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Wednesday, September 9, 2026
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बॉडी स्कल्पटिंग का आदित्य पर छाया फितूर

Bureau@Navpravah.com

वास्तव फिल्म के संजय दत्त का गठीला बदन याद तो होगा ही या फिर सलमान खान का ‘ओ ओ जानेजाना’ में बिना शर्ट का डांस. यही हिंदी सिनेमा के दो माइल स्टोन है, जहां से शरीर का कसावट को अभिनेताओं ने गंभीरता से लिया। फिर कहो ना प्यार है में ऋतिक रोशन और गजनी में आमिर खान के पैक्स ने युवाओं को जिम में जाने के लिए मजबूर कर दिया. करीब दो दशक तक चले पैक्स के मिथ को शायद आदित्य राय कपूर अब तोड़ने वाले हैं.

आदित्य ने अपनी फिल्म फितूर के लिए बॉडी स्कल्पटिंग की है, जिसके लिए आदित्य को जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी. या यूं कहें कि फितूर सवार था, अपने आप को किरदार के अंदर डालने के लिए. पर हां, एक बार उनके इस लुक को युवा दर्शक देखेंगे तो वे जरूर बॉडी स्कल्पटिंग को गंभीरता से लेंगे.

बॉडी स्कल्पटिंग यानी अपने शरीर को गढ़ना नियमित अभ्यास और कसरत से. अमूमन इसमें शरीर के साथ ज्यादा वजनों का खेल नहीं होता जैसा कि बॉडी बिल्डिंग में होता है. देसी कसरत और दौड़ भाग, खाने में संतुलन. कश्मीरी लड़के के लुक के लिए ये जरूरी था. क्योंकि कश्मीर के युवाओं की काया पहाड़ों के कारण टोन्ड ही रहती है. क्योंकि कहानी इन्हीं जगहों के आसपास घूमती है. ये हम नहीं सूत्र कह रहे हैं.

खैर, बात फिल्म की करें तो आदित्य के साथ पहली बार कैटरीन कैफ हैं. कद-काठी और स्किन दोनों की करीब समान होने से ऑन स्क्रीन इनका अपीयरेंस बेहतरीन लगने की संभावना है. आदित्य के लिए अपनी एथलेटिक काया छोड़ बॉडी स्कल्पटिंग करना आसान नहीं था. इसके लिए उन पर सही में फितूर छाया था. इसी फितूर पर ही पूरी फिल्म ही बनी है. जिसकी झलक हमने आदित्य राय कपूर के शरीर में हुए ट्रांसफार्मेशन को देखकर लगा सकते हैं.

सूत्रों की मानें तो फिल्म वैलेंनटाइन डे के करीब रिलीज हो रही है. कश्मीर की वादियों में छाया प्रेम और उसका फितूर युवाओं के लिए ही है. अपने बॉडी स्कल्पटिंग के बारे में आदित्य राय कपूर कहते हैं कि डायरेक्टर की डिमांड थी और उन्होंने जैसा किरदार सोचा वैसा ही मैने खुद को ढाला. इसके लिए काफी वेट लूज़ करना पड़ा. वेट लूज़ करना ही काफी नहीं था, उसे मेनटेन करना सबसे बड़ी चुनौती होती है. दिमाग में कभी पैक्स बनाने का सुरूर तो नहीं था पर बॉडी स्कल्पटिंग का फितूर जरूर चढ़ गया. कभी-कभी इरिटेशन भी होती थी पर यह तो होता ही है. जब मनचाहे शेप में शरीर आ गया तो फील गुड होने लगा.

यूटीवी मोशन के इस फिल्म को डायरेक्ट किया है युवा निर्देशक अभिषेक कपूर ने.फर्स्ट लुक में आदित्य ने पहली बाज़ी जीत ली है. यह शायद एक्टर-डायरेक्टर के फितूरबाजी का ही नतीजा है.

मोदी का ‘हाईवे’ तोहफा

ShikhaPandey@navpravah.com

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिल्ली,गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ के लोगों को नए साल का तोहफा मिला है. आज प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली-डासना- मेरठ 14 लेन के एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया।

दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे दिल्ली के निजामुद्दीन पुल से शुरू होगा. और एनएच 24 पर डासना तक जाएगा और डासना से मेरठ के लिए नया रास्ता बनेगा. एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद दिल्ली से मेरठ की दूरी ढाई घंटे से घंटकर 45 मिनट हो जाएगी. डासना से एक नए रास्ते का निर्माण होगा. जो सीधे मेरठ तक जाएगा. इस एक्सप्रेस वे का काम 4 चरणों में होगा.

