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Sunday, August 16, 2026
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CAG की रिपोर्ट गलत है -निर्मला सीतारमन

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
सेना में गोलाबारूद की कमी पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने आज  CAG की रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा कि ये ‘तथ्यात्मक’ रूप से गलत है। देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया, जिसमें सेना के पास गोलाबारूद की कमी की बात कही गई थी, रक्षा मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने सेना के अधिकारियों से बात की है, उन्होंने CAG की रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा कि भारतीय सेना के पास हथियारों की कमी नहीं है।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि सेना को मज़बूत बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाये जायेंगे, जैसे कि उन्हें किसी भी प्रकार की कमी नही होने देगें, सेना के लिए संसाधनों की खरीद प्रक्रिया एक सामान्य प्रक्रिया है। मैं केवल इतना कहना चाहती हूँ कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
हाल ही में आई CAG की रिपोर्ट ने सेना की एक बड़ी खामी को उजागर किया गया था, रिपोर्ट के मुताबिक़, सेना के पास केवल 10 दिन के युद्ध के लिए गोला-बारूद का भंडार है, CAG ने इस रिपोर्ट को संसद में भी पेश किया था।

कंगना-ऋतिक विवाद, रंगोली-ज़रीना की तूतू-मैंमैं जारी

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कोमल झा | Navpravah.com
 
कंगना रनौत ने अपने इंटरव्यू में ऋतिक रोशन से लेकर आदित्य पंचोली के साथ अपने रिलेशनशिप पर सनसनीखेज खुलासे के बाद सुर्खियों में तो थी ही अब उनकी बहन भी  विवाद में कूद पड़ी. आप को बता दें कि हाल ही में कंगना के इंटरव्यू के बाद आदित्य पंचोली की पत्नी जरीना वहाब ने भी कंगना की बातों को साफ़ झूठ बताया था. इसी बात पर कंगना की बहन रंगोली ने जरीना को करारा जवाब दिया है.
जरीना वहाब ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि, ” वो कैसे किसी लड़की को अपनी बेटी बोल सकती हैं, जो उनके पति को ही डेट कर रही हो. जरीना के इस बयान के बाद रंगोली ने गुस्से में ट्विटर पर जरीना के दावों पर कई सारे ट्वीट के जरिए करारा जवाब दिया.
रंगोली ने अपने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर जरीना से पूछा है, ‘अगर कंगना आदित्य पंचोली से साल 2005 में मिली थी और उसने 2007 में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दिया था, तो उनका अफेयर चार साल तक भला कैसे चल सकता है ? सना पंचोली का जन्म 1985 में हुआ है, जबकि कंगना 1987 में पैदा हुई थी. आपके अंदर क्या थोड़ा भी शर्म है कि आप अपनी बेटी से छोटी उम्र की लड़की के शोषण का हिस्सा हैं?
रंगोली ने जरीना पर सवाल उठाते हुए कहा कि वो क्यों कंगना को संजय लीला भंसाली से मिलवाने के लिए लेकर गईं आपने उसे हीरे और बैंकाक से लाई हुई ड्रेस गिफ्ट किया और क्यों उन्हें अपनी बहनों से मिलवाया. रंगोली ने कहा कि कंगना के साथ हुए फिजिकल अब्यूज के लिए जरीना भी उतनी ही जिम्मेदार हैं क्योंकि सबकुछ जानते हुए भी वो चुप रहीं. रंगोली ने आखिर में ट्वीट करते हुए लिखा, शर्म आनी चाहिए, आप जैसी औरतों की वजह से ही पंचोली जैसे दुष्ट लोग इस समाज का हिस्सा बने हुए हैं.
वैसे रंगोली के इन सवालों पर जरीना ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन इन सब बातों को देखकर तो बस यही लग रहा है कि ये मुद्दा और बढ़ता ही जा रहा है इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है. वैसे ये पहली बार नहीं है जब कंगना की बहन ने सोशल मीडिया पर इस तरह से किसी को लताड़ा हो, इसके पहले भी वो सिंगर सोना मोहपात्रा को आड़े हाथों ले चुकी हैं.

