28 C
Mumbai
Friday, September 4, 2026
Home Blog Page 367

तिरुपति के बालाजी मंदिर में अब VVIP दर्शन बंद, आम श्रद्धालुओं को फायदा

नई दिल्ली. भगवान के लिए सभी भक्त बराबर हैं लेकिन भगवान के सामने सभी भक्त बराबर नहीं होते। खास करके मंदिरों में जिनमें स्पेशल या वीवीआई दर्शन की संस्कृति है। देश में सबसे धनवान मंदिर तिरुमला में अब VVIPए दर्शन बंद होंगे। तिरुमला तिरुपति देवस्‍थानम बोर्ड के चेयरमैन वाईवी सुब्‍बा रेड्डी ने घोषणा की जल्‍द ही VVIP दर्शन की व्‍यवस्‍था तिरुमला में खत्‍म हो जाएगी। पास से दर्शन की शुरुआत 2012 में हुई। VVIP दर्शन व्‍यवस्‍था को तिरुमला में L1, L2, L3 के नाम से जाना जाता है। इस व्‍यवस्‍था को बंद करने के पीछे का कारण ये बताया जा रहा है कि इससे ज्‍यादा से ज्‍यादा आम श्रद्धालु दर्शन कर सकें।

लगभग हर दिन भक्तों की भीड़ तिरुपति मंदिर में भगवन के दर्शन के लिए आती है। आम श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ता है लेकिन VVIP पास धारक अधिकतम एक घंटे में दर्शन कर लेते हैं। ऐसे में आम श्रद्धालुओं को भी दिक्‍कत होती है। देवस्‍थानम बोर्ड के ऊपर भी इन VVIPएस को दर्शन कराने की चुनौती होती है।

L1 को सबसे शीर्ष श्रेणी में यानी VVIP माना जाता है। विधायक, मंत्री (किसी भी राज्य या केंद्र के), सांसद, आईएएस, आईपीएस, जज, उद्योगपति, सितारे इसमें शामिल हैं। रोजाना लगभग 450 लोग इस श्रेणी के तहत दर्शन करते हैं। L2 में वीआईपी आते हैं। लगभग 1500 लोग रोजाना इस श्रेणी में दर्शन करते हैं। तीसरी श्रेणी L3 है जिसमें वीआईपी भगवान से थोड़ी दूर हाथ जोड़कर प्रार्थना कर सकते हैं।

चेयरमैन वाईवी सुब्‍बा रेड्डी ने कहा, मैंने जिस दिन से चार्ज संभाला है, तब से मेरी कोशिश यहां पर व्‍यवस्‍थाओं को अपने सीएम जगन मोहन रेड्डी के आदेशानुसार चलाने की है। उन्‍होंने साफ कहा है कि यहां पर हर काम में पूरी पारदर्शिता हो। यही मैंने देवस्‍थानम बोर्ड में किया है। इसी के तहत हमने तय किया है कि अब हम L1 L2 और L3 जैसी VVIP व्‍यवस्‍था को खत्‍म कर दें। इससे आम श्रद्धालुओं को महत्‍व दे सकेंगे।

सावन मास की कांवड यात्रा आज से शुरु, NSG-ATS की टीमें सुरक्षा में तैनात

धर्म डेस्क. सावन मास का कांवड़ मेला बुधवार को विधिवत शुरू हो जाएगा। मेला शुरू होने से एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में कांवड़िए हरिद्वार पहुंच गए हैं। बुधवार से हरिद्वार में पहले चरण का ट्रैफिक प्लान लागू हो जाएगा। बसें घूमकर आने से दिल्ली से हरिद्वार की दूरी बढ़ जाएगी।

उत्तर भारत के सबसे बड़े मेले कांवड़ मेले में करोड़ों की संख्या में शिव भक्त हरिद्वार पहुंचते हैं। मंगलवार को भी हजारों की संख्या में कांवड़िये हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों को रवाना हुए। हरिद्वार पुलिस प्रशासन का कहना है मेले के लिए पूरी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। दो चरणों का ट्रैफिक प्लान भी तैयार किया है।

हाईवे पर भारी वाहन बंद

कांवड़ यात्रा की शुरुआत के साथ ही भारी वाहनों को हरिद्वार हाईवे पर प्रवेश दिन के लिए बंद कर दिया गया है। पुलिस ने दो चरणों में ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। प्लान का पहला चरण 17 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगा। दूसरा चरण 24 जुलाई को शुरू होकर मेला समाप्ति 30 जुलाई तक लागू रहेगा।

