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Monday, September 7, 2026
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बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेंगी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

आनंदीबेन ने दिया विवादित बयान

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

उत्तर प्रदेश | बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा का ग्यारहवाँ दीक्षांत समारोह 16 अक्टूबर 2025 को बड़े हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल करेंगी। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के निदेशक एवं कुलपति डॉ. चेरुकुमल्ली श्रीनिवास राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। डॉ. राव देश के प्रसिद्ध मृदा वैज्ञानिक हैं, जिन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए जाना जाता है।

समारोह में विश्वविद्यालय के कुल 350 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जाएँगी, जिनमें 240 स्नातक, 87 स्नातकोत्तर और 15 पीएच.डी. शोधार्थी शामिल हैं। कुल 19 स्वर्ण पदक भी प्रदान किए जाएँगे, जिनमें 7 छात्राएँ और 12 छात्र सम्मानित होंगे। सर्वश्रेष्ठ स्नातक छात्र के रूप में बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि के अंश सक्सेना को चान्सलर गोल्ड मेडल दिया जाएगा। समारोह में सभी छात्र-छात्राएँ पारंपरिक भारतीय परिधान में शामिल होंगे।

कुलसचिव प्रो. एस.के. सिंह ने बताया कि इस वर्ष उपाधियों के कागज में विशेष परिवर्तन किया गया है। अब सभी उपाधियाँ सिंथेटिक कागज पर मुद्रित होंगी, जो पानी और तेल प्रतिरोधी है तथा हाथ से फाड़ी नहीं जा सकती। इससे उपाधियाँ लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगी।

दीक्षांत समारोह से पूर्व 7 से 14 अक्टूबर तक “दीक्षोत्सव 2025” के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राज्यपाल महोदया के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने दुरेडी, खप्टिहाकला, मवई, चहितारा एवं अछरौड़ ग्रामों के विद्यालयों में कक्षा 3 से 12 तक के विद्यार्थियों के बीच कहानी कथन, चित्रकला, भाषण एवं देशभक्ति गीत प्रतियोगिताएँ कराईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

समारोह के अवसर पर राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में एचपीवी वैक्सीनेशन कार्यक्रम स्थल का भ्रमण करेंगी और संग्रहालय एवं कला दीर्घा का उद्घाटन करेंगी। बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने की पहल की जा रही है। इस वर्ष समारोह में हमीरपुर जिले के 100 आंगनवाड़ी केंद्रों को कुलाधिपति द्वारा आंगनवाड़ी किट प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय द्वारा आयोजित किए जाने वाले उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला 2026 (12 से 14 फरवरी 2026) की विवरणिका का विमोचन भी राज्यपाल द्वारा किया जाएगा।

राजभवन के मार्गदर्शन में पहली बार नैक मूल्यांकन में ‘ए’ ग्रेड प्राप्त कर विश्वविद्यालय ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस वर्ष 57 नई शोध परियोजनाएँ तैयार की गईं और 33 सक्रिय परियोजनाओं पर कार्य जारी है। विश्वविद्यालय द्वारा अलसी, तिल और तोरई की नई प्रजातियाँ विकसित की गई हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत चार प्रदर्शन इकाइयाँ स्थापित की गईं। बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत 2363 क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया गया। राज्य स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर को राज्यपाल द्वारा सर्वश्रेष्ठ केवीके पुरस्कार मिला, वहीं एक वैज्ञानिक को मुख्यमंत्री सम्मान और पाँच शिक्षकों को राज्यस्तरीय पुरस्कार से नवाज़ा गया।

