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Sunday, September 6, 2026
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“ऑपरेशन टाइगर” के मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे का दिल्ली की सियासत में बढ़ा क़द

ब्यूरो | नवप्रवाह.कॉम 

मुम्बई | ऑपरेशन टाइगर की कामयाबी के बाद शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का राजनीतिक कद राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ता हुआ दिख रहा है। इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड उन्हें माना जा रहा है। दिल्ली के सियासी गलियारों में अब उन्हें किंगमेकर के तौर पर देखा जा रहा है।

आमतौर पर लाइमलाइट से दूर रहकर संगठन का काम करने वाले श्रीकांत शिंदे इस बार खुलकर सामने आए। उन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) गुट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नाराज सांसदों को शिवसेना के पाले में लाने का काम किया। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत एक साल पहले ही हो गई थी। शिंदे ने बेहद गोपनीय तरीके से उद्धव गुट के असंतुष्ट सांसदों से संपर्क साधा। इसकी जानकारी उनके कुछ चुनिंदा भरोसेमंद लोगों को ही थी।

क्यों हुए सांसद नाराज ? 

श्रीकांत शिंदे की राजनीतिक सूझबूझ ने भांप लिया था कि महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस और एनसीपी के बढ़ते प्रभाव से उद्धव गुट कमजोर पड़ रहा है।  उनके नेता स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ थे, जिससे कई सांसद असहज महसूस कर रहे थे। श्रीकांत शिंदे ने इन सांसदों को ताकत दी, जिससे उनका भरोसा शिवसेना पर बढ़ा।

रणनीतिक रूप से काम करते हुए शिंदे ने उद्धव गुट के 6 नाराज सांसदों का विश्वास जीता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात का समय तय करने से लेकर कानूनी कागजी कार्रवाई तक, हर पहलू पर उन्होंने खुद निगरानी रखी। दिल्ली से मुंबई तक मीडिया और विपक्ष की नजरों से बचाकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

संसद में मुद्दे मजबूती से रखने के साथ-साथ डॉ. शिंदे ने विदेश में भी देश की छवि बेहतर की है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विदेशों में भारत का पक्ष रखकर मजबूत समर्थन जुटाया, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सांसदों के साथ निरंतर संवाद और संगठनात्मक समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया। डॉ. शिंदे केवल संसदीय राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीति और राजनीतिक प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी के बड़े फैसलों में उनका सुझाव महत्वपूर्ण माना जाता है। एक सामान्य महिला कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने का निर्णय भी उन्हीं की पहल पर हुआ था।

आखिर क्यों महंगे होते जा रहे हैं Vi के Recharge Plans?

Illustration showing Supreme Court, AGR dues papers, telecom towers and a worried mobile user explaining why Vodafone Idea (Vi) recharge plans are expensive in India
जब कंपनियों पर हजारों करोड़ का AGR बकाया आया, तो उसकी कीमत आखिरकार आम मोबाइल उपयोगकर्ता को ही चुकानी पड़ी।

क्या आपने सोचा है कि मोबाइल रिचार्ज इतने महंगे क्यों होते जा रहे हैं?

कहानी सिर्फ कंपनियों की नहीं है, इसमें अदालत, सरकार और अंत में आम जनता सब शामिल हैं।

शुरुआत 1999 से होती है

भारत सरकार ने 1999 की New Telecom Policy के तहत टेलीकॉम कंपनियों से कहा कि वे अपनी कमाई का एक हिस्सा सरकार को देंगी।
इसे कहा गया Adjusted Gross Revenue यानी AGR।
कंपनियों को अपनी कमाई का लगभग 8% लाइसेंस फीस और अलग से स्पेक्ट्रम चार्ज देना होता था।

कई साल तक कंपनियाँ AGR को सिर्फ कॉल और डेटा की कमाई पर लागू मानती रहीं। लेकिन सरकार का कहना था कि इसमें ब्याज, रेंट, और दूसरी आय भी शामिल होगी। यहीं से विवाद शुरू हुआ।

2019: वह साल जिसने पूरे टेलीकॉम सेक्टर की दिशा बदल दी

24 अक्टूबर 2019 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकार की AGR परिभाषा सही है और कंपनियों को पिछली पूरी देनदारी ब्याज और पेनल्टी के साथ चुकानी होगी।

इस फैसले के बाद टेलीकॉम कंपनियों पर कुल ₹1.77 लाख करोड़ से ज्यादा का AGR बकाया निकल आया। इनमें सबसे ज्यादा बोझ पड़ा Vodafone Idea पर, जिस पर लगभग ₹89,952 करोड़ की देनदारी बताई गई।

Vodafone Idea पर कर्ज का पहाड़

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Vodafone और Idea, जो पहले ही ग्राहकों के कम होने से कमजोर हो चुके थे, अचानक भारी कर्ज में दब गए।

2025 तक कंपनी का कुल कर्ज लगभग ₹2.4 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया। यह सिर्फ व्यापारिक नुकसान नहीं था, बल्कि अदालत के आदेश से पैदा हुई देनदारी भी थी।

सरकार ने राहत दी, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई

सितंबर 2021 में सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर को राहत देने के लिए एक पैकेज घोषित किया और कंपनियों को AGR और स्पेक्ट्रम भुगतान पर चार साल का मोराटोरियम दिया। इसका मतलब यह था कि कंपनियाँ कुछ समय तक भुगतान टाल सकती थीं, लेकिन पैसा माफ नहीं हुआ। यानी कर्ज बना रहा, सिर्फ उसकी किस्तें आगे बढ़ गईं।

अब सवाल यह है कि इसका असर जनता पर कैसे पड़ा

जब किसी कंपनी पर अचानक हजारों करोड़ का कर्ज आ जाता है, तो उसके पास तीन ही रास्ते होते हैं:- कंपनी बंद कर दे, सरकार से पूरी माफी मांगे या फिर ग्राहकों से ज्यादा कमाई शुरू करे। टेलीकॉम कंपनियों ने तीसरा रास्ता चुना।

2016 के आसपास जो प्लान ₹149 या ₹199 में मिल जाते थे, वही 2024-2026 तक ₹299 या उससे ज्यादा में मिलने लगे। यह सिर्फ महंगाई नहीं थी, बल्कि कंपनियों की मजबूरी भी थी।

Jio की एंट्री ने आग में घी का काम किया

2016 में Reliance Jio ने बेहद सस्ते डेटा और मुफ्त कॉल के साथ बाजार में एंट्री की। इससे बाकी कंपनियों की कमाई घट गई, लेकिन AGR की देनदारी उतनी ही रही। मतलब- कमाई कम और भुगतान ज्यादा। यही वजह थी कि Vodafone और Idea को 2018 में मिलकर एक कंपनी बनानी पड़ी।

आज की स्थिति

आज भारत में मोबाइल नेटवर्क का बाजार लगभग तीन कंपनियों तक सिमट चुका है- Vodafone Idea, Bharti Airtel, Reliance Jio. कम प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि कंपनियां अब उतनी सस्ती कीमतों पर प्लान देने की स्थिति में नहीं हैं।

सबसे बड़ा सच

जब आप ₹299 या ₹349 का रिचार्ज करते हैं, तो आप सिर्फ डेटा नहीं खरीद रहे होते- आप उस पूरी व्यवस्था का खर्च भी उठा रहे होते हैं जिसमें, सरकारी नीतियां, अदालत के फैसले, और कंपनियों की वित्तीय हालत सब शामिल हैं। यानी टेलीकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी कीमत आखिरकार जनता ने ही चुकाई है।

अस्वीकरण:
इस लेख में व्यक्त विचार और विश्लेषण उपलब्ध तथ्यों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित हैं। किसी भी प्रकार की वित्तीय या सेवा-संबंधी निर्णय लेने से पूर्व पाठकों को संबंधित कंपनियों की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।

हनुमान जी महाराज हैं दुनिया के सबसे बड़े गुरु – पं. धीरेंद्र शास्त्री

ब्यूरो | navpravah.com 

बांदा | शहर के मवई बाईपास चौराहे पर आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं.धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म की कथा सुनाई और मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को धर्म की साक्षात प्रतिमूर्ति बताया। कहा कि दीनहीनों की मदद करना, दूसरे को प्रसन्नता देना ही सच्चा धर्म होता है। उन्होंने मंच से अहिंसा परमो धर्म: की सीख दी। बताया कि जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा स्वयं धर्म करता है।

हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वरधाम सरकार ने रोचक कथाओं के जरिए धर्म का महत्व समझाया और सभी को सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प दिलाया। कथा व्यास पं.धीरेंद्र शास्त्री ने मनुष्य को अपना जीवन भगवान को समर्पित करने की सीख दी। कहा कि मनुष्य तो अपने लिए बेहतर ही सोचता है, लेकिन परमात्मा अपने भक्त के लिए बेहतरीन सोचते हैं। उन्होंने मौजूदा पारिवारिक स्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता भरोसे की मजबूत डोर पर टिका होता है।

परिवार में पति-पत्नी के बीच विश्वास और भरोसे का रिश्ता कायम हो तो घर स्वर्ग से भी सुंदर बन जाता है, लेकिन जिस रिश्ते में विश्वास का आभाव हो वहां जीवन नरक से बदतर हो जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि रील के चक्कर में भारत का चरित्र खराब हो रहा है। बागेश्वरधाम सरकार ने परिवारों के टूटने और तलाक के बढ़ते मामलों के लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार बताया। कहा कि सोशल मीडिया में धोखे के मित्रों के साथ लोग अपना हसता खेलता परिवार तोड़ने का आतुर हो रहे हैं। उन्होंने जीवन को सार्थक बनाने के लिए गुरुकृपा को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि खुद के प्रभाव या गुरुकृपा के बल पर ही भगवान की कृपा प्राप्त हो सकती है। एक सच्चा व अच्छा गुरु रंक को भी राजा

बनाने की शक्ति रखता है। बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर ने स्वामी एकनाथ की कथा सुनाकर जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा दी।

प्रभारी मंत्री और जलशक्ति मंत्री ने सुनी हनुमंत कथा-

शहर के मवई बाईपास चौराहे पर आयोजित बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं.धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा सुनने के लिए जहां बांदा जनपद समेत आसपास के सभी जिलों समेत पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, वहीं शनिवार को कथा के दूसरे दिन प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने भी यहां पहुंचकर कथा का रसपान किया और बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद प्राप्त किया। शनिवार की दोपहर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री व प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी कथा पंडाल पर पहुंचे और करीब दो घंटे तक कथा सागर में गोते लगाए। दो घंटे तक कथा सुनने के बाद प्रभारी मंत्री श्री नंदी ने मंच पर पहुंचकर बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद ग्रहण किया।

वहीं प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने भी कथा स्थल पर पहुंचकर बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद लिया और कथा का रसपान किया। जबकि प्रदेश सरकार में जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद कथा आयोजन के संरक्षक की भूमिका में हैं और आयोजन की तैयारियों से लेकर प्रतिदिन कथा सुनने पहुंच रहे हैं। कथा आयोजक बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक भाजपा नेता प्रवीण सिंह, मुख्य यजमान प्रशांत सिंह अपने सभी परिजनों, समर्थकों और इष्टमित्रों के साथ कथा श्रवण करने पहुंचे लाखों की संख्या में श्रद्धालु श्रोताओं की व्यवस्थाओं में जुटे रहे।

नहीं रहीं दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी, पूरे बिहार में शोक की लहर

