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Monday, August 10, 2026
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इलाहाबाद: अतीक अहमद के असलहे का लाइसेंस रद्द

सौम्या केसरवानी,

पूर्व सांसद व सपा के टिकट पर कानपुर कैंट से विधानसभा प्रत्याशी बाहुबली अतीक अहमद के हथियारों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। पिछले दिनों इलाहाबाद SSP शलभ माथुर ने शियाट्स मामले के चलते DM से अतीक का शस्त्र लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की थी। अतीक अहमद के साथ ही उनके तीन अन्य साथियों का भी लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

14 दिसंबर को शाम 4:00 बजे इलाहाबाद के नैनी स्थित  कृषि संस्थान (शियाट्स) में छात्र-छात्राएं परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त थे। इसी बीच पूर्व सांसद अतीक अहमद करीब आधा दर्जन लक्जरी गाड़ियों और बाइकों पर अपने साथ 50 से 60 गुंडे लेकर प्रशासनिक भवन में आ गये और निदेशक प्रशासन के बारे में जानकारी लेते हुए उनके कार्यालय को जबरदस्ती खुलवाकर अंदर घुस गये एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों को अपशब्द बोलते हुए बैठ गये।

उनके साथ के उपद्रवियों ने कार्यालय में उपस्थित कर्मचारियों को लात-घूसों से पीटने लगे। इस दौरान कॉलेज के पीआरओ समेत कई अधिकारियों को पीटा गया।

पूरा मामला मीडिया में गरमाने के बाद पुलिस ने बाहुबली अतीक सहित 6 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। लेकिन इसके बाद भी अतीक ने शिकायतकर्ता पीआरओ को फोन पर धमकाया। इसके बाद इलाहाबाद SSP ने शलभ माथुर ने DM से अतीक अहमद और उनके कई साथियों के शस्त्र लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की थी।

इन दो बड़े फ़िल्मी सितारों ने आमिर को किया नज़र अंदाज़!

आशीष पाण्डेय,

मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म ‘दंगल’ 23 दिसंबर को आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में पहुँच रही है। फिल्म रिलीज़ होने से पूर्व आमिर खान ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया था। इसके लिए उन्होंने बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान और सलमान खान को भी आमंत्रित किया था, लेकिन दोंनो एक्टरों ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए आने से इंकार कर दिया।

आमिर द्वारा असहिष्णुता वाला बयान दिए जाने के बाद से उनकी यह फिल्म इस विवाद को लेकर बहुत चर्चा में थी। रिलीज़ डेट करीब आ जाने के बाद हाल ही में मुंबई में फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई थी। इस दौरान फोगट परिवार के अलावा मनसे प्रमुख राज ठाकरे, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी मौजूद थे, लेकिन आश्चर्य यह रहा कि आमिर द्वारा दिए गए न्यौते के बावजूद शाहरुख़ और सलमान प्रीमियर में नहीं पहुंचे।

आमिर ने इस विषय में खुद बताया कि शाहरुख और सलमान ने संदेश भेजा है कि अपने पूर्व निर्धारित शेड्यूल के कारण वे दोनों व्यस्त हैं। आमिर ने कहा कि आगे दोनों की सुविधा को देखते हुए फिर से फिल्म की स्क्रीनिंग की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘दंगल’ पहलवान महावीर सिंह फोगट के जीवन पर आधारित हैं। जिन्होंने अपनी बेटियों गीता और बबीता को काफी कठिनाई के बाद भी पहलवान बनाया। आमिर ने बताया, “मैं हमेशा अपनी फिल्मों को लेकर नर्वस होता हूं। हम जब कभी भी फिल्म बनाते हैं तो पूरे प्यार और मेहनत के साथ बनाते हैं। हमें चिंता है कि दर्शक इसे पसंद करेंगे कि नहीं।” आमिर ने बताया कि हम खुश हैं कि प्रीमियर में जिन्होंने भी फिल्म देखी उन्हें यह पसंद आ रही है।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इलाहाबाद को PNG का तोहफा