पहला चरण निजामुद्दीन पुल से यूपी बार्डर का होगा, दूसरा चरण – यूपी बार्डर से डासना, तीसरा चरण डासना से हापुड़ तक और चौथा चरण डासना से मेरठ का होगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 2 हजार 809 करोड़ रुपये होगी.14 लेन के इस एक्सप्रेस में 6 लेन का एक एक्सप्रेसवे होगा, दोनों ओर 4-4 लेन का नेशनल हाईवे होगा और साथ ही दोनों साईड एक-एक साइकिल ट्रैक भी बनाया जाएगा.

सरकार का दावा है कि ये पूरा प्रोजेक्ट ढाई साल में पूरा हो जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी, लेकिन उनके कार्यक्रम में यूपी के सीएम अखिलेश यादव नहीं हुए.दरअसल ऐसे माना जाता है कि जो भी सीएम नोएडा आता है उसे अगली बार सत्ता नहीं मिलती. शायद इसी वजह से अखिलेश यादव ने नोएडा में पीएम के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.

नए साल से ‘नो इंटरव्यू’

ShikhaPandey@navpravah.com

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को दिल्ली मेरठ हाईवे का शिलान्यास करने के पश्चात् केंद्र की सरकारी नौकरियों के विषय में बेरोज़गार नौजवानों को नए वर्ष का एक खास तोहफा दिया। प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के मद्देनज़र 1 जनवरी 2016 से केंद्र की सी दर्जे व डी दर्जे की सभी सरकारी नौकरियों के लिए इंटरव्यू नहीं लिया जायेगा। उन्होंने राज्य सरकारों से भी निवेदन किया कि वो सी व डी ग्रुप की नौकरियों के लिए इंटरव्यू न लें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इंटरव्यू का मतलब होता है ‘सिफारिश’। इंटरव्यू के नाम पर कैंडिडेट किसी बड़े सोर्स का कुर्ता पहन कर आ जाता है और आसानी से नौकरी पा लेता है। इसलिए अब नौकरी मेरिट के अनुसार योग्य व्यक्ति को मिलेगी,इंटरव्यू और सिफारिशके आधार पर नहीं।

1 जनवरी 2016 से भर्ती प्रक्रिया के तहत भविष्य की रिक्तियों के लिए सभी विज्ञापन इंटरव्यू के बिना होंगे ,हालाँकि कौशल एवं शारीरिक परीक्षा ली जा सकती है। डीओपीटी ने कहा कि भर्तियों के लिए साक्षात्कार समाप्त करने का निर्णय सभी ग्रुप सी व ग्रुप डी के अराजपत्रित पदों व इसके समकक्ष पदों के लिए है।

याद रहेगा वर्ष २०१५ ..!

AnujHanumat@Navpravah.Com

समय कभी नही ठहरता बल्कि हमेशा गतिशील रहता है और इसी कारण इसके बीतते एक-एक लम्हे के साथ हमारा जीवन भी मुट्ठी में भरी रेत की तरह फिसलता जाता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं वक्त के साथ बदलते चले जाते हैं मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो वक्त को अपने कर्मों से बदल देते हैं । ऐसे इतिहास की धारा को नया मोड़ देते हैं। जो लोग इतिहास को बदलने की क्षमता रखते हैं इतिहास उन्हें ही याद रखता है। अब जबकि वर्ष 2015 हमसे विदा ले रहा है हम कुछ ऐसी ही हस्तियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने वक्त की रेत पर अपने कदमों की दमदार छाप छोड़ी है, जिन्हें याद किये बिना हमारा नए वर्ष में प्रवेश कुछ अधूरा सा लगेगा इसलिए आईये एक झलक डाले उन महान व्यक्तित्वों पर जिन्होंने इस बीते हुए साल में अपनी दमदार उपस्थिति से सबके दिलो दिमाग में अपनी जगह बनाई।

  •  क्यों खास रहा 2015 ?[metaslider id=1251]

कुछ अन्य झलकियाँ:

*पहली ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मानबी बन्दोपाध्य, सड़क पर आंदोलन के लिए उतरी निर्भया की माँ आशा देवी, मुम्बई लोकल में कैंसर मरीजो के लिए गाकर पैसे जुटाने वाले सौरभ निम्बाकर और आल इंडिया चैम्पियनशिप में प्रवेश करने वाली साइना नेहवाल भी इस बर्ष चर्चित रही।