नीतीश कुमार मिश्र | navpravah.com 

बिहार | दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का आज सोमवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जिसके बाद दरभंगा, मिथिला समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई। नवंबर 2025 में तबीयत बिगड़ने के बाद से वह अस्वस्थ चल रही थीं। महारानी का अंतिम संस्कार राज परिसर स्थित श्यामा माई मंदिर परिसर में किया जाएगा, जहां परंपरागत रूप से राज परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार होता रहा है। महारानी कामसुंदरी देवी के बड़े पोते रत्नेश्वर सिंह मुखाग्नि देंगे।

महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। महारानी कामसुंदरी देवी का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह रियासत के अंतिम शासक माने जाते हैं, जिनका निधन वर्ष 1962 में हुआ था। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में ही हो गया था।

महाराजा कामेश्वर सिंह की याद में महारानी कामसुंदरी देवी ने महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह मिथिला की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करती है। जानकारी के मुताबिक, फाउंडेशन के जरिए महाराजा कामेश्वर की प्राइवेट लाइब्रेरी में हजारों किताबें और पांडुलिपियां लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई है। महारानी ने महाराजा के नाम पर एक समृद्ध पुस्तकालय की स्थापना कराई, जिसमें आज भी करीब 15 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही महारानी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाती रहीं और दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया।

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा राज की आखिरी जीवित सदस्य थीं। महाराजा के निधन के बाद उन्होंने कई संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े कानूनी विवादों को संभाला है। इतना ही नहीं, फाउंडेशन के जरिए उन्होंने संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ कला को भी बढ़ावा दिया। आज महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की खबर मिलते ही कई लोग कल्याणी निवास पहुंचे। पारंपरिक रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मुंबई : 18 जनवरी को 5वां बॉलीवुड महा आरोग्य शिविर, शिल्पा शेट्टी और तुषार कपूर होंगे शामिल

एंटरटेनमेंट डेस्क | navpravah.com 

मुंबई | डॉ. 365 और डीआरवीए चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में 5वें बॉलीवुड महा आरोग्य शिविर 2026 का आयोजन 18 जनवरी 2026 को अंधेरी वेस्ट स्थित चित्रकूट ग्राउंड में किया जाएगा। यह विशाल स्वास्थ्य शिविर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसमें बॉलीवुड और मीडिया जगत से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम नागरिक भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस शिविर में मशहूर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और अभिनेता तुषार कपूर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे, जबकि डॉ. 365 के एमडी और डीआरवीए ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार की विशेष उपस्थिति रहेगी।

इस आयोजन को लेकर मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें प्राइम फोकस के चेयरमैन नरेश मल्होत्रा, डॉ. मनीष मोटवानी, अभिनेता दीपक पराशर, इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) के अध्यक्ष अभय सिन्हा, फैशन डिजाइनर अर्चना कोचर, एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा, संदीप सोपारकर, बी.एन. तिवारी, संगीतकार दिलीप सेन, हरीश चोकसी, भोजपुरी अभिनेत्री संगीता तिवारी और चित्रकूट ग्राउंड के महेंद्र पोद्दार सहित कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई और सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया।

5वें बॉलीवुड महा आरोग्य शिविर में जनरल हेल्थ चेकअप, ब्लड टेस्ट, आंखों की जांच व चश्मा वितरण, डेंटल, ईएनटी, जनरल सर्जरी, गायनेकोलॉजी, यूरोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, कैंसर स्क्रीनिंग, बच्चों की स्वास्थ्य जांच, एक्स-रे, बीएमडी, बीएमआई, मैमोग्राफी, मुफ्त दवाएं, व्हीलचेयर वितरण और 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुंबई के प्रीमियम अस्पतालों के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ इस शिविर को सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना काल के बाद से बॉलीवुड और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए यह विशेष आरोग्य शिविर लगातार आयोजित किया जा रहा है, जिसका लाभ उनके परिवारजन भी ले सकते हैं। बी.एन. तिवारी ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि ऐसे मुफ्त हेल्थ कैंप निरंतर होते रहने चाहिए। वहीं दिलीप सेन और हरीश चोकसी ने डॉ. 365 की सेवाओं को समाज के लिए अनुकरणीय बताया।

