समाजवादी उठापटक: लौट के बुद्धू घर को आए!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

महीनों से चल रही ‘समाजवादी’ उठापटक अंततः समाप्त होने की कगार पर पहुँच ही गई। ‘समाज’ की नाक में सुबह शाम दम कर के रख देने वाला यह ‘समाजवादी’ घमासान वास्तव में घमासान ही था, या मात्र जनता की आँखों में धूल झोंकी जा रही थी, यह कह पाना मुश्किल है।

बॉलीवुड फिल्मों के ट्रैजिक नियमानुसार अंततः खून ने खून को खींचा। सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने आज ‘फाइनल अनाउंसमेंट’ किया कि वे खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुख्यमंत्री उम्मीदवार।

आज सुबह सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मिलने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनके आवास पहुंचे और पिता पुत्र ने अकेले में अपने सारे गिले शिकवे दूर किए। पिता-पुत्र के बीच अकेले में हुई यह ‘जादुई’ बातचीत सुलह तक पहुंच गई। मुलायम ने अखिलेश से कहा कि वह चुनाव आयोग में जमा कराये गये साईकिल के दावे को वापस ले लें और अपने आपको मुख्यमंत्री का दावेदार मानकर चुनाव प्रचार में जुट जायें।  मुलायम ने कल दिल्ली में सुलह के संकेत दिये ही थे। सूत्रों का दावा है कि मुलायम ने अखिलेश को मुख्यमंत्री का प्रत्याशी बताया है जबकि स्वयं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे।

पिता और पुत्र के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। पिता – पुत्र की इस मुलाकात के दौरान अमर सिंह और रामगोपाल यादव अनुपस्थित रहे। इस बैठक के बाद अखिलेश यादव जिस अंदाज में बाहर निकले, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि पिता-पुत्र के बीच सुलह हो गई है। मुलायम से मुलाकात के बाद सीएम अखिलेश हाथ हिलाते हुए निकले और ओके जैसा मैसेज दिया।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी में अब तक सुलह की 7 बार कोशिशें हो चुकी हैं, जिनमें से एक भी कोशिश पूरी तरह से कामयाब नहीं हुई। दरअसल सुलह का हर मामला मुख्यमंत्री अखिलेश, शिवपाल और अमर सिंह पर लटक जाता है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री अखिलेश की प्रमुख शर्त यह है कि अमर सिंह को पार्टी से बाहर भेजा जाये। इसके साथ ही शिवपाल सिंह को राष्ट्रीय राजनीति में भेजा जाए, जबकि सपा प्रमुख इन दोनों ही शर्तों के लिए कतई तैयार नहीं हैं।

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