका तालमेल काफी अच्छा माना जाता है। बिहार में जंगलराज का मामला उठाते वक्त सुशील मोदी ने लगातार ये ध्यान रखा कि नितीश की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। सुशील मोदी ने एक तरफ लालू कुनबे को निशाने पर लिया तो वहीं नितीश को ऑफर भी दिया कि अगर वे लालू का साथ छोड़कर आते हैं तो उन्हें समर्थन के लिए बीजेपी तैयार है। बुधवार को जब नितीश ने लालू से अलग होने का ऐलान किया तो कुछ मिनटों के अंदर ही पटना से लेकर दिल्ली तक बीजेपी सक्रिय हो गई और कुछ मिनटों में ही समर्थन का ऐलान कर दिया गया।

जब देश की राजनीति मोदी के इर्द गिर्द फोकस होकर रह गई, ऐसे में सुशील मोदी का अभियान विपक्षी राजनीति के लिए एक बड़ा सबक साबित हो सकता है। बिहार में 2015 में चुनाव हारने के बाद ही सुशील मोदी ने जंगलराज खत्म करने का ऐलान किया और खुलासों के अभियान में लग गए, सुशील मोदी ने कोई बड़ी रैली नहीं की और कोई बंद औऱ विरोध-प्रदर्शन नहीं किया। दस्तावेजों के जरिए लगातार खुलासे किए और लालू उनके बेटे तेजस्वी और पूरे परिवार को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेर लिया।

अब मोदी सरकार करेगी ओला-उबेर की बत्ती गुल, खुद लायेगी इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम!

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com

मोदी सरकार जल्द ही एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम लाने जा रही है। इसके लिए वह खुद 6400 करोड़ रुपए के  ऐप बेस्ड ‘कैब एग्रीग्रेटर बिजनेस’ में अपना प्लेटफॉर्म लाने की तैयारी में है।  ऐसा कर सरकार लोगों को सस्ती ट्रांसपोर्टशन सर्विस दिलाना चाहती है। सरकार जल्द ही ऐसा ऐप लाएगी, जिसके जरिए सभी तरह के ट्रांसपोर्टेशन को इंटीग्रेट किया जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो उसका सबसे बड़ा असर ओला और उबर जैसी कंपनियों के बिजनेस पर होगा। साथ ही आम आदमी को सस्ती ट्रांसपोर्ट सर्विस के साथ नए विकल्प मिल जाएंगे।

सरकार की ओर से पेश कि‍ए जाने वाले इस ऐप में सभी तरह के कैब सर्वि‍स प्रोवाइर्ड शामि‍ल होंगे। यानी कस्‍टमर को अलग-अलग कंपनी के लि‍ए एक ही ऐप का यूज करना होगा। साथ ही, इसमें इलेक्‍ट्रि‍क कार से लेकर टू-व्‍हीलर, ऑटो, ई-रि‍क्‍शा आदि‍ सभी बुक किए जा सकेंगे। इस सिस्टम के लॉन्च होने के बाद कंपनि‍यों को नए इनोवेशन पर काम करना होगा। उदाहरण के लि‍ए उबर के मार्केट में आने के बाद ओला ने ‘मि‍नी’ नाम से सस्‍ती कैब सर्वि‍स शुरू की थी। इसके बाद, ‘ओला शेयर’ को शुरू कि‍या। ऐसे में अगर सरकार इस इंडस्‍ट्री में आती है तो कस्‍टमर्स को ही फायदा मि‍लेगा। लोगों को सस्‍ते पब्‍लि‍क ट्रांसपोर्टेशन का ऑप्‍शन मिलेगा।

यूनि‍यन रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे मि‍नि‍स्‍टर नि‍ति‍न गडकरी ने कहा, “सरकार एक कैब एग्रीगेटर या प्‍लैटफॉर्म पेश करने की प्‍लानिंग कर रही है, जहां लोग ‘इलेक्‍ट्रि‍क फोर व्‍हीलर टैक्‍सी’ या ‘टू-व्‍हीलर्स’ जैसे कि‍सी भी ट्रांसपोर्टेशन मोड को चुन सकते हैं। सरकार इसमें केवल एक फैसेलि‍टेटर होगी लेकि‍न यह प्‍लैटफॉर्म कॉम्‍पीटि‍शन को बढ़ाएगा।” सरकार का मानना है कि‍ मार्केट में केवल बड़ी कंपनि‍यां, जैसे उबर और ओला की ही मोनोपली क्‍यों होनी चाहि‍ए? जो छोटे स्‍तर पर कैब बि‍जनेस चलाते हैं, उनको भी लोगों को सर्वि‍स देने का समान मौका मिलन चाहिए।

गडकरी ने कहा कि‍ भारत में इस वक्‍त 22 लाख कमर्शि‍यल ड्राइवर्स की डि‍मांड है। इसके लि‍ए सरकार देशभर में 100 ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्‍टीट्यूट खोलने की योजना बना रही है। गडकरी ने दावा कि‍या कि‍ अगले पांच साल में पांच लाख लोगों को नौकरी मि‍लेगी।

आपको बता दें कि रि‍सर्च कंपनी रेडडीर की ताजा रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, इस साल जनवरी के बाद से ओला और उबर दोनों कंपनि‍यों के ड्राइवर्स की संख्‍या में करीब 20 फीसदी की कमी आई है। दोनों कैब कंपनि‍यों के पास 2017 की शुरुआत में 11.12 लाख ड्राइवर्स थे, जो घटकर 8.9 लाख हो गए। ऐसा इसलि‍ए क्‍योंकि‍ कंपनि‍यों ने ड्राइवर्स के इन्‍सेंटि‍व्‍स को घटा दि‍या है। ड्राइवर्स को इन्‍सेंटि‍व पाने के लि‍ए ज्‍यादा टारगेट हासि‍ल करना पड़ता है। उबर के पास इस वक्‍त 2.4 लाख ड्राइवर्स हैं और ओला 6.5 लाख ड्राइवर्स के साथ काम कर रही है।

उल्लेखनीय है कि सरकार एक नए कानून पर वि‍चार कर रही है। जि‍समें मोटर व्‍हीकल्‍स एक्‍ट के तहत टैक्‍सी एग्रीगेटर्स को शामि‍ल कि‍या जाएगा। इसके बाद, वि‍भि‍न्‍न राज्यों को इस तरह की कंपनि‍यों को लाइासेंस देते वक्‍त सरकार की ओर से तय कि‍ए गए दि‍शा-नि‍र्देशों को मानना होगा। हालांकि‍, राज्‍यों के पास अति‍रि‍क्‍त नि‍यम लगाने की आजादी होगी। ऐसे में भारत सरकार द्वारा इस सिस्टम की लॉन्चिंग को बहुत अहम माना जा रहा है।

नितीश ने त्यागा मुख्यमंत्री पद, कहा, “भ्रष्टाचार के साथ कोई समझौता नहीं”

शिखा पाण्डेय । Navpravah. com

लालू प्रसाद यादव व उनके परिवार के घोटालों के दावानल में घिर जाने के बाद से धर्म संकट में घिरे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंततः स्वयं इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा मंज़ूर भी कर लिया गया है। तमाम उठापटक व आतंरिक मंथन के बाद नितीश कुमार ने राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंपा। राजभवन में राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने में बाद नीतीश कुमार मीडिया से रूबरू हुए व कहा कि उन्हें अपने उसूलों के खिलाफ कोई समझौता मंज़ूर नहीं था। ज़मीन घोटाले में घिरे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे की लगातार मांग के बीच नितीश कुमार का स्वयं इस्तीफा दे देना वाक़ई राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा गया है।