बंद रहेगा अयोध्या फोरलेन

गोरखपुर क्षेत्र में कांवड़िये अयोध्या से सरयू का जल लाकर 30 जुलाई को तेरस पर शिवालयों में भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। कांविड़यों का जत्था 26 जुलाई से ही अयोध्या के लिए रवाना होने लगेगा। वापसी 29 जुलाई की रात तक होती है। इसके चलते गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन संतकबीरनगर-बस्ती से अयोध्या के बीच चार दिन बंद रहेगा।

फैजाबाद रोड पर विशेष व्यवस्था की जाएगी : लखनऊ में सीतापुर रोड और हरदोई रोड से कांवड़िए हर साल आते हैं। आगे जा कर ये कांवड़िए बाराबंकी स्थित महादेवा में जल चढ़ाते हैं। खास बात यह है कि अदब के इस शहर में कांवड़ियों के लिए अलग से ट्रैफिक नहीं रोका जाता है। फैजाबाद रोड पर विशेष रूप से कई जगह कांवड़ियों के लिए शेड और जलपान की व्यवस्था रहती है।

एनएसजी और एटीएस की टीमें सुरक्षा में तैनात रहेंगी

नोएडा और गाजियाबाद में बुधवार से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाएगी। आतंकी हमले के इनपुट के चलते यात्रा के दौरान एनएसजी के जवान और एटीएस की टीमें तैनात रहेंगी। हेलीकॉप्टर और 17 ड्रोन कैमरो से निगरानी की जाएगी। 25 जुलाई को मेरठ जोन में हेलीकॉप्टर आएगा, जो निगरानी के साथ ही कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा भी करेगा।

कावड़ियों को रखना होगा पहचान-पत्र

इस बार कावड़ियों को पहचान-पत्र रखना अनिवार्य होगा और कांवड़ बेड़ों का पंजीकरण कराना होगा। गढ़मुक्तेश्वर से कांवड़ लेकर आने वाले कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए शुक्रवार से लेकर सोमवार तक हाईवे पर बड़े वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।

देवघर में 40 से 45 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

ऐतिहासिक श्रावणी मेला बुधवार से शुरू होगा। पूरे सावन झारखंड, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत देशभर के कांवड़ियों की कतार लगेगी। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा वैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए इस बार 40 से 45 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। देवघर में जलार्पण के बाद श्रद्धालु दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम जाते हैं। मेले का उद्घाटन सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री रघुवर दास करेंगे।

बीड़ी-गुटखा नहीं मिला तो कैदियों ने कर दी भूख हड़ताल, एक की मौत

जौनपुर. उत्तर प्रदेश स्थित जौनपुर की जिला जेल में। यहां पर कैदी अच्छा खाना, पान मसाला और खैनी न मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए। इस दौरान एक कैदी की जेल में मौत भी हो गई। कैदियों ने आरोप लगाया कि कैदी की मौत भूख हड़ताल और पिटाई के चलते हुई है, वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि बीमारी के चलते कैदी ने दम तोड़ा है। अब डीएम ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।

छापेमारी के बाद हुई थी सख्ती

जिला जेल में 7 जुलाई को डीएम अरविंद मलप्पा और एसपी विपिन कुमार ने छापेमारी की थी। इस दौरान जेल से मोबाइल, बीड़ी, सुर्ती, सिगरेट, पान मसाला, गांजा समेत कई अन्य मादक पदार्थ बरामद हुए थे। इसके बाद जेल में सख्ती बरती जा रही थी। इस सख्ती के विरोध में कैदियों ने सोमवार को भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया था। बंदियों ने आरोप लगाया था कि उनको मिलने वाला खाना अच्छा नहीं है और सुविधाएं भी काफी खराब हैं। इस संबंध में कोर्ट में पेशी पर लाए गए कैदियों ने मीडिया को भी सूचित कर दिया था।

डीआईजी को देना पड़ा आश्वासन

कैदियों की भूख हड़ताल के दौरान जेल का माहौल गर्मा गया। कैदियों ने इस दौरान नारेबाजी की, जिसके बाद सोमवार शाम को ही डीआईजी ने सुर्ती और तंबाकू पर लगा प्रतिबंध हटाने का आश्वासन देकर भूख हड़ताल को खत्म करवाया था। बाद में मंगलवार सुबह जौनपुर जिले के ही कैदी जयराम की संदिग्‍ध परिस्थिति में मौत हो गई। जेलर संजय सिंह ने इसके पीछे बीमारी का कारण बताया।

