कोरोना वायरस से चीन के कई शहर रेड एलर्ट मोड में, अब तक 493 लोगों की जा चुकी है जान

लेखक – विकास कुमार सिंह,
एशिया अध्ययन विभाग, पेइचिंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन

कोरोना वायरस को फैले हुए लगभग एक माह हो चुका है। इस वायरस का केंद्र, वुहान शहर पूरी तरह से बाकी चीन से कटा हुआ है। वर्तमान समय तक इस वायरस के कारण अकेले वुहान शहर में 362 लोगों की जान जा चुकी है। पूरे चीन में लगभग 24 हजार से ज्यादा लोग इस वायरस से ग्रसित हैं तो 23 हजार से ज्यादा लोग इस वायरस के संक्रमण के दायरे में हैं। अब तक कुल मिलाकर 493 लोगों की जान जा चुकी है। चीन सरकार पूरी तरह से इस वायरस पर काबू पाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सेना को भी काम पर लगा दिया गया है। वुहान शहर में सैन्य डॉक्टरों की तैनाती की गई है और उपचार का काम उनके निर्देश में चल रहा है।

इसी बीच चीन में वसंत त्योहार की छुट्टी समाप्त हो चुकी है और कई लोग काम पर वापस अपने शहर लौट रहे हैं। चीन के विशेषज्ञ चिकित्सक चुंग नान शान का मानना है कि फरवरी माह के पहले दो सप्ताह में वायरस का प्रकोप बहुत तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसका प्रमाण इस बात से भी पता चलता है कि कल की अपेक्षा आज इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में लगभग 3800 लोग और जुड़ चुके हैं, वहीं इस वायरस के संक्रमण के संदिग्ध लोगों की संख्या में भी 3900 की बढ़ोतरी हुई है। वायरस के संक्रमण में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए सरकार नें कई कंपनियों को तत्काल बंद रखने का निर्देश दिया है। कुछ कंपनियाँ घर से ही काम करने के लिए अपने कर्मचारियों को प्रेरित कर रही है।

वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लोगों में कई तरह की भ्रांतियाँ भी फैली रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वायरस का मुख्य कारण वुहान का मछली बाजार है तो कुछ लोग इसका कारण चमगादड़ को बता रहे हैं। वहीं कुछ विदेशी मिडिया का मानना है कि वायरस फैलने का कारण वुहान शहर में स्थित पी4 लैब है जिसमें इस वायरस के बारे में अनुसंधान हो रहा था। वहीं कुछ लोग सोशल मिडिया पर इस वायरस के फैलने के पीछे अमरीका का हाथ बता रहे हैं। इस वायरस के बारे में फैली भ्रांतियों को रोकने के लिए सरकार ने कई तरह के बेवसाईट का निर्माण किया है जिस पर वायरस के बारे में तथा इससे बचने के उपायों के बारे में लोगों को आगाह किया जा रहा है। सरकार ने सोशल मिडिया के द्वारा भी लोगों से अपील किया है कि इस स्थिति में वायरस से बचने के बारे में एक-दूसरे को आगाह करें।

लेकिन सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद चीन के कई शहरों ने रेड एलर्ट घोषित कर दिया है और शहर में ए-ग्रेड के एहतियाति कदमों को अपनाया है। इस लिस्ट में पहला कदम दक्षिण चीन में स्थित नानचिंग शहर ने उठाया है। नानचिंग शहर ने शहर के अंदर सभी सोसाइटी को कड़े निर्देशों का पालन करने को कहा है। उन निर्देशों में मुख्य रूप से उन सभी लोगों को जो सोसाइटी से बाहर आ-जा रहे हैं उनका शारीरिक तापमान लेने, कूरियर वालों को सोसाइटी से बाहर ही रहने, सभी तरह की निर्माण कार्य को तत्काल स्थगित करने का निर्देश दिया है। वहीं चीन के उत्तर-पूर्व में स्थित हारपीन शहर ने और भी कड़ा निर्देश दिया है। उनके निर्देशों में मुख्य रूप से सभी परिवारों को एक-दूसरे से संपर्क नहीं रखने, एक परिवार से एक ही व्यक्ति को बाहर आने-जाने, किसी भी बाहरी गाड़ी का सोसाईटी में प्रवेश पर रोक आदी निर्देश जारी किए हैं। इसी तर्ज पर हांग चो, निंग पो आदी शहरों ने भी शहर को पूरी तरह से बंद करने का निर्देश दिया है। इन निर्देशों में जो सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी व्यक्ति के सोसाइटी से बाहर जाने या आने पर शारीरिक तापमान की जाँच तथा बिना मास्क के सड़क पर या बाहर निकलने पर सख्त मनाही है। हांग चो शहर ने तो यहाँ तक ऐलान किया है कि जिस सोसाइटी में संक्रमित लोग पाए जाते हैं उस सोसाइटी के गेट पर मरीजों की संख्या को दर्शाना है। अगर देखा जाए तो एक तरफ जहाँ इस महामारी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं वहीं लोगों में दहशत का भी माहौल है। आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि मार्च माह तक इस वायरस का प्रभाव कम हो पाएगा।

वायरस के प्रकोप को देखते हुए, विश्वविद्यालयों में सरदी की छुट्टी को बढ़ा दिया गया है। छात्रों से अपील किया गया है कि विश्वविद्यालय के अगले आदेश तक छात्र घर से बाहर नहीं निकलें या विश्वविद्यालय वापस नहीं लौटें। कुछ विश्वविद्यालयों नें मार्च माह से छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की व्यवस्था की है और मई माह से सामान्य तौर पर कक्षा संचालन करने की संभावना बताई जा रही है। वहीं विदेशी छात्रों को फरवरी के अंत और मार्च माह के पहले सप्ताह में विश्वविद्यालय पहुँचने के लिए आदेश जारी किया गया है।

सरकार और जनता इस महामारी पर काबू पाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। लेकिन एक तरफ जहाँ संक्रमित लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लोगों में भय का माहौल है वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों से लोगों में कहीं न कहीं आत्मविश्वास भी लौटना शुरू हुआ है। लोगों का विश्वास है कि सरकार और जनता की मिलीजुली कार्यवाही से इस महामारी पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इस वायरस ने भारत में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी है। अभी तक केरल में तीन लोगों में इस वायरस का संक्रमण पाया गया है। ये तीनों लोग कहीं ना कहीं वुहान से जुड़े हुए हैं। भारत सरकार ने वुहान से भारतीयों को वापस भारत ले जाकर सराहनीय काम तो किया है लेकिन क्या भारत इस वायरस के प्रकोप से बचने के लिए पूरी तरह तैयार है। क्या भारतीय अस्पतालों की जर्जर स्थिति इस वायरस से निपटने के लिए तैयार है। इस सवाल का जबाव आनेवाले दिनों में ही पता चल पाएगा।

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