UP Assembly Election: समझिए, सुल्तानपुर का समीकरण

ब्यूरो | नवप्रवाह डॉट कॉम

उत्तर प्रदेश | सुल्तानपुर की लम्भुआ सीट (190) पर सियासी हलचल तेज हो गई है। यह सीट हमेशा से अपने अलग सियासी मिजाज के लिए जानी जाती है। 1957 में अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं, जिसमें प्रदेश सभी बड़े दलों कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा ने जीत दर्ज की है। फिर भी लम्भुआ की धरती एक नए प्रकाश, एक नए सवेरे की प्रतीक्षा में है। ऐसे में स्थानीय लोगों को राम प्रकाश मिश्रा ‘दधीचि ‘ के रूप मे उस प्रकाश की उम्मीद नजर आ रही है।

हमारी टीम ने पिछले एक सप्ताह में धोपाप, पापर घाट, जनवारी धाम और नंदौली बाजार सहित 20 से ज्यादा गांवों में लोगों से बात की। बातचीत के दौरान स्थानीय मुद्दों में सबसे ऊपर धोपाप तीर्थ का अधूरा विकास, लम्भुआ-कादीपुर मार्ग की खराब स्थिति, गन्ना भुगतान में देरी और युवाओं का पलायन आदि सामने आया है। लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो लखनऊ में कम और लम्भुआ में ज्यादा रहे। इसी जनसंपर्क के दौरान रामप्रकाश मिश्र ‘दधीचि’ नाम बार-बार लोगों की जुबान पर आया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हैं और “सुनवाई, पढ़ाई, दवाई और कमाई” जैसे मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं। बिना किसी बड़े पद पर रहते हुए भी सुख-दुख में लोगों के बीच मौजूद रहने की वजह से उनकी पहचान एक सरल और सुलभ व्यक्ति के तौर पर बनी है। वर्तमान में यहां भाजपा के विधायक हैं, जिन्होंने 2022 में 82,999 वोट (39.37%) पाकर सपा को (73,466 वोट) को 9,533 वोटों से हराया था। तीसरे नंबर पर बसपा के अवनीश कुमार सिंह रहे थे, जिन्हें 42,119 वोट मिले थे।

लम्भुआ का वोट गणित: किसके पास कितनी ताकत-

चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक लम्भुआ में कुल 3,56,962 मतदाता हैं।

– दलित मतदाता – लगभग 80,000 (22.4%)
– ब्राह्मण मतदाता – लगभग 77,000 (21.5%)
– यादव मतदाता – लगभग 42,000
– राजपूत मतदाता – लगभग 42,000
– मुस्लिम मतदाता – लगभग 38,000
– अन्य पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा – लगभग 77,000

आंकड़े बताते हैं कि यहां कोई भी पार्टी अकेले एक जाति के भरोसे चुनाव नहीं जीत सकती। यही कारण है कि इस बार सभी दल नए सामाजिक समीकरण तलाश रहे हैं।

आंकड़ों में लम्भुआ:

– कुल मतदाता: 2026 में 3,39,126 (पुरुष 1,82,349, महिला 1,56,775)
– बड़ा बदलाव: SIR से पहले 3,75,634 वोटर थे, पुनरीक्षण में 36,508 नाम कम हुए – 9.72% की कमी
– 2022 का नतीजा: भाजपा को 82,999 वोटों से जीते, सपा को 73,466 वोट मिले, जीत का अंतर सिर्फ 9,533 वोट का था
– 2024 का संकेत: इसी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में सपा को 11,324 वोटों की बढ़त मिली थी 5313

इसका सीधा मतलब है कि यहां 10 हजार वोटों का स्विंग भी पूरा परिणाम बदल सकता है।

जातीय समीकरण नहीं, स्थानीयता का मुद्दा-

आमतौर पर कहा जाता है कि यहां SC और ब्राह्मण सबसे बड़ी धुरी हैं, साथ ही यादव, क्षत्रिय, मुस्लिम और कुर्मी निर्णायक भूमिका में हैं। लेकिन गांव में बात करने पर जाति से ज्यादा एक दूसरा फैक्टर सुनाई देता है – “अपने बीच का होना”।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 23.29% और मुस्लिम आबादी 14.27% जैसी बड़ी है, लेकिन सभी को ऐसा चेहरा चाहिए जो ब्लॉक, तहसील और थाने तक पैरवी कर सके।

इसी माहौल में रामप्रकाश मिश्र “दधीचि” का नाम चर्चा में है। इसकी वजह नारा नहीं, बल्कि उनकी निरंतरता बताई जा रही है। क्षेत्र में उनके समर्थक उन्हें “सुनवाई, पढ़ाई, दवाई और कमाई” वाले फोरमूले से जोड़कर देखते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा को 2022 के 9,533 वोटों की छोटी बढ़त को 2027 में बड़ी जीत में बदलना है और 2024 में लोकसभा में गंवाई गई 11,324 वोटों की लीड को कवर करना है, तो उसे ऐसे चेहरे पर दांव लगाना होगा जिसकी पकड़ बूथ स्तर तक हो।

फिलहाल लम्भुआ में मुकाबला मुद्दों पर आ गया है – स्थानीयता, सुलभता और विकास की निरंतरता। आने वाले दिनों में टिकट वितरण इस 3.39 लाख वोटरों वाले क्षेत्र की दिशा तय करेगा।

*मेरे पास महर्षि दधीचि का त्याग का आदर्श है – राम प्रकाश मिश्रा दधीचि*

हमारी लम्भुआ विधानसभा संख्या 190 सुल्तानपुर जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट है। 2026 की नई वोटर लिस्ट के अनुसार हमारे यहाँ कुल 3,39,126 मतदाता हैं, जिसमें 1,82,349 भाई और 1,56,775 माताएं-बहनें हैं। विशेष पुनरीक्षण में 36,508 नाम कटे हैं, यानी अब हर एक वोट की कीमत और भी बढ़ गई है। 2022 में जीत का अंतर 9,533 वोट का था। सोचिये एक-एक बूथ पर अगर 20-25 वोट और मिल जाते तो तस्वीर कुछ और होती। 2024 के लोकसभा चुनाव में तो हम इस विधानसभा में 11,324 वोटों से पीछे रह गए। ये आंकड़े हमें चेतावनी दे रहे हैं कि हमें अब जात-पात से ऊपर उठकर, एकजुट होकर अपने घर को बचाना होगा। हमारा लम्भुआ 98% ग्रामीण है। यहाँ करीब 23% दलित भाई, 14% मुस्लिम भाई, और बड़ी संख्या में ब्राह्मण, यादव, क्षत्रिय, कुर्मी और पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद हमारे यहाँ –

– आज भी कितने गाँवों में नहर का पानी आखिरी खेत तक नहीं पहुँचता?
– आज भी कितने नौजवान रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई, सूरत जाने को मजबूर हैं?
– आज भी कितनी माताओं को इलाज के लिए सुल्तानपुर भागना पड़ता है?

इसीलिए मैंने अपने जीवन का एक लक्ष्य बनाया है सुनवाई, पढ़ाई, दवाई और कमाई। मैं भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता हूँ। मैं माननीय मोदी जी और योगी जी की नीतियों को लम्भुआ के हर घर तक पहुँचाना चाहता हूँ। मेरे पास सिर्फ जनता का आशीर्वाद है और महर्षि दधीचि का त्याग का आदर्श है। अगर आप सबका आशीर्वाद रहा और पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया। तो मैं वादा करता हूँ 5 साल में लम्भुआ को हम पहचान नहीं पाएंगे।

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