कैदियों का अरोप- पिटाई से हुई मौत

वहीं कैदियों ने आरोप लगाया कि डिप्टी जेलर ने जयराम की पिटाई की थी। उन्होंने बताया कि जयराम भी हड़ताल का हिस्सा था और इसी के चलते डिप्टी जेलर भड़क गया और उसकी पिटाई कर दी। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। वहीं जेलर ने इस बात का खंडन किया। जेलर ने बताया कि जयराम की तबियत खराब होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहां पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।

CPI और तृणमूल कांग्रेस समेत ये 3 पार्टियां खो सकती हैं राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा

New Delhi. लोकसभा चुनाव 2019 में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), तृणमूल कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) राष्ट्रीय दल का अपना दर्जा खो सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी दिनों में इन राजनीतिक दलों को ‘कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की संभावना है जिसमें पूछा जाएगा कि क्यों न उनका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म कर दिया जाए।

भाकपा, बसपा और राकांपा 2014 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद भी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के संकट का सामना कर रही थीं। हालांकि, उन्हें 2016 में तब राहत मिल गई जब निर्वाचन आयोग ने अपने नियमों में संशोधन करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दर्जे की समीक्षा पांच साल की जगह हर 10 साल के अंतराल पर की जाएगी।

बसपा के पास वर्तमान में 10 लोकसभा सीट और कुछ विधानसभा सीट हैं, इसलिए अब उसके सामने राष्ट्रीय दल का दर्जा खोने का संकट नहीं है। निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत किसी राजनीतिक दल को तब राष्ट्रीय स्तर का दल माना जाता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करें।

इसके अलावा लोकसभा में उसके कम से कम चार सांसद हों। इसके पास कुल लोकसभा सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीट होनी चाहिए और इसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से आने चाहिए।

कर्नाटक संकट: 14 माह पुरानी कुमारस्वामी सरकार पर SC का फैसला आज !

बेंगलुरु. कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जद(एस) के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग को लेकर दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय बुधवार को अपना अहम फैसला सुनायेगा। इस फैसले से कर्नाटक में 14 माह पुरानी कुमारस्वामी सरकार की किस्मत तय हो सकती है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को इस मामले में सभी पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।

वहीं, बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संवैधानिक पदाधिकारी होने के नाते उन्हें इन विधायकों के इस्तीफे पर पहले फैसला करने और बाद में उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग पर फैसला करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव पेश करेंगे और अगर विधानसभा अध्यक्ष इन बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी सरकार उससे पहले ही गिर सकती है।

हालांकि, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता पर फैसला करने से नहीं रोक रही है, बल्कि उनसे सिर्फ यह तय करने को कह रही है क्या इन विधायकों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। पीठ ने कहा कि उसने दशकों पहले दल-बदल कानून की व्याख्या करने के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के पद को ‘काफी ऊंचा दर्जा दिया था और ‘संभवत: इतने वर्षों के बाद उसपर फिर से गौर करने की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर परस्पर विपरीत दलीलें हैं और ”हम जरूरी संतुलन बनाएंगे। सत्तारूढ़ गठबंधन को विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है। इसमें कांग्रेस के 78, जद (एस) के 37, बसपा का एक और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का भी एक मत है। दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी भाजपा को 107 विधायकों का समर्थन हासिल है। इन 225 सदस्यों में एक मनोनीत सदस्य और विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं।

अगर इन 16 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों की संख्या घटकर 101 हो जाएगी। मनोनीत सदस्य को भी मत देने का अधिकार होता है। विधानसभा अध्यक्ष कुमार ने कहा कि वह संविधान के अनुरूप काम कर रहे हैं और अपना काम कर रहे हैं। कुमार ने कोलार जिले में संवाददाताओं से कहा, “आखिरकार, उच्चतम न्यायालय क्या फैसला देता है उसका अध्ययन करने के बाद ही मैं जवाब दूंगा।” उन्होंने कहा, “मैं केवल अपना कर्तव्य निभाऊंगा।।सभी को कल तक इंतजार करना होगा।”

