चित्रकूट | आबकारी आयुक्त निर्देश मे जिले मे विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें आबकारी अधिकारी सहित पांच टीमें बनाकर मुखबिर की सूचना के आधार पर कई जगह छापेमारी की गई साथ ही अंग्रेजी विदेशी शराबों की दुकानों में चेकिंग भी की गई।
देर शाम जिला अधिकारी के निर्देश पर संयुक्त आबकारी आयुक्त आगरा जोन एवं उप आबकारी आयुक्त चित्रकूट धाम प्रभार बांदा एवं जिला आबकारी अधिकारी निर्देशों के अनुसार में आज आबकारी निरीक्षक क्षेत्र 2 मऊ द्वारा थाना रैपुरा क्षेत्रांतर्गत आबकारी दुकानों का नियमानुसार निरीक्षण किया गया। जिसके अंतर्गत आबकारी ऐप से दुकान में रखी मदिरा को स्कैन कर सत्यापन किया गया साथ ही विक्रेताओं को POS मशीन का शत प्रतिशत उपयोग कर मदिरा विक्रय करने और नियमानुसार दुकान संचालन हेतु निर्देशित किया गया।
इसके साथ ही क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक क्षेत्र 1 कर्वी तथा क्षेत्र 3 मानिकपुर द्वारा मय स्टॉफ थाना कर्वी क्षेत्रांतर्गत ग्राम टिकुरा में औचक दबिश देकर संदिग्ध स्थलों की सघन तलाशी ली गई एवं लगभग 200 किलो लहन मौके पर नष्ट की गई। साथ ही 20 लीटर अवैध कच्ची शराब जब्त कर संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम 1910 (यथा संशोधित) के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कार्यवाही की गई ।
मंदाकिनी नदी के किनारे के लगभग चार ठिकानों में छापामारी की गई, जहां बनाने के उपकरण तो मिले लेकिन टीम में किसी भी प्रकार का लहान व कच्ची शराब नहीं बराबर कर जिला अधिकारी ने कहा कि कच्ची शराब पूरी तरह बंद होगी, जहां भी इसकी शिकायत मिलेगी उसके खिलाफ धनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वाराणसी | चंदौली के धरौली में पूर्व सांसद और चर्चित बाहुबली नेता धनंजय सिंह शनिवार को पहुंचे, जहां उन्होंने यूपी-बिहार बॉर्डर स्थित धरौली में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर कई अहम बातें साझा कीं और एनडीए की जीत का विश्वास जताया।
धनंजय सिंह ने बताया कि वे बिहार जा रहे हैं, जहां वे जदयू प्रत्याशी और मंत्री जमा खां के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने कहा कि, “मैं प्रयास करूंगा कि बिहार में एक बार फिर से एनडीए की सरकार बने और विकास की गति आगे बढ़े।” उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ करते हुए कहा, “नीतीश जी के नेतृत्व में ही बिहार में स्थिरता, विकास और कानून का राज स्थापित हुआ है। उनके प्रति जो जनता का विश्वास है, वह किसी और नेता में नहीं दिखती।”
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि इस बार बिहार में जनता फिर से नीतीश कुमार को मौका देगी और एनडीए की सरकार रिपीट करेगी। उन्होंने दावा किया कि बिहार में विपक्ष बिखरा हुआ है और जनता का भरोसा अब भी एनडीए पर बना हुआ है।
धनंजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वे निजी रूप से भी चाहते हैं कि बिहार में सुशासन की सरकार कायम रहे और इसका नेतृत्व वही व्यक्ति करे, जिसने वर्षों तक जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास किया है।
बिहार चुनाव के मद्देनज़र इस प्रकार बाहरी नेताओं का समर्थन और सक्रिय प्रचार यह दिखाता है कि इस बार मुकाबला दिलचस्प और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होने वाला है। धनंजय सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं की भूमिका भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
इस दौरान चंदौली में स्थानीय समर्थकों और पत्रकारों की भीड़ देखने को मिली, जो उनके आगमन से उत्साहित नजर आई।
चित्रकूट |नगर की पावन धरा पर आज युवाओं ने गोवंश की दयनीय स्थिति को लेकर आवाज़ बुलंद की। युवा समाजसेवी अर्जुन पांडे के नेतृत्व में जागरूक युवाओं ने एसडीएम महिपाल सिंह को ज्ञापन सौंपकर नगर में भटकते और कचरे में पलते गोवंश के लिए ठोस इंतज़ाम की मांग रखी।