हैदराबाद के एक विद्यालय में छात्रा के साथ बदसलूकी, शिक्षिका ने लड़कों के टॉइलेट में किया खड़ा

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एनपी न्यूज़ नेट्वर्क । Navpravah.com
हैदराबाद में एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली पांचवीं क्लास की छात्रा को स्कूल यूनिफॉर्म नहीं पहने के कारण लड़कों के शौचालय में खड़े रहने की सजा दे दी गई. छात्रा को ये सजा उसकी फिजिकल एजुकेशन टीचर ने दी. इस घटना के लिए अभिभावकों ने सोमवार को स्कूल पहुंचकर प्रदर्शन किया. आंध्र प्रदेश बाल अधिकार संघ ने राज्य मानवाधिकार आयोग और पुलिस के साथ शिकायत दर्ज करने के बाद सोमवार को तेलंगाना सरकार ने इस घटना की जांच का आदेश दिया.
बाल अधिकार संगठन के अध्यक्ष पी अच्युता राव ने कहा कि उन्होंने असंवेदनशील कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि लड़कों के शौचालय में एक लड़की को सीमित करना किसी बच्चे के यौन शोषण से कम नहीं था.
घटना शनिवार को रामचंद्रपुरम स्थित बीएचईएल के परिसर स्थित राव हाईस्कूल में हुई थी. लड़की के पिता ने कहा जैसे ही वह अपनी कक्षा में प्रवेश कर रही थी, उसके शारीरिक शिक्षा की शिक्षक प्रियंका ने उसे रोक दिया और यूनिफॉर्म नहीं पहन कर आने की वजह पूछी. लड़की ने कहा कि उसकी मां ने यूनिफॉर्म धोने के लिए रखी थी इसलिए उसे सादे कपड़े पहन कर आना पड़ा. इस पर नाराज, प्रियंका को स्कूल की इमारत की पहली मंजिल पर लड़कों के शौचालय तक खींच कर ले के गई और कुछ समय के लिए वहां खड़ा किया.
लड़की के पिता ने चाइल्ड राइट्स एसोसिएशन को शिकायत के साथ एक वीडियो क्लिपिंग भी भेजी है. इसमें लड़की बता रही है “कक्षा 4 के कुछ छात्रों ने मुझे शौच में देखा और मुझ पर हँसे. मुझे बहुत बुरा लगा और शर्म आई, “उसने वीडियो क्लिपिंग में कहा कि उसके पिता ने बाल अधिकार संघ को अपनी शिकायत भेजी. “शाम को घर लौटने के बाद, मेरी बेटी सारी रात रो रही थी और अब स्कूल जाने से इनकार कर रही है.वह चाहते हैं कि मैं उसे किसी अन्य स्कूल में स्थानांतरित कर दूं, “रामकृष्ण ने शिकायत में कहा.
राइट ऑफ़ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन (आरटीई) अधिनियम, 2009 के अधिकार के तहत, छात्रों पर भौतिक और “मानसिक उत्पीड़न” अवैद्य है और एक दंडनीय अपराध है. लखनऊ में अगस्त में एक निजी स्कूल शिक्षक ने कक्षा तीसरी के छात्र को 40 बार थप्पड़ मारा क्युकी उसने रोल कॉल का जवाब नहीं दिया था, जिसके बाद उस शिक्षक पर क़ानूनी करवाई हुई.

शाओमी ने लांच किया अब तक का सबसे बेहतरीन कैमरा फ़ोन, जानें कीमत

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शिखा पांडे| Navpravah.com

लीडिंग मोबाइल ब्रांड शाओमी ने Mi Mix 2 और Mi Note 3 नाम के नए स्मार्टफोन्स लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक Mi Note 3 शाओमी का अब तक का सबसे बेहतरीन कैमरा स्मार्टफोन है। इस फोन में 12 मेगापिक्सल का डुअल रियर कैमरा है। कंपनी के मुताबिक यह स्मार्टफोन पिछले साल के फ्लैगशिप MI 6 का बड़ा वैरिएंट है। कंपनी का दावा है कि यह iPhone 7 Plus से छोटा है, लेकिन इसकी डिस्प्ले उससे बड़ी है।

