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हमें रुकना मंजूर नहीं, झुकना हमारा स्वभाव नहीं, ये देश ना रुकेगा, ना झुकेगा – पीएम मोदी
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
72वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया, इससे पहले पीएम मोदी ने राजघाट पहुंच महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की, प्रधानमंत्री ने इस दौरान देश में हर क्षेत्र में हुए विकास को जनता के सामने रखा।
पीएम ने कविता पाठ करते हुए देश की शक्ति का उल्लेख किया, उन्होंने कहा हमें रुकना मंजूर नहीं, झुकना हमारा स्वभाव नहीं, ये देश ना रुकेगा, ना झुकेगा।
पीएम ने कहा कि आज का सूर्योदय एक नई उमंग, चेतना को लेकर आया है, आजादी का यह पर्व हम तक मना रहे हैं, जब हमारी बेटियों ने सात समुंदर को पार किया और तिरंगा लहराया है।
पीएम मोदी ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को गिनाया, उन्होंने कहा कि हम 2022 तक देश के बेटा-बेटी को अंतरिक्ष तक पहुंचाएंगे, मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर कहा कि हम गोली और गाली के रास्ते पर नहीं पर गले लगाकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
पीएम ने कहा कि मेरे बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, लेकिन मैं आज बेसब्र हूं, मैं बेचैन हूं, बच्चों के विकास में कुपोषण रुकावट बना हुआ है, मुझे मेरे देश को कुपोषण से मुक्त कराना है।
उन्होंने कहा एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अच्छी रिपोर्ट पेश की है, उस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्ष में पांच करोड़ गरीब गरीबी की रेखा से बाहर आए हैं, हमने अपने चार सालों में देश के गरीबों को सशक्त बनाने पर बल दिया है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि, अगले साल बैसाखी के त्योहार पर जलियांवाला बाग कांड को 100 साल पूरे हो जाएंगे, मैं उन लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने तब अपनी जान गवां दी थी, उन्होंने कहा कि, 2014 में देश के सवा सौ करोड़ नागरिक सरकार बनाकर रुके नहीं थे, वे देश बनाने के लिए जुटे थे और जुटे रहेंगे।
स्वतंत्रता संग्राम में बागी बलिया के बलिदान को जान लेना ज़रूरी है
गौरव कुमार उपाध्याय | Navpravah.com
“चौदह दिन अपना राज रहा, इसके हम सब अभिमानी हैं ।
भारत छोड़ो के नारे की, बलिया अमिट निशानी है।”
उपरोक्त पंक्तियां बलिया के अमिट इतिहास को बतलाने के लिये काफी है, जहाँ की जनता ने अंग्रेजी हुक्मरानों की ईंट से ईंट बजा डाली और अपने इन्हीं तेवरों के कारण बलिया, बागी बलिया कहलाया।
दरअसल किस्सा अगस्त 1942 का है, जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आन्दोलन की घोषणा करने और तदोपरान्त उनकी नज़रबंदी के बाद देश में जनाक्रोश फैल गया। चारों तरफ अंग्रेजो भारत छोड़ो के नारे लगने लगे। जनाक्रोश भी ऐसा कि इसे भारत का द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम कहें, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इस जनाक्रोश से बलिया कहाँ अछूता था। 9 अगस्त 1942 की सुबह बलिया के बागी तेवरों की बानगी बन कर आई। बलिया के अलग अलग तहसीलों मे लोग इकट्ठे होने लगे, जगह जगह तिरंगा लहराया जाने लगा। भीड़ का उन्माद इतना था कि पुलिस को कई बार लाठी चार्ज करना पड़ा। पर भीड़ तो जैसे स्वराज के लिये मतवाली थी, ट्रेनों मे भर भर कर जनता शहर की तरफ आने लगी। सबको स्वराज चाहिए था, और जेल में बंद नेताओ की रिहाई भी।
