…तब जाकर सार्थक होगा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का स्वप्न।

जटाशंकर पाण्डेय । Navpravah.com

आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में बाबा रामदेव गुजरात के अहमदाबाद में एक भव्य योग शिविर ले रहे हैं।इस शिविर में 21 जून को, योग से संबंधित कई विश्व रेकॉर्ड भी बनने वाले हैं। इस शिविर में भारत के तमाम मंत्री , शिक्षक, छात्र , सेना के तमाम सैनिक और अधिकारी,तमाम शिक्षित-अशिक्षित वर्ग उपस्थित हो कर योग सीख रहे हैं। आस्था चैनल के माध्यम से इसका सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है, जिससे इसे पूरे देश, विदेश में तमाम योग प्रेमी देख व सुन सकें।

आज के शिविर में योग की शिक्षा समाप्त करते समय बाबा ने योग की विशेषता का गुणगान करते हुए बताया कि योग करने से मनुष्य संसार का सबसे बड़ा बलवान ,सबसे बड़ा प्रतिभावान,स्वास्थ्यवान मानव बन सकता है। बाबा की इस शिक्षा से शायद योग करने वालों के मन में कुछ भाव जगें और लोग संसार का सबसे बड़ा बलवान , प्रतिभावान, महान, बुध्दिमान, धनवान व्यक्ति बनने की दौड़ में लग जाएं। इससे कम से कम यह लाभ तो होगा कि जिस दौड़ में आज लोग लगे हुए हैं, उनकी दौड़ को योग के माध्यम से थोड़ा और बल मिल जाएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग अपने अहंकार की तृप्ति के लिए ही सही, योग करना प्रारंभ कर देंगे। आज के समाज में मानव का अहंकार वैसे ही चरम सीमा पर है। योग कर के सबसे बड़ा बलवान, सबसे बड़ा प्रतिभावन सबसे बड़ा सौन्दर्यवान, सबसे बड़ा धनवान, महान बनने की दौड़ में और लोग उत्साहित होंगे, जिस दौड़ के कारण आज इंसान इंसान नहीं रहा। आज का हर मानव अपनी संतानों को योग की शिक्षा तो नहीं, पर सबसे बड़ा बलवान, महान, रूपवान धनवान, गुणवान बनने की शिक्षा जरूर देता है।

सचमुच योग और ध्यान करने से आज का मानव मानव बन सकता है, जिसकी आज के समाज को बड़ी आवश्यकता है। इंसानियत आज के समाज से लगभग विलुप्त होती जा रही है। आज सुबह एक न्यूज़ चैनल की 100 प्रमुख खबरें मैं सुन रहा था। उनमें से कम से कम 80% समाचार हत्या और बलात्कार से संबंधित थे, 10% समाचार ठगी बेईमानी और लूट से संबंधित थे, बाकी 10% में और सब। मानव की मानसिकता ही ऐसी बन गई है कि पूरे समाचार में यदि हत्या,बलात्कार,आतंक,ठगी बेईमानी चोरी,दो पार्टियों में कहा-सुनी देखने या सुनने को न मिले, तो समाचार ही नीरस लगता है। इसीलिए मीडिया ने भी जनता की कमज़ोर नस पकड़कर ऐसी ही ख़बरों की भरमार लगा रखी है। अगर समाचारों में मात्र देश विदेश की प्रगति, विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास इत्यादि से जुड़ी खबरें हों, तो लोग कहते हैं कि आज के समाचार में कुछ खास नहीं है। लोगों की मानसिकता ही हिंसक समाचार सुनने की हो चुकी है। समाचार पत्रों को भी ऐसे ही समाचार चाहिए क्योंकि उनको भी अपना धंधा चलाना है। समाचार ऐसे ही होने चाहिए जो लोगों को भाएँ, तभी लोग उनका अख़बार खरीदेंगे। यही हालत समाचार चैनलों की भी है। सबको अपना धंधा चलाना है। खासियत यह है कि जनता की मांग ही ऐसी है। प्रश्न यह है कि लोग इसे ही पसंद क्यों करते हैं ?

ऐसी पसंद एक रुग्ण मानसिकता को दर्शाती है। यह एक रुग्ण तन, रुग्ण मन की जरूरत को दर्शाती है। एक प्रकार के रोगी के मन में ही ऐसे विचार, ऐसे भाव उत्पन्न हो सकते हैं। इसी का परिणाम है कि आज पूरा मानव समाज ,समाज को एक दूसरे के प्रतियोगी की भांति देखता है। मैत्रीयता लोगों में ऊपर से देखने को भले ही मिले, लेकिन दिलों से गायब हो चुकी है। जो लोग व्यभिचार, भ्रष्टाचार,नीति-अनीति आदि से जुड़ी चीज़ें जो सुनने के इच्छुक होते हैं, उनमें ऊपरी तौर पर ये भाव देखने को भले ही न मिलें, लेकिन उनके अंदर ये भाव मौजूद होते हैं और यह एक मानसिक रोग है। अन्यथा ये चीजें सुनने या देखने में इनकी उत्सुकता इतनी प्रबल नहीं रहती।

योग वैश्विक दृष्टि में एक विज्ञान है। योग और ध्यान लोगों को स्वस्थ तन,स्वस्थ मन और स्वस्थ दिमाग दे सकता है, यह शत प्रतिशत सत्य है। अगर लोग योग करने के बाद 5 मिनट,10 मिनट साधारण मुद्रा में बैठकर, आँख बंद कर, अपने अंदर यह भाव जगाएं ,ऐसा ध्यान करें, कि हमें इंसान बनना है, तो लोगों का तन और मन पूर्ण स्वास्थ्य को अवश्य उपलब्ध होगा। सबसे बलवान ,सबसे प्रतिभावान,सबसे सौन्दर्यवान, सबसे धनवान बनने का भाव ही लोगों के अंदर से विलुप्त हो जायेगा। जहाँ पर लोग एक दूसरे को प्रतियोगी की भांति देखते या महसूस करते हैं, वहीं पर लोगों में ऐसा मित्रवत भाव जगे, कि लोग अपने मित्र को गिरते-तड़पते, मरते-बिलखते कतई न देख सकें, बल्कि मित्रवत भाव से लोगों का ऐसा सहयोग करेंगे कि यदि मैं आगे हूँ, तो मेरा मित्र पीछे कैसे रहेगा, वह भी मेरे साथ आगे बढ़ेगा। राजनीति से प्रेरित होकर नहीं, बल्कि जीवंत रूप से प्रधानमंत्री मोदी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ सार्थक होगा और मात्र स्वस्थ तन और स्वस्थ मन से ही यह संभव है, जो इस समाज को मात्र योग और ध्यान ही दे सकता है। तब जाकर सार्थक होगा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का स्वप्न।

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