नितीश कुमार ने कहा,” हमने गठबंधन सरकार का एक तिहाई कार्यकाल सफलता पूर्वक पूर्ण किया। जितना संभव हुआ, गठबंधन धर्म का पालन भी किया। इसके बाद जो चीज़ें सामने आईं, मेरे लिए उनके साथ समझौता करना असंभव था।” नितीश ने कहा, “मैंने कभी किसी का इस्तीफा नहीं माँगा। मैंने कहा आरोप पर अपना पक्ष साफ़ कीजिये। लेकिन कोई सफाई नहीं मिली।”

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा बार बार नितीश की खामोशी व उनके पक्ष पर प्रश्न खड़ा करने के विषय में उन्होंने कहा, ” अगर आप संकट में हैं, और मेरे साथ की इच्छा रखते हैं, तो पहले ये सोचिये कि आपने खुद ये संकट खड़ा किया है। यदि अपना पक्ष स्पष्ट कर देते, तो काम आसान होता। पर ये मेरे स्वाभाव व काम करने के तरीके के अनुरूप नहीं है।”

बार बार गठबंधन पर शंका ज़ाहिर किए जाने पर नितीश ने कहा, “नोटेबन्दी का मैंने समर्थन किया, खुद मांग की कि बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई कीजिये। फिर मैं कैसे पीछे हटाता! गांधी जी ने कहा है, नीड की पूर्ती होती है ग्रीड की नहीं। मैं भी विपक्षी एकता का पक्षधर हूँ। पर उसका कोई एजेंडा होना चाहिए।” उन्होंने कहा, ” सिर्फ रिएक्टिव एजेंडा से कम नहीं चल सकता। जिस बिहार के लिए काम कर रहा हूँ, वहां के जनमत में इस चर्चा के अलावा कोई अन्य बात नहीं हो रही । ऐसे में राज्य का नेतृत्त्व करना असंभव हो गया था व इस्तीफा देना ही सर्वोचित था।” नितीश ने कहा कि हर संभव प्रयास के बाद भी जब कोई अन्य रास्ता न दिखा तो खुद वो स्थान त्यागना ही उत्तम विकल्प था क्योंकि ‘लोकतंत्र लोकलाज से चलता है।’

भाजपा से गठबंधन के विषय में पूछे गए प्रश्न पर गोल गोल जवाब देते हुए नितीश बोले, “जब तक अन्य इंतेज़ाम नही होता, काम चलता रहेगा। मेरा कमिटमेंट बिहार के प्रति है। बिहार की बेहतरी के लिए जो संभव होगा, वो कदम उठाया जाएगा।”

इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर नितीश कुमार को बधाई दी। उन्होंने लिखा, ” भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नितीश जी को बधाई। 125 करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना देश व समय की मांग है।” नितीश कुमार के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से कहा, “अटल जी के समय से हमने नितीश जी के साथ काम किया है। हमने उन्हें नहीं छोड़ा, उन्होंने हमें छोड़ा था। अब निर्णय उनका है।”

इन सारे अकस्मात निर्णयों व बयानबाज़ियों के बीच भाजपा व जेडीयू का गठबंधन कहीं न कहीं जुड़ता नज़र आ रहा है, बाकी जवाब ‘समय’ व दोनों पार्टियों के हाथ हैं।

टमाटर प्रेमियों के प्रेम पर लगने जा रहा है ‘टमाटर ग्रहण’!

