एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com यवतमाल में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए अम्बेडकर ने कहा कि चुनाव आयोग पक्षपाती है और राजनीतिक दलों को पुलवामा में आतंकी हमले के बारे में बात नहीं करने का निर्देश दे रही है। चुनाव आयोग के निर्देश को मानने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह इस बारे में बात करेंगे क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “मैं यह जानना चाहूंगा कि हमें पुलवामा आतंकी हमले के बारे में बात करने की अनुमति क्यों नहीं दी जाती है जब इसे संविधान के तहत अनुमति दी जाती है। हमारी सरकार को सत्ता में आने दें, हम चुनाव आयोग को नहीं छोड़ेंगे। हम उन्हें दो दिनों के लिए जेल में रखेंगे। आयोग अधिक तटस्थ नहीं है। यह भाजपा के सहयोगी के रूप में कार्य कर रहा है।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केरल के वायनाड से पर्चा भरा। इसके बाद उन्होंने रोड शो भी किया। इसमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुईं। प्रियंका ने कहा कि मेरी नजर में राहुल सबसे साहसी हैं। कांग्रेस महासचिव ने वायनाड की जनता से अपील की कि राहुल का ख्याल रखना। वायनाड में 23 अप्रैल को मतदान होगा। एनडीए ने यहां से तुषार वेलापल्ली को उम्मीदवार बनाया है। राहुल पहली बार अमेठी के साथ ही दूसरी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल ने कहा, ”जिस तरह से नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस काम कर रहा है, उसे कई लोगों को यह लग रहा था कि उनकी संस्कृति पर हमला हो रहा है। यही कारण है कि मैंने अमेठी के अलावा वायनाड से भी चुनाव लड़ने का फैसला किया। आज मोदी सरकार में अलग-अलग प्रांत, धर्म के लोगों की संस्कृति पर हमला हो रहा है। भारत एक देश है, मैं यही संदेश देने आया हूं। मोदी सरकार और संघ नागपुर में बैठकर देश की भाषा और संस्कृति पर हमला कर रहे हैं। चौकीदार ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। उसी का खुलासा करना है। मेरे यहां से चुनाव लड़ने से सीपीएम जरूर नाराज है, लेकिन हम सब एक हैं और मैं इस पर कुछ नहीं बोलूंगा।”
तीन राज्यों को जोड़ती है वायनाड की सीमा कांग्रेस नेता एके एंटनी ने बताया कि राहुल ने अमेठी के अलावा वायनाड को चुना है, इसकी कई वजह हैं। एक तो ये है कि यह सीट सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से काफी अहम है। दूसरा यह केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमाओं को जोड़ती है। ऐसे में राहुल का यहां से चुनाव लड़ना एक तरह से पूरे दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व होगा।
अमेठी में भाजपा ने फिर स्मृति को उतारा
राहुल उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से 2004 से लगातार तीन बार चुनाव जीतते आ रहे हैं। भाजपा ने अमेठी से राहुल के खिलाफ इस बार भी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को उतारा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल ने उन्हें 1.07 लाख वोटों से हराया था। हालांकि, राहुल की जीत का यह अंतर 2009 की तुलना में काफी कम था। तब राहुल 3.70 लाख वोटों से जीते थे।
मदनगंज-किशनगढ़. राजस्थान के किशनगढ़ में बुधवार को फूड पॉइजनिंग से करीब 70 लोग बीमार हो गए। जिसमें 10 बच्चे भी शामिल हैं। सभी मंगलवार रात एक शादी में खाना खाने के बाद बीमार पड़ गए। सभी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। गांधीनगर थाना क्षेत्र के सराणा रोड पर शादी का आयोजन किया गया था। जहां खाना खाने के बाद देर रात 12 बजे बाद अचानक लोगों के पेट में दर्द और उल्टी की शिकायतें होने लगीं। बीमार लोगों को राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया। जहां 70 में से 10 लोगों को भर्ती किया गया। मरीजों में सभी बच्चे शामिल है। अन्य 60 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com भोपाल। मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से जारी किए जाने वाले नौ विज्ञापनों में से छह विज्ञापनों को आपत्तिजनक मानते हुए इनके प्रसारण पर रोक लगा दी है। इन विज्ञापनों में राफेल से जुड़े हुए दो विज्ञापन भी थे। चुनाव आयोग का कहना है कि राफेल विमान का केस देश की सर्वोच्च अदालत में हैं, इसलिए इसका चुनाव विज्ञापन में उपयोग करना ठीक नहीं है। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग के पास अनुमति के लिए अपने नौ विज्ञापनों को भेजा था। इसमें से छह विज्ञापन पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताई। विज्ञापन की जांच के बाद आयोग ने आपत्तिजनक विज्ञापनों को प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का कहना है कि इस मामले में किसी भी पाटी को कोई आपत्ति है तो वह इसके लिए अपील कर सकते हैं। आयोग के इस कदम के बाद मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि आयोग कांग्रेस के मामले में दोहरी नीति अपना रहा है। 