उल्लेखनीय है कि डीआरवीए चैरिटेबल ट्रस्ट पिछले 15 वर्षों से सेवा कार्यों में सक्रिय है। डॉ. धर्मेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में अब तक 9,781 मेडिकल कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 1 करोड़ 96 लाख मरीजों को लाभ मिला है। ट्रस्ट का लक्ष्य एक स्वस्थ, सशक्त और प्रगतिशील समाज का निर्माण करना है।

डीएसजे के छात्रों ने गरीबों में बांटे कंबल

न्यूज डेस्क | navpravah.com

 

नई दिल्ली | दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म की मीडिया मंथन DSJ यूनिट ने समृद्धि सोसायटी के साथ मिलकर 6 दिसंबर को कश्मीरी गेट क्षेत्र में डोनेशन ड्राइव 2.0 का आयोजन किया। ठंड से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 51 कंबल जरूरतमंद बुजुर्गों, बच्चों और गरीब परिवारों में वितरित किए गए। वितरण शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक चला।

इस अवसर पर मेंटर मिथलेश जी, मीडिया मंथन कनवीनर विनीत जी, समृद्धि सोसायटी की कनवीनर कोमल जी , को-कनवीनर आयुष जी और सोशल वर्क कनवीनर ऋषि जी मौजूद रहे। इनके साथ मीडिया मंथन टीम के कई कार्यकर्ता भी स्थल पर सक्रिय रूप से जुड़े रहे और पूरे अभियान को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया।

छात्रों, प्रोफेसरों और अभिभावकों के डोनेशन से कंबलों की खरीद की गई और टीमों ने मौके पर पहुंचकर वितरण प्रक्रिया को पूरा किया।

अभियान की तैयारी से लेकर वितरण तक, दोनों संगठनों की टीमों ने पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम किया। कड़कड़ाती ठंड में यह सहायता उन परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुई, जो बुनियादी साधनों की कमी के कारण सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

आयोजकों ने बताया कि सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

‘एक राष्ट्र, एक संस्कृति, एक जन’ की भावना में रचा–बसा पूर्वोत्तर: SEIL अभियान में प्रतिनिधियों ने महसूस की आत्मीयता और विविधता

न्यूज डेस्क| Navpravah.com

गुवाहाटी/नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा 1966 से चलाए जा रहे “अंतर-राज्य छात्र जीवन दर्शन (SEIL)” अभियान ने एक बार फिर पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु को मजबूत किया है। इस वर्ष देशभर से पहुंचे प्रतिनिधियों ने मेघालय और अरुणाचल प्रदेश की जनजातीय परंपराओं, जीवनशैली और आत्मीयता का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश से शामिल प्रतिनिधि सात्विक श्रीवास्तव ने इस अनुभव को “भारत की मूल परंपरा के सजीव दर्शन” बताया।

मेघालय: मातृसत्तात्मक समाज और प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता

यात्रा की शुरुआत गुवाहाटी में ओरिएंटेशन से हुई, जिसके बाद प्रतिनिधियों को समूहों में विभाजित किया गया। सात्विक जिस समूह ‘लांगोल’ के सदस्य थे, उसमें 7 राज्यों के प्रतिभागी शामिल थे।

मेघालय में प्रतिनिधियों ने देखा कि आधुनिकता के बीच भी स्थानीय जनजातियाँ प्रकृति, संस्कृति और परंपरा से अभिन्न रूप से जुड़ी हैं। मातृसत्तात्मक समाज की खास व्यवस्था, संपत्ति का मातृरेखा से स्थानांतरण, छोटी बेटी की विशेष भूमिका और ‘नोकमा’ जैसी महिलाओं को सशक्त करने वाली प्रणालियाँ भी प्रतिभागियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं।

सात्विक ने बताया कि स्थानीय लोगों की प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता अद्भुत है। एक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “एक स्थानीय युवक ने रात में पेड़ को हाथ लगाने पर कहा—‘उन्हें मत जगाइए, उन्हें दुख होगा।’ इस मासूमियत ने पेड़ों को भी जीव मानने की संस्कृति का एहसास कराया।”

अरुणाचल प्रदेश: अतिथि को पुत्र समान सम्मान

अरुणाचल प्रदेश की यात्रा ने प्रतिनिधियों को भावुक कर दिया। ईटानगर के एक स्थानीय परिवार में ठहरे सात्विक के अनुसार, परिवार के मुखिया ने उनसे कहा—“जब तक तुम अरुणाचल में हो, तुम हमारे बेटे हो। तुम्हें किसी संकट से बचाने के लिए हम जान लगा देंगे।” यह संवेदना उन्हें गहरे तक छू गई।

प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री पेमा खांडू से संवाद का अवसर भी मिला, जहां अरुणाचल की जनजातीय विविधता, कला-साहित्य, भूगोल और आत्मनिर्भरता मॉडल पर चर्चा हुई।

राज्य में बंबू इंडस्ट्री, ऑर्गेनिक फार्मिंग, ईको-एग्रो टूरिज्म, टी इंडस्ट्री और मछली पालन जैसे आत्मनिर्भर आजीविका मॉडल ने प्रतिनिधियों को बेहद प्रभावित किया।

विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण

दोनों राज्यों में आत्मीयता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, अतिथि–देवो–भव परंपरा, संस्कृति के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रत्यक्ष अनुभूति ने प्रतिभागियों को ‘एक भारत’ की भावना से जोड़ा।

सात्विक श्रीवास्तव कहते हैं, “पूर्वोत्तर भारत वास्तव में दुनिया का सबसे सुंदर, विविधतापूर्ण और रंग-बिरंगा क्षेत्र है। तमाम विविधताओं के बावजूद ‘एक राष्ट्र, एक परंपरा, एक जन’ की भावना यहां जीवंत है।”

ABVP का SEIL अभियान वर्षों से पूर्वोत्तर और भारत के अन्य हिस्सों के बीच सांस्कृतिक एकता के इस सूत्र को और मजबूत कर रहा है।

बिहार में एक बार फिर नीतिशे कुमार, दसवीं बार ली मुख्यमंत्री की शपथ

नीतीश कुमार मिश्र | navpravah.com

पटना | ऐतिहासिक गांधी मैदान में नीतीश कुमार ने गुरुवार को दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.मुख्यमंत्री के अलावा 26 और मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ लेकर मंत्रिमंडल का गठन पूरा किया. जिनमें बीजेपी के 14 और जदयू के 8 मंत्री शामिल हैं.

इस बार के मंत्रिमंडल में कई नए चेहरे शामिल हुए हैं. शपथ ग्रहण समारोह आज सुबह 11.30 बजे गांधी मैदान में शुरू हुआ। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , अमित शाह, जेपी नड्डा, बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के सीएम भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।मंत्रिमंडल विस्तार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन शब्दों को साकार करता है जब वह कहते हैं कि सबका साथ सबका विकास शायद इसी वाक्य से प्रेरित हो कर महिला, युवा और अल्पसंख्यकों को भी शामिल किया गया हैं तक के मंत्रिमंडल विस्तार में तीन महिला और एक मुसलमान मंत्री हैं.

बीजेपी विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी और उपनेता विजय कुमार सिन्हा ने डिप्टी सीएम के रूप में मंत्री पद की शपथ ली. सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के अलावा बीजेपी के मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप जायसवाल, नितिन नवीन, रामकृपाल यादव, संजय सिंह, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र पासवान, श्रेयसी सिंह, डॉ . प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने भी बिहार सरकार मंत्री पद की शपथ ग्रहण की.

वहीं नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से भी आठ मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की है. जेडीयू की से मंत्री पद की शपथ लेने वालों में विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, विजेंद्र यादव, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मो. जमा खान, मदन सहनी, डॉ. प्रमोद कुमार का नाम शामिल है.

इसके अलावा चिराग की पार्टी से संजय कुमार (पासवान), संजय सिंह ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की. उधर जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की ओर से संतोष कुमार सुमन और दीपक प्रकाश ने भी नई सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली है.