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
अर्ज़ किया है, “तू अपने गरीब होने का दावा मत कर ऐ दोस्त, हमने देखा है तुझे बाजार से टमाटर लाते हुए।” जी हाँ। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में ऐसे तमाम चुटकुले छाये हुए हैं। कभी बाजार में सूरज की लालिमा की तरह चहुँ ओर छाया टमाटर, आज ‘गौने की दुल्हन’ बन गया है। लगभग एक महीने से टमाटर के चढ़े दाम कतई उतरने का नाम नहीं ले रहे। उतरने की बात तो दूर, जो टमाटर 10 दिन पहले तक करीब 80 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इतना ही नहीं, जानकारों की मानें तो टमाटर के दाम अभी और चढ़ेंगे। इसका मतलब यह, कि अगले कुछ दिन टमाटर प्रेमियों के प्रेम पर ‘टमाटर ग्रहण’ छाया रहेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन मंडियों में रोजाना लगभग 500 टन टमाटर की खपत थी, उन मंडियों में सिर्फ 200 से 250 टन ही टमाटर आ रहा है। अभी तक सबसे ज्यादा टमाटर महाराष्ट्र और कर्नाटक से आता था। पश्चिम बंगाल से भी टमाटर की ठीक-ठाक सप्लाई हो जाती थी। हिमाचल और हरियाणा भी टमाटर में हाथ बंटाते थे, लेकिन इस वक्त हालात ये हैं कि विभिन्न कारणों के चलते महराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और कर्नाटक से टमाटर की सप्लाई न के बराबर हो रही है। जो टमाटर आ रहा है, वो सप्लाई के हिसाब से अति काम है।
टमाटर के महंगे होने की बड़ी वजह सप्लाई का काम होना है। टमाटर के दाम आसमान छूने का मुख्य कारण स्थानीय फसल नहीं आना और समय पर बरसात नहीं होना है। वर्तमान में अधिक बरसात के कारण किसान टमाटर रोपण की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। अधिक बरसात से टमाटर की फसल प्रारंभ में ही बर्बाद हो जाती है।
टमाटर के व्यापरियों का कहना है कि आने वाले एक सप्ताह में टमाटर के भाव और अधिक हो सकते हैं। बाजार का उलट फेर इस कदर देखने को मिल रहा है कि जो व्यापारी जिले में टमाटर खरीदने के लिए आते थे, वही व्यापारी यहां वर्तमान में टमाटर बेचने के लिए आ रहे हैं। जानकारों की मांगें तो अक्टूबर माह में अधिक पैमाने पर स्थानीय फसल के आने पर हालात बदल सकते हैं और करीब एक माह के बाद लोकल टमाटर बाजार में उपलब्ध हो जाएंगे, जिसके बाद टमाटर व सब्जियों के भाव गिरने की उम्मीद है।