क्या हैं  Mi Note 3 के अन्य ख़ास फीचर

– स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स की बात करें तो 5.5 इंच IPS LCD डिस्प्ले वाले इस स्मार्टफोन में  ऑक्टाकोर स्नैपड्रैगन 660 प्रोसेसर दिया गया है। इसमें 6GB रैम है और यह दो इंटरनल मेमोरी वैरिएंट – 64GB और 128GB में उपलब्ध होगा।

– Mi Note 3 की डिस्प्ले 5.5 इंच की है जबकि इसकी बैटरी 3,500mAh की है। कॉम्पकन्य के दावों के मुताबिक फ़ोन की चार्जिंग कैपेसिटी बहुत तेज़ है। सेल्फी दीवानों के लिए यह एक बेहतरीन चॉइस साबित हो सकता है क्योंकि इसमें 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

– इसके अलावा इस सुपर कैमरा फ़ोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फेशियल रिकॉग्निशन फीचर भी दिया गया है। इसके जरिए चेहरा पहचान कर फोन अनलॉक होगा। कंपनी ने दावा किया है कि फेस अनलॉक फिंगरप्रिंट स्कैनर जैसा ही फास्ट है, जिसे एक हाथ से यूज किया जा सकता है।

– डुअल कैमरा सेटअप वाले इस फ़ोन में एक लेंस वाइड एंगल है जबकि दूसरा टेलीफोटो लेंस है। बैक्ग्राउंड ब्लर करके पोट्रेट मोड लेने के लिए यह काफी बेहतर है।

– Mi Note 3 चारों तरफ से कर्व्ड है और इसका बॉडी फ्रेम ऐल्यूमिनियम का है।

क्या होगी कीमत

कीमतों की बात करें तो Mi Note 3 की कीमत लगभग 24,499 रुपये है, जिसमें 6GB रैम और 64GB इंटरनल मेमोरी वाला ब्लैक वैरिएंट मिलेगा।  इसके अलावा इसके दो और भी मॉडल हैं। पहला 6GB रैम के साथ 128GB इंटरनल मेमोरी वैरिएंट है, जिसकी कीमत लगभग 28,420 रुपये है। दूसरा वैरिएंट ब्लू कलर का है जिसकी कीमत लगभग 29,400 रुपये है।

फ्लोरिडा में इरमा तूफ़ान से तबाही, ३ की मौत

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एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 
कैरेबियाई क्षेत्र में भारी तबाही मचाने के बाद इरमा तूफान अमेरिका के तटवर्ती शहर फ्लोरिडा से टकरा गया है. तूफान के वजह से तीन लोगों की मौत हो गई. तूफान के बाद फ्लोरिडा में तेज बारिश हो रही है. हालांकि इरमा तूफान को डाउनग्रेड कर तीसरी कैटेगरी में रखा गया है, लेकिन फ्लोरिडा के तट पर हवा की रफ़्तार तकरीबन 200 किलोमीटर प्रति घंटा थी. तूफान के वजह से भारतीय मूल के हजारों अमेरिकी नागरिकों समेत लाखों लोगों को राज्य से बाहर निकाला गया.
फ्लोरिडा गल्फ कोस्ट के उत्तर पश्चिम की ओर जाने से पहले 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इरमा तूफान के निचले फ्लोरिडा कीज से टकराने की आशंका है. इसकी वजह से हवाएं चल रही हैं. तूफान की निगरानी करने वाले केंद्र ने कहा, ‘जानलेवा तूफान के चलते फ्लोरिडा कीज समेत फ्लोरिडा पश्चिम तट के अधिकतर हिस्सों के आस-पास बाढ़ आने का भारी खतरा है. तूफान के चलते मची तबाही को देखते हुए 63 लाख से अधिक लोगों को फ्लोरिडा छोड़ने के लिए कहा गया है, क्योंकि इस तूफान के रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह जानलेवा हो सकता है.
इरमा तूफान पहले से ही कैरेबियाई क्षेत्र के कई हिस्सों में तबाही मचा चूका है. इसके चलते 25 लोगों की मौत हो गई है. फ्लोरिडा भर में करीब 120,000 भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक रहते हैं, जबकि इनमें से हजारों नागरिक खतरे की दृष्टि से संवेदनशील मियामी, फोर्ट लॉडरडेल और टेम्पा में मौजूद हैं.
बताया जा रहा है कि इरमा तूफान द्वितीय विश्व युद्ध में इस्तेमाल हुए सभी बमों से दो गुना ज्यादा ताकतवर है. विशेषज्ञ इस तूफान की शक्ति सात लाख करोड़ वाट्स बता रहे हैं. इस तूफान को दो और तूफानों का साथ मिल गया है जिस कारण ये और खतरनाक हो गया है.