*हिंदी के ‘हैशटैग’-
ट्विटर पर इस साल अंगरेजी की सामने हिंदी ने अपनी जगह बनाई। अक्सर अंगरेजी में ट्रेड करने वाले हैशटैग इस साल हिंदी में नजर आये। महाशिवरात्री के मौके पर ट्रेंड करता दिखा #हरहरमहादेव। विश्वकप में भारत और पकिस्तान के मैच के दौरान #जयहिंद खूब ट्रेंड में रहा। वही हिंदू-मुस्लिम सम्बन्धो पर छिड़ी बहस ने जन्म दिया #असहिष्णुता को। वैसे भी बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर हिंदी का चलन बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। ट्विटर ने साल 2011 में यूजर्स की संख्या 10 करोड़ पहुँच जाने पर हिंदी इनपुट की व्यवस्था की थी।

*51वां साहित्य अकादमी पुरूस्कार
साल के आखिरी सप्ताह में प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार रघुबीर चौधरी को 2015 का ज्ञानपीठ पुरूस्कार देने की घोषणा की गई। अमृता,सहवास,अन्तर्वास,वेणू वात्सल(उपन्यास) ,तमाशा और वृक्ष पतनमा(कविता संग्रह) उनकी प्रमुख रचनायो में शुमार है। इससे पहले उनकी कृति ‘उप्रवास कथात्रयी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। पिछले वर्ष यह पुरस्कार मराठी साहित्यकार भलचंद्र नेमाडे को मिला था।

*अलविदा – इस वर्ष कई महत्वपूर्ण हस्तियां हमारे बीच से विदा हो गयी ।उन सबके प्रति हमारी हार्दिक श्रद्धांजली:-
1.अब्दुल कलाम आजाद
(1931-2015)
मिसाइलमैन एपीजे अब्दुल कलाम आजाद को जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था।

2.चार्ल्स कोरिया
(1930-2015)
महात्मा गांधी संग्रहालय,भारत भवन जैसी इमारतों के वास्तुशिल्पी।

3.आर के लक्ष्मण
(1921-2015)
मशहूर कार्टूनिस्ट लक्ष्मण ने अपने कार्टूनों में आम आदमी का प्रसिद्द रेखाचित्र बनाया।

4.सुभाष घिसिंग
(1936-2015)
घिसिंग गोरखालैंड आंदोलन के जनक थे।

5.विनोद मेहता
(1942-2015)
आउटलुक पत्रिका के संस्थापक संपादक मेहता प्रखर राजनीतिक टिप्पणीकार थे।

6.अशोक सिंघल
(1926-2015)
अशोक सिंघल विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष थे।

7.शरद जोशी
(1935-2015)
किसानो के संगठन शेतकारी संगठन के संस्थापक जोशी ने इण्डिया बनाम भारत की अवधारणा दी।

8.अभीनेत्री साधना
(1941-2015)
1960 के दशक की शीर्ष अभिनेत्री साधना के बालों का स्टाइल चर्चित था।

कुल मिलाकर ये साल बहुत से ऐसे व्यक्तित्वों की सफलता का साल था, जिसने आने वाले नए साल की उम्मीदों को और भी बढ़ा दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा की आने वाला वर्ष 2016 आशाओं के कितने नए द्वारो को खोलेगा।

जेटली की बढ़ी मुसीबत, ‘आप’ का चिट्ठी अटैक

ShikhaPandey@Navpravah.com

डीडीसीए मामले में अरुण जेटली की समस्याएं लगातार बढ़ती नज़र आ रही हैं. आम आदमी पार्टी ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप लगाया कि उन्हें इस घोटाले की पूरी जानकारी थी और जेटली ने जांच को प्रभावित करने के लिए अपने रसूख का गलत इस्तेमाल भी किया था.

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा पर एक चिट्ठी के जारी हल्ला बोला. आशुतोष ने अरुण जेटली पर आरोप लगाया कि उन्हें दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ में हुई अनियामितताओं की पूरी जानकारी थी और उन्होंने अपने पद का गलत प्रयोग करते हुए तत्कालीन दिल्ली कमिश्नर को पत्र भी लिखा था और इस बात पर बल दिया था कि धोखाधड़ी के मामले को तत्काल बंद किया जाए. आशुतोष ने उस चिट्ठी को लेकर जेटली से पांच सवाल किए। साथ ही उन्होंने जेटली से केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की.

आशुतोष ने प्रेस कांफ्रेंस में जेटली की लिखी चिट्ठी भी दिखाई. उन्होंने कहा कि यह चिट्ठी 27 अक्टूबर 2011 की है, जो अन्ना आंदोलन के समय लिखी गई थी. उन्होंने कहा कि 5 मई 2012 को जेटली ने दूसरी चिट्ठी लिखी, उसमें भी केस बंद करने के लिए पुलिस कमिश्नर से कहा गया था. जेटली ने लिखा था कि डीडीसीए में कोई गलत काम नहीं करता है इसलिए केस बंद करें. आम आदमी पार्टी ने भाजपा से यह सवाल किया कि पुलिस की जांच से पहले जेटली ने क्‍यों आरोप को निराधार बता दिया?