2014 में कॉमनवेल्थ गेम सहित अन्य आपत्तिजनक विज्ञापनों को मंजूरी दी गई थी, हम सुप्रीमकोर्ट जाएंगे।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से नमो टीवी के लॉन्च पर जवाब मांगा है। दरअसल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित इस चैनल के लॉन्च को लेकर आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों पार्टियों ने सवाल उठाया था कि आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसे चैनल को क्यों लॉन्च होने दिया गया। नमो टीवी 31 मार्च को लॉन्च हुआ था। इसके लोगो (चिह्न) में प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा इस्तेमाल किया गया है। चैनल में मोदी की लाइव रैलियों के साथ उनके भाषण प्रसारित किए जाते हैं।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को अनंतनाग सीट से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान मुफ्ती ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए धारा 370 और 35 ए मुद्दे पर सीधे तौर पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर किसी ने भी जम्मू कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाली धाराओं के साथ छेड़छाड़ की तो भारत के साथ जम्मू कश्मीर का रिश्ता खत्म हो जाएगा।
इससे पहले महबूबा मुफ्ती ने भाजपा प्रमुख अमित शाह को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वो जो 370 को खत्म करने की बात कर रहे हैं दरअसल वह दिन में सपना देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्पेशल दर्जा देने वाला यह प्रावधान भारत और घाटी में एक पुल के समान है अगर इस पुल को तोड़ा गया तो हम भारत के साथ रिश्ते को गंवा देंगे। जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालातों के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराया। उन्होंने पूछा कि क्या वजह है कि 2014 तक हालात ठीक हो गए थे, क्या वजह है कि 2014 से लेकर आज तक हालात फिर 1990-91 की तरह हुए? इसके लिए अगर कोई एक आदमी जिम्मेदार है तो वह इस देश के प्रधानमंत्री हैं।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में चुनाव प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक परिवार ने 55 साल तक दावा किया, लेकिन ये फिर भी दावा नहीं कर सकते कि हिंदुस्तान के सारे काम पूरे कर दिए। मुझे तो पांच साल होने वाले हैं, लेकिन मैं इतना जरूर समाधान कर सकता हूं कि मैं हर चुनौतियों को चुनौती देने वाला इंसान हूं। मोदी आज पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी और कोलकाता में भी जनसभाएं करेंगे। मोदी ने कहा, “आपके मजबूत विश्वास का ही नतीजा है कि आज अरुणाचल में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अनेक संस्थान बन रहे हैं। आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा पाए हैं, हर घर को रोशन कर पाए हैं। एक तरफ वे दल हैं, जिन्होंने कभी देश की आशाओं-आकांक्षाओं को नहीं समझा, जिन्होंने देश पर राज करने की नीयत से सत्ता पर कब्जा जमाए रखा। जबकि आपका ये चौकीदार, आपके सेवक की तरह काम कर रहा है।” “इस बार आपकी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, आपके गौरव की रक्षा करने वालों और आपके परिधानों, आपकी परंपराओं का मजाक उड़ाने वालों, आपका अपमान करने वालों के बीच चुनाव है। ये अरुणाचल-नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए दिन रात एक करने वालों और दशकों तक नॉर्थ ईस्ट की उपेक्षा करने वालों का चुनाव है। इस बार का चुनाव वादों और इरादों के बीच का चुनाव है। ये संकल्प और साजिश के बीच का चुनाव है। ये भरोसे और भ्रष्टाचार के बीच का चुनाव है।” मोदी के मुताबिक, “हम सिर्फ एक वादा करके उसे दशकों तक लटकाए रखने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि आपके जीवन को आसान बनाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं। इन लोगों (कांग्रेस) की तरह ही इनका घोषणापत्र भी भ्रष्ट होता है, बेइमान होता है, ढकोसलों से भरा होता है और इसलिए उसे घोषणापत्र नहीं ढकोसला पत्र कहना चाहिए। यह अरुणाचल प्रदेश के लोगों का ही सपोर्ट है कि हम यहां देश और राज्य में विकास कर सके। हमने सड़क, नेशनल हाईवे, रेलवे और हवाई साधन विकसित कर राज्य में आवागमन सुगम बनाने का काम किया है।”