मंडल मुख्यालयों पर स्थापित होंगे दिव्यांग पुनर्वास केंद्र: योगी आदित्यनाथ

cm up yogi
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न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों पर दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से वंचित न रहे। प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर अत्याधुनिक पुनर्वास केंद्र विकसित किए जाएं, जहां दिव्यांग व्यक्तियों को चिकित्सकीय, शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक सहायता एक ही स्थान पर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘सेवा, संवेदना और सम्मान’ के भाव से दिव्यांगजनों के समग्र सशक्तिकरण के लिए कृतसंकल्पित है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में पहले से दिव्यांग पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, उनकी सेवाओं को और सशक्त करते हुए मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। वहीं जहां केंद्र नहीं हैं, वहां उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय जिला या सरकारी अस्पतालों के परिसर में स्थापित किया जाए ताकि चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ इनका सहज समन्वय बन सके। यदि सरकारी अस्पताल में स्थान पर्याप्त नहीं है तो अलग भवन की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, ऑर्थोटिक व प्रॉस्थेटिक सेवाएं, उपकरण वितरण आदि सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि वर्तमान में प्रदेश के 37 जिलों में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं, इनमें 11 मंडल मुख्यालयों पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों में तकनीकी संसाधन और विशेषज्ञ मानवबल को सुदृढ़ किया जाए। प्रत्येक केंद्र में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट, क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट, प्रॉस्थेटिस्ट, ऑर्थोटिस्ट, स्पीच थैरेपिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल पंजीकरण, और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए ताकि सेवाओं की पारदर्शिता और निगरानी बनी रहे। बैठक में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में केंद्र संचालन समिति के स्वरूप पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन केवल सहानुभूति के पात्र बनकर न रहें, बल्कि आत्मनिर्भर और योगदानकारी नागरिक के रूप में समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप सहित विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति रही।

किसानों के हित में योगी सरकार का बड़ा फैसला

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

लखनऊ | प्रदेश के उद्यान एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश के आलू किसानों के हित में वर्ष 2025-26 हेतु विभागीय आलू बीज की दरों पर 800 रुपये प्रति कुंतल की छूट देने का निर्णय लिया गया।

उद्यान मंत्री ने कहा कि वर्तमान वर्ष में विभागीय आलू बीज की विक्रय दरें उत्पादन लागत के आधार पर 2760 रुपये से 3715 रुपये प्रति कुंतल तक निर्धारित थीं, जबकि निजी बीज कंपनियों की आलू बीज की औसत दरें लगभग 2500 से 3500 रूपये के मध्य है। अब किसानों को गुणवत्तायुक्त सभी श्रेणी के विभागीय आलू बीज की दरों में 800 रुपये प्रति कुंतल की छूट दी जायेगी।

शोध संस्थाओं एवं सरकारी संस्थाओं को छूट प्रदान नहीं की जायेगी। अब किसानों के लिए सभी विभागीय आलू बीज की दरें 1960 रुपये से 2915 रुपये प्रति कुंतल के बीच रहेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसानों को आलू की खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा तथा गुणवत्तायुक्त बीज की उपलब्धता से प्रदेश में आलू उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जनपदों में किसानों तक यह लाभ शीघ्र पहुँचाया जाए और बीज वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से संपन्न कराई जाए।

वर्तमान वर्ष में उद्यान विभाग के पास 41,876 कुंतल आलू बीज भंडारित है। विभाग द्वारा यह बीज नकद मूल्य पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि किसान आगामी वर्षों के लिए बीज उत्पादन कर सकें। उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख आलू उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लगभग 6.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की जाती है, जिससे लगभग 26 लाख मीट्रिक टन आलू बीज की आवश्यकता होती है। राज्य देश के कुल आलू उत्पादन का लगभग 30 से 35 प्रतिशत उत्पादन करता है, जो न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था बल्कि रोजगार और पोषण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

मंत्री सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को गुणवत्तायुक्त बीज सुलभ दरों पर उपलब्ध हो ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। किसान भाई विभागीय आलू बीज कम दरों पर अपने संबंधित जनपदीय उद्यान अधिकारी से संपर्क कर नकद मूल्य पर प्राप्त कर सकते हैं। इससे आगामी वर्षों के लिए बीज तैयार किया जा सकेगा, जिससे प्रदेश में आलू उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि होगी।

चित्रकूट: आबकारी टीम की छापेमारी, पकड़ी कच्ची और अंग्रेज़ी शराब

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

चित्रकूट | आबकारी आयुक्त निर्देश मे जिले मे विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें आबकारी अधिकारी सहित पांच टीमें बनाकर मुखबिर की सूचना के आधार पर कई जगह छापेमारी की गई साथ ही अंग्रेजी विदेशी शराबों की दुकानों में चेकिंग भी की गई।