ज्ञापन में कहा गया कि लापरवाही के चलते गोवंश का जीवन निरंतर संकट में है। सड़कों और कचरे के ढेरों में उनकी करुण दशा न केवल उनके अस्तित्व को मिटा रही है, बल्कि नगर की सूरत और पवित्रता को भी धूमिल कर रही है।
युवाओं ने चेताया कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकला तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द प्रभावी कदम उठाएगा।
चित्रकूट |पहले अंग्रेज़ों ने गुलाम बनाये रखा, फिर ददुआ ने शोषण किया और उसके आतंक ने तोड़ा। फिर छुटभैये डकैतों ने आबरू लूटी और अब सिस्टम-सियासत बची हुई उम्मीद तोड़ रहा है। कई पीढ़ियों की आँखें पथरा गई उस उम्मीद पर टकटकी लगाए कि शायद अब सड़क मयस्सर होगी, अब गांव की कोई भी प्रसव से पीड़ित महिला अस्पताल पहुँचने से पहले दम नहीं तोड़ेगी! बच्चे हसंते खेलते शिक्षा क्षेत्र में झंडे गाड़ेंगे, गांव का जुड़ाव शहर से होगा । लेकिन मानिकपुर विकासखण्ड के चूल्हि गांव के ग्रामीणों की ये उम्मीदें बीते 75 बरस से सिर्फ उम्मीदें ही हैं। कब गांव तक सड़क बनेगी किसी को नही पता !
युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने बताया कि चित्रकूट के पाठा इलाके में मौजूद इस गांव में अपनी टीम के साथ पिछले दिनों गया था, तो यकीन ही नहीं हुआ कि जिस विकासखण्ड में विकास के लिए करोड़ो का बजट आता है, जिस तहसील में जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं, उन सरकारी कार्यालयों से महज 5-6 किमी दूर एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी सड़क न होने कारण जीवन ठहरा सा है। एक तरफ देश में नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस-वे के निर्माण का विश्व रिकार्ड बनाया जा रहा है वहीं पाठा के चूल्हि, बड़ेहार जैसे कई ऐसे गांव हैं जहां आज तक सड़क नही बन पाई। आखिर क्या दोष है इन गांव वालों का? यही की ये कोल आदिवासी हैं? या अशिक्षित हैं या फिर इनकी आवाज उठाने वाला कोई नही ? वजह क्या है!
उन्होंने बताया कि अब तक जितने स्थानीय नेता हुए वो सब रबर स्टाम्प की तरह हुए, जिनकी चाभी किसी दादू या दबंग के हाथ होती थी। अधिकारी ऐसे गांवो में जाना नही चाहते, कहीं कीचड़ लग गया या गाड़ी फंस गई तो क्या होगा ? नेता/जनप्रतिनिधि ऐसे गांव कभी भी इसलिए नही घुसना पसन्द करते, क्योंकि चुनावी मुद्दे खत्म हो जाएंगे और मौजूदा राजनीतिक कलेवर बुरा मान जाएगा ! सिस्टम और सियासत की बेरुखी का फायदा ठेकेदार, जेई, सचिव और कुछ अन्य तरह के दबंग उठाते हैं। फिर ऐसे गांवो का होता है फाइलों में विकास जो बनाता है “अतुल्य भारत “
आदिवासी गांव चूल्हि की ऐसी हालत है कि देखकर किसी को भी शर्म आ जाए। किसी को शर्म नहीं आती, अगर शर्म नही आती तो डूब मरिये चुल्लू भर पानी में और सोचिए कि अगर आप किसी ऐसे गांव या घर में पैदा होते, तो आपकी क्या औकात होती ? क्या बन पाते आलीशान गाड़ियों में चलने वाले नेता ! बन पाते सरकारी सुविधाओ से लैस नौकरशाह ? बन पाते जागरूक इंसान ? दौड़ पाते विकास की मुख्य धारा की दौड़ में ? “नही”
युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने कहा कि उन्होंने उक्त गांव में सड़क सहित कई अन्य विषयों को लेकर राष्ट्रपति महोदय को पत्र लिखा है। क्योंकि वो खुद आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं, शायद चूल्ही गांव के गरीब आदिवासियों का दर्द वो समझें। हम चाहते हैं कि उक्त गांव तक विकास पहुंचे और गरीबों का कल्याण हो।
काठमांडू | सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ नेपाल में शुरू हुए हुए उग्र प्रदर्शन ने देश की राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। राजधानी काठमांडू से लेकर देशभर में जेनरेशन जेड के द्वारा किए गए आंदोलन ने देश में तख्तापलट करा दिया। बुधवार सुबह से ज्यादातर जगहों पर हालत सामान्य दिखे लेकिन देश के कुछ हिस्सों से अब भी हिंसा की खबरें आ रही हैं।
