सत्ता को लेकर नवाज परिवार में छिड़ा गृह युद्ध

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पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
हाल ही में पनामा पेपर्स लीक के मामले में अपनी कुर्सी से हाथ धो चुके पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की शराफ़त पर दाग अब उनके ही परिवार के लोग लगाने लगे हैं। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य करार दिये जाने के बाद शरीफ को अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी के साथ-साथ अपनी संसद की सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ा था जिसके बाद प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे कद्दावर चेहरे के रूप में उनके छोटे भाई शाहबाज शरीफ को देखा जा रहा था लेकिन नवाज ने अपने भाई को आईना दिखाते हुए शाहिद अब्बासी को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।
शाहबाज को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर न देखकर शाहबाज की पत्नि तहमिना दुर्रानी ने नवाज के खिलाफ ट्विटर पर ट्विटयुद्ध छेड़ दिया है। वे अपने हर ट्विट में नवाज़ के ख़िलाफ आग उगलती हुई नज़र आ रही है। नवाज़ की आलोचना करते हुए एक ट्विट में वे लिखती हैं कि नवाज़ एकदम औसत दर्जे के सलाहकारों से घिरे हुए हैं। वे उनकी बात सुनते हैं और उनका ख़्याल रखते हैं। तहमिना की यह नाराज़गी तब खुलकर सामने आयी जब नवाज ने शाहबाज को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठाने का फैसला किया।
नवाज ने पहले यह भी कहा था कि अब्बासी को प्रधानमंत्री बनाना कोई तात्कालिक या कामचलाऊ कार्रवाई नहीं है वे उन्हें अपने स्थायी उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। वहीं गुरूवार को हुई अपने रोड शो में उन्होंन अपनी बात को पलटते हुए कहा कि वे अब्बासी को अगले चुनाव तक प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। विशेषज्ञ इस बात से यही मतलब निकाल रहे हैं कि अगले चुनाव में जीतने के बाद नवाज़ किसी और को प्रधानमंत्री की कुर्सी का स्वाद चखा सकते हैं। फिलहाल आशंका इस बात की जताई जा रही है कि नवाज़ अपनी बेटी को अपनी सीट से चुनाव लड़ाएंगे।
उधर रोड शो के बाद भी तहमिना का गुस्सा ट्विटर पर साफ नज़र आया और वे इस रोड शो की आलोचना करती हुई नज़र आयी। उन्होंने लिखा कि नवाज़ के रोड शो से काफी दिक्कत हुई। जनजीवन पर काफी बुरा असर पड़ा। उन्होंने यह भी लिखा की नवाज की रैली से लोगों का जो नुकसान हुआ है उसका हर्जाना कौन भरेगा।
ऐसा पहली बार नहीं था जब तहमिना ने नवाज़ पर सार्वजनिक रूप से शाब्दिक हमले किए हों। पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद भी वे नवाज़ को अपनी सारी काली कमाई देश के नाम करने की सलाह भी दे चुकी हैं। फिलहाल नवाज़ अपने सलाहकारों से घिरे हैं तो यह मुश्किल है कि वे तहमिना की सलाह पर काम करें।

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