जयललिता से अम्मा तक का सफर, स्त्री सशक्तिकरण की अनुपम कहानी है -मालिनी अवस्थी

सुप्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी ने जयललिता के प्रति अपने फेसबुक वॉल में बेहद संजीदा संस्मरण लिखा। पढ़ें क्या कहती हैं मालिनी अवस्थी:

“27 सितंबर 2014 की तारीख मुझे कभी नहीं भूलेगी।
मैं उस दिन चेन्नई में थी और वापसी के जहाज़ में समय शेष था। अतः मैं चेन्नई के नल्ली स्टोर से साड़ियां लेने पहुँच गई। लगभग 4 बजे का समय रहा होगा कि अचानक नल्ली में अफरातफरी का माहौल बन गया। बाहर भयंकर कोलाहल की आवाज़ आने लगी।

दुकान का शटर गिरा दिया गया। दुकान में लगभग तीन सौ लोग रहे होंगे, हम सभी चकित थे कि आखिर हुआ क्या। भाषाई दिक्कत चेन्नई में इस समय और भी आड़े आ रही थी। कोई बताने को तैयार नहीं कि हुआ क्या। अंग्रेजी में कुछ कुछ यह स्पष्ट हुआ कि पूरे चेन्नई में माहौल बहुत ख़राब है, दुकान छोड़कर बाहर कोई न जाये। मैंने बाहर झांक कर देखा तो पाया कि आदमी औरतें हाँथ में पत्थर ले कर उन दुकानों को निशाना बना रहे थे जो अभी भी खुली थीं, औरतें रो रही थीं।

मैंने अपने पति को तुरंत फोन मिलाकर सब हाल बताया, उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का अभी अभी निर्णय आया है, जयललिता को जेल हो गई है। तुम इस समय कहाँ हो। इस समय तमिलनाडु में माहौल ठीक नहीं।
अब मैं समझ सकी कि इतनी आक्रामक प्रतिक्रिया क्यों हो रही थी। तमिलनाडु की “अम्मा” का दुःख उनका अपना क्षोभ था, जो प्रकट हो रहा था।

मैं वहां से कैसे निकली, वह अलग कहानी। लेकिन उस दिन मैंने चेन्नई की सड़कों पर जनता का जो रुदन और क्षोभ देखा, वह किसी भी राजनेता के लिए सिर्फ ईर्ष्या और कल्पना का मंज़र था!

एक नायिका, फिंल्मफ़ेयर पुरस्कार विजेता, लक्स की मॉडल, तमिलनाडु के शिखर व्यक्तित्व की नायिका एवं शिष्या, सार्वजनिक ताड़ना और अपमान से दग्ध, एकाकी जयललिता का राजनीती का सफर एक औरत की दृढ इक्षाशक्ति का प्रमाण है। ऐसी औरत, जो विधानसभा में अपने अपमान का बदला लेने के साथ प्रतिज्ञा करती है कि अब इस विधानसभा में मुख्यमंत्री बनकर ही वापस आएगी, एक एक महिला, जिसका व्यक्तिगत जीवन सदा विवाद से जुड़ा रहा, कोई व्यक्तित्व सम्पूर्ण नहीं होता। उनसे अनेक भूलें भी हुईं, धन संचय को ले जेल जाना पड़ा लेकिन उनके जादू में कमी नहीं आने पाई।

शायद तभी उन्हें यह भान हो गया कि इंसान के गुज़र जाने पर यह कमाई साथ नहीं जाती, जाता है तो सिर्फ भलाई, यश, और कृतत्व!

अपनी उम्र के उत्तरार्ध में जयललिता ने जनउपयोगी ऐसी योजनाएं चलाईं कि वे सबकी “अम्मा” बन गईं। यह सच है कि तमिलनाडु निवासी अपनी भावनाओं के प्रकटीकरण में अत्याधिक भावुक हैं, लेकिन यह सच है कि अम्मा सा आदर पाना सरल नहीं और जयललिता ने वही कमाया। जयललिता की अम्मा तक पहुँचने की कहानी स्त्री सशक्तिकरण की अनुपम कहानी है।”

(मालिनी अवस्थी जी की फेसबुक वाल से साभार)

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