गुजरात दंगा 2002: “धार्मिक ढांचा पुनर्निर्माण के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त”

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एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त धार्मिक ढांचों खासकर मस्जिदों के पुनर्निर्माण के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने आज निरस्त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है.

राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त ढांचों के लिए क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव रखा था जिसे मंजूर कर लिया गया है. गौरतलब है कि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 2012 में राज्य सरकार को ये आदेश दिया गया था कि वो गोधरा काण्ड के बाद हुए दंगों में जिन मस्जिदों मकबरों को नुक्सान पहुंचा है उनका पुनर्निर्माण किया जाये. जिसके विरुद्ध राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

ऐसे लगभग 500 धार्मिक स्थल चिन्हित तौर पर क्षतिग्रस्त हुए थे जिनके पुनर्निर्माण के लिए हाईकोर्ट से राज्य सरकार को आदेश दिया गया था. राज्य सरकार ने बतौर मुआवजा 50 हजार रुपये प्रति ढांचा देने का प्रस्ताव रखा था.

राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह दलील दी गई कि राज्य सरकार कर दाताओं के पैसे को धार्मिक ढांचों, मंदिर,मस्जिद, गुरुद्वारों या चर्च के नाम पर खर्च नहीं करेगी, बल्कि इन ढांचों को महज इमारत मानकर ही बतौर क्षतिपूर्ति धन देगी. राज्य सरकार कि इस अपील को स्वीकार करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया है.

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