भयानक प्रलय की ओर बढ़ता संसार

JitendraPandey@Navpravah.com

 

भारतीय संस्कृति में पृथ्वी को माता की संज्ञा दी गई है -” माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः।” अर्थात् पृथ्वी हमारी मां है और हम पृथ्वी के पुत्र हैं। अथर्ववेद का यह सूत्र वर्तमान काल में प्रत्येक के लिए मंत्र-रूप होना चाहिए। अब जलवायु परिवर्तन भविष्य की समस्या नहीं रही। मौजूदा हालात में इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं। विश्व के ऊपर गहराते संकट एक भयानक प्रलय का न्योता दे रहे हैं।

‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एन्ड वाटर’ द्वारा जारी एक शोध में कहा गया कि वैश्विक तापमान वृद्धि में पैदा हुए मुद्दों का युद्धस्तर पर निवारण नहीं किया गया तो 2050 तक गेहूं, चावल और मक्के की 200 अरब डॉलर फसलों का नुकसान हो सकता है। ऋतुचक्र में परिवर्तन, ग्लेशियर्स में सिकुड़न, सुनामी, सूखा, बाढ़ आदि संकेत जीव-जगत के लिए विनाशकारी हैं। इसके अलावा समय-समय पर वैज्ञानिकों, पर्यावरण वेत्ताओं और थिंकर टैंकों ने इस सन्दर्भ में दुनिया की भीषण तबाही की चेतावनी दे दी है।

पेरिस सम्मेलन में इन चेतावनियों और प्रकृति के अशुभ संकेतों का असर देखने को मिला। विश्व समुदाय आपसी सहयोग व सहकारिता के लिए पृथ्वी के ताप को 1.5 डिग्री तक कम करने का लक्ष्य सामने रखा। इसके लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई। विकासशील देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए दी गई आर्थिक मदद यूरोपीय देशों की सदाशयता को दर्शाती है। हालाँकि भविष्य के लिए आर्थिक मदद को जारी रखना बाध्यकारी नहीं है, तथापि उम्मीद की किरण पुनः चमकने लगी। ये वही पश्चिमी देश हैं, जो विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति का सर्वाधिक दोहन करते हैं। कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में इनकी 70 प्रतिशत की भागीदारी है। खैर, जलवायु परिवर्तन का उज्ज्वल पक्ष यह है कि आज विश्व समुदाय एकजुट है। प्रश्न यह उठता है कि क्या यह एकजुटता रंग लाएगी? मेरे विचार से यह तब सम्भव होगा, जब दुनिया की सबसे छोटी इकाई “आम इंसान” इस मिशन से जुड़ेगा। यह ऐसी इकाई है जो ठान लेती है, करती है और सरकारों से करवाती भी है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार अपने विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से “साइंस एक्सप्रेस” चलवाने की नायाब पहल की है। इसे “जलवायु परिवर्तन” के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए चलाया गया है। इस वातानुकूलित ट्रेन की अत्याधुनिक प्रदर्शनी को करोड़ों लोगों ने देखा और समझा। इस पहल से जलवायु परिवर्तन के लिए “सम्पूर्ण क्रांति” की आहट महसूस की जा सकती है।

वैश्विक ताप के कारण और दुष्परिणामों के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता पैदा करना प्रत्येक राष्ट्र का पहला कदम होना चाहिए ताकि उनका सहयोग भी लक्ष्य-प्राप्ति के लिए लिया जा सके। आधुनिक तकनीकी जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे बड़ा हथियार है। माना कि अतिभोग आधुनिक तकनीकी का एक कारण है किन्तु इसकी सकारात्मक उपयोगिता वैश्विक संकल्प को पूरा करने में उपयोगी साबित होगी। इसी के सहारे हम वैकल्पिक ऊर्जा को कारगर बना सकते हैं। भारत में पवन ऊर्जा के लिए समुद्र से अपरिमित सम्भावनाएं हैं। यह देश का सौभाग्य है कि इसे 7600 किलोमीटर तक का समुद्री तट उपहार के रूप में मिला है। इसीलिए सरकार ने इसे विशेष आर्थिक क्षेत्र घोषित कर दिया है, ताकि यहां से गैर पारंपरिक ऊर्जा का अधिकाधिक दोहन किया जा सके। इसके अलावा भारत के 13 राज्यों के 190 से अधिक स्थानों को पवन ऊर्जा के स्रोतों के रूप में चिन्हित किया गया है। ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन में 80 प्रतिशत कटौती के लक्ष्य को भारत सौर ऊर्जा से भी पूरा कर सकता है। विश्व के 102 देश ऐसे हैं जो “सूर्य पुत्र” कहलाते हैं।अर्थात् सूर्य का प्रकाश इन देशों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। भारत सहित ये देश सौर ऊर्जा का उत्सर्जन करके संकल्पित लक्ष्य की तरफ बढ़ सकते हैं। 600 मेगावाट की क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना करके गुजरात भारत में ही नहीं बल्कि पूरी एशिया के लिए एक उदाहरण बन गया है। राहत और उम्मीद की बात यह है कि भारत की मौजूदा अक्षय ऊर्जा की क्षमता 25000 मेगावाट है, जबकि 2017 में इसका लक्ष्य दोगुना से भी ज्यादा 55000 मेगावाट रखा गया है।