तब के आई सी एस और बलिया जिले के तत्कालीन कलेक्टर जगदीश्वर निगम को लगने लगा कि अब बलिया को आजाद किये बिना माहौल बदला नहीं जा सकता, जिसके बाद उन्होने निर्णय लिया और बलिया जिला जेल का फाटक खुलवा दिया तथा जेल मे बंद आन्दोलनकारी नेताओं चित्तू पाण्डेय, राधामोहन सिंह, महानन्द मिश्र आदि को रिहा किया। साथ ही साथ चित्तू पाण्डेय से निवेदन किया कि अब आप ही इस जनाक्रोश को सम्भालें।
इस प्रकार 19 अगस्त 1942 को एक स्वतंत्र बलिया प्रजातन्त्र सरकार का गठन हुआ, जिसके शासनाध्यक्ष बने शेरे बलिया चित्तू पाण्डेय। इस सरकार ने 14 दिनों तक बलिया पर हुकूमत की। शेरे बलिया की उपाधि चित्तू पांडे को स्वयं पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दी थी। बलिया के इन बागी तेवरों से अंग्रेजी हुकूमत का हौसला पस्त होने लगा साथ ही, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्वपूर्ण दौर भी आरम्भ करने में बलिया की क्रांति का अमित योगदान रहा।
*(लेखक, शेरे बलिया चित्तू पांडे के वंशज हैं)
यूपी सरकार से एक दलित ने इच्छामृत्यु की मांग की
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक दलित ने मुफलिसी की जिंदगी से छुटकारा पाने के लिए मुख्यमंत्री योगी से परिवार सहित इच्छामृत्यु की मांग की है, उसने यह आरोप लगाया कि उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
मकरी गांव के भूमिहीन दलित मातादीन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में कहा है कि, मेरा परिवार खपरैल के खंडहरनुमा घरौंदे में रह रहा है, मैंने जिले के अधिकारियों तक के चक्कर लगाए लेकिन अभी तक न तो शौचालय मिला और न ही राशन कार्ड दिया गया है, जिससे हम सब बहुत परेशान हैं।
उसने पत्र में लिखा कि वह अपनी पत्नी शकुंतला के साथ जान देना चाहता है, उसे इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए, इस मामले में जिलाकारी डी.पी. गिरि का कहना है कि उन्हें दलित द्वारा इच्छामृत्यु मांगे जाने की जानकारी नहीं है. उन्हें जॉब कार्ड, इंदिरा आवास और शौचालय पहले ही दिया जा चुका है।
नोएडा : महिलाइंजीनियर ने अपनी कंपनी के 43 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया केस
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 62 में स्थित प्राइवेट कंपनी तवंत टेक्नोलॉजी कंपनी में काम करने वाली एक महिला इंजीनियर ने कंपनी के करीब 43 लोगों पर छेड़खानी का आरोप लगाया है।
उसने इनके खिलाफ सेेक्टर 58 के थाने में पुलिस में शिकायत करते हुए मामला भी दर्ज कराया है, कुल 43 लोगों में से 20 के खिलाफ नामजद और 23 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
महिला का आरोप है कि कंपनी के 20 कर्मचारी उससे हर रोज अश्लील बातें और छेड़खानी करते थे, पुलिस ने महिला की शिकायत पर सभी के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच में जुट गई है।
पीड़ित महिला के अनुसार उसने यह कंपनी अक्टूबर, 2016 में ज्वाइन की थी, इसके बाद 2017 में एक वाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें कुछ लोगों ने महिला से अश्लील बातें की थीं।
उसके बाद ऑफिस में सभी आरोपी अश्लील बातें और कमेंट्स पास करने लगे, पुलिस अधिकारियों के मुताबिक महिला की शिकायत के आधार पर लगभग 20 लोगों के खिलाफ नामजद और 23 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
वहीं कंपनी के किसी भी अधिकारी और कर्मचारी ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देने से मना कर दिया है, कहा कि इस बारे में हमें बोलने से मना किया गया है, हमारे हेडऑफिस वाले ही बात करेंगें।
