आतंकवाद ने कश्मीर के टूरिज्म को बहुत नुकसान पहुँचाया है – राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह
सौम्या केसरवानी।Navpravah.com
आतंकवाद ने कश्मीर के टूरिज्म को बहुत नुकसान पहुँचाया है – राजनाथ सिंह
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जम्मू-कश्मीर के दौरें पर हैं, उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की शांति और संपन्नता के लिए जितनी बार कश्मीर आना पड़े आऊंगा। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद ने कश्मीर को नुकसान पहुँचाया है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर दौरे पर कहा कि वो कश्मीर की समस्या को सुलझाने के लिए हर एक प्रयास करने को तैयार है। हम हर कश्मीरी चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते है। हम चाहते हैं कि कश्मीर के लोग खुश रहें।
उन्होंने कहा, कश्मीर में सबसे अधिक नुकसान झेलने वाले युवा, व्यापारी, मजदूर और गरीब तबका है। इस दौरान उन्होंने फाइव-C का फार्मूला दिया-
कम्पैशन, कम्यूनिकेशन, को-एक्सिस्टेंस, कांफिडेंशन बिल्डिंग, कंस्सिटेंसी। और कहा कि ये फाइव-C को फोलो करने पर कश्मीर के लोग आगे जायेंगे।
उन्होंने कहा कि वो व्यक्तिगत तौर पर चाहता हूं कि सभी से बातचीत हो, केंद्र सरकार की कश्मीर मुद्दे को हल करने की पूरी मंशा है। आतंकवाद ने राज्य के टूरिज्म को बहुत नुकसान पहुँचाया है।

१२५ साल पहले स्वामी विवेकानंद ने कही थीं यह प्रमुख बातें

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एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 

१२५ साल पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने जो भाषण दिया था, उसकी चर्चा आज भी पूरे विश्व में होती है. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में स्वामी विवेकानंद के भाषण का ज़िक्र विद्यार्थियों के सामने किया. मोदी ने विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए छात्रों को उनका अनुसरण करने की सलाह दी. प्रस्तुत है स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के प्रमुख अंश.

स्वामी विवेकानंद जब बहुत कम उम्र के थे तभी सारी दुनिया ने उनके ज्ञान का लोहा मान लिया था. 12 जनवरी 1863 को जन्मे इस संन्यासी ने अपनी प्रखर ज्ञान से पूरे विश्व में भारतीय अध्यात्मिकता का ज़बररदस्त प्रचार किया था. अमेरिका के शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म संसद में दुनिया के सभी धर्मों के प्रतिनिधी आए थे और स्वामी विवेकानंद इसमें सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. स्वामीजी ने ऐसा यादगार भाषण दिया कि भारत की अतुल्य अध्यात्मिक विरासत और ज्ञान का डंका बज गया.

प्रिय बहनो और भाइयो!

आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है. मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की ओर से धन्यवाद देता हूं. मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं. मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी है, जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देश भारत से फैला है. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है.

हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है. मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इजराइलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़कर खंडहर बना दिया था और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी.

मुझे इस बात का गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और अभी भी उन्हें पाल-पोस रहा है. भाइयों, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा, जिन्हें मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज करोड़ों लोगों द्वारा प्रतिदिन दोहराया जाता है.

रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम्।

नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव।।

अर्थात, जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न् नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिलती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है.

वे देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, पर सभी भगवान तक ही जाते हैं. वर्तमान सम्मेलन, जो कि आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, गीता में बताए गए इस सिद्धांत का प्रमाण है कि ‘जो भी मुझ तक आता है, चाहे वह कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं. लोग चाहे कोई भी रास्ता चुनें, आखिर में मुझ तक ही पहुंचते हैं”.

सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं, हठधर्मिता और इसके भयानक वंशज लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है. कितनी बार ही यह धरती खून से लाल हुई है. कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं.

अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते, तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है. मुझे पूरी आशा है कि आज इस सम्मेलन का शंखनाद सभी हठधर्मिताओं, हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हों या कलम से और सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा.

 

चीख़ में तब्दील किलकारी के नेपथ्य का दर्द

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अरुणाभ सौरभ | Navpravah.com
मोटी रकम वसूलने वाले पब्लिक स्कूल क्या हमारे बच्चों की जान सुरक्षित रखने के प्रति संवेदनशील है? कुकुरमुत्ते की तरह हर शहर-कस्बे में उग आए पब्लिक स्कूल हमारे बच्चे को ना पब्लिक का बनाते हैं ना स्कूल का रहने देते हैं । सरकारी स्कूलों में अब वे बच्चे भेजे जाते हैं जिनके माता-पिता अपने बच्चे को पब्लिक स्कूल भेजने में असमर्थ होते हैं, या कहीं-कहीं उच्च गुणवत्ता वाले सरकारी स्कूल भी होते हैं जहाँ हर घर के बच्चे पढ़ने आते हैं ।
केंद्र सरकार  द्वारा स्वायत्त विद्यालयों की स्थिति किसी भी स्टार पब्लिक स्कूल से बेहतर होती है ! भारत सरकार के केंद्रीय विद्यालयों,नवोदय विद्यालयों,आर्मी स्कूल, सैनिक स्कूल आदि की स्थिति अब भी स्टार पब्लिक स्कूल से बेहतर है । पर इन सबमें नामांकन की अपनी शर्तें हैं सो ठीक पर, गुणवत्ता और बच्चों की देखभाल में जरा सी कमी बेबर्दाश्त होतीं हैं । इसीलिए ध्यान रखने के मामले में सतर्क रहते हैं यहाँ के कर्मी ! अध्यापान,मूल्यांकन से लेकर सुरक्षा,खेलकूद आदि सभी स्तरों पर बच्चों का ख्याल रखा जाता है । इसके वाबाजूद सरकारी विद्यालय हाई-फ़ाई सोसाइटी में उपहास का विषय है। क्योंकि हमारे सरकारी विद्यालयों में मूल्यों की शिक्षा दी जाती है, कुछ जरूरी पाठ जरूर बता दिये जाते हैं जीवन में जिससे थोड़ी नैतिकता बची रहती है ।
राज्य सरकारों के स्कूल का भी जितना मज़ाक हाई-फ़ाई सोसाइटी वाले लोग उड़ाते हैं, उतना बुरा हाल है नहीं ! मत भूलिए कि हमारी मनोवृत्ति का निजीकरण है जो अपनी बुनियादी दुनिया में रहना ही नहीं चाहती ! स्टेटस सिंबल की बात होती है कि आपका बच्चा पढ़ कहाँ रहा है ? जिसका जो स्टेटस होता है उतनी मोटी रकम बच्चों की शिक्षा पर लुटाता है । हमने स्वयं इन पब्लिक और प्राइवेट स्कूलों को पनपाया है जिससे ये हमारी जेब खोखला कर दे और हमारे बच्चों की आत्मा ! ऊपर से हम अपने प्यारे बच्चे का बचपन छीन लेते हैं, मगर जान सुरक्षित नहीं है- ये कहाँ सोचते हैं ! हमारे बच्चे हाई-फ़ाई स्कूलों में पढे और अंग्रेजीदा माहौल में ढाल जाए, उसकी चाल-ढाल में अंग्रेज़ियत आ जाये थोड़ी सी यही कामना ईश्वर से भी करने लगते हैं । हम मोटी रकम अदा कर एक शानदार फुल एसी स्कूल में बच्चों को इसीलिए दाखिला देते हैं कि हमारा बच्चा फर्राटेदार अँग्रेजी बोले ! मगर क्या करें जमाना वही करता है !