देर शाम जिला अधिकारी के निर्देश पर संयुक्त आबकारी आयुक्त आगरा जोन एवं उप आबकारी आयुक्त चित्रकूट धाम प्रभार बांदा एवं जिला आबकारी अधिकारी निर्देशों के अनुसार में आज आबकारी निरीक्षक क्षेत्र 2 मऊ द्वारा थाना रैपुरा क्षेत्रांतर्गत आबकारी दुकानों का नियमानुसार निरीक्षण किया गया। जिसके अंतर्गत आबकारी ऐप से दुकान में रखी मदिरा को स्कैन कर सत्यापन किया गया साथ ही विक्रेताओं को POS मशीन का शत प्रतिशत उपयोग कर मदिरा विक्रय करने और नियमानुसार दुकान संचालन हेतु निर्देशित किया गया।

इसके साथ ही क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक क्षेत्र 1 कर्वी तथा क्षेत्र 3 मानिकपुर द्वारा मय स्टॉफ थाना कर्वी क्षेत्रांतर्गत ग्राम टिकुरा में औचक दबिश देकर संदिग्ध स्थलों की सघन तलाशी ली गई एवं लगभग 200 किलो लहन मौके पर नष्ट की गई। साथ ही 20 लीटर अवैध कच्ची शराब जब्त कर संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम 1910 (यथा संशोधित) के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कार्यवाही की गई ।

मंदाकिनी नदी के किनारे के लगभग चार ठिकानों में छापामारी की गई, जहां बनाने के उपकरण तो मिले लेकिन टीम में किसी भी प्रकार का लहान व कच्ची शराब नहीं बराबर कर जिला अधिकारी ने कहा कि कच्ची शराब पूरी तरह बंद होगी, जहां भी इसकी शिकायत मिलेगी उसके खिलाफ धनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार चुनाव को लेकर बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने कही बड़ी बात

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

वाराणसी | चंदौली के धरौली में पूर्व सांसद और चर्चित बाहुबली नेता धनंजय सिंह शनिवार को पहुंचे, जहां उन्होंने यूपी-बिहार बॉर्डर स्थित धरौली में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर कई अहम बातें साझा कीं और एनडीए की जीत का विश्वास जताया।

धनंजय सिंह ने बताया कि वे बिहार जा रहे हैं, जहां वे जदयू प्रत्याशी और मंत्री जमा खां के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने कहा कि, “मैं प्रयास करूंगा कि बिहार में एक बार फिर से एनडीए की सरकार बने और विकास की गति आगे बढ़े।” उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ करते हुए कहा, “नीतीश जी के नेतृत्व में ही बिहार में स्थिरता, विकास और कानून का राज स्थापित हुआ है। उनके प्रति जो जनता का विश्वास है, वह किसी और नेता में नहीं दिखती।”

पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि इस बार बिहार में जनता फिर से नीतीश कुमार को मौका देगी और एनडीए की सरकार रिपीट करेगी। उन्होंने दावा किया कि बिहार में विपक्ष बिखरा हुआ है और जनता का भरोसा अब भी एनडीए पर बना हुआ है।

धनंजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वे निजी रूप से भी चाहते हैं कि बिहार में सुशासन की सरकार कायम रहे और इसका नेतृत्व वही व्यक्ति करे, जिसने वर्षों तक जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास किया है।

बिहार चुनाव के मद्देनज़र इस प्रकार बाहरी नेताओं का समर्थन और सक्रिय प्रचार यह दिखाता है कि इस बार मुकाबला दिलचस्प और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होने वाला है। धनंजय सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं की भूमिका भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
इस दौरान चंदौली में स्थानीय समर्थकों और पत्रकारों की भीड़ देखने को मिली, जो उनके आगमन से उत्साहित नजर आई।

चित्रकूट: नगर में गोवंश की स्थिति चिंतनीय, युवाओं में आक्रोश

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

चित्रकूट | नगर की पावन धरा पर आज युवाओं ने गोवंश की दयनीय स्थिति को लेकर आवाज़ बुलंद की। युवा समाजसेवी अर्जुन पांडे के नेतृत्व में जागरूक युवाओं ने एसडीएम महिपाल सिंह को ज्ञापन सौंपकर नगर में भटकते और कचरे में पलते गोवंश के लिए ठोस इंतज़ाम की मांग रखी।

ज्ञापन में कहा गया कि लापरवाही के चलते गोवंश का जीवन निरंतर संकट में है। सड़कों और कचरे के ढेरों में उनकी करुण दशा न केवल उनके अस्तित्व को मिटा रही है, बल्कि नगर की सूरत और पवित्रता को भी धूमिल कर रही है।

युवाओं ने चेताया कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकला तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द प्रभावी कदम उठाएगा।