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में एक चुनावी सभा में भाजपा के लिए प्रचार करते हुए भारतीय सेना को ‘मोदी जी की सेना’ करार दिया। योगी की इस टिप्पणी पर सोमवार को राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। विपक्षी नेताओं ने योगी पर हमला बोलते हुए उन पर सेना का ‘‘अपमान करने’’ का आरोप लगाया। आदित्यनाथ पर विपक्ष के हमलों के बीच चुनाव आयोग ने गाजियाबाद के जिला मजिस्ट्रेट से इस मामले में रिपोर्ट तलब की ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की टिप्पणी से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है कि नहीं। चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों को पहले ही नसीहत दे चुका है कि वे लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सैन्य बलों के मुद्दे पर कोई प्रचार या दुष्प्रचार नहीं करें। विपक्षी दलों पर प्रहार करते हुए रविवार को आदित्यनाथ ने कहा था कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए जो ‘असंभव’ था, वह अब भाजपा के शासन में संभव हो गया है। योगी ने कहा, ‘‘कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है। यही अंतर है। कांग्रेस के लोग मसूद अजहर के नाम के आगे ‘जी’ लगाते हैं, ताकि आतंकवाद को बढ़ावा मिले।’’ इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने योगी पर हमला बोला। कांग्रेस ने कहा, ‘‘योगी आदित्यनाथ द्वारा सेना की वीरता को हड़पना और इसे ‘मोदी की सेना’ करार देना हमारे शहीदों एवं हमारे बहादुर जवानों की वीरता और त्याग का अपमान है।’’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योगी की टिप्पणी पर ‘‘हैरत’’ जताई। भाकपा नेता डी राजा ने भी योगी के बयान की निंदा की। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘योगी आदित्यनाथ ने ‘मोदी की सेना’ बोलकर हमारे शहीदों तथा हमारे बहादुर जवानों के पराक्रम एवं बलिदान का अपमान किया है। यह चुनाव आयोग के नियमों का भी उल्लंघन है।’’ सुरजेवाला ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक, 2019 के चुनावों में अपनी हार सामने देखकर वे देश के जनादेश को कुचल रहे हैं। आदित्यनाथ ‘जीरो परफॉर्मेंस’ मुख्यमंत्री हैं।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com नई दिल्ली. मूर्तियों पर जनता के पैसे की फिजूलखर्ची के मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। उन्होंने मूर्ति बनवाने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह लोगों की इच्छा थी। उन्होंने 2007 से 2011 के बीच लखनऊ और नोएडा में अपनी और उनकी पार्टी के चिह्न हाथी की प्रतिमाएं बनवाई थीं। इसी पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मायावती को प्रतिमाओं पर खर्च जनता का पैसा लौटाना होगा। एक याचिका में आरोप लगाया है कि मायावती ने इन प्रतिमाओं की मदद से खुद की छवि चमकाई। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिमाओं से राज्य के विधानमंडल ने एक दलित महिला नेता के प्रति सम्मान दिखाया है। आखिर मैं उनकी इच्छा का अनादर कैसे करुं? इसके साथ ही मायावती ने कहा कि यह पैसा शिक्षा, अस्पताल या किसी और चीज पर खर्च किया जाना था यह एक बहस का मुद्दा है। अदालत यह तय नहीं कर सकती। यह स्मारक लोगों को प्रेरणा दिलाने के लिए बनाए गए थे। इनमें हाथियों की मूर्तियां केवल वास्तुशिल्प की बनावट हैं। ये बसपा के प्रतीक नहीं हैं। मूर्तियां बनवाने की परियोजना पर 1400 करोड़ खर्च हुए थे मायावती ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ और नोएडा में दो पार्क बनवाए थे। इन पार्कों में मायावती ने अपनी, संविधान के संस्थापक भीमराव अंबेडकर, बसपा के संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चिह्न हाथी की कई प्रतिमाएं बनवाई थीं। इस परियोजना की लागत 1,400 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां और कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थीं। इस पर 685 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस पर सरकारी खजाने को 111 करोड़ रुपए का नुकसान होने का मामला दर्ज किया था।
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने की हार्दिक पटेल की अपील को खारिज कर दिया हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ऐसा माना जा रहा है की पाटीदार नेता हार्दिक पटेल लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। हाल ही में कांग्रेस जॉइन करने वाले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने विसपुर दंगा मामले में गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट से अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की है क्योंकि वह जामनगर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने की हार्दिक पटेल की अपील को खारिज कर दिया हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ऐसा माना जा रहा है की पाटीदार नेता हार्दिक पटेल लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। आपको बता दें कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख चार अप्रैल है। मेहसाणा, गुजरात की निचली अदालत ने उन्हें पाटीदार कोटे के विरोध प्रदर्शन के दौरान 2015 में दंगा और आगजनी के लिए जुलाई में 2 साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने तब गुजरात HC से संपर्क किया था ताकि उन्हें दोषी ठहराया जा सके और वे चुनाव लड़ सकें, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई।