नोटबंदी के चलते सपना हुआ ताज का दीदार, रोजगार भी हुआ चौपट

सौम्या केसरवानी,

नोटबंदी के बाद लोगों को बैंकों और एटीएम से कैश प्राप्त करने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ताजनगरी आगरा में नोटबंदी के चलते अब ताजमहल का दीदार करना भी सपना होता जा रहा है। बता दें कि नोटबंदी के बाद होने वाली कैश की कमी के चलते ताजनगरी में पर्यटकों की संख्या आधी हो गई है। यही नहीं पर्यटक की संख्या आधी होने से होटलों का भी बजट बिगड़ रहा है।

बता दें कि नोटबंदी के चलते आगरा में करीब पांच लाख लोगों का रोजगार चौपट होने के कगार पर है। दिसंबर में जहाँ ताज के बाहर पर्यटकों का जमावड़ा हुआ करता था, वहां सन्नाटा पसरा है। ताजनगरी आगरा में जिस मौसम में ताजमहल के दीदार के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहता था। वहां अब नोट बन्दी के बाद कोई नज़र ही नहीं आ रहा है। छिटपुट स्थानीय लोग ही नज़र आ रहे हैं।

नोट बन्दी के बाद देशी पर्यटक चालीस फीसदी और विदेशी आधे रह गए हैं। विदेशी टूरिस्‍ट टूर कैंसिल कर थाइलैंड, दुबई, श्रीलंका, नेपाल व अन्‍य देश जा रहे हैं। इस कारण आगरा का पर्यटन उद्योग अब चौपट हो गया है। जिसके चलते करीब 5 लाख लोगों के रोजगार पर संकट पैदा हो गया हैं। आगरा में पर्यटकों की संख्या आधी होने से पर्यटन से जुड़े लोग ख़ासा परेशान हैं।

नोट बन्दी का असर अब खुल कर दिखने लगा है। जिस ताज को इस सीजन में देखने के लिए बेताब रहते थे। आज वहां के टिकट विंडो पर सन्नाटा है।

लेकिन नोटबन्दी की वजह से देशी और विदेशी दोनों पर्यटक की संख्या में आधी से ज्यादा की गिरावट आयी है। होटलों में पर्यटक की कमी से अधिकतर कमरे खाली हैं। जबकि हर साल होटलों में जगह नहीं बचती थी। आगरा में चार सौ से ज्‍यादा होटल व रेस्‍टोरेंट हैं। दर्जनों ट्रैवल एजेंसियां हैं। मार्बल के छोटे-छोटे ताजमहल व अन्‍य सामान बनाने वाले हजारों कुटीर उद्योग भी पर्यटन पर ही निर्भर हैं।

नोटबंदी की वजह से ताजमहल में पर्यटक कम होने का सीधा असर यहां के पांच लाख लोगों के रोजगार पर पड़ रहा है। जिससे करीब पांच लाख लोग बेरोजागर हो गए हैं। 21 से 30 नवंबर 2015 तक ताजमहल में 2.4 लाख पर्यट‍क पहुंचे थे। जबकि 21 से 30 नवंबर 2016 तक यह संख्‍या घटकर 1.6 लाख रह गई।

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