शक्ति परीक्षण से पहले अपने विधायकों को एक साथ रखने के लिए कांग्रेस, भाजपा और जद (एस) ने अपने विधायकों को रिसॉर्ट्स में भेज दिया है। कांग्रेस ने मंगलवार को इस आशंका के बीच अपने विधायकों को शहर के एक होटल से बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट में भेज दिया कि उसके कुछ और विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष की उन दलीलों पर भी सवाल खड़े किये कि पहले अयोग्यता के मुद्दे पर फैसला किया जाना है। न्यायालय ने पूछा कि 10 जुलाई तक वह क्या कर रहे थे जब इन विधायकों ने छह जुलाई को ही इस्तीफा दे दिया था।

पीठ ने कहा, ”छह जुलाई को उन्होंने (बागी विधायकों) ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने उच्चतम न्यायालय के 11 जुलाई को आदेश देने तक कुछ भी नहीं किया।” न्यायालय ने पूछा, ”लंबित अयोग्यता मामले की क्या स्थिति है।” पीठ ने कहा, ”न्यायालय के आदेश के अनुसार वे (बागी विधायक) विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित हुए। तब उन्होंने (विधानसभा अध्यक्ष) क्यों इसपर फैसला नहीं किया। वह (विधानसभा अध्यक्ष) यह कह रहे हैं कि वह इसपर फैसला करने में समय लेंगे। इससे उनका क्या आशय है।”

कुमारस्वामी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि ये बागी विधायक ‘समूह में शिकार कर रहे हैं और विधानसभा अध्यक्ष इसको लेकर आंखें नहीं मूंद सकते क्योंकि उनका मकसद सरकार को गिराना है। धवन ने कहा, ”यह विधानसभा अध्यक्ष बनाम अदालत का मामला नहीं है।यह मुख्यमंत्री और उस व्यक्ति के बीच का मामला है जो मुख्यमंत्री बनना चाहता है और इस सरकार को गिराना चाहता है।” उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि वह विधानसभा अध्यक्ष को इन इस्तीफों पर फैसला करने और यथास्थिति बरकरार रखने के संबंध में अपने दो अंतरिम आदेशों को रद्द करे।

बागी विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं करके “पक्षपातपूर्ण” और “दुर्भावनापूर्ण” तरीके से काम कर रहे हैं और उन्होंने इस्तीफा देने के लिए इन सांसदों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक नियमों के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे पर “तत्काल” निर्णय लेना है और ऐसा नहीं करने के वह “नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।”

रोहतगी ने कहा, “यहां एक ऐसी सरकार है जो सदन में बहुमत खो चुकी है और यहां एक अध्यक्ष है जो इस सरकार को सहारा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा, अयोग्यता की कार्यवाही से अलग है, जो कि “मिनी-ट्रायल” के समान है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार नहीं करने और अयोग्यता के मुद्दे को लंबित रखने के पीछे की समूची मंशा सत्तारूढ़ गठबंधन को व्हिप जारी करने में समर्थ बनाने के लिये है ताकि जब 18 जुलाई को विश्वास मत के प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा जाता है, तो उनके विधायक खास तरह से कार्य करें, क्योंकि कोई भी विपरीत कार्रवाई अयोग्यता को आमंत्रित करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने कहा कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की याचिका 11 जुलाई को उनके इस्तीफे से पहले दायर की गई थी, जब वे व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के सामने पेश हुए थे। उन्होंने कहा, “यह एक सामान्य आधार है कि इन 15 में से 11 विधायकों ने 11 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के सामने उपस्थित होकर अपने इस्तीफे सौंपे।” उन्होंने कहा, “इस्तीफा अयोग्यता की कार्यवाही को विफल करने के लिए आधार नहीं हो सकता है।”

हालाँकि, जब सिंघवी दलील दे रहे थे कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए थे, तो इसपर पीठ ने पूछा, “किस चीज ने आपको (स्पीकर) निर्णय लेने से रोक दिया जब ये विधायक इस अदालत के आदेश के बाद 11 जुलाई को आपके सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता से पूछा, “किस चीज ने आपको (अध्यक्ष) को यह कहने से रोका कि ये इस्तीफे स्वेच्छा से थे या नहीं?” वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “इस्तीफे पर फैसला करने से पहले अध्यक्ष समग्र राय बना रहे थे”।