अरविन्द मौर्या,

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के तहत भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार प्रतिदिन किसी न किसी केंद्रीय मंत्री को उत्तर प्रदेश के दौरे पर भेज रही है। इसी क्रम में बुधवार, 21 दिसम्बर को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे।

यूपी विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है।
जिसके चलते केंद्र सरकार प्रतिदिन किसी न किसी केंद्रीय मंत्री को उत्तर प्रदेश के दौरे पर भेज रही है। इलाहाबाद आए पेट्रोलियम मंत्री ने इस दौरान शाह को कई योजनाओं की सौगात दी।

CNG स्टेशनों का उद्घाटन-

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में 3 CNG स्टेशनों का उद्घाटन किया।
इसके अलावा उज्ज्वला योजना के तहत केंद्रीय मंत्री ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन योजना का भी उद्घाटन किया।
ज्ञात हो कि, वाराणसी के बाद केंद्र सरकार ने घर-घर गैस पाइपलाइन पहुँचाने की योजना का शुभारम्भ इलाहाबाद में भी कर दिया है। गौरतलब है कि, पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र से PNG पाइपलाइन योजना की यूपी में शुरुआत की थी।

पोस्टमैन बनेंगे नोटमैन, मोबाइल एटीएम से करेंगे ग्रामीणों की मदद

सौम्या केसरवानी,

डाक विभाग अपने पोस्टमैन को नोटमैन के तौर पर तैयार करेगा। डाकियों को मोबाइल एटीएम दिए जाएंगे, जिन्हें लेकर वे गांव-गांव जाएंगे और ग्रामीणों को उनके खातों से रुपये निकालकर देंगे और पैसा ट्रांसफर करने में मदद भी करेंगे।

इसके लिए जल्द ही सभी डाकियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। रुपये लेकर चलने वाले डाकिए की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होंगे। वह एटीएम से अधिकतम कितने रुपये निकालेंगे, जमा की क्या लिमिट होगी, यह बाद में तय होगा।

देश के हर गांव में बैंक नहीं है, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैशलेस करेंसी का सपना पूरा करने के लिए ग्रामीणों को एटीएम की सुविधा की जरूरत है। ऐसे में डाक विभाग ने प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए एक कदम बढ़ाया है। अब तक चिट्ठी, पार्सल और मनी आर्डर लेकर गांव-गांव जाने वाले पोस्टमैन, मोबाइल एटीएम लेकर भी गांव-गांव जाएंगे।

मोबाइल एटीएम के माध्यम से ग्रामीण समय-समय पर यह भी पता कर सकेंगे कि उनके खाते में कितना धन है। यह कदम डिजिटल भारत के सपने को सच करने मे मदद करेगा।

अभिनेता धर्मेंद्र की बिगड़ी तबियत, अस्पताल में भर्ती

सौम्या केसरवानी,

अभिनेता धर्मेंद्र को मुंबई के नानावटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इससे बॉलीवुड को बेहद गहरा धक्का लगा है। धर्मेंद्र पिछले कुछ हफ्तों से पेट में इन्फेक्शन की परेशानी से गुजर रहे हैं। इससे उनके जान को खतरा तक पैदा हो गया और जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराने की सलाह दी गई।

धर्मेंद्र के दोनों बेटे सनी देओल और बॉबी देओल उनके साथ हॉस्पिटल में हैं। फिलहाल उनकी तबियत के बारे में ज्यादाकारी हासिल नहीं हो सकी है। लेकिन देशभर के सभी प्रशंसक उनकी सेहत सुधरने की कामना कर रहे हैं।

इससे पहले, धर्मेंद्र को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। धर्मेंद्र को लगातार सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच साल पहले भी इनको इसी तरह की बीमारी के चलते चंडीगड़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि कुछ दिनों के बाद उन्हें छुट्टी मिल गई थी। धर्मेंद्र ने कई सुपहिट फिल्में दी है और वो आखिरी बार फिल्म ‘यमला पगला दीवाना 2’ में दिखे थे।

नोटबंदी: जानिए किस हाल में जी रहे हैं किसान

अनुज हनुमत,

8 नवम्बर की देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक एक चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए 500 और 1000 की बड़ी नोटों पर पाबंदी लगाने का अहम निर्णय लिया। इसके बाद शुरुआती दिनों से ही ये कयास लगाया जा रहा था कि इस नोटबन्दी का देश के किसानों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा होगा!

