जब गाने से पहले दर्जन भर पान चबाने की ज़िद पर अड़े किशोर कुमार

पीयुष चिलवाल | Navpravah.com
बात सबको अज़ीब लगी जब किशोर ने कहा कि इस गीत को गाने से पहले मुझे दर्जन भर पान चबाने हैं लेकिन फिर सबको राज़ी कर दिया। वाकया है फिल्म डाॅन के गीत खईके पान बनारस वाला की रिकार्डिंग का जब किशोर ने सबको हैरान करते हुए स्टूडियो में पान की डिमांड कर दी। हालांकि उन्होने ऐसा इसलिए किया क्यूंकि वे इस गाने को उसी अंदाज़ में गाना चाहते थे जिससे सब को लगे की कोई हक़ीक़त में पान खाकर गा रहा है।
6किशोर बेहद मज़ाकिया किस्म के व्यक्ति थे जब एक बार फिल्म हाफ टिकट के गीत “आंख सीधी लगी दिल पे जैसे कटरिया ओ संवरिया” की रिकार्डिंग के दौरान लता मंगेशकर वक़्त पर नहीं पहुंची तो उन्होंने फिल्म निर्माता कालीदास को सुझाव दिया की वे पूरा गाना उन्हें ही गाने दें, वे आदमी और औरत दोनों की आवाज़ में गा सकते हैं। जिसके बाद वे ठहाके लगाकर हंसने लगे।
मधुबाला संग किशोर दा
मरने की दुआएं क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे…. फिल्म “जिद्दी” के इस गीत से बतौर गायक अपने कॅरियर की शुरूआत करने वाले
किशोर कुमार अपनी मृत्यु के तीन दशक बाद भी लोगों के जेहन में ज़िंदा हैं। हालांकि किशोर ने 1946 में शिकारी फिल्म में अभिनय से फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। 4 अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश में जन्मे किशोर कुमार हिंदी फिल्मी जगत में सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर के रूप में जाने जाते हैं और अबतक के सबसे अधिक फिल्मफेयर अवार्ड जीतने वाले गायक हैं। 500 से भी अधिक गीतों का अपनी आवाज़ देने वाले किशोर ने न सिर्फ हिंदी गीत गाए बल्कि देश की कई भाषाओं के गीतों को भी अपनी आवाज़ दी। किशोर न सिर्फ एक अच्छे गायक थे बल्कि वे अभिनय और निर्देशन भी बखूबी करते थे।
मेरे महबूब क़यामत होगी, एक लड़की भीगी भागी सी, तेरे जैसा यार कहां, हमें तुमसे प्यार कितना जैसे कई सुपरहिट गीतों को गाने वाले किशोर को उनके शुरूआती दिनों में ज्यादा तवज्ज़ो नहीं मिली लेकिन 1957 में बनी फिल्म फंटूस में “दुखी मन मेरे” गीत से ऐसी धाक जमायी की सबको उनका लोहा मानना पड़ा और संगीत की दुनिया में किशोर युग शुरू हो गया और जिसका शायद ही कभी अंत हो।
किशोर के गीत पांच रूपया बारह आना के बारे में कहा जाता है कि वे अपने काॅलेज टाइम में बेहद मस्तमौजी थे और उधार लेने से नहीं हिचकत थे। अपने काॅलेज की कैंटीन में उन्होंने 5 रूपये बारह आने का उधार कर लिया था और जब कैंटीन संचालक उन्हें पैसे चुकाने के लिए कहता तो वे उसे चिढ़ाने के लिए टेबल पर ग्लास और चम्मच बजाकर कई धुनें सुनाया करते। कहते हैं कि उन्होंने इस गीत में भी उन धुनों का बखूबी इस्तेमाल किया है।
अपने शहर खंडवा से बेहद प्रेम करने वाले किशोर ने 1975 में आपातकाल के दौरान एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने से इंकार किया तो तत्कालीन सुचना और प्रसारण मंत्री ने किशोर के गीतों को आकाशवाणी में प्रसारित करने से प्रतिबंधित कर दिया था।
अपने भाई बहनों में किशोर दूसरे नंबर के थे।  किशोर की चार शादियां थी पहली शादी उन्होंने रुमा गुहा ठाकुरता उर्फ रूमा घोष से 1951 में की जो 1958 में टूट गई। बाद में उन्होंने दूसरी शादी एक्ट्रेस मधुबाला से 1960 में की, मधुबाला के दिल में छेद होने के कारण 1969 में उनकी मौत हो गई। मधुबाला के बाद किशोर का दिल एक्ट्रेस योगिता बाली पर आ गया लेकिन शादी ज्यादा वक्त तक चल न सकी। किशोर कुमार ने 51 साल की उम्र में चैथी और आखिरी शादी 20 साल छोटी एक्ट्रेस लीना चंद्रावरकर से की थी शादीशुदा ज़िंदगी अच्छे से बीत रही थी कि 1987 में किशोर की मृत्यु हो गई।

1 COMMENT

  1. किशोर कुमार हमेशा दिलों में अमर रहेंगे।

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