सरकारी विद्यालयों की छवियाँ जान-बूझ कर खराब की गई कि निजी विद्यालय फूले-फले ! शिक्षा एक बेजोड़ कमाऊ सेक्टर हुआ कई कॉर्पोरेट घराने उतर गए शिक्षा के बाज़ार में ! और हमारी प्यारी सी शिक्षा को मेगा मार्केट होने में कोई ज्यादा दिन इंतज़ार नहीं करना पड़ा ! राज्य सरकार के बोर्ड की छवियों की धज्जियाँ इसीलिए लगातार उड़ाई जा रहीं हैं । हाँ अगर हाल बुरा है सरकारी स्कूलों का तो प्राइवेट का भी बहुत अच्छा नहीं है ! यहाँ मेरा मकसद सरकारी-प्राइवेट स्कूल का मुक़ाबला कराना नहीं है। वो सात साल का बेटा हमारा,हम सबका बेटा है, और भी वे बच्चे जो मारे जाते हैं वे हमारे नहीं हैं क्या ? उन तमाम मासूमों की मुस्कुराहट देखने का क्या दिल नहीं कराता हमारा ? बच्चे की एक मुस्कान एक पूरे दिन को खुशनुमा बना देती है। रोते हुए बच्चे को हँसाने की बात कहकर एक शायर चला गया ! प्रद्युम्न के गले पर चली चाकू की निशान एक अत्यंत भयभीत करनेवाली दुनिया में ले जाती है हमें ।
हम किस दुनिया में रह रहे हैं जहाँ लेखकों की जान कहीं भी ली जा रही है । आखिर बिना किसी तोड़फोड़ और मार-पीट करनेवाले लोग भी कुछ लोगों को हत्या करने लायक लगती है ? एक शांतिप्रिय अपनी साधना में लीन लेखक को मार देना उचित है, भले ही उसके विचार,जीवन,धर्म और दर्शन आपके जैसा नहीं हो ? किसी भी दूसरी विचारधारा के लोगों से संवाद बनाइये,तर्क-वितर्क कीजिए लगातार बहस हों–पर हत्या क्यों हो ? कहीं एक-दूसरे की   राजनैतिक विचारधारा के विरोधी कार्यकर्त्ता एक-दूसरे की हत्या कर रहे हैं !
बेहतर होगा कि राजनैतिक दलों के कार्यकर्त्ता जनता के बीच अपने-अपने पार्टीगत उपलबद्धियों को गिनाएं एक दूसरे की राजनीतिक खींचतान करे –पर बहस की संस्कृति,आलोचना की संस्कृति बनाएँ रखें, जनता को पोलिटिकली मेच्योर होने दें ! कोई किसी तरह की हत्या क्यों करे ? और जहाँ कहीं भी हत्या होगी वहाँ स्थानीय प्रशासन की ही कमी कही जाएगी।
एक बच्चे के माँ-बाप के लिए नहीं हम सबके लिए उनके बच्चे की हिफाज़त के सतर्कता बनाने की जरूरत है ! यह समय प्रद्युम्न और बलात्कार की शिकार उस पाँच साल की स्कूली छात्रा के शोकाकुल परिवार के प्रति महज सहानुभूति रखने का नहीं है, हम सबको बच्चों की सुरक्षा के प्रति चिंतित होने का है। आखिर मोटी रकम वसूलने वाले स्कूलों में हमारे बच्चे की जान कितनी सुरक्षित है ? और इस निर्ममता पर क्या कहा जाये ? इतने घिनौने लोगों के बीच है हमारी दुनिया जिसमें बच्चे की जान निर्ममतापूर्वक ली जाती है,इस निर्ममता के आगे निशब्द होने के अलावा क्या कर सकते हैं हैं हम जिसमें पाँच साल की स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार जैसी घटना हो  ? बच्चे को बचने दीजिए,लिखने दीजिए लेखकों को अपने समय का इतिहास और अपना-अपना अनुभव जीवन का ! बहुरंगी दुनिया बनाने के लिए कलम को अनवरत चलना होगा किलकारियों को गूँजते रहने की जरूरत है।

गुरूग्राम : प्रद्युम्‍न मर्डर केस में हरियाणा सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने 3 हफ्तों मे मांगा जवाब

