औरंगाबाद: पुलिस ने शिक्षकों पर बरसाई लाठियां, गुरूवार को प्रदेश के स्कूल बंद!

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

औरंगाबाद में पुलिस द्वारा शिक्षकों पर किए गए लाठी चार्ज के विरोध में गुरुवार को मुख्याध्यापक संघ ने राज्य के स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। हालाँकि कई शिक्षक संघो में बंद को लेकर मतभेद बना हुआ है। शिक्षक संगठन ‘शिक्षक भारती’ स्कूल बंद न रखकर काली पट्टी लगाकर प्रशासन का विरोध करने के पक्ष में है। शिक्षक भारती ने सभी शिक्षकों से इस संबंध में सहयोग करने की अपील भी की है।

औरंगाबाद में मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान महाराष्ट्र राज्य बिना अनुदानित कृति समिति के शिक्षकों ने मोर्चा निकाला था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित पूरा मंत्रिमंडल वहां मौजूद था। सरकार द्वारा अनुदान की घोषणा के बावजूद एक भी पैसा न मिलने से नाराज शिक्षक मोर्चा लेकर वहाँ गए थे। पुलिस ने होनेवाली बैठक के स्थान से दूर बेरिकेड्स लगाकर शिक्षकों के मोर्चे को रोक रखा था।

शिक्षक दरअसल शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े से मिलकर उन्हें ज्ञापन देना चाहते थे। शिक्षकों के शिष्टमंडल के मुख्यमंत्री से बातचीत करके लौटने के बाद भी जामा मस्जिद चौक में असंतुष्ट शिक्षकों का मोर्चा जमा रहा। पुलिस के अनुसार उन्होंने शिक्षकों को रास्ते से हटने का आग्रह किया, लेकिन मोर्चा वहाँ से हटने को तैयार न था। इससे पुलिस और शिक्षकों के मध्य वाद-विवाद होने लगा।

सूत्र से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, शिक्षकों ने पत्थर फेंकना भी शुरू कर दिया, जिसकी वजह से बाद में पुलिस ने शिक्षकों पर लाठी चलाया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इस लाठीचार्ज में 22 शिक्षक जख्मी हो गए, जिसमें महिला शिक्षिकाओं का भी समावेश था।

वहीं शिक्षकों का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से निकाले गए मोर्चे पर पुलिस वालों ने अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। जबकि पुलिस ने कहा कि शिक्षकों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसके कारण उन्हें लाठीचार्ज करना पड़ा। बंदोबस्त में तैनात एक पुलिसकर्मी को हार्ट अटैक आ जाने पर अस्पताल में भरती कराया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। मृत पुलिसकर्मी का नाम राहुल कांबले बताया जा रहा है।

मुख्याध्यापक संघ ने पुलिस द्वारा किये गए इस लाठीचार्ज का कड़ा विरोध करने का फैसला किया है। मुख्याध्यापक संघ ने कहा, “लोकतंत्र में न्याय मांगने के लिए आंदोलन करने का अधिकार हर किसी को है। हम शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे, इसके बावजूद पुलिस ने हम पर लाठियाँ चलाईं, यह बहुत ही कष्टदायक और असहनीय है।”

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