चित्रकूट: 75 साल से सड़क के लिए तरह रहा आदिवासियों का गाँव

आकाश कश्यप | navpravah.com 

चित्रकूट | पहले अंग्रेज़ों ने गुलाम बनाये रखा, फिर ददुआ ने शोषण किया और उसके आतंक ने तोड़ा। फिर छुटभैये डकैतों ने आबरू लूटी और अब सिस्टम-सियासत बची हुई उम्मीद तोड़ रहा है। कई पीढ़ियों की आँखें पथरा गई उस उम्मीद पर टकटकी लगाए कि शायद अब सड़क मयस्सर होगी, अब गांव की कोई भी प्रसव से पीड़ित महिला अस्पताल पहुँचने से पहले दम नहीं तोड़ेगी! बच्चे हसंते खेलते शिक्षा क्षेत्र में झंडे गाड़ेंगे, गांव का जुड़ाव शहर से होगा । लेकिन मानिकपुर विकासखण्ड के चूल्हि गांव के ग्रामीणों की ये उम्मीदें बीते 75 बरस से सिर्फ उम्मीदें ही हैं। कब गांव तक सड़क बनेगी किसी को नही पता !

युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने बताया कि चित्रकूट के पाठा इलाके में मौजूद इस गांव में अपनी टीम के साथ पिछले दिनों गया था, तो यकीन ही नहीं हुआ कि जिस विकासखण्ड में विकास के लिए करोड़ो का बजट आता है, जिस तहसील में जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं, उन सरकारी कार्यालयों से महज 5-6 किमी दूर एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी सड़क न होने कारण जीवन ठहरा सा है। एक तरफ देश में नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस-वे के निर्माण का विश्व रिकार्ड बनाया जा रहा है वहीं पाठा के चूल्हि, बड़ेहार जैसे कई ऐसे गांव हैं जहां आज तक सड़क नही बन पाई। आखिर क्या दोष है इन गांव वालों का? यही की ये कोल आदिवासी हैं? या अशिक्षित हैं या फिर इनकी आवाज उठाने वाला कोई नही ? वजह क्या है!

उन्होंने बताया कि अब तक जितने स्थानीय नेता हुए वो सब रबर स्टाम्प की तरह हुए, जिनकी चाभी किसी दादू या दबंग के हाथ होती थी। अधिकारी ऐसे गांवो में जाना नही चाहते, कहीं कीचड़ लग गया या गाड़ी फंस गई तो क्या होगा ? नेता/जनप्रतिनिधि ऐसे गांव कभी भी इसलिए नही घुसना पसन्द करते, क्योंकि चुनावी मुद्दे खत्म हो जाएंगे और मौजूदा राजनीतिक कलेवर बुरा मान जाएगा ! सिस्टम और सियासत की बेरुखी का फायदा ठेकेदार, जेई, सचिव और कुछ अन्य तरह के दबंग उठाते हैं। फिर ऐसे गांवो का होता है फाइलों में विकास जो बनाता है “अतुल्य भारत “

आदिवासी गांव चूल्हि की ऐसी हालत है कि देखकर किसी को भी शर्म आ जाए। किसी को शर्म नहीं आती, अगर शर्म नही आती तो डूब मरिये चुल्लू भर पानी में और सोचिए कि अगर आप किसी ऐसे गांव या घर में पैदा होते, तो आपकी क्या औकात होती ? क्या बन पाते आलीशान गाड़ियों में चलने वाले नेता ! बन पाते सरकारी सुविधाओ से लैस नौकरशाह ? बन पाते जागरूक इंसान ? दौड़ पाते विकास की मुख्य धारा की दौड़ में ? “नही”

युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने कहा कि उन्होंने उक्त गांव में सड़क सहित कई अन्य विषयों को लेकर राष्ट्रपति महोदय को पत्र लिखा है। क्योंकि वो खुद आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं, शायद चूल्ही गांव के गरीब आदिवासियों का दर्द वो समझें। हम चाहते हैं कि उक्त गांव तक विकास पहुंचे और गरीबों का कल्याण हो।

नेपाल में हालात ​स्थिर, कुछ जगहों पर हिंसा जारी

ब्यूरो | navpravah.com

काठमांडू | सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के ​खिलाफ नेपाल में शुरू हुए हुए उग्र प्रदर्शन ने देश की राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। राजधानी काठमांडू से लेकर देशभर में जेनरेशन जेड के द्वारा किए गए आंदोलन ने देश में तख्तापलट करा दिया। बुधवार सुबह से ज्यादातर जगहों पर हालत सामान्य दिखे लेकिन देश के कुछ हिस्सों से अब भी हिंसा की खबरें आ रही हैं।