मंगलवार को सेना ने आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बीच 27 लोगों को गिरफ्तार कर लिया और देश में कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है। इस दौरान देश में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया और आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियों को भेज दिया गया है।
बता दें कि काठमांडू के गौशाला-चाबाहिल-बौद्ध इलाके से सुरक्षा बलों ने चोरी की गई करीब 33.7 लाख नेपाली रुपये की नकदी बरामद की। इसके अलावा, पुलिस ने 31 गन, मैगजीन और गोला-बारूद जब्त किए हैं, जिनमें से 23 काठमांडू और आठ पोखरा से बरामद हुए। हाल की झड़पों में 23 पुलिसकर्मी और 3 आम नागरिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है।
बढ़ते हिंसा के बीच देश में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा को बढ़ा दिया गया है। निषेधाज्ञा बुधवार को शाम पांच बजे तक लागू रहेगी। वहीं कर्फ्यू बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक लागू रहेगी। जानकारी के मुताबिक, कुछ अराजक तत्व हिंसा, लूटपाट, आगजनी और दुष्कर्म जैसे अपराध कर रहे हैं। सेना ने सभी से शांति बनाए रखने और अपराधियों का समर्थन न करने की अपील की है।
बता दें कि नेपाल की हिंसा में सबसे ज्यादा नुकसान काठमांडू में हुआ है। हिल्टन होटल पूरी तरह से जल कर बर्बाद हो चुका है। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगने से उनकी पत्नी राज्यलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से झुलस गईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कांतिपुर मीडिया ग्रुप के मुख्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया।
नई दिल्ली। नेपाल में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों और देश में हाल ही में लगे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद सरकार का विरोध शुरू हो गया है। देश के युवा खासकर जेनरेशन जेड सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गए हैं। युवाओं ने सरकार के विरोध में नारेबाजी की। कई युवा दीवार फांदकर संसद भवन में घुस गए। पुलिस ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वे बेकाबू हो गए और बैरिकेड कूदकर इधर उधर भागने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस ने बचाव में हल्का लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। कुछ जगहों पर पानी की बौछार की और फायरिंग भी की। इस दौरान एक की मौत हो गई और 42 लोग घायल हो गए। काठमांडू के न्यू बानेश्वर और झापा जिले के दमक में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं।
द हिमालयन टाईम्स के अनुसार, फायरिंग में घायल एक युवक ने सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया। कई घायलों की पहचान अब भी नहीं हो पाई है। दमक में प्रदर्शन कर रहें युवकों ने नेपाली प्रधानमंत्री के पी ओली का पुतला फूंका और कार्यालय के द्वार को भी तोड़ने की कोशिश की। हालात और न खराब हो इसलिए अब सेना को मोर्चे पर उतार दिया गया है।
न्यू बानेश्वर में गोलाबारी में कुछ लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए एवरेस्ट अस्पताल, सिविल अस्पताल समेत आस पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कार्यकर्ता रोनेश प्रधान ने बताया कि हामी नेपाल संगठन ने प्रदर्शनकारियों को उपचार के लिए मैतीघर में एक चिकित्सा शिविर भी बनाया है। प्रधान ने कहा कि मैतीघर में छह से सात घायलों का इलाज चल रहा है जबकि ज्यादातर घायलों का इलाज एवरेस्ट अस्पताल में चल रहा है। घायलों की सटीक संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है।
सोशल मीडिया पर क्यों लगा प्रतिबंध?