लापता 39 भारतीयों के मारे जाने का कोई सबूत नहीं – सुषमा स्वराज

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
इराक में लापता 39 भारतीयों के मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि ये मामला बहुत गंभीर है, मैं इस बात को हंगामे के दौरान नहीं बोलूंगी, पूरा देश इस मामले को सुनना चाहता है।
सुषमा स्वराज ने कहा कि मैं शुरू से ही लोकसभा में बयान देना चाहती थी, ये घटना हमारी सरकार आने के 20 दिन बाद की है। उस समय हरजीत ने ये बयान दिया था कि मैं मेरे सामने 39 लोगों को मार दिया गया था और मैं भाग कर आ गया था। लेकिन हमें ना ही कहीं लाशें मिली, ना ही कोई सूची मिली, और इसलिए हम कैसे कह सकते हैं। हरजीत के बयान में काफी विरोधाभास है, जिस मुद्दे को उठाया गया था, हमने मोसुल के आस-पास तलाशी ली है, मैंने जो कुछ भी किया है वह सदन को विश्वास में लेकर किया।
24 नवंबर 2014 को मैंने कहा था कि एक व्यक्ति कह रहा है कि वो मार दिए गए हैं, और 6 सूत्र कह रहे हैं कि वो जिंदा हैं तो मुझे क्या उन्हें ढूंढना नहीं चाहिए। मैंने बार-बार सदन से कहा था कि मेरे पास उनके जीवित होने का कोई सबूत नहीं है, ना ही मेरे पास उनके मारे जाने का कोई ठोस सबूत नहीं है। मैं सदन की अनुमति चाहूंगी कि अगर मेरा रास्ता सही है तो हम इसमें आगे बढ़ सके।
तीन साल से मिसलीड करने का आरोप लगाया गया, बिना ठोस सबूत के उन्हें मरा हुआ घोषित नहीं कर सकती है, ऐसा करना पाप है मैं ये पाप कभी नहीं करुंगी। मुझे पता लगा कि इसमें टर्की से मदद मिल सकती है, मैं खुद टर्की गई थी बात करने के लिए।
हमारे सूत्र ऐसे वैसे नहीं हैं हमें एक देश के राष्ट्रपति, एक देश के विदेश मंत्री ने ये बताया है, मैं 12 बार पीड़ितों के परिवार से मिली हूं, मैंने हर बार कहा कि मेरे पास उनके जीवित रहने की कोई जानकारी नहीं है, मैं सूत्रों के हवाले से ये कह रही हूं। उनकी फाइल तब तक बंद नहीं कर सकते हैं जब तक कोई सबूत ना हो।
सुषमा ने कहा कि अगर मैं आज कह दूं कि वो मर गए हैं पर कल को कोई जीवित हुआ तो किसे दोष देंगे, अगर किसी परिवार वाले का मुझ पर से भरोसा उठ गया है तो वे आजाद हैं।
9 तारीख को मोसुल आजाद होने की घोषणा की गई, 10 तारीख को हमारे विदेश मंत्री मोसुल पहुंच गए थे, वो 4 दिन वहां पर रहे, वीके सिंह के आने के बाद ही मैंने पीड़ितों के परिवार को बुलाया, वीके सिंह ने कहा था कि हमारे सूत्रों के हवाले से वो लोग वहां पकड़े गए, फिर उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया फिर खेती करवाई गई। लेकिन 2016 के बाद से हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं है, हमें जो पता लगा हमनें वही परिवार को बताया।
सुषमा बोलीं कि तस्वीर बस इतना बताती है कि जेल ढह गई है, लेकिन तस्वीर से ये नहीं पता लगता है कि सभी लोग मार दिए हैं। इराक के विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे पास ना ही जिंदा होने या मारे जाने का ठोस सबूत है, 2016 के बाद कोई सूचना नहीं है, लेकिन फिर भी तलाश जारी है, मैंने उनसे अपील की है कि अब जो भी जानकारी दें तो सबूत के साथ दें, बिना सबूत अब मैं परिवार से बात नहीं कर सकती हूं।
सुषमा ने कहा कि सबूत के तौर पर अगर वो हिंदी में अपना नाम और घर का पता लिख कर दें तो हमें मदद मिलेगी, हमें उनकी ओर से पूरा भरोसा दिया गया है। मैंने कभी संसद को गुमराह नहीं किया, मुझे गुमराह करने का क्या फायदा मिलता।
सुषमा ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब के 6 परिवार उनसे मिलने आए, और कहा कि 1971 की लड़ाई में उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया था लेकिन 45 साल बाद गांव के पास का व्यक्ति लौट कर आया और कहा कि वो लोग जिंदा हैं, तब से वो परिवार कह रहा है कि हमारे परिवार वालों को वापस लाना चाहिए। सुषमा बोलीं कि एक बच्चा 7 साल का बच्चा 21 साल पहले खेत में अपने पिता के साथ खेलते-खेलते सरहद पार कर गया, उसका नाम नानक सिंह है, लेकिन उसके परिवार वाले कहते हैं कि वो पाकिस्तान में है उसे वापस लाओ। मेजर धनसिंह थापा को पहले शहीद घोषित किया, उन्हें पुरस्कार दिया लेकिन बाद में वो जिंदा निकले। सुषमा ने कहा कि मैं जो भी बात बोलूंगी वो सबूत के साथ बोलूंगी, मैंने कभी नहीं कहा कि वो जिंदा हैं या मारे गए हैं, जब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है मैं कोई नतीजे पर नहीं पहुंच सकते हैं। यदि कोई सबूत ऐसा मिलेगा जो इसका खुलासा करेगा, मैं उस दिन का इंतजार करुंगी।
एक निजी चैनल के खुलासे के बाद कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी, एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने भी इन लोगों के जिंदा होने या नहीं होने के मामले में सरकार से जवाब की मांग की थी, साथ ही इन लोगों ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या भारतीय खुफिया तंत्र इस मामले में विफल साबित हुआ है।