इस बार के मंत्रिमंडल में कई नए चेहरे भी शामिल हुए हैं, वहीं एक नाम ऐसा भी हैं जिसने चुनाव भी नहीं लड़ा परंतु मंत्री बन गए उनका दीपक प्रकाश हैं राजनीतिक पहचान बस इतनी हैं कि वह उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे हैं उनके पिता बिहार के एक बड़े और प्रभावशाली नेताओं की सूची में शामिल हैं.
वहीं दूसरी ओर लेशी सिंह, रमा निषाद और श्रेयसी सिंह- तीनों नई मंत्रियों में एक समानता यह है कि तीनों के ही परिवारों का राजनीतिक जुड़ाव रहा है.

पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह की बेटी एवं जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह, आरा से विधायक संजय टाइगर, खजौली से अरुण शंकर प्रसाद, औराई से रमा निषाद, पातेपुर से लखेन्द्र कुमार रोशन और विधानपार्षद प्रमोद चंद्रवंशी को पहली बार मंत्री पद मिला है.

रमा निषाद औराई सीट से पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत कर विधानसभा पहुंची हैं.रमा निषाद के पति अजय निषाद दो बार सांसद रह चुके हैं जबकि उनके ससुर कैप्टन जयनारायण निषाद केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

वहीं जमुई विधानसभा सीट से विधायक बनीं और नीतीश सरकार में मंत्री बनने वाली श्रेयसी सिंह एक मशहूर निशानेबाज़ भी हैं.
उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया) के महिला डबल ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था. इससे पहले उन्होंने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो, स्कॉटलैंड) में रजत पदक हासिल किया था.
श्रेयसी सिंह के पिता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री थे. दिग्विजय सिंह बिहार की बांका लोकसभा सीट से कई बार सांसद रहे. वे नेशनल राइफ़ल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे.

बताते चले कि एनडीए ने पिछले हफ़्ते बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की.
243 सीटों में से एनडीए को 202 सीटें मिलीं. बीजेपी को 89, जेडीयू को 85, एलजेपी(आर) को 19 और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा 5 और आरएलएम 4 सीटें जीतने में कामयाब रही थीं.

भारत का संविधान जीवन का दर्शन भी समाहित करता है — न्यायमूर्ति ए.के. गोयल

ब्यूरो| Navpravah.com

नई दिल्ली| दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में युवा संगठन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक युवा संवाद “विमर्श 2025” का शुभारंभ आज उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम का विषय “संविधान: भारत की आत्मा (Samvidhan – The Soul of Bharat)” रखा गया, जिसके तहत देशभर के युवा, शिक्षाविद् और विचारक एक मंच पर जुटे, ताकि भारतीय संविधान के मूल्यों और उसकी जीवंत भावना पर विचार-विमर्श किया जा सके।

कार्यक्रम की शुरुआत दक्षिण भारत के पारंपरिक नृत्य और महाराष्ट्र के लोकनृत्य की प्रस्तुतियों से हुई, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का सुंदर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्री-विमर्श प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

‘युवा’ संगठन के प्रतिनिधि कविंदर तालियान ने संगठन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जैसी दिशा युवाओं को मिलेगी, वैसी ही देश की दशा होगी।”
विमर्श संयोजक डॉ. प्रतिभा त्यागी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए “संविधान – द सोल ऑफ भारत” नामक वार्षिक पत्रिका का लोकार्पण किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. अशोक कुमार नागावत (कुलपति, डीएसईयू) ने संविधान की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए और युवाओं से संविधान की भावना को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
प्रो. डॉ. पवित्रा भारद्वाज (प्राचार्या, कमला नेहरू कॉलेज) ने कहा, “संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे देश की आत्मा है।”
वहीं, प्रो. बालाराम पाणी (डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने “विमर्श” जैसे मंचों को युवाओं में विचारशीलता और जिम्मेदारी की भावना जगाने वाला बताया।