सरकार का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पंजीकरण के लिए 28 अगस्त से सात दिन का समय दिया था। इन सात दिनों में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने पंजीकरण नहीं किया। इसके बाद से नेपाली सरकार ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, युट्युब समेत ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।
सरकार का आरोप है कि फर्जी आईडी का उपयोग करके समाज में नफरत और अफवाह फैलाई जा रही है। इससे समाज में अशांति और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही है।
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर की सुध क्यो नहीं लेते? आरोप लगता रहा कि कठिन दौर में हमेशा साथ खड़े रहने वाले मोदी मणिपुर के साथ सौतेलों जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं? खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12-13 सितंबर में से कभी भी मणिपुर के दौरे पर जा सकते हैं। हालांकि, अभी उनके इस दौरे का आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी को 13 सितंबर को मिजोरम से असम को जोड़ने वाली रेल लाईन का लोकार्पण करने जाना है। उससे पहले वो 12 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर जा सकते हैं। वहां वे दो जन सभाओं को भी संबोधित कर सकते हैं।
पिछले दो सालों से जातीय हिंसा की आग में मणिपुर जल रहा है। अब तक हिंसा में आधिकारिक तौर पर राज्य में 260 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन गैर-सरकारी आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं। हजारों की संख्या में लोग हिंसा में घायल हो चुके हैं। न्यूज एजेंसी डी डब्ल्यू के मुताबिक, 50 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। राज्य में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इन परिस्थितियों को नियंत्रित न कर पाने के कारण लोगों में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को लेकर नाराजगी थी। इसी कारण से उनसे इस्तीफा लेकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। फरवरी से लागू राष्ट्रपति शासन को पिछले महीने फिर बढ़ा दिया गया है।
उनके इस दौरे से पहले दिल्ली में बृहस्पतिवार को कुकी जो-काउंसिल, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समझौता हुआ। इस त्रिपक्षीय समझौते की सबसे खास बात, हिंसा शुरू होने के बाद से ही बंद नेशनल हाइवे-2 को खोलने पर बनी सहमति है। इसे मणिपुर की जीवन रेखा माना जाता है। यह नागालैंड के व्यापारिक शहर दीमापुर को राजधानी इंफाल से जोड़ती है। राज्य को जरूरी वस्तुओं की सप्लाई में इसकी अहम भूमिका रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते मार्च में ही इसे मुक्त आवाजाही के लिए खोलने का एलान किया था। लेकिन कुकी संगठनों ने इस पर लगी पाबंदी हटाने से इंकार कर दिया था।
इस समझौते के तहत कुकी उग्रवादियों ने संवेदनशील इलाकों में बने अपने सात शिविरों को हटाने और अपने हथियार सुरक्षा बलों को सौंपने पर भी सहमति जताई है। तीनों पक्ष मणिपुर में स्थायी शांति बहाल करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने और इसके जरिए समस्या का समाधान करने पर भी सहमत हो गए हैं। यह समझौता अगले एक साल तक के लिया गया है। पहले भी यह समझौता हुआ था लेकिन फरवरी 2024 में हालात खराब होने के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। हालांकि अब केंद्र सरकार ने इसे फिर से लागू करने का समझौता किया है, साथ ही कुछ शर्ते भी जोड़ दी हैं। सरकार ने कहा कि वह समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करेगी।
हालांकि कुकी-जो काउंसिल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नेशनल हाइवे-2 को फिर से खोलने का सवाल ही नहीं उठता। उसका दावा है कि इस सड़क को कभी बंद ही नहीं किया गया था। इस परस्पर विरोधी दावे से असमंजस की स्थिति बनी है।
मोदी के दौरे का अनुमान तब लगा जब मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने एक बैठक बुलाई जिसे किसी वीवीआईपी मूवमेंट के लिए माना गया। उस बैठक में यह तय हुआ कि 7 से 14 सितंबर के बीच किसी भी पुलिस वाले को छूट्टी नहीं दी जाएगी। पुलिस को हर वक्त अलर्अ रहने को कहा गया है।