जलवायु परिवर्तन जैसी खतरनाक वैश्विक स्थिति से निपटने के लिए कार्बन संग्रहण (सिक़्वेस्ट्रेशन) भी एक कारगर प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया भूगर्भीय तथा भूतलीय स्तर पर होती है। भूगर्भीय प्रक्रिया में बालू-पत्थर, बेसाल्ट, डोलोमाइट, शेल और कोयला खानों जैसे ठोस चट्टानों में कार्बन डाई ऑक्साइड को प्रविष्ट कराया जाता है। भूतलीय प्रक्रिया में इसका भंडारण पेड़-पौधों द्वारा जड़ों, शाखाओं एवं मिट्टी में कराया जाता है। बाद में यही मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है। कहने का आशय यह है कि कार्बन डाई ऑक्साइड को समाप्त करने में इसी गैस का उपयोग किया जा सकता है।
तापमान कम करने के लिए सफेद छतों का प्रयोग ज़रूरी है। इससे सूरज की रोशनी आकाश की तरफ मुड़ जाती है। शहरी पर्यावरण में इसके द्वारा फेर- बदल किया जा सकता है। इससे शहर की परावर्तकता (रिलेटिविटी) बढ़ती है। यह जियो इंजीनियरिंग का सबसे असरदार तरीका है। कई देश इस पद्धति का परम्परागत रूप से प्रयोग करते आ रहे हैं।

इकोफ्रैंडली इमारतों का निर्माण भी समय का तकाज़ा है। इनसे पैदा होने वाले ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को 30 प्रतिशत तक रोकने में मदद मिलेगी। आवश्यकता यह भी महसूस की जा रही है कि इन हानिकारक गैसों पर निगरानी रखने के लिए वायुमंडल में उपग्रह स्थापित किए जाय, ताकि वे इनकी मात्रा व संकेन्द्रण की जानकारी मुहैया करा सके।इस सन्दर्भ में जापान द्वारा गोसैट उपग्रह का प्रक्षेपण सराहनीय कदम है। इसी तरह आईआईटी कानपुर में देश की सर्वाधिक अत्याधुनिक मशीनें सक्रिय हैं। ये वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक कणों की जानकारी देती रहती हैं। ये वही कण हैं जिनसे आकाश की नीलिमा पर ग्रहण लगा है। कार्बन सोखने वाले वनों को बढ़ावा देकर जलवायु परिवर्तन की इस वैश्विक चुनौती को मात दी जा सकती है। मरीन क्लाउड का निर्माण करके धरती पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है। हालाँकि यह मंहगा सौदा है।

पर्यावरण के प्रति हम प्राचीन काल से सचेत थे। लगभग सभी धार्मिक ग्रन्थ प्रकृति के संरक्षण का उपदेश देते हैं। वेदों में कहा गया है-“रक्षायै प्रकृति पातुं लोका। “अर्थात् प्राणिमात्र के लिए प्रकृति की रक्षा कीजिए। इसीलिए प्रकृति के प्रति मानव-प्रेम और जागरूकता बनाए रखने के लिए उसे हमारी जीवन -पद्धति के साथ जोड़ दिया गया। बाद में कर्मकांड रह गया और वैज्ञानिकता गायब हो गई। हो भी क्यों न ? इसे शिक्षा से अलग जो कर दिया गया। आवश्यकता है कि हमारी प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को भी तरज़ीह दी जाय ताकि जलवायु परिवर्तन जैसी विध्वंशक स्थिति से निपटा जा सके। हमने कभी भी भोग को सर्वोपरि नहीं माना। यह तो जीवन को गति देने वाला एक पड़ाव था। दुनिया के साथ कदम मिलाने में हम इतने बेसुध हुए कि हमारा गुरु-बोध विस्मृत होता गया। हमारी ज्ञान-सम्पदा को छीनकर हमें परमुखापेक्षी बना दिया गया।

