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शाओमी ने लांच किया अब तक का सबसे बेहतरीन कैमरा फ़ोन, जानें कीमत
लीडिंग मोबाइल ब्रांड शाओमी ने Mi Mix 2 और Mi Note 3 नाम के नए स्मार्टफोन्स लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक Mi Note 3 शाओमी का अब तक का सबसे बेहतरीन कैमरा स्मार्टफोन है। इस फोन में 12 मेगापिक्सल का डुअल रियर कैमरा है। कंपनी के मुताबिक यह स्मार्टफोन पिछले साल के फ्लैगशिप MI 6 का बड़ा वैरिएंट है। कंपनी का दावा है कि यह iPhone 7 Plus से छोटा है, लेकिन इसकी डिस्प्ले उससे बड़ी है।
क्या हैं Mi Note 3 के अन्य ख़ास फीचर
– स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स की बात करें तो 5.5 इंच IPS LCD डिस्प्ले वाले इस स्मार्टफोन में ऑक्टाकोर स्नैपड्रैगन 660 प्रोसेसर दिया गया है। इसमें 6GB रैम है और यह दो इंटरनल मेमोरी वैरिएंट – 64GB और 128GB में उपलब्ध होगा।
– Mi Note 3 की डिस्प्ले 5.5 इंच की है जबकि इसकी बैटरी 3,500mAh की है। कॉम्पकन्य के दावों के मुताबिक फ़ोन की चार्जिंग कैपेसिटी बहुत तेज़ है। सेल्फी दीवानों के लिए यह एक बेहतरीन चॉइस साबित हो सकता है क्योंकि इसमें 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है।
– इसके अलावा इस सुपर कैमरा फ़ोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फेशियल रिकॉग्निशन फीचर भी दिया गया है। इसके जरिए चेहरा पहचान कर फोन अनलॉक होगा। कंपनी ने दावा किया है कि फेस अनलॉक फिंगरप्रिंट स्कैनर जैसा ही फास्ट है, जिसे एक हाथ से यूज किया जा सकता है।
– डुअल कैमरा सेटअप वाले इस फ़ोन में एक लेंस वाइड एंगल है जबकि दूसरा टेलीफोटो लेंस है। बैक्ग्राउंड ब्लर करके पोट्रेट मोड लेने के लिए यह काफी बेहतर है।
– Mi Note 3 चारों तरफ से कर्व्ड है और इसका बॉडी फ्रेम ऐल्यूमिनियम का है।
क्या होगी कीमत
कीमतों की बात करें तो Mi Note 3 की कीमत लगभग 24,499 रुपये है, जिसमें 6GB रैम और 64GB इंटरनल मेमोरी वाला ब्लैक वैरिएंट मिलेगा। इसके अलावा इसके दो और भी मॉडल हैं। पहला 6GB रैम के साथ 128GB इंटरनल मेमोरी वैरिएंट है, जिसकी कीमत लगभग 28,420 रुपये है। दूसरा वैरिएंट ब्लू कलर का है जिसकी कीमत लगभग 29,400 रुपये है।
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१२५ साल पहले स्वामी विवेकानंद ने कही थीं यह प्रमुख बातें
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
१२५ साल पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने जो भाषण दिया था, उसकी चर्चा आज भी पूरे विश्व में होती है. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में स्वामी विवेकानंद के भाषण का ज़िक्र विद्यार्थियों के सामने किया. मोदी ने विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए छात्रों को उनका अनुसरण करने की सलाह दी. प्रस्तुत है स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के प्रमुख अंश.
स्वामी विवेकानंद जब बहुत कम उम्र के थे तभी सारी दुनिया ने उनके ज्ञान का लोहा मान लिया था. 12 जनवरी 1863 को जन्मे इस संन्यासी ने अपनी प्रखर ज्ञान से पूरे विश्व में भारतीय अध्यात्मिकता का ज़बररदस्त प्रचार किया था. अमेरिका के शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म संसद में दुनिया के सभी धर्मों के प्रतिनिधी आए थे और स्वामी विवेकानंद इसमें सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. स्वामीजी ने ऐसा यादगार भाषण दिया कि भारत की अतुल्य अध्यात्मिक विरासत और ज्ञान का डंका बज गया.
प्रिय बहनो और भाइयो!
आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है. मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की ओर से धन्यवाद देता हूं. मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं. मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी है, जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देश भारत से फैला है. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है.
हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है. मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इजराइलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़कर खंडहर बना दिया था और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी.
मुझे इस बात का गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और अभी भी उन्हें पाल-पोस रहा है. भाइयों, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा, जिन्हें मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज करोड़ों लोगों द्वारा प्रतिदिन दोहराया जाता है.
रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषा
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव।।
अर्थात, जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न् नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिलती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है.
वे देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, पर सभी भगवान तक ही जाते हैं. वर्तमान सम्मेलन, जो कि आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, गीता में बताए गए इस सिद्धांत का प्रमाण है कि ‘जो भी मुझ तक आता है, चाहे वह कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं. लोग चाहे कोई भी रास्ता चुनें, आखिर में मुझ तक ही पहुंचते हैं”.
सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं, हठधर्मिता और इसके भयानक वंशज लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है. कितनी बार ही यह धरती खून से लाल हुई है. कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं.
अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते, तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है. मुझे पूरी आशा है कि आज इस सम्मेलन का शंखनाद सभी हठधर्मिताओं, हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हों या कलम से और सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा.

