सिंघवी ने कहा कि स्पीकर का एक-पेज का हलफनामा है, जिसमें न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को संशोधित करने की मांग की गई है, जिसके तहत उन्हें यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया था, ताकि वह इन विधायकों के इस्तीफे के मुद्दे पर फैसला कर सकें। जब वह दलील दे रहे थे तो पीठ ने कहा, “बहुत अच्छा। आप इस्तीफे का फैसला जल्द से जल्द करें और फिर अयोग्यता का फैसला करें।” सिंघवी ने कहा कि शीर्ष अदालत के पास इस तरह का अधिकार क्षेत्र नहीं है कि वह विधानसभा अध्यक्ष से किसी विशेष तरीके से कार्य करने के लिए कहे या इस्तीफे के मुद्दे पर समयबद्ध तरीके से फैसला करने को कहे। उन्होंने कहा कि अगर बुधवार तक कहा जाए तो विधानसभा अध्यक्ष अयोग्यता और इस्तीफा दोनों मुद्दे पर फैसला कर सकते हैं।

दिन की सुनवाई रोहतगी के पीठ से यह कहने के बाद पूरी हुई कि वह अपने अंतरिम आदेश को जारी रखने के लिये एक निर्देश पारित करे जिसमें विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था। उन्होंने पीठ से यह भी कहा कि जब सदन की बैठक बुलाई जाए तो इन 15 बागी विधायकों को सत्तारूढ़ गठबंधन के व्हिप के आधार पर उपस्थित होने से छूट प्रदान की जाए।

कुलभूषण जाधव मामले पर ICJ में फैसला आज, जानें कितने बजे शुरू होगी सुनवाई

नई दिल्ली. पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में नीदरलैंड का हेग स्थित अंतरार्ष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) बुधवार (17 जुलाई) को फैसला सुनाएगा। इस मौके के लिए पाकिस्तान के कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम हेग पहुंच चुकी है। पाकिस्तान मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रेडियो पाकिस्तान ने बताया है कि पाकिस्तान की कानूनी टीम का नेतृत्व देश के महान्यायवादी मंसूर खान कर रहे हैं। टीम के साथ पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल भी हेग पहुंचे हैं।

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले की 10 अहम बातें

1। पाकिस्तान का आरोप है कि जाधव एक भारतीय जासूस हैं जिन्होंने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया था।

2। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में बंद कमरे में सुनवाई के बाद ”जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि जाधव ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की हुई है।

3। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और तल्खी घोलने वाले इस मामले में भारत ने पाकिस्तान के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जाधव बेकसूर हैं।

4। भारत ने मामले को हेग स्थित अंतरार्ष्ट्रीय न्यायालय में उठाया। इससे पहले हुई सुनवाई में ICJ ने पाकिस्तान को जाधव को दी गई फांसी की सजा पर अमल करने से रोक दिया था।

5। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, देश के कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ICJ कुलभूषण जाधव को रिहा करने के भारतीय अनुरोध को ठुकरा देगा, लेकिन यह हो सकता है कि उन्हें दी गई सजा को रद्द कर दिया जाए और जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान करने का आदेश अदालत द्वारा सुनाया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर राजनयिक पहुंच प्रदान करने का आदेश दिया जाता है तो ऐसा पहली बार होगा कि ‘एक जासूस’ को राजनयिक पहुंच प्रदान की जाएगी।

6। भारत लगातार जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान करने की मांग करता रहा है। लेकिन, पाकिस्तान यह कहकर इससे इनकार करता रहा है कि जासूसों के मामले में राजनयिक पहुंच नहीं दी जाती है।

7। नीदरलैंड में द हेग के ‘पीस पैलेस’ में बुधवार को भारतीय समयानुसार शाम साढ़े छह बजे सार्वजनिक सुनवाई होगी जिसमें अदालत के प्रमुख न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ फैसला पढ़कर सुनाएंगे।

8। इस चर्चित मामले में फैसला आने से करीब पांच महीने पहले न्यायाधीश यूसुफ की अध्यक्षता वाली ICJ की 15 सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद 21 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस मामले की कार्यवाही पूरी होने में दो साल और दो महीने का वक्त लगा।