मंगलवार को सेना ने आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बीच 27 लोगों को गिरफ्तार कर लिया और देश में कर्फ्यू बढ़ा ​दिया गया है। इस दौरान देश में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया और आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियों को भेज दिया गया है।

बता दें कि काठमांडू के गौशाला-चाबाहिल-बौद्ध इलाके से सुरक्षा बलों ने चोरी की गई करीब 33.7 लाख नेपाली रुपये की नकदी बरामद की। इसके अलावा, पुलिस ने 31 गन, मैगजीन और गोला-बारूद जब्त किए हैं, जिनमें से 23 काठमांडू और आठ पोखरा से बरामद हुए। हाल की झड़पों में 23 पुलिसकर्मी और 3 आम नागरिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है।

बढ़ते हिंसा के बीच देश में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा को बढ़ा दिया गया है। निषेधाज्ञा बुधवार को शाम पांच बजे तक लागू रहेगी। वहीं कर्फ्यू बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक लागू रहेगी। जानकारी के मुताबिक, कुछ अराजक तत्व हिंसा, लूटपाट, आगजनी और दुष्कर्म जैसे अपराध कर रहे हैं। सेना ने सभी से शांति बनाए रखने और अपराधियों का समर्थन न करने की अपील की है।

बता दें कि नेपाल की हिंसा में सबसे ज्यादा नुकसान काठमांडू में हुआ है। हिल्टन होटल पूरी तरह से जल कर बर्बाद हो चु​का है। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगने से उनकी पत्नी राज्यलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से झुलस गईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कांतिपुर मीडिया ग्रुप के मुख्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया।

नेपाल में युवा सड़क पर उतरे! जानिए क्या है सोशल मीडिया कनेक्शन?

ब्यूरो | navpravah.com 
नई दिल्ली। नेपाल में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों और देश में हाल ही में लगे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद सरकार का विरोध शुरू हो गया है। देश के युवा खासकर जेनरेशन जेड सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गए हैं। युवाओं ने सरकार के विरोध में नारेबाजी की। कई युवा दीवार फांदकर संसद भवन में घुस गए। पुलिस ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वे बेकाबू हो गए और बैरिकेड कूदकर इधर उधर भागने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस ने बचाव में हल्का लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। कुछ जगहों पर पानी की बौछार की और फायरिंग भी की। इस दौरान एक की मौत हो गई और 42 लोग घायल हो गए। काठमांडू के न्यू बानेश्वर और झापा जिले के दमक में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं।
द हिमालयन टाईम्स के अनुसार, फायरिंग में घायल एक युवक ने सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया। कई घायलों की पहचान अब भी नहीं हो पाई है। दमक में प्रदर्शन कर रहें युवकों ने नेपाली प्रधानमंत्री के पी ओली का पुतला फूंका और कार्यालय के द्वार को भी तोड़ने की कोशिश की। हालात और न खराब हो इसलिए अब सेना को मोर्चे पर उतार दिया गया है।
न्यू बानेश्वर में गोलाबारी में कुछ लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए एवरेस्ट अस्पताल, सिविल अस्पताल समेत आस पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कार्यकर्ता रोनेश प्रधान ने बताया कि हामी नेपाल संगठन ने प्रदर्शनकारियों को उपचार के लिए मैतीघर में एक चिकित्सा शिविर भी बनाया है। प्रधान ने कहा कि मैतीघर में छह से सात घायलों का इलाज चल रहा है जबकि ज्यादातर घायलों का इलाज एवरेस्ट अस्पताल में चल रहा है। घायलों की सटीक संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है।
सोशल मीडिया पर क्यों लगा प्रतिबंध?
सरकार का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पंजीकरण के लिए 28 अगस्त से सात दिन का समय दिया था। इन सात दिनों में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने पंजीकरण नहीं किया। इसके बाद से नेपाली सरकार ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, युट्युब समेत ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।
सरकार का आरोप है कि फर्जी आईडी का उपयोग करके समाज में नफरत और अफवाह फैलाई जा रही है। इससे समाज में अशांति और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही है।

मणिपुर: प्रधानमंत्री मोदी की सम्भावित यात्रा, क्या अब प्रदेश में स्थापित हो जाएगी ‘शांति’ ?