समय रबी की फसल का है और जुताई, बुआई का भी काम तेजी से चल रहा है। नोटबन्दी के फैसले को 40 दिन से ऊपर का समय हो गया है और तमाम तरह की रिपोर्ट्स के माध्यम से लगातार ये खुलासा हो रहा है कि नोटबन्दी के बाद से किसानों की स्थिति बड़ी तेजी से दयनीय होती जा रही है, लेकिन जब कल हमने ग्राउंड जीरों की हकीकत जाना तो तस्वीर उन रिपोर्ट्स से उलट थी। उलट का मतलब ये कि आखिर वास्तविक समस्या क्या आ रही है?

बात करते हैं बुन्देलखण्ड के सबसे पिछड़े इलाके पाठा की। चित्रकूट जिले से तकरीबन 40-50 किमी दूर पाठा के उन गांवों में, जहाँ का क्षेत्र दशकों तक दस्यु प्रभावित रहने के कारण आज भी मूलभूत सुविधाओं की आस लगाए बैठा है। इतना पिछड़ा कि यहाँ आस-पास बिजली, सड़क और पानी की तो समुचित व्यवस्था भी नहीं है। अगर बैंको की बात करें तो उसके लिए भी लोगों को 20-30 रूपये लगाकर मानिकपुर आना पड़ता है। कुछ बड़े किसानों को अगर छोड़ दिया जाये तो गरीबी की हालत ऐसी की तन में पूरा कपड़ा भी मुश्किल से ही नजर आएगा।

विगत कई वर्षों से किसानों की भी हालत बिगड़ी है, क्योंकि तीन चार दशक से क्षेत्र सूखे की समस्या से जूझ रहा है। सबसे खास बात ये कि इस पूरे क्षेत्र में आदिवासी जनजातियां बहुतायत मात्रा में निवास करती हैं।

अब बात करते हैं यहाँ के किसानों और मजदूरों पर नोटबन्दी के असर की, जो इस क्षेत्र में काफी कम नजर आया। जो थोड़ा बहुत प्रभाव था भी, वह रोजाना वाले कार्यों पर देखने को मिला। ज्यादातर किसानों और मजदूरों से जब मैंने बात की तो उनका कहना था कि नोटबन्दी के फैसले का वह अपनी निजी जिंदगी में ज्यादा प्रभाव नहीं महसूस कर रहे हैं। हाँ अगर कुछ दिक्कत हुई है, तो वह ये कि बड़े कामों में रुकावट आई है। मसलन शादी, अन्य बड़े खर्चे आदि।

हमने जब इस बात की पड़ताल कि क्या वास्तव में ग्रामीण बैंको में आने वाला कैश इधर उधर किया जा रहा है, तो हमे इसके पुख्ता सबूत तो नहीं मिले लेकिन कुछ किसानों और मजदूरों ने नाम न छापने की शर्त पर हमें बताया कि हमे दिनभर लाइन में लगना पड़ता है और उधर बैंक वाले शाम को बड़े खाता धारकों को कैश उपलब्ध करा देते हैं। जैसे उनके लिए कोई कानून ही न हो। उन्होंने बताया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा अभद्रता भी की जाती है। सरकार ने एक बार में जितनी लिमिट तय की है, उतना कैश भी नहीं देते और दूसरी तरफ बड़ी बड़ी गाड़ियों वालों को पूरा कैश दे दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण भारत के 81 फीसदी नागरिक बैंकों के बिना जी रहे हैं। आकंड़ों के अनुसार ग्रामीण भारत के 93 फीसदी हिस्से में बैंक नहीं बल्कि बैंक मित्र काम कर रहे हैं।

कुलमिलाकर नोटबन्दी के 41 दिन बाद भी ग्रामीण इलाकों के बैंको में लंबी लाइनें इसलिए भी लगातार लंबी बनी हुई हैं, क्योंकि बैंको द्वारा आम लोगों के साथ सहयोग नहीं किया जा रहा है। सबसे बुरी स्थिति ग्रामीण बैंको की है, जहाँ हफ़्तों कैश नही आता। जिसके कारण गरीब किसानों, मजदूरों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ता है। सुबह आकर लाइन में लगना और फिर मायूस होकर लौटना पड़ता है। नोटबन्दी के फैसले पर अधिकांश लोगो की यही राय थी कि ये फैसला बिल्कुल सही है, लेकिन तैयारी कमजोर थी। अब ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि पीएम मोदी के नोटबन्दी वाले फैसले से आम जनमानस को कितना फायदा मिलेगा!