समय ने करवट ली। पसरा धुंध छंटता सा नज़र आ रहा है। जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकट में भारत का योगदान सराहा जा रहा है। पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना कठिन तो है किन्तु असम्भव नहीं।दुनिया में अमन-चैन कायम करने में भारत की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। इसके कई उदाहरण दुनिया ने देखा है। सबकी नज़रें भारत पर टिकी हैं। विश्वबाज़ार में विश्वग्राम की संवेदना जो जगानी है।

बिग बॉस के घर में मंदाना का हॉट अवतार

Bureau@Navpravah.com

 

ईरानियन अदाकारा मंदाना करीमी जो कि अभी बिग बॉस के घर मैं कैद हैं, जल्द ही बालाजी मोशन पिक्चर्स की आने वाली सेक्स कॉमेडी फिल्म क्या कूल है हम में दिखाई देंगी. बिग बॉस पसंद करने वाले सभी लोग मंदाना को बेचारी और शर्मीली समझते है. बिग बॉस में अभी तक मंदाना सब से झगड़ते और अपना बचाव करते नज़र आई है. लेकिन अगर करीबी सूत्रों की माने तो मंदाना असल ज़िन्दगी में बहुत ही बिंदास लड़की है.

हाल ही में बालाजी मोशन पिक्चर्स में मंदाना का फोटोशूट वीडियो जारी किया गया, जिसमें मंदाना अलग अलग तरह की बिकनी पहने दिखाई दे रही हैं. शूट पर मौजूद सूत्र ने बताया कि मंदाना को एक हॉट पैंट और टैंक टॉप मैं फोटोशूट करना था. लेकिन मंदाना ने डायरेक्टर को बिकिनी शूट का सुझाव दिया.

इन सभी बातों से यह साफ़ पता चलता है कि मंदाना घर के अंदर बेचारी और शर्मीली होने का सिर्फ नाटक कर रही है. क्या कूल है हम मैं मंदाना के साथ तुषार कपूर और आफताब शिवदासानी भी दिखाई देंगे. यह फिल्म 22 जनवरी को सिनेमाघरों मैं लगेगी.

फ़ोन रखेगा आपको सुरक्षित

ShikhaPandey@Navpravah.com

किसी भी आपातकालीन स्थिति में आप तक मदद पहुँचाने की दिशा में सरकार एक नयी प्रभावी कोशिश में जुटी है।इकोनोमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक़ मार्च 2016 तक सरकार एक ऐसी योजना लेकर आ रही है, जिसके तहत आप किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने फ़ोन से अंक ‘9’ अगर देर तक दबाएं तो आपके नज़दीकी पुलिस स्टेशन व आपके परिजनों तक सूचना पहुँच जायेगी।

सरकार इस योजना के जरिए बेहद साधारण फोन में भी ऐसी सुविधा उपलब्ध कराना चाहती है, जिसके जरिए आपात स्थिति में पुलिस तक अलर्ट पहुंचाया जा सके.

इसे विशेष रुप से महिलाओं के लिए डिजायन किया जा रहा है. इसके साथ ही भविष्य में ऐसे स्मार्टफोन बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिनमें एक साथ दोनों वॉल्यूम बटन दबाने पर आपात स्थिति में पुलिस तक अलर्ट पहुंचाया जा सके. इसके अतिरिक्त कोशिश यह भी है कि आपके लोकेशन की भी जानकारी पुलिस तक पहुँच सके ताकि जल्द से जल्द आप तक मदद पहुंचाई जा सके.

सूत्रों के मुताबिक महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए हाल ही में कई स्मार्टफोन मेकर कंपनियों और टेलीकॉम कंपनियों के साथ बैठक  की है. जानकारी के अनुसार स्मार्टफोन में एक खास एप्लिकेशन के अतिरिक्त एक विशेष फोन में इस सुविधा के लिए एक विशेष बटन बनाने पर भी बात हो रही है.

साल 2015 – मनोरंजन संसार में खूब मची धूम

AnujHanumat@Navpravah.com
साल 2015 में, मनोरंजन की दुनिया में काफ़ी धूम-धड़ाका रहा. बॉलीवुड की कुछ नामी फ़िल्मों ने दर्शकों के दिलोदिमाग़ पर गहरी छाप छोड़ी. कुछ फ़िल्में बढ़िया अदाकारी और निर्देशन की वजह से कामयाब रहीं, तो कुछ अपनी स्क्रिप्ट और कहानी के ‘प्लॉट’ से जुड़े विवाद के ज़रिए.