9। भारत ने नयी दिल्ली को जाधव तक राजनयिक पहुंच देने से बार बार इंकार करके पाकिस्तान द्वारा वियना संधि के प्रावधानों का ”खुलेआम उल्लंघन के लिए आठ मई 2017 को ICJ का दरवाजा खटखटाया था। ICJ की दस सदस्यीय पीठ ने 18 मई 2017 को पाकिस्तान को जाधव की मौत की सजा पर अमल से रोक दिया था।

10। ICJ में सुनवाई के दौरान, भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपना अपना पक्ष रखा था और जवाब दिये थे। इस मामले में भारत का पक्ष रखने वाले हरीश साल्वे ने पाकिस्तान की कुख्यात सैन्य अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाए थे और ”दबाव वाले कबूलनामे पर आधारित जाधव की मौत की सजा निरस्त करने का संयुक्त राष्ट्र की इस अदालत से अनुरोध किया था।

राशिफल: 17 जुलाई 2019, इन राशियों के लिए दिन मंगलमय, धन लाभ के योग !

राशिफल: 17 जुलाई 2019, इन राशियों के लिए दिन मंगलमय, धन लाभ के योग !

आज का राशिफल

मेष

व्यय बढ़ेगा। जोखिम न लें। व्यापार-व्यवसाय मंदा चलेगा। विरोध होगा। यात्रा सफल होगी।

वृष

जीवनसाथी की चिंता होगी। मान बढ़ेगा। योजनाएं लाभ देंगी। अचानक लाभ के अवसर हाथ आएंगे। निर्णय लेने में विलंब न करें।

मिथुन

विवाद को बढ़ावा न दें। अशुभ सूचना मिल सकती है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अस्वस्थता रहेगी।

कर्क

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। नेत्र पीड़ा संभव है। संपत्ति के कार्य लाभ देंगे।

सिंह

मेहनत का फल मिलेगा। सौदों से लाभ होगा। विद्यार्थी, बेरोजगार मनोनुकूल लाभ लें। विरोधी शांत होंगे। कार्य की गति बनाए रखें।

कन्या

जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कानूनी अड़चन दूर होगी।

तुला

जीवनसाथी से सहयोग प्रसन्नता देगा। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे। रुका हुआ धन वापस आएगा। लाभ के अवसर बनेंगे। कार्यशैली में सुधार होगा।

वृश्चिक

व्यापारिक यात्रा लाभदायक रहेगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। निवेश-नौकरी से लाभ होगा। नई योजनाएं लाभ देंगी। अचानक लाभ के योग बनेंगे।

धनु

शरीर कष्ट संभावित है। धन वसूली होगी। निवेशादि से लाभ होगा। रोजगार प्राप्ति होगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। किए गए कार्य फलीभूत होंगे।

मकर

कार्य-सिद्धि होगी। योजना फलीभूत होगी। मान सम्मान मिलेगा। जोखिम न उठाये। व्यवसाय ठीक चलेगा।

कुंभ

उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। यात्रा सफल रहेगी। धनलाभ होगा।

मीन

यात्रा सफल रहेगी। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा।

पंचांग: 17 जुलाई 2019 दिन- बुधवार, जानें शुभ समय एवं राहुकाल !

पंचांग: 17 जुलाई 2019 दिन- बुधवार, जानें शुभ समय एवं राहुकाल !

आज का पंचांग

विक्रम संवत:- 2076

शक संवत:- 1941

वार:- बुधवार

ऋतु:- वर्षा

अयन:- दक्षिणायण

मास:- आषाढ़

पक्ष:- कृष्ण पक्ष

नक्षत्र:- उत्तराषाढा

योग:-विष्कम्भ

तिथि:- प्रतिपदा

दिशाशूल:- उत्तर में

सूर्योदय:- 05:34

सूर्यास्त:- 07:20

राहुकाल:- सुबह 05:35-07:17

बरसात के मौसम में खाने की प्लेट से गायब कर दे ये चीज़े, नहीं तो होगा नुकसान

हेल्थ डेस्क. आने वाले दिनों में मानसून के और बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है। जल्द ही मानसून की बेरुखी खत्म होने वाली है और हल्की बारिश होने की संभावाना बनी हुई है, जिससे देश की राजधानी के मौसम का मिजाज बदलेगा.

बारिश होने से गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन यह मौसम अपने साथ बहुत सारी बीमारियां भी लेकर आता है. इसलिए जरूरत होती है इस मौसम में नपा-तुला खाने की. वहीं हल्की-फुल्की बारिश में लोग भींगना पसंद करते हैं. बाद में गर्म पानी से नहा लेते हैं जिससे भी तबीयत खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.