नोटबंदी से मायावती का दिमागी संतुलन बिगड़ा -स्वामी प्रसाद मौर्या

सौम्या केसरवानी,

बसपा सुप्रीमो मायावती के खास रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर उनपर हमला बोला है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मायावती का दिमागी संतुलन बिगड़ा हुआ लग रहा है। बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह बात मुरादाबाद की एक सभा में कही।

उऩ्होंने फिर मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सीटें नीलाम करने का काम करती हैं। इसलिए नोटबंदी के बाद से वह बौखला गई हैं। बसपा में लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या होती है।

गत जून में स्वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी के महासचिव के पद से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया।

इसके पर मायावती ने सफाई दी थी कि उन्होंने मौर्य के बेटे-बेटी को टिकट नहीं दिया। इसलिए उन्होंने ऐसे आरोप लगाएं हैं, और साथ ही मायावती ने ये भी कहा था कि अच्छा हुआ मौर्य ने इस्तीफा दे दिया, क्योंकि वह मौर्य को पार्टी से निकालने ही वाली थी।

यूपी में विपक्ष पर बरसे गृहमंत्री राजनाथ सिंह

सौम्या केसरवानी,

गृह मंत्री राजनाथ सिंह आज उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे। इस दौरान सिंह सूबे के हरदोई जिले में पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा को संबोधित किया।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में नोटबंदी के हंगामे पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नोटबंदी पर विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा नहीं चलने दी, इसलिए हम जनसभा में आये हैं। सिंह ने कहा कि लाइन तो हर जगह आपने लगवाई हैं, हम तो उसे तोड़ना चाहते हैं।

राजनाथ सिंह ने आगे राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के नौजवान नेता कहते हैं कि बोलूँगा तो भूचाल आ जायेगा, पर आप पहले भी बोलते रहे हैं लेकिन हवा भी नहीं चली है। मैंने यूपी के सीएम रहते हुए भी भीगा हुआ धान खरीदने का काम किया था। उन्होंने ये भी कहा कि सपा-बसपा के सीएम क्यों किसानों के पेट पर लात मार रहे हैं? क्या किसानों के साथ अच्छा होता वो नहीं देख पा रहे हैं।

नोटबंदी से जनता फ़क़ीर हो गई है -ममता बनर्जी

सौम्या केसरवानी,

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि नोटबंदी के प्रभाव से जनता फकीर हो गई है। मोदी सरकार इस बात को समझ ही नहीं पा रही है। ममता ने बांकुड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वेनेजुएला सरकार ने अपनी जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए नोटबंदी का फैसला वापस ले लिया है, लेकिन यहां मोदी सरकार इस मुद्दे पर किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है।

मोदी सरकार गूंगी-बहरी हो गई है। देश के आम लोग भी परेशानी समझ रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को किसी की परेशानी समझ में नहीं आ रही। जब देश के लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे, तब प्रधानमंत्री समस्या को समझकर क्या करेंगे?