कहने को बॉलीवुड में इस साल 150 से भी अधिक फ़िल्‍में रिलीज हुईं, पर सफलता का स्वाद कुछ ही चख पाईं. बॉलीवुड में इस साल बड़े बजट की भी कई फ़िल्में आई, जिन्होंने खूब कमाई की और कुछ ऐसी कम बजट की भी फ़िल्में रहीं, जिन्होंने अपनी मजबूत विषयवस्तु और शानदार प्रस्तुतीकरण से सबका दिल जीत लिया.

बॉलीवुड में किसी भी फ़िल्म के सफल होने पर पार्टी या जश्न मनाना कोई बड़ी बात नही, लेकिन बॉलीवुड में ऐसी भी कई फ़िल्में होती हैं जिनकी कामयाबी पर कोई जश्न नही होता. इन फिल्मों को देश विदेश में खूब वाहवाही मिलती है मान सम्मान मिलता है बावजूद इसके, आम जनमानस तक इनकी पहुँच कम ही होती है. बेहद कम बजट या कहिये एक कसे हुए बजट में बनने वाली ये फ़िल्में अब अच्छा पैसा भी कमा रही हैं.

साल 2015 कुछ बड़ी फ्लाप फिल्मों के लिए भी याद किया जायेगा. इस कड़ी में सबसे पहला नाम लिया जाएगा अनुराग कश्यप की ‘बॉम्बे वेल्वेट’ का. 100 करोड़ से ज्यादा के बजट में बनी इस फ़िल्म ने महज 23 करोड़ रूपये का कलेक्शन किया. इसके अलावा आर. बाल्की निर्देशित अमिताभ बच्चन -धनुष स्टार ‘षमिताभ्’ भी फ्लॉप रही. सुभाष कपूर की ‘गुड्डू रंगीला’ भी महज 8 करोड़ इकट्ठा कर फ्लॉप रही, असिन और अभिषेक बच्चन की ‘आल इज बेल’ (18 करोड़), इमरान-कंगना की कट्टी बट्टी(25 करोड़), शाहिद-आलिया की शानदार’ (42 करोड़) भी बड़ी फ्लॉप फिल्मों में शुमार रही.

साल 2015 में कई फिल्मकारों ने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया, जिनका बजट तो कम था लेकिन वे फ़िल्में अपनी विषय वस्तु के लिए लम्बे समय याद रखी जायेंगी. इन फिल्मों ने दर्शको का मनोरंजन भी किया और पैसा भी कमाया. ऐसी फिल्मों को दो भागो में बाँट कर देखा जाए तो बेहतर होगा. पहले भाग में वो फ़िल्में जो केवल अपने विषयवस्तु और प्रस्तुतिकरण की वजह से सराही गयी.

साल के दूसरे माह में आई फ़िल्म ‘बदलापुर’ ने बॉक्स ऑफीस पर 50 करोड़ रूपये भी अधिक का कारोबार किया, जबकि इस फ़िल्म का बजट करीब 12 करोड़ रूपये ही था. यश राज बैनर से आई फ़िल्म ‘दमा लगा के हईशा’ जिसका बजट करीब 15 करोड़ रूपये था, इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफीस पर कुल 30 करोड़ से अधिक का कारोबार किया. मार्च में आई अनुष्का शर्मा के बैनर तले बनी फिल्म ‘एनएच-10’ (बजट करीब 13 करोड़) ने भी करीब करीब 32 करोड़ रूपये का कारोबार करके अपनी कामयाबी का परचम लहराया. बेहद कम बजट की अनुराग कश्यप द्वारा निर्मित फ़िल्म ‘हन्टर’ ने तो 13 करोड़ का बिजिनेस करके सबको चौंका दिया. इस फ़िल्म की लागत मात्र 3-4 करोड़ ही थी. इसके बाद मई में आई फ़िल्म पीकू सुपरहिट रही और इस फ़िल्म ने 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया और खूब वाहवाही बटोरी. इस फ़िल्म का बजट 40 करोड़ से अधिक था पर फ़िल्म का माहौल चकाचौंध और भव्यता से परे था.