बारिश के साथ ही तला-गला खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है. जिसे मिटाने के लिए हम आप अक्सर रोड साइड की दुकानों पर पसंदीदा चीजें खाना पसंद करते हैं. जबकि बरसात के मौसम में खान पान को लेकर लापवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से पेट खराब हो सकता है. इस मौसम में पानी में पैदा हुआ बैक्टीरिया काफी सक्रिय होता है जोकि रोड साइड चीजें खाने से हमारे पेट में पहुंच जाते हैं. बाद में ये बदहजमी के कारण बनते हैं. इसलिए जरूरत है संभलने की. हम यहां बता रहे हैं कि मानसून में कैसा खान-पान अपनाना चाहिए ताकि हेल्दी रह सकें.

जानिए आखिर क्यों धोनी को चयनकर्ता संन्यास लेने पर कर रहे हैं मजबूर , टीम से बाहर करने की पूरी तैयारी…

फल खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में कुछ फलों को अलविदा कहने में भी भलाई है. इन फलों में तरबूज, खरबूजा और आम शामिल हैं. ऐसा माना जाता है कि इन फलों को खाने से चेहरे पर मुहांसे और दाने आने लगते हैं. बेहतर स्वास्थ्य और स्किन के लिए सेब, नाशपती, अनार जैसे फलों का सेवन करना फायदा पहुंचा सकता है.

– बारिश के दौरान प्याज और अदरक का सेवन ज्यादा करना चाहिए. भोजन में रेशेदार फलों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. नींबू में विटामिन सी मिलता है इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. वहीं पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है. इसकी चटनी या फिर सलाद में खा सकते हैं. बारिश के मौसम में पीने के पानी का खास ध्यान देना चाहिए. कोशिश करें कि उबला हुआ पानी ठंडा कर पीएं. कच्ची हरी सब्जियों के सेवन से बचें. क्योंकि इनमें फंगस और बैक्टीरिया सबसे ज्यादा पनपते हैं.

– बारिश में रोड साइड लगी दुकानों से कुछ भी न लेकर खाएं, क्योंकि इसके कारण आपको इन्फेक्शन हो सकता है. अलग खाना ही चाहते हैं तो पहले यह देख लें कि उस दुकान पर साफ-सफाई है भी या नहीं. साथ ही बना खाना हाइजीनफ्री हो.

– बच्चों को बारिश के दौरान भरे पानी में खेलने से रोकें. अगर वे पानी में भींग गए हैं तो ठंडा पदार्थ देने से बेहतर होगा गर्म दूध में हल्दी डालकर दें. इससे उन्हें सर्दी, जुकाम नहीं होगी. खुद भी और बच्चों को भी गरम चीजें खाने के लिए दें. दूध को अच्छी तरह उबालना भी जरूरी है.

– बरसात के दिनों में हर्बल चाय का सेवन करना फायदा पहुंचा सकता है. हर्बल चाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं.

– बारिश में पकौड़े, समोसे, कचौड़ी खाने का खूब मन करता है, लेकिन इन चीजों का ज्यादा मात्रा में सेवन आपको बीमार कर सकता है. साथ पेट और स्किन की एलर्जी या दाने भी हो सकते हैं. इनकी जगह आप भून हुए खाने को प्रिफर करें.

हेल्दी और स्वस्थ्य रहने के लिए अपनी रुटीन में शामिल करें ये आदतें

हेल्थ डेस्क. हेल्दी और स्वस्थ जीवन की तमन्ना तो हर कोई रखता है, पर रह नही पता क्यों आज कल इतनी बीमारियां होने लगी है कि इन्सान का स्वस्थ रहना मुश्किल हो गया है. स्वस्थ रहने के लिए आप क्या क्या नही करते हैल्दी डाइट से लेकर एक्सरसाइज तक करते हैं. इसके बावजूद भी आप कई बीमारियों की चपेट मे आ जाते हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि स्वस्थ रहने के लिए कुछ अच्छी आदतों का होना बेहद जरूरी है। कई बार आप कुछ चीजों को लेकर लापरवाह हो जाते है और बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में आज हम आपको 10 हेल्दी आदतों के बारे में बताएंगे, जिसे रूटीन में शामिल करके आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।

रूटीन में शामिल करें ये हेल्दी आदतें

कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।