मुख्य अतिथि और पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. गोयल ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा, “भारत का संविधान विश्व के सबसे जीवंत संविधानों में से एक है, जिसमें शासन का ढांचा ही नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन भी समाहित है।” उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल्यों को अपने आचरण का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “विमर्श 2025 युवाओं के विचारों का ऐसा संगम है जो भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा।”

चित्रकूट: असमय बारिश से धान की फसल चौपट, किसान पहुँचे कलेक्ट्रेट

ब्यूरो | navpravah.com 

चित्रकूट | उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, बुंदेलखंड क्षेत्र में इस बार की असमय और लगातार हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर कहर ढा दिया है। खेतों में पकने को तैयार धान की फसलें जलमग्न होकर सड़ चुकी हैं और कई जगहों पर बालियों में अंकुर फूट आए हैं। धान की फसल बर्बाद हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एड. प्रखर पटेल व समाजसेवी मुकेश कुमार के नेतृत्व में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को जिलाधिकारी चित्रकूट के माध्यम से सम्बोधित ज्ञापन सौंपकर किसानों के लिए तात्कालिक राहत और मुआवज़े की मांग की है।

अपने पत्र में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने लिखा है कि “यह केवल फसलों का नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और भविष्य का प्रश्न है। जिस किसान की मेहनत पर प्रदेश की अन्न-व्यवस्था टिकी है, आज वही किसान असहाय खड़ा है।” उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र, जो पहले से ही सूखा, पलायन और आर्थिक पिछड़ेपन की मार झेल रहा है, वहाँ यह आपदा किसानों के जीवन में विनाश बनकर आई है। खेतों में पानी भर जाने से न सिर्फ धान बल्कि मसूर, चना और आलू जैसी आगामी फसलों की तैयारी भी रुक गई है। हजारों किसान अब बीज और खाद खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। कई किसानों के घरों में अन्न का संकट गहराने लगा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है।

प्रखर पटेल व मुकेश कुमार ने मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें की हैं—राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत सर्वे करें, प्रभावित किसानों को राहत राशि और मुआवज़ा दिया जाए, अगली फसल के लिए ब्याजमुक्त ऋण, बीज और खाद की सहायता दी जाए तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जमीनी समीक्षा कर उसका लाभ किसानों तक पहुंचाया जाए। कहा कि उन्होंने स्वयं कई गांवों का दौरा कर खेतों की स्थिति देखी है। उन्होंने बताया, “हमने खेतों में जाकर देखा कि धान की फसल खराब हो चुकी है। पकी हुई फसलें पानी में डूबकर अंकुरित हो गई हैं। किसानों के चेहरों पर निराशा और असहायता साफ झलक रही है।” कहा कि बुंदेलखंड का किसान हर बार विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद का बीज बोता है, लेकिन इस बार मौसम ने उसकी सारी मेहनत तबाह कर दी।

गांवों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि आने वाले महीनों में परिवार का गुजारा कैसे होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस स्थिति को कृषि आपदा घोषित करते हुए बुंदेलखंड सहित सभी प्रभावित जिलों के किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की आत्मा हैं—उनकी पीड़ा ही प्रदेश की पीड़ा है। सरकार को इस त्रासदी को केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि किसानों के अस्तित्व से जुड़ा संकट मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

इस मौके पर अनुपम, भरत, कृष्णकांत, महेंद्र सिंह, सुभील, राहुल, सुनील, केशव द्विवेदी, अयूब अली, राजकुमार, चूड़ामणि, नवाब अली, रससदवा, बैजनाथ, सुनील भगत, अरविंद, राम अभिलाष, सुधीर, उज्जैन, कामता, महादेव, रामसागर, अतुल, विनीत, अलफ नारायण, महेश, राम-लखन, छोटके, अभिलाष, गौरव, ज्ञानेंद्र, आशीष, मेहंदी हुसैन, अशोक उपाध्याय, इरसाद अली, संतोष व सभी सम्मानित किसान मौजूद रहे।