40 करोड़ से कम लागत में बनी फ़िल्म कंगना रणावत की ‘तनु बेड्स मनु रिटर्न्स’ ने देश में ही नही बल्कि पूरी दुनिया में धमाल मचा दिया. इस फ़िल्म ने देशभर में 150 करोड़ रूपये और विभिन्न देशो में 100 करोड़ से अधिक का कारोबार किया. यह साल 2015 की पहली सुपरहिट फ़िल्म रही. इसके आलावा ‘प्यार का पंचनामा 2’ ने 65 करोड़ से अधिक का कारोबार किया. इसकी लागत भी महज 12 करोड़ रूपये थी. इसी तरह से केवल 13 करोड़ में बनी ‘हेट स्टोरी 3’ ने करीब 60 करोड़ का बिजिनेस का सुपरहिट का तमगा पाया. बेहद कसे हुए बजट (3-4 करोड़ या इससे अधिक )में बनी फ़िल्में जैसे ‘मसान’,’तितली’,’धनक’,’परचेड’,’तितली’,’किला’,’किस्सा’ सरीखी फिल्मों को देश विदेश के फिल्म समारोहों में सम्मानित किया गया. इनमें से कई फिल्मों ने मुनाफे के साथ साथ दर्शको का दिल भी जीत लिया, जिसमें कनु बहल द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘तितली’ ने दर्शको के बीच अपनी एक अलग ही पहचान बनाई. अगर इन दोनों तरह की फिल्मो को मिलाकर देखा जाए तो इस साल बालीबुड में ऐसे सिनेमा को लोगो ने खासा पसंद किया जो विषय केंद्रित तो था ही साथ उसका प्रस्तुतीकरण भी सराहनीय रहा.

साल 2015 बजरंगी भाईजान (320.87 करोड़), बेबी (95.50 करोड़), प्रेम रतन धन पायो (201.52 करोड़) और बाजीराव मस्तानी जैसी भी कुछ फिल्में बनी, जिन्होंने दर्शकों को काफी भावुक भी किया. ज़ाहिर है इन फिल्मों ने कारोबार भी बहुत किया. दृश्यम (95.50 करोड़) जैसी फिल्म ने फिल्म इंडस्ट्री में कहानी को लेकर किए जाने वाली टीका-टिप्पणी को रोका. निशिकांत कामत द्वारा निर्देशित यह फिल्म दर्शकों के साथ ही फिल्म समीक्षाकों को भी काफी पसंद आई.

ये पहला मौक़ा था जब किसी दक्षिण भारतीय फ़िल्म (बाहुबली) ने हिंदी भाषा के डब वर्जन से न केवल 50 करोड़ रूपये रिकार्ड समय में बटोरे बल्कि 100 करोड़ बटोरकर एक नया रिकार्ड भी बनाया. करीब 120 करोड़ में बनी इस फ़िल्म ने देश विदेश में 600 करोड़ रूपये से अधिक बटोरे. इसका दूसरा भाग अगले साल रिलीज होने की उम्मीद जताई जा रही है. इस फ़िल्म में प्रयोग किये गए स्पेशल इफेक्टस ने तो इसको हॉलीवुड के करीब लाकर खड़ा कर दिया.

एक बार फिर जांच के घेरे पतंजलि प्रोडक्ट, घी में फफूंद की शिकायत

Bureau@Navpravah.com
हमेशा चर्चा में रहने वाले बाबा रामदेव का देसी घी अब विवादों में फंस गया है. उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने पतंजलि के देसी घी की जांच के लिए इसका सैंपल लैब भिजवाया है. देसी घी में फफूंद मिलने की शिकायत के बाद उत्तराखंड की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कंपनी से सैंपल लेकर रुद्रपुर लैब के लिए भेज दिया है, जिसकी रिपोर्ट अगले १४ दिनों में मिलेगी.

रामदेव के गाय के देशी घी में फफूंद की शिकायत उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग को मिली, शिकायत पर तत्काल अमल करते हुए राज्य सरकार ने सोमवार को स्वास्थ्य महकमे को आदेश दिया. जिसके बाद अधिकारियों ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पहुंचकर घी के दो सैमपल लिए और जांच के लिए भेज दिए.

पिछले १५ दिनों में रामदेव के पतंजलि का दूसरा प्रोडक्ट है, जो जांच के घेरे में आया है. इसके पहले 11 दिसंबर को भी आटा नूडल्स के सैंपल की जांच कराई गई थी. भले ही केंद्र में बीजेपी की हो और मोदी को पीएम बनाने में रामदेव के भी प्रयास शामिल रहे हों, लेकिन इन सबके बावजूद रामदेव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. बल्कि पतंजलि की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती ही नज़र आ रही हैं. अब देखना ये है कि घी में फफूंद पाए जाने की शिकायत में रामदेव का पतंजलि घिरता है या नहीं.

राज्य सरकार की खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पतंजलि योगपीठ के निकट स्थित पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड फैक्ट्री पहुंचकर बाबा द्वारा बनाए जा रहे गाय के देशी घी की सैमपलिंग कर इसे रुद्रपुर लैब भेज दिया है. इस मामले में राज्य सरकार कोई भी कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट के आने का इंतज़ार कर रही है.