पीएम मोदी के इस दौरे को कुछ लोग बहुत देर से होने वाला कार्यक्रम बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं। कुकी जो-कांउसिल के सदस्य गिंजा वुअलजोंग ने कहा कि मुझे उम्मीद है प्रधानमंत्री हमारे लोगों और समुदाय के बात को सुनेंगे। अगर वो हमारी समस्या को सुलझाने आ रहे हैं तो बहुत अच्छी बात होगी। हम यह उम्मीद करते हैं कि वो हमारे नेताओं के साथ मिलकर मामले को समझेंगे और उसका हल ढूंढने में मदद करेंगे।हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि वो हमारे राहत शिविरों का दौरा करेंगे और देखेंगे कि हमें कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि मोदी के दौरे के बाद से राज्य के हालत में कुछ सुधार होगा। इंफाल स्थित कोकोमी के सलाहाकार जीतेंद्र निंगोम्बा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी की यह यात्रा शांति के लिए पहल करेगी। ऐसा माना जा रहा है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री लोगों की समस्याओं को सही से संभाल नहीं पाए, उनको लेकर मणिपुर के लोगों में गुस्सा है। राजग के घटक दल चाहते है कि जल्द ही राज्य में राष्ट्रपति शासन को हटा लोकप्रिय सरकार की स्थापना की जाए।
इस बीच, मैतेई और कुकी समुदाय के बीच शांति प्रक्रिया में शामिल एक आदिवासी नेता का शव बरामद होने से शांति बहाल करने की उनकी (कुकी उग्रवादियों की) मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। नेखाम जोमाहो नामक उस आदिवासी नेता को बीते शनिवार को अपहरण कर लिया गया था। उनका शव असम के कार्बी आंग्लांग जिले में एक नदी से बरामद किया गया। इस हत्या से मैदानी इलाके के लोगों में भारी नाराजगी है। कार्बी आंग्लांग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सैकिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। उग्रवादी संगठन कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (केआरए) ने इस हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है कि वह इस मामले की आंतरिक जांच करेगी।
केआरए के महासचिव एल.एस. गांग्ते ने एक बयान में कहा है कि संगठन के नेतृत्व ने इस हत्या की मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार पांच कैडरों को संगठन से निलंबित कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले राज्य में सवाल पूछा जा रहा है कि इतली देर के बाद प्रधानमंत्री के दौरे से क्या मणिपुर के हालत सुधरेंगे और शांति बहाल करने में मदद मिलेगी? राज्य की भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री का दौरा शांति बहाली की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। पार्टी के एक नेता युमनाम खेमचंद ने मीडिया से कहा कि नेशनल हाइवे-2 को मुक्त आवाजाही के लिए खोलने का फैसला राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। हिंसा शुरू होने के बाद यह पहला बड़ा सकारात्मक फैसला है।
वहीं कांग्रेस इससे उलट दावा कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने कहा कि अभी बहुत ज्यादा उम्मीद करना ठीक नहीं होगा। मणिपुर की समस्या उतनी आसान नहीं है, जितनी नजर आती है। प्रधानमंत्री ने अगर यही काम हिंसा शुरू होने के तुरंत बाद किया होता, तो हालात नहीं बिगड़ते।
जब राजनीतिक विश्लेषको से इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होने कहा कि उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी किसी निष्कर्ष पर नहीं जा सकते। एक समझौता हो जाने से राज्य के हालात सुधर जाएंगे ऐसा कहना मुश्किल है। कुछ समय का इंतजार करना होगा। जमीनी स्तर पर हालत सुधरने के बाद ही कुछ कह पाना ठीक होगा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मणिपुर में दो साल से चल रही जातीय हिंसा के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना यह है कि मोदी के इस दौरे के बाद राज्य के हालात में कितना सुधार होता है!
मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा की शुरुआत हो चुकी थी। मणिपुर में तीन मई को मैतेई (घाटी बहुल समुदाय- हिंदू) और कुकी जनजाति (पहाड़ी बहुल समुदाय- इसाई) के बीच हिंसा शुरू हुई थी। दरअसल, मणिपुर में मैतेई समाज की मांग है कि उसको कुकी की तरह राज्य में जनजाति का दर्जा दिया जाए। मणिपुर में तनाव तब और बढ़ गया जब कुकी समुदाय ने मैतेई समुदाय की आधिकारिक जनजातीय दर्जा दिए जाने की मांग का विरोध करना शुरू कर दिया। इसे लेकर कुकियों ने तर्क दिया कि इससे सरकार और समाज पर उनका प्रभाव और अधिक मजबूत होगा, जिससे उन्हें जमीन खरीदने या मुख्य रूप से कुकी क्षेत्रों में बसने की अनुमति मिल जाएगी। कुकियों का कहना है कि मैतेई के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा छेड़ा गया नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध उनके समुदाय को उखाड़ने का एक बहाना है। उसके बाद से ही हिंसा शुरू हो गई। कई बार ऐसी घटनाएं भी हुईं जिससे देश शर्मसार हो गया।
नई दिल्ली |वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अध्यक्षता में हो रही जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक जारी है। यह बैठक दो दिनों तक चलेगी और लिए गए फैसलों की घोषणा चार सितंबर को होगी। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हो रहे हैं। इस बार हो रही जीएसटी परिषद की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी दरों में बदलाव की घोषणा किया था। यह बदलाव जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद होगी। परिषद ने इस बार जीएसटी दरों में भारी कटौती करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार के इस प्रस्ताव का मकसद अमेरिका द्वारा लगाए टैरिफ के चुनौतियों से निपटने के लिए घरेलु स्तर पर मांग को बढ़ावा देने की कोशिश करना।