अमित द्विवेदी | navpravah.com 
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर की सुध क्यो नहीं लेते? आरोप लगता रहा कि कठिन दौर में हमेशा साथ खड़े रहने वाले मोदी मणिपुर के साथ सौतेलों जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं? खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12-13 सितंबर में से कभी भी मणिपुर के दौरे पर जा सकते हैं। हालांकि, अभी उनके इस दौरे का आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी को 13 सितंबर को मिजोरम से असम को जोड़ने वाली रेल लाईन का लोकार्पण करने जाना है। उससे पहले वो 12 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर जा सकते हैं। वहां वे दो जन सभाओं को भी संबोधित कर सकते हैं।
पिछले दो सालों से जातीय हिंसा की आग में मणिपुर जल रहा है। अब तक हिंसा में आधिकारिक तौर पर राज्य में 260 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन गैर-सरकारी आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं। हजारों की संख्या में लोग हिंसा में घायल हो चुके हैं। न्यूज एजेंसी डी डब्ल्यू के मुताबिक, 50 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। राज्य में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इन परिस्थितियों को नियंत्रित न कर पाने के कारण लोगों में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को लेकर नाराजगी थी। इसी कारण से उनसे इस्तीफा लेकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। फरवरी से लागू राष्ट्रपति शासन को पिछले महीने फिर बढ़ा दिया गया है।
उनके इस दौरे से पहले दिल्ली में बृहस्पतिवार को कुकी जो-काउंसिल, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समझौता हुआ। इस त्रिपक्षीय समझौते की सबसे खास बात, हिंसा शुरू होने के बाद से ही बंद नेशनल हाइवे-2 को खोलने पर बनी सहमति है। इसे मणिपुर की जीवन रेखा माना जाता है। यह नागालैंड के व्यापारिक शहर दीमापुर को राजधानी इंफाल से जोड़ती है। राज्य को जरूरी वस्तुओं की सप्लाई में इसकी अहम भूमिका रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते मार्च में ही इसे मुक्त आवाजाही के लिए खोलने का एलान किया था। लेकिन कुकी संगठनों ने इस पर लगी पाबंदी हटाने से इंकार कर दिया था।
इस समझौते के तहत कुकी उग्रवादियों ने संवेदनशील इलाकों में बने अपने सात शिविरों को हटाने और अपने हथियार सुरक्षा बलों को सौंपने पर भी सहमति जताई है। तीनों पक्ष मणिपुर में स्थायी शांति बहाल करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने और इसके जरिए समस्या का समाधान करने पर भी सहमत हो गए हैं। यह समझौता अगले एक साल तक के लिया गया है। पहले भी यह समझौता हुआ था लेकिन फरवरी 2024 में हालात खराब होने के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। हालांकि अब केंद्र सरकार ने इसे फिर से लागू करने का समझौता किया है, साथ ही कुछ शर्ते भी जोड़ दी हैं। सरकार ने कहा कि वह समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करेगी।
हालांकि कुकी-जो काउंसिल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नेशनल हाइवे-2 को फिर से खोलने का सवाल ही नहीं उठता। उसका दावा है कि इस सड़क को कभी बंद ही नहीं किया गया था। इस परस्पर विरोधी दावे से असमंजस की स्थिति बनी है।
मोदी के दौरे का अनुमान तब लगा जब मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने एक बैठक बुलाई जिसे किसी वीवीआईपी मूवमेंट के लिए माना गया। उस बैठक में यह तय हुआ कि 7 से 14 सितंबर के बीच किसी भी पुलिस वाले को छूट्टी नहीं दी जाएगी। पुलिस को हर वक्त अलर्अ रहने को कहा गया है।
पीएम मोदी के इस दौरे को कुछ लोग बहुत देर से होने वाला कार्यक्रम बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं। कुकी जो-कांउसिल के सदस्य गिंजा वुअलजोंग ने कहा कि मुझे उम्मीद है प्रधानमंत्री हमारे लोगों और समुदाय के बात को सुनेंगे। अगर वो हमारी समस्या को सुलझाने आ रहे हैं तो बहुत अच्छी बात होगी। हम यह उम्मीद करते हैं कि वो हमारे नेताओं के साथ मिलकर मामले को समझेंगे और उसका हल ढूंढने में मदद करेंगे।हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि वो हमारे राहत शिविरों का दौरा करेंगे और देखेंगे कि हमें कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 
वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि मोदी के दौरे के बाद से राज्य के हालत में कुछ सुधार होगा। इंफाल स्थित कोकोमी के सलाहाकार जीतेंद्र निंगोम्बा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी की यह यात्रा शांति के लिए पहल करेगी। ऐसा माना जा रहा है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री लोगों की समस्याओं को सही से संभाल नहीं पाए, उनको लेकर मणिपुर के लोगों में गुस्सा है। राजग के घटक दल चाहते है कि जल्द ही राज्य में राष्ट्रपति शासन को हटा लोकप्रिय सरकार की स्थापना की जाए।
इस बीच, मैतेई और कुकी समुदाय के बीच शांति प्रक्रिया में शामिल एक आदिवासी नेता का शव बरामद होने से शांति बहाल करने की उनकी (कुकी उग्रवादियों की) मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। नेखाम जोमाहो नामक उस आदिवासी नेता को बीते शनिवार को अपहरण कर लिया गया था। उनका शव असम के कार्बी आंग्लांग जिले में एक नदी से बरामद किया गया। इस हत्या से मैदानी इलाके के लोगों में भारी नाराजगी है। कार्बी आंग्लांग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सैकिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। उग्रवादी संगठन कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (केआरए) ने इस हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है कि वह इस मामले की आंतरिक जांच करेगी।
केआरए के महासचिव एल.एस. गांग्ते ने एक बयान में कहा है कि संगठन के नेतृत्व ने इस हत्या की मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार पांच कैडरों को संगठन से निलंबित कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले राज्य में सवाल पूछा जा रहा है कि इतली देर के बाद प्रधानमंत्री के दौरे से क्या मणिपुर के हालत सुधरेंगे और शांति बहाल करने में मदद मिलेगी? राज्य की भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री का दौरा शांति बहाली की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। पार्टी के एक नेता युमनाम खेमचंद ने मीडिया से कहा कि नेशनल हाइवे-2 को मुक्त आवाजाही के लिए खोलने का फैसला राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। हिंसा शुरू होने के बाद यह पहला बड़ा सकारात्मक फैसला है।
वहीं कांग्रेस इससे उलट दावा कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने कहा  कि अभी बहुत ज्यादा उम्मीद करना ठीक नहीं होगा। मणिपुर की समस्या उतनी आसान नहीं है, जितनी नजर आती है। प्रधानमंत्री ने अगर यही काम हिंसा शुरू होने के तुरंत बाद किया होता, तो हालात नहीं बिगड़ते।
जब राजनीतिक विश्लेषको से इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होने कहा कि उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी किसी निष्कर्ष पर नहीं जा सकते। एक समझौता हो जाने से राज्य के हालात सुधर जाएंगे ऐसा कहना मुश्किल है। कुछ समय का इंतजार करना होगा। जमीनी स्तर पर हालत सुधरने के बाद ही कुछ कह पाना ठीक होगा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मणिपुर में दो साल से चल रही जातीय हिंसा के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना यह है कि मोदी के इस दौरे के बाद राज्य के हालात में कितना सुधार होता है!
मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा की शुरुआत हो चुकी थी। मणिपुर में तीन मई को मैतेई (घाटी बहुल समुदाय- हिंदू) और कुकी जनजाति (पहाड़ी बहुल समुदाय- इसाई) के बीच हिंसा शुरू हुई थी। दरअसल, मणिपुर में मैतेई समाज की मांग है कि उसको कुकी की तरह राज्य में जनजाति का दर्जा दिया जाए। मणिपुर में तनाव तब और बढ़ गया जब कुकी समुदाय ने मैतेई समुदाय की आधिकारिक जनजातीय दर्जा दिए जाने की मांग का विरोध करना शुरू कर दिया। इसे लेकर कुकियों ने तर्क दिया कि इससे सरकार और समाज पर उनका प्रभाव और अधिक मजबूत होगा, जिससे उन्हें जमीन खरीदने या मुख्य रूप से कुकी क्षेत्रों में बसने की अनुमति मिल जाएगी। कुकियों का कहना है कि मैतेई के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा छेड़ा गया नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध उनके समुदाय को उखाड़ने का एक बहाना है। उसके बाद से ही हिंसा शुरू हो गई। कई बार ऐसी घटनाएं भी हुईं जिससे देश शर्मसार हो गया।