ममता ने कहा, आज लोग अपना पैसा बैंक से नहीं निकाल पा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या जनता का पैसा सुरक्षित है। ममता ने कहा कि मोदी खुद को चुनाव के समय चायवाला बताकर सत्ता में आए। प्रधानमंत्री बनने के बाद वह पेटीएम वाले करोड़पति बन गए हैं, और फकीर होने का नाटक कर रहे हैं।

“मोदी मुक्त भारत” मेरा एक मात्र एजेंडा -वृंदा करात

शिखा पाण्डेय,

माकपा नेता वृंदा करात का कहना है कि उनका एक मात्र महत्त्वपूर्ण कोई एजेंडा है, तो वह है ‘मोदी मुक्त भारत’। वृंदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई नोट बंदी को 100 फ़ीसदी गलत ठहराया है और कहा है कि यदि मोदी का एकमात्र एजेंडा डिमोनेटाइजेशन (विमुद्रीकरण) है तो हमारा एकमात्र एजंडा डिमोदियाइजेशन (मोदी को हटाना) है।

वृंदा ने कहा कि मोदी सरकार के लिए वास्तव में नोटबंदी का मुद्दा ध्यान बंटाने और बैंकों की सेहत सुधारने का एक जरिया है। माकपा नेता ने कहा कि यह एक जनवादी और बहुलवादी संस्कृति का देश है। लिहाजा यहां अपने मन की बात की तुलना देश की बात से करना मुमकिन नहीं है।

वृंदा करात ने नोटबंदी के मुद्दे पर सोमवार को एक अख़बार के साथ अपने इंटरव्यू में कहा, मोदी सरकार की विमुद्रीकरण की नीति का एजंडा काला धन नहीं है। काले धन का वास्तविक स्रोत विदेशी खाते, दोहरी कर नीति, धन शोधन और जांच एजंसियों की कमजोरी है। लाभ-हानि का विश्लेषण कर अर्थशास्त्री भी कह रहे हैं कि पूरी अर्थव्यस्था चौपट हो रही है। लोगों को हो रही परेशानियों का जिक्र करते हुए करात ने कहा कि हम एक-दो दिन कतार में खड़े हो सकते हैं, लेकिन जब जीविका और नौकरी पर हमला होता है, तब निश्चित रूप से नफा-नुकसान की बैलेंसशीट पर यह नोटबंदी सौ फीसद विफल मानी जाएगी।

माकपा नेता ने नोट बंदी का विरोध कर रही सभी पार्टियों में एकता न होने पर भी अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा, “विपक्ष की भूमिका संसद में एक साथ हो सकती है, क्योंकि सबकी एक ही मांग थी कि 500 और 1000 रुपए के नोट के इस्तेमाल की इजाजत तब तक होनी चाहिए जब तक कि पूरी मशीनरी तैयार नहीं हो जाती है, लेकिन विपक्ष के रूप में संसद के बाहर एक सीमित समझ ही बन सकती थी। बाहर हमें तो कहना ही पड़ेगा कि तृणमूल कांग्रेस का ‘शारदा नारदा’ है… कांग्रेस दूध की धुली नहीं है। एक विपक्ष के रूप में हर किसी का अपना नजरिया है।”

वृंदा ने कहा कि वास्तव में ढाई साल पहले किए गए वादों को लेकर मोदी को घेरा जा रहा था तो बचाव में उन्होंने नोट बंदी की नीति पेश कर दी। माकपा नेता ने इसे सरकार और अमीरों की मिली जुली साजिश करार देते हुए कहा, “नोटबंदी से 11 लाख करोड़ के एनपीए (वसूल नहीं की जाने वाली रकम), जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट के ऋण वापस नहीं किए जाने के कारण था, के जरिए बैंकों को घाटे से उबारा गया। अब छह महीने के बाद उन्हीं अमीरों को दोबारा ऋण दिया जाएगा।” वृंदा ने कहा कि नोटबंदी से निश्चित ही महिलाओं की बचत पर असर पड़ा है और महिलाएं पूरी तरह से इस कदम के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “यदि हिंदुस्तान को बचाना है तो चुनाव सुधार करने होंगे, यह केवल वाम दलों से जुड़ा मुद्दा नहीं है।”

करात ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने पैसे का हिसाब-किताब देना होगा, क्योंकि यह संसदीय प्रणाली के लिए अनिवार्य है, लेकिन भाजपा ऐसा कभी नहीं चाहेगी। उन्होंने आरएसएस को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा,”हकीकत यह है कि संघ रिमोट कंट्रोल नहीं बल्कि प्रत्यक्ष कंट्रोल है।” उन्होंने काला धन और भ्रष्टाचार पर जनता से बड़ी भूमिका निभाने को कहा।