इसके पहले फरवरी में आयकर में बड़ी राहत देने के बाद अब जीएसटी दरों में बड़ी कटौती करने से देश में खपत बढ़ने की उम्मीद है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित रूप से 7.8% की उच्च दर ने इसके संकेत पहले ही दे दिए हैं।
इस बैठक में परिषद, हेयर ऑयल से लेकर छोटी कारों तक लगभग 400 वस्तुओं की कीमत कम करने पर विचार करेगा। रॉयटर्स ने ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी के पार्टनर मनोज मिश्रा के हवाले से बताया है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण कपड़ा, ऑटो और संभवतः फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात पर असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत को प्राथमिक विकास इंजन के रूप में घरेलू खपत पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
इस कदम के बाद से हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज जैसी एफएमसीजी कंपनियों और सैमसंग जैसी इलेक्ट्रानिक्स कंपनियों को फायदे का अनुमान है। वहीं वाहनों की ब्रिकी से मारूति, टोयोटा मोटर्स और सुजुकी कार जैसी कंपनियों को बड़े राहत की उम्मीद है।
जानकारों के मुताबिक जीएसटी स्लैब को चार से घटाकर दो स्लैब में करने की योजना है। जीएसटी में लगने वाले 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत वाले स्लैब को हटाया जा सकता है। वहीं एक 40 प्रतिशत के नए स्लैब को जोड़ने का विचार किया जा रहा है। इसके तहत सिगरेट और महंगी कारों जैसी विलासितापूर्ण चीजों पर मोटा कर लगाने पर विचार किया जाना है। सरकार की योजना है कि रोजमर्रा में उपयोग होने वाली वस्तुओं को 5 प्रतिशत की श्रेणी में लाया जाए, जो फिलहाल 12 प्रतिशत वाले स्लैब में है।
जीएसटी सुधारों के लिए केंद्र की रूपरेखा के अनुसार, आठ क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें कपड़ा, उर्वरक, नवीकरणीय ऊर्जा, मोटर वाहन, हस्तशिल्प, कृषि, स्वास्थ्य और बीमा के दरों में बदलाव से सबसे अधिक लाभ होगा।
सस्ते होने वाले अनुमानित वस्तुओं की सूची-
डेयरी प्रोडक्ट्स: मक्खन, पनीर, छाछ, पनीर जैसे उत्पाद।
रेडी टू इट फूड्स: जैम, अचार, स्नैक्स, चटनी जैसे उत्पाद।
नई दिल्ली| राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात की। वसुंधरा ने भागवत से लगभग 20 मिनट की बातचीत की। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच 20 मिनट की मुलाकात में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मचने लगा है।
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे ने धौलपुर में एक रामकथा के दौरान वनवास को लेकर बयान दिया था और उसके एक दिन बाद ही उन्होंने कहा था कि ईश्वर पर अटूट विश्वास से किसी भी कार्य को पूरा किया जा सकता है, भले ही देर से हो। सियासी गलियारे में उनके इस बयान और भागवत के साथ मुलाकात के बाद चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों की मानें तो सिंधिया आरएसएस की पहली पसंद है। अगर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनती हैं, तो भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष होंगी।
बता दें कि आरएसएस प्रमुख इन दिनों 5 से 7 सितंबर तक होने वाली अखिल भारतीय समन्वय बैठक के लिए जोधपुर प्रवास पर हैं। भागवत से मुलाकात के बाद राजे सीधे सूरसागर स्थित बड़ा रामद्वारा पहुंचीं, जहां रामस्नेही संत रामप्रसाद जी के जन्मदिन की बधाई देने के साथ ही उनके साथ धार्मिक चर्चा भी की। राजे ने अजीत भवन में पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती में सफल हुए युवाओं से भी मुलाकात की और उन्हें हरसंभव मदद देने का आश्वासन भी दिया।
नई दिल्ली | दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामलें में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों को जमानत देने से इन्कार कर दिया।
मंगलवार को इस मामले पर न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने उमर खालिद, शरजील इमाम, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने जमानत याचिका दायर करते हुए दलील दी कि उनके उनके मुवक्किल निर्दोष हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि इस आधार पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। बचाव पक्ष ने कहा कि वो फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
बता दें कि फरवरी 2020 में दिल्ली में हिंसा भड़की थी। इस हिंसा के साजिशकर्ता के रूप में उमर खालिद और शरजील इमाम पर आरोप लगे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था।