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एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में 8 सितंबर को दूसरी क्लास में पढ़ने वाले छात्र प्रद्युम्न की हत्या हुई थी। इस मामले में प्रद्युम्न के पिता वरूण चंद्रा ठाकुर ने सीबीआई जाँच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
वरुण चंद्रा ठाकुर ने प्रद्युम्न की हत्या की सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग के अलावा बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मामलों में स्कूलों को जवाबदेह बनाने के लिए दिशा निर्देश बनाए जाने की भी मांग की है।
इस याचिका पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह केवल एक बच्चे का मसला नहीं है, बल्कि ये देश के बच्चों का मसला है। कोर्ट ने CBSE व रयान इंटरनेशनल स्कूल को भी नोटिस भेजा है, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को भी नोटिस भेजा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस भेजा है, कोर्ट ने इस मामले में 3 हफ्तों में जवाब मांगा है।
कोर्ट की सुनवाई के बाद वरुण ठाकुर ने कहा कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से भी उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
इस मामले में हरियाणा सरकार सीबीआई जाँच के लिए तैयार हो गई है, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर से फ़ोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने वरुण कहा कि वो सीबीआई जांच को तैयार है।
अभिवावकों ने रयान इंटरनेशनल स्कूल की वसंत कुंज शाखा के खिलाफ शिकायत दर्ज की, रयान इंटरनेशनल स्कूल की वसंत कुंज शाखा में अभिवावकों ने सुरक्षा में खामियों, खराब सीसीटीवी और बिना ताले के पानी-टैंक की शिकायत दर्ज कराई है। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के शौचालय में आठ सितंबर को प्रद्युम्न का शव मिला था, उसका गला रेता गया था और उसके शव के पास एक चाकू मिला था।

खुलेआम गन्दगी करने वाले ‘वन्दे मातरम’ कहने लायक नहीं -प्रधानमंत्री मोदी

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में दिए गए भाषण की १२५वीं वर्षगाँठ पर विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छात्रों को संबोधित किया. ‘युवा भारत, नया भारत’ विषय पर छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वन्दे मातरम कहने का अधिकारी वही है, जो साफ़ सफाई के काम में जुटा हो. पान की पीक खुलेआम सड़कों और साफ़ सुथरी जगहों पर थूककर गन्दगी करने वालों को वन्दे मातरम कहने का कोई अधिकार नहीं है.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सपष्ट किया कि विवेकानंद में आत्मसम्मान का भाव बहुत गहरा था और आज हमें इस बात को गंभीरता से सोचने की आवश्यक्ता है. मोदी ने कहा की स्वामी जी ने १२५ साल पहले सन्देश नहीं दिया था, बल्कि ‘विचारों’ को ‘विचारवाद’ में बदला था. स्वामी विवेकानंद ने पश्चिमी देशों को भारतीय अध्यात्मिकता से परिचित कराया था. पीएम ने कहा कि मेक इन इंडिया का संदेश विवेकानंद ने ही दिया था.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि हम चिकित्सकों और चिकित्सालयों नहीं, बल्कि सफाई कर्मियों की बदौलत स्वस्थ रहते हैं. उन्होंने कहा कि पान की पिचकारी थूक कर हमें वंदे मातरम् कहने का कोई हक़ नहीं है. हमने पहले शौचालय फिर देवालय का नारा दिया. पीएम ने कहा कि वंदे मातरम् कहने का हक़दार वही है जो सफ़ाई में जुटा हो. उन्होंने कहा कि जो छात्र लड़कियों का सम्मान करते हैं उन्हें वह सौ बार नमन करते हैं.
प्रधानमंत्री ने छात्र राजनीति का जिक्र किया और कहा कि आज तक मैंने नहीं सुना कि छात्र संघ चुनाव में किसी उम्मीदवार ने यह कहा हो कि हम कैम्पस को साफ रखेंगे. उन्होंने कहा कि क्या हम नहीं चाहते कि हम अपने देश को 21वीं सदी का भारत बनाये, गांधी, भागत सिंह, राजगुरू, आजाद, विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस के सपनों का भारत बनाएँ. यह हमारा दायित्व है और